The editorial explained
India is still from a weak southwest monsoon, and now attention has shifted to the 'other monsoon' — the northeast monsoon. This seasonal wind system gives only about a quarter of India's total yearly rainfall, yet it is the main source of water for the south-eastern peninsula. States such as Tamil Nadu, Puducherry, coastal Andhra Pradesh, Rayalaseema, south interior Karnataka and Kerala depend heavily on it between October and December. The hope is that it will make up for earlier losses, but there is also , since this rainfall pattern can behave in ways.
हिंदी अर्थभारत अभी भी कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से उबर रहा है, और अब सबका ध्यान 'दूसरे मानसून' यानी उत्तर-पूर्वी मानसून पर है। यह मौसमी हवा प्रणाली भारत की कुल वार्षिक बारिश का केवल लगभग एक-चौथाई हिस्सा देती है, फिर भी यह दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल जैसे राज्य अक्टूबर से दिसंबर के बीच इस पर बहुत निर्भर रहते हैं। उम्मीद यह है कि यह पहले के नुकसान की भरपाई करेगा, लेकिन चिंता (trepidation) भी है क्योंकि यह बारिश का पैटर्न अप्रत्याशित तरीके से व्यवहार कर सकता है।
বাংলা অনুবাদভারত এখনও দুর্বল দক্ষিণ-পশ্চিম মৌসুমি বায়ু (southwest monsoon)-র ধাক্কা সামলে উঠছে, আর এখন নজর ঘুরে গেছে 'অন্য মৌসুমি বায়ু' অর্থাৎ উত্তর-পূর্ব মৌসুমি বায়ু (northeast monsoon)-র দিকে। এই মৌসুমি বায়ু প্রবাহ ভারতের মোট বার্ষিক বৃষ্টিপাতের মাত্র এক-চতুর্থাংশের মতো দেয়, তবুও এটি দক্ষিণ-পূর্ব উপদ্বীপের জল সরবরাহের প্রধান উৎস। তামিলনাড়ু, পুদুচেরি, উপকূলীয় অন্ধ্রপ্রদেশ, রায়ালসীমা, দক্ষিণ অভ্যন্তরীণ কর্ণাটক এবং কেরালার মতো রাজ্যগুলি অক্টোবর থেকে ডিসেম্বরের মধ্যে এর উপর ব্যাপকভাবে নির্ভরশীল। আশা করা হচ্ছে যে এটি আগের ঘাটতি পূরণ করবে, তবে একইসঙ্গে উদ্বেগও রয়েছে, কারণ এই বৃষ্টিপাতের ধরন অপ্রত্যাশিতভাবে আচরণ করতে পারে।
The southwest monsoon this year was far from encouraging. Between June and September, India 759.4 mm of rainfall compared to a normal of 868.6 mm, a of 12.6 percent and the driest spell in eleven years. A El Niño, a warming of the central Ocean, is widely seen as the reason behind this dry spell. The shortage has already kharif sowing, the main crop-planting season, and its effects are visible in rising food prices across the country.
हिंदी अर्थइस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून बिल्कुल भी उत्साहजनक नहीं रहा। जून से सितंबर के बीच भारत को 759.4 मिमी बारिश मिली, जबकि सामान्य 868.6 मिमी होती है, यानी 12.6 प्रतिशत की कमी, जो पिछले ग्यारह वर्षों में सबसे सूखा दौर है। एक मजबूत होता एल नीनो, जो मध्य प्रशांत महासागर के गर्म होने से जुड़ा है, इस सूखे का मुख्य कारण माना जा रहा है। इस कमी ने पहले ही खरीफ की बुवाई को नुकसान पहुंचाया है, और इसका असर देश भर में बढ़ती खाद्य महंगाई में साफ दिख रहा है।
বাংলা অনুবাদএ বছরের দক্ষিণ-পশ্চিম মৌসুমি বায়ু (southwest monsoon) মোটেই আশাব্যঞ্জক ছিল না। জুন থেকে সেপ্টেম্বরের মধ্যে ভারত ৭৫৯.৪ মিমি বৃষ্টিপাত পেয়েছে, যেখানে স্বাভাবিক পরিমাণ ছিল ৮৬৮.৬ মিমি—অর্থাৎ ১২.৬ শতাংশ ঘাটতি, যা গত এগারো বছরের মধ্যে সবচেয়ে শুষ্ক সময়কাল। মধ্য প্রশান্ত মহাসাগরের উষ্ণায়নজনিত শক্তিশালী এল নিনো (El Niño)-কে এই শুষ্ক পরিস্থিতির কারণ হিসেবে ব্যাপকভাবে মনে করা হচ্ছে। এই ঘাটতি ইতিমধ্যেই খরিফ (kharif) ফসল বোনার মূল মরসুমের ক্ষতি করেছে, এবং এর প্রভাব সারা দেশে খাদ্যপণ্যের ক্রমবর্ধমান দামে স্পষ্ট দেখা যাচ্ছে।
The India Meteorological Department has now forecast that the northeast monsoon will likely be 'normal' this year, meaning it should stay close to the fifty-year average rainfall figure. However, this forecast carries a wide of error of around 12 percent, compared to just 5 percent for the southwest monsoon. Most parts of India are expected to see below-normal rainfall, while the northwest and the southern peninsula may get normal to above-normal showers. This lack of precision makes the northeast monsoon far harder to plan for than its summer .
हिंदी अर्थभारत मौसम विज्ञान विभाग ने अब अनुमान लगाया है कि इस साल उत्तर-पूर्वी मानसून 'सामान्य' रहने की संभावना है, यानी यह पचास साल के औसत बारिश के आंकड़े के करीब रहेगा। हालांकि, इस पूर्वानुमान में लगभग 12 प्रतिशत की बड़ी त्रुटि सीमा है, जबकि दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए यह सीमा केवल 5 प्रतिशत है। देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की उम्मीद है, जबकि उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीप में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। यह सटीकता की कमी उत्तर-पूर्वी मानसून को गर्मियों के मानसून से कहीं अधिक योजना बनाने में कठिन बना देती है।
বাংলা অনুবাদভারতীয় আবহাওয়া দপ্তর (India Meteorological Department) এখন পূর্বাভাস দিয়েছে যে এ বছর উত্তর-পূর্ব মৌসুমি বায়ু (northeast monsoon) সম্ভবত 'স্বাভাবিক' থাকবে, অর্থাৎ এটি পঞ্চাশ বছরের গড় বৃষ্টিপাতের কাছাকাছি থাকবে। তবে এই পূর্বাভাসে প্রায় ১২ শতাংশের মতো বড় ত্রুটির মার্জিন (margin of error) রয়েছে, যেখানে দক্ষিণ-পশ্চিম মৌসুমি বায়ুর ক্ষেত্রে তা মাত্র ৫ শতাংশ। ভারতের বেশিরভাগ অংশে স্বাভাবিকের চেয়ে কম বৃষ্টিপাত হতে পারে বলে মনে করা হচ্ছে, অন্যদিকে উত্তর-পশ্চিম ও দক্ষিণ উপদ্বীপে স্বাভাবিক থেকে স্বাভাবিকের বেশি বৃষ্টিপাত হতে পারে। এই নির্ভুলতার অভাবের কারণে গ্রীষ্মকালীন মৌসুমি বায়ুর তুলনায় উত্তর-পূর্ব মৌসুমি বায়ুর জন্য পরিকল্পনা করা অনেক বেশি কঠিন।
History shows why this matters so much. On December 1, 2015, Chennai witnessed its heaviest single-day rainfall in more than a century, a that killed around 500 people and nearly 18 lakh residents. That disastrous year, like the present one, was marked by a El Niño. This shared background raises a genuine concern that an El Niño year could again bring a sudden, destructive downpour instead of a calm, steady season.
हिंदी अर्थइतिहास बताता है कि यह अनिश्चितता (imprecision) कितनी मायने रखती है। 1 दिसंबर 2015 को चेन्नई ने एक सदी से अधिक समय में अपनी सबसे भारी एक-दिवसीय बारिश देखी, जिस बाढ़ (deluge) में करीब 500 लोगों की जान गई और लगभग 18 लाख लोग विस्थापित हुए। वह विनाशकारी वर्ष, वर्तमान वर्ष की तरह, एक शक्तिशाली एल नीनो से चिह्नित था। यह साझा पृष्ठभूमि यह वास्तविक चिंता पैदा करती है कि एल नीनो वर्ष फिर से शांत, स्थिर मौसम की बजाय अचानक, विनाशकारी बारिश ला सकता है।
বাংলা অনুবাদইতিহাস দেখায় কেন এই অনিশ্চয়তা এত গুরুত্বপূর্ণ। ২০১৫ সালের ১ ডিসেম্বর, চেন্নাই একশো বছরেরও বেশি সময়ের মধ্যে একদিনে সবচেয়ে বেশি বৃষ্টিপাতের সাক্ষী হয়েছিল, যে বিপর্যয়ে প্রায় ৫০০ জনের মৃত্যু হয় এবং প্রায় ১৮ লক্ষ মানুষ গৃহহীন হয়ে পড়ে। সেই বিপর্যয়কর বছরটিতে, বর্তমান বছরের মতোই, একটি শক্তিশালী এল নিনো (El Niño) সক্রিয় ছিল। এই মিল একটি প্রকৃত উদ্বেগের জন্ম দেয় যে এল নিনোর বছরে শান্ত, স্থির মৌসুমের বদলে আবার হঠাৎ ধ্বংসাত্মক বৃষ্টিপাত হতে পারে।
Yet the link between El Niño and the northeast monsoon is not simple or constant. In some El Niño years, such as 1997 and 2009, Tamil Nadu actually above-normal rainfall during these months. In other El Niño years, such as 1982 and 2002, the northeast monsoon turned out weak, matching an already poor southwest monsoon. Scientists have not yet fully explained this pattern, though it seems that the ocean's warming may push rain-carrying cyclones off their usual paths in directions.
हिंदी अर्थफिर भी एल नीनो और उत्तर-पूर्वी मानसून के बीच संबंध सरल या स्थिर नहीं है। कुछ एल नीनो वर्षों में, जैसे 1997 और 2009 में, तमिलनाडु को वास्तव में इन महीनों के दौरान सामान्य से अधिक बारिश मिली। अन्य एल नीनो वर्षों में, जैसे 1982 और 2002 में, उत्तर-पूर्वी मानसून कमजोर निकला, जो पहले से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से मेल खाता था। वैज्ञानिक अभी तक इस पैटर्न को पूरी तरह समझा नहीं पाए हैं, हालांकि ऐसा लगता है कि महासागर की गर्मी बारिश लाने वाले चक्रवातों को उनके सामान्य रास्तों से अप्रत्याशित दिशाओं में धकेल सकती है।
বাংলা অনুবাদতবুও এল নিনো (El Niño) এবং উত্তর-পূর্ব মৌসুমি বায়ুর মধ্যে সম্পর্ক সরল বা স্থির নয়। ১৯৯৭ ও ২০০৯ সালের মতো কিছু এল নিনো বছরে তামিলনাড়ু এই মাসগুলিতে বরং স্বাভাবিকের চেয়ে বেশি বৃষ্টিপাত পেয়েছিল। অন্যদিকে ১৯৮২ ও ২০০২ সালের মতো কিছু এল নিনো বছরে উত্তর-পূর্ব মৌসুমি বায়ু দুর্বল প্রমাণিত হয়েছিল, যা ইতিমধ্যেই দুর্বল দক্ষিণ-পশ্চিম মৌসুমি বায়ুর সঙ্গে মিলে গিয়েছিল। বিজ্ঞানীরা এখনও এই ধরনটি সম্পূর্ণভাবে ব্যাখ্যা করতে পারেননি, যদিও মনে করা হয় যে সমুদ্রের উষ্ণায়ন বৃষ্টিবাহী ঘূর্ণিঝড়গুলিকে তাদের স্বাভাবিক পথ থেকে অপ্রত্যাশিত দিকে ঠেলে দিতে পারে।
Given this uncertainty, preparedness becomes the only sensible response for both the central government and the southern states. Officials need to clear stormwater drains well before the season begins, vulnerable shelters, and keep emergency funds ready for possible infrastructure . Weather agencies must also sharpen their short-term warning systems so that local authorities and citizens get enough notice before any sudden of rain arrives. A mix of caution and quick action can turn an season into a manageable one.
हिंदी अर्थइस अनिश्चितता को देखते हुए, तैयारी ही केंद्र सरकार और दक्षिणी राज्यों दोनों के लिए एकमात्र समझदारी भरा जवाब है। अधिकारियों को मौसम शुरू होने से पहले तूफानी जल निकासी नालों की सफाई करनी चाहिए, कमजोर आश्रयों को मजबूत (fortify) करना चाहिए, और संभावित बुनियादी ढांचे के नुकसान के लिए आपातकालीन धन तैयार रखना चाहिए। मौसम एजेंसियों को भी अपनी अल्पकालिक चेतावनी प्रणालियों को तेज करना चाहिए ताकि स्थानीय अधिकारियों और नागरिकों को किसी भी अचानक मूसलाधार बारिश (torrent) से पहले पर्याप्त सूचना मिल सके। सावधानी और त्वरित कार्रवाई का मिश्रण एक अप्रत्याशित मौसम को प्रबंधनीय बना सकता है।
বাংলা অনুবাদএই অনিশ্চয়তার পরিপ্রেক্ষিতে, কেন্দ্রীয় সরকার এবং দক্ষিণের রাজ্যগুলির জন্য প্রস্তুতিই একমাত্র বিচক্ষণ পদক্ষেপ হয়ে ওঠে। মৌসুম শুরু হওয়ার অনেক আগেই কর্মকর্তাদের ঝড়-জলের নিকাশি নালা পরিষ্কার করতে হবে, দুর্বল আশ্রয়কেন্দ্রগুলি মজবুত করতে হবে, এবং সম্ভাব্য পরিকাঠামোগত ক্ষতির জন্য জরুরি তহবিল প্রস্তুত রাখতে হবে। আবহাওয়া সংস্থাগুলিকেও তাদের স্বল্পমেয়াদি সতর্কীকরণ ব্যবস্থা (early warning system) আরও শক্তিশালী করতে হবে, যাতে কোনো আকস্মিক ভারী বৃষ্টিপাত আসার আগে স্থানীয় প্রশাসন ও নাগরিকরা পর্যাপ্ত সময় পান। সতর্কতা ও দ্রুত পদক্ষেপের মিশ্রণ একটি অপ্রত্যাশিত মৌসুমকেও সামলানোর যোগ্য করে তুলতে পারে।
In short, while a 'normal' forecast sounds , the wide error window of the northeast monsoon means nothing should be taken for granted. The experience of 2015 is a clear reminder that comfort based on averages can be misleading when El Niño is involved. Careful planning, not casual optimism, should guide how India approaches the months ahead.
हिंदी अर्थसंक्षेप में, 'सामान्य' पूर्वानुमान भले ही आश्वस्त करने वाला लगे, लेकिन उत्तर-पूर्वी मानसून की बड़ी त्रुटि सीमा का मतलब है कि कुछ भी तय मानकर नहीं चलना चाहिए। 2015 का अनुभव एक स्पष्ट अनुस्मारक है कि जब एल नीनो शामिल हो तो औसत पर आधारित आराम भ्रामक हो सकता है। सावधानीपूर्ण योजना, न कि लापरवाह आशावाद, आने वाले महीनों में भारत के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करनी चाहिए।
বাংলা অনুবাদসংক্ষেপে বলা যায়, 'স্বাভাবিক' পূর্বাভাস শুনতে স্বস্তিদায়ক মনে হলেও, উত্তর-পূর্ব মৌসুমি বায়ুর বড় ত্রুটির মার্জিনের (margin of error) কারণে কোনো কিছুই নিশ্চিত ধরে নেওয়া উচিত নয়। ২০১৫ সালের অভিজ্ঞতা স্পষ্ট মনে করিয়ে দেয় যে এল নিনো জড়িত থাকলে গড় পরিসংখ্যানের উপর ভিত্তি করে স্বস্তি পাওয়া বিভ্রান্তিকর হতে পারে। সতর্ক পরিকল্পনাই, হালকা আশাবাদ নয়, আগামী মাসগুলির প্রতি ভারতের দৃষ্টিভঙ্গি নির্ধারণ করা উচিত।
Based on the editorial “Wicked surprise: On the northeast monsoon” in The Hindu – read the original. Explanation, Hindi lines, vocabulary and quiz written by RBE for exam preparation. RBE is not affiliated with or endorsed by The Hindu.