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SSC GD 2026 26 मई 2026 शिफ्ट 1 – GK प्रश्न – उत्तर व व्याख्या सहित

SSC GD 2026 (26 मई 2026 शिफ्ट 1) में पूछे गए सभी 19 GK / सामान्य अध्ययन प्रश्न, सही उत्तर और व्याख्या के साथ – विषयवार।

📚 19 प्रश्न🗓️ 26 मई 2026⏰ शिफ्ट 1
English📥 पूरा पेपर PDF
विषय: Polity (3) · Static GK (8) · Physics (2) · Geography (2) · Economics (1) · Modern History (1) · Medieval History (1) · Current Affairs (1)

Polity (3)

Judiciary · Removal of judges

Q1. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया को किस नाम से जाना जाता है?

  1. (a) प्रत्याह्वान (Recall)
  2. (b) न्यायिक समीक्षा
  3. (c) महाभियोग (Impeachment)
  4. (d) राष्ट्रपति द्वारा बर्खास्तगी
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) महाभियोग (Impeachment)

सही उत्तर: महाभियोग (Impeachment) — विकल्प (c)
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया को महाभियोग (Impeachment) कहा जाता है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के महाभियोग के बारे में (अनुच्छेद 124(4)): संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124(4); आधार: सिद्ध कदाचार या अक्षमता; प्रक्रिया: संसद के प्रत्येक सदन (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है; आवश्यक विशेष बहुमत: प्रत्येक सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और प्रत्येक सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 बहुमत; दोनों सदनों को एक ही सत्र में प्रस्ताव पारित करना होगा; दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद, राष्ट्रपति निष्कासन आदेश जारी करते हैं; न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 प्रक्रिया को नियंत्रित करता है: एक प्रस्ताव (महाभियोग प्रस्ताव) पर लोकसभा के कम से कम 100 सदस्यों या राज्यसभा के 50 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने चाहिए; अध्यक्ष/सभापति प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करते हैं; यदि स्वीकार किया जाता है, तो एक 3-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया जाता है (मुख्य न्यायाधीश/उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश + उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश + एक प्रतिष्ठित न्यायविद्); समिति आरोपों की जांच करती है; ऐतिहासिक तथ्य: भारत में किसी भी उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पर कभी भी सफलतापूर्वक महाभियोग नहीं लगाया गया है। न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी (1993) के खिलाफ एकमात्र प्रयास किया गया था — प्रस्ताव विफल हो गया क्योंकि सत्तारूढ़ दल ने मतदान से परहेज किया; अन्य प्रक्रियाओं के बारे में: प्रत्याह्वान (Recall): निर्वाचित प्रतिनिधियों को वापस बुलाने की एक राजनीतिक व्यवस्था — न्यायाधीशों पर लागू नहीं; न्यायिक समीक्षा: कानूनों/सरकारी कार्रवाइयों की समीक्षा करने की अदालतों की शक्ति — यह एक अदालती शक्ति है, न कि निष्कासन प्रक्रिया; राष्ट्रपति द्वारा बर्खास्तगी: राष्ट्रपति संसद के प्रस्ताव के बाद ही न्यायाधीशों को हटा सकते हैं — स्वतंत्र रूप से नहीं।
विकल्प (a) प्रत्याह्वान (Recall) — गलत: प्रत्याह्वान कुछ लोकतंत्रों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनका कार्यकाल समाप्त होने से पहले हटाने के लिए उपयोग की जाने वाली एक प्रक्रिया है — यह भारत में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों पर लागू नहीं होती है; उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की सही प्रक्रिया महाभियोग है। उम्मीदवार ने यह गलत विकल्प चुना।
विकल्प (b) न्यायिक समीक्षा — गलत: न्यायिक समीक्षा अदालतों (विशेषकर उच्चतम न्यायालय) की वह शक्ति है जो यह जांच करती है कि संसद द्वारा पारित कानून या कार्यपालिका की कार्रवाइयां संवैधानिक हैं या नहीं — यह एक अदालती शक्ति है, न कि न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया।
विकल्प (d) राष्ट्रपति द्वारा बर्खास्तगी — गलत: यद्यपि राष्ट्रपति अंतिम निष्कासन आदेश जारी करते हैं, एक न्यायाधीश को स्वेच्छा से 'राष्ट्रपति द्वारा बर्खास्त' नहीं किया जा सकता है; निष्कासन के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित एक प्रस्ताव की आवश्यकता होती है — इस प्रक्रिया को महाभियोग कहा जाता है, न कि बर्खास्तगी।
DPSP and Fundamental Duties · Swaran Singh Committee and 42nd/86th amendments

Q2. किस समिति ने मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने की सिफारिश की?

  1. (a) स्वर्ण सिंह समिति
  2. (b) राजमन्नार समिति
  3. (c) सरकारिया आयोग
  4. (d) बलवंत राय मेहता समिति
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) स्वर्ण सिंह समिति

सही उत्तर: स्वर्ण सिंह समिति — विकल्प (a)
स्वर्ण सिंह समिति (1976) ने भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने की सिफारिश की। स्वर्ण सिंह समिति के बारे में: गठित: कांग्रेस पार्टी/सरकार द्वारा (1975-77 के आपातकाल के दौरान); नामकरण: सरदार स्वर्ण सिंह के नाम पर, जो एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और अनुभवी राजनीतिज्ञ थे; वर्ष: 1976; उद्देश्य: संविधान में परिवर्तन/संशोधन की सिफारिश करना; मुख्य सिफारिश: समिति ने नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्यों को जोड़ने की सिफारिश की; परिणाम: इस सिफारिश के आधार पर, 42वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 पारित किया गया, जिसने 10 मौलिक कर्तव्यों वाले भाग IV-ए (अनुच्छेद 51ए) को जोड़ा; मौलिक कर्तव्यों के बारे में (अनुच्छेद 51ए): मूल रूप से 1976 में 42वें संशोधन द्वारा 10 कर्तव्य जोड़े गए थे; 11वां कर्तव्य 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया (6-14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का माता-पिता का कर्तव्य); मौलिक कर्तव्य गैर-न्यायसंगत (अदालतों द्वारा लागू नहीं किए जा सकते) हैं; वे भारत के सभी नागरिकों पर लागू होते हैं; स्रोत: यूएसएसआर (सोवियत संघ) के संविधान से प्रेरित; अन्य समितियों के बारे में: राजमन्नार समिति (1969): तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित, राज्यों को अधिक स्वायत्तता की सिफारिश की; सरकारिया आयोग (1983): केंद्र-राज्य संबंध; बलवंत राय मेहता समिति (1957): पंचायती राज प्रणाली की सिफारिश की — ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की त्रि-स्तरीय प्रणाली।
विकल्प (b) राजमन्नार समिति — गलत: राजमन्नार समिति (1969) को तमिलनाडु राज्य सरकार द्वारा केंद्र-राज्य संबंधों की जांच करने और राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता की सिफारिश करने के लिए नियुक्त किया गया था — इसका मौलिक कर्तव्यों से कोई लेना-देना नहीं था।
विकल्प (c) सरकारिया आयोग — गलत: सरकारिया आयोग (1983-1988) केंद्र-राज्य संबंधों की जांच करने और परिवर्तनों की सिफारिश करने के लिए स्थापित किया गया था — इसका मौलिक कर्तव्यों की सिफारिश करने से कोई संबंध नहीं था।
विकल्प (d) बलवंत राय मेहता समिति — गलत: बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने भारत में त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली की स्थापना की सिफारिश की थी — यह मौलिक कर्तव्यों से संबंधित नहीं था; स्वर्ण सिंह समिति सही है। उम्मीदवार ने यह गलत विकल्प चुना।
Union Executive · President - impeachment and succession

Q3. जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के पद रिक्त हों, तो भारत के राष्ट्रपति के रूप में कौन कार्य करता है?

  1. (a) किसी भी राज्य का राज्यपाल
  2. (b) भारत का मुख्य न्यायाधीश
  3. (c) महान्यायवादी
  4. (d) प्रधान मंत्री
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) भारत का मुख्य न्यायाधीश

सही उत्तर: भारत के मुख्य न्यायाधीश — विकल्प (b)
जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के पद एक साथ रिक्त होते हैं, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। राष्ट्रपति के पद की रिक्ति के लिए संवैधानिक प्रावधान: सामान्य रिक्ति (राष्ट्रपति अनुपस्थित/बीमार): उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं (अनुच्छेद 65(1)); राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों अनुपस्थित/बीमार: कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं — लेकिन परंपरा और व्यवहार ने CJI की भूमिका स्थापित की है; दोनों पद रिक्त: भारत के मुख्य न्यायाधीश (या सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश) राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं; ऐतिहासिक उदाहरण: मुख्य न्यायाधीश एम. हिदायतुल्ला ने 20 जुलाई से 24 अगस्त 1969 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया, जब राष्ट्रपति वराहगिरि वेंकट गिरि ने चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया था और उपराष्ट्रपति का पद रिक्त था; उत्तराधिकार के क्रम के बारे में: राष्ट्रपति → उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 65) → भारत के मुख्य न्यायाधीश (यदि दोनों अनुपलब्ध/रिक्त हों); CJI सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रपति/कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेते हैं; CJI इस अवधि के दौरान राष्ट्रपति की सभी शक्तियों और कार्यों का प्रयोग करते हैं; अन्य विकल्पों के बारे में: किसी राज्य का राज्यपाल: राज्यपाल राज्यों के प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं; राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति के उत्तराधिकार में उनकी कोई भूमिका नहीं होती है; महान्यायवादी: महान्यायवादी भारत का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है (उत्तराधिकार में कोई संवैधानिक/कार्यकारी पद नहीं); प्रधान मंत्री: प्रधान मंत्री सरकार का मुखिया होता है लेकिन राष्ट्रपति के उत्तराधिकार की पंक्ति में नहीं होता है; संवैधानिक रूप से, राष्ट्रपति के कार्य उपराष्ट्रपति, फिर CJI को हस्तांतरित होते हैं।
विकल्प (a) किसी राज्य का राज्यपाल — गलत: राज्य के राज्यपाल अपने संबंधित राज्यों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं — वे भारत के राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार की पंक्ति में नहीं हैं; जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों अनुपस्थित हों/पद रिक्त हों, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।
विकल्प (c) महान्यायवादी — गलत: भारत का महान्यायवादी सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है और उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार होता है — यह एक कानूनी/सलाहकारी भूमिका है और संवैधानिक उत्तराधिकार का पद नहीं है; जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों पद रिक्त होते हैं, तो CJI राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।
विकल्प (d) प्रधान मंत्री — गलत: प्रधान मंत्री सरकार का प्रमुख (कार्यकारी शक्ति) होता है लेकिन राष्ट्रपति के संवैधानिक उत्तराधिकार की पंक्ति में नहीं होता है; क्रम है: राष्ट्रपति → उपराष्ट्रपति → भारत के मुख्य न्यायाधीश।

Static GK (8)

Music and Musical Instruments · Hindustani music (ragas, gharanas)

Q4. ग्रंथ 'राग तरंगिणी' के लेखक कौन हैं?

  1. (a) पं. अहोबल
  2. (b) पं. शारंगदेव
  3. (c) पं. लोचन
  4. (d) पं. भातखंडे
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) पं. लोचन

सही उत्तर: पं. लोचन — विकल्प (c)
पं. लोचन (लोचन कवि) 'राग तरंगिणी' नामक ग्रंथ के लेखक हैं। राग तरंगिणी के बारे में: लेखक: पं. लोचन (जिन्हें लोचन कवि भी कहा जाता है); 'राग तरंगिणी' भारतीय (हिंदुस्तानी) संगीत पर एक महत्वपूर्ण शास्त्रीय ग्रंथ है; यह रागों, उनकी विशेषताओं और प्रदर्शन के नियमों से संबंधित है; मध्यकालीन युग में लिखा गया; यह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के ऐतिहासिक विकास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है; पं. लोचन के बारे में: लोचन कवि संगीत सिद्धांत के मध्यकालीन विद्वान थे; उन्होंने विभिन्न रागों की विशेषताओं का वर्णन करते हुए राग तरंगिणी का संकलन किया; अन्य शास्त्रीय संगीत ग्रंथों के बारे में: संगीत रत्नाकर (पं. शारंगदेव द्वारा, 13वीं शताब्दी): भारतीय शास्त्रीय संगीत पर सबसे व्यापक और आधिकारिक ग्रंथों में से एक; हिंदुस्तानी और कर्नाटक दोनों परंपराओं को शामिल करता है; नाद, श्रुति, स्वर, ग्राम, मूर्छना, तान, अलंकार, राग और वाद्य यंत्रों से संबंधित है; पं. शारंगदेव देवगिरि में यादव वंश के राजा सिंहन के दरबार में रहते थे; संगीत पारिजात (पं. अहोबल द्वारा, 17वीं शताब्दी): उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत पर ग्रंथ; क्रमिक पुस्तक मालिका (पं. विष्णु नारायण भातखंडे द्वारा, 20वीं शताब्दी की शुरुआत): हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को 10 थाटों में व्यवस्थित किया; भातखंडे ने 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति' भी लिखी; स्वर मेला कलानिधि: रामामात्य द्वारा दक्षिण भारतीय संगीत ग्रंथ (16वीं शताब्दी)।
विकल्प (a) पं. अहोबल — गलत: पं. अहोबल (17वीं शताब्दी) ने 'संगीत पारिजात' लिखा था — 'राग तरंगिणी' नहीं; उनका कार्य 17वीं शताब्दी के हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत पर एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
विकल्प (b) पं. शारंगदेव — गलत: पं. शारंगदेव (13वीं शताब्दी) ने 'संगीत रत्नाकर' लिखा था — जो भारतीय शास्त्रीय संगीत पर सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक ग्रंथों में से एक है; उन्होंने 'राग तरंगिणी' नहीं लिखी थी। उम्मीदवार ने यह गलत विकल्प चुना।
विकल्प (d) पं. भातखंडे — गलत: पं. विष्णु नारायण भातखंडे (1860-1936) ने 'क्रमिक पुस्तक मालिका' और 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति' लिखी थी — उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को 10 थाटों में व्यवस्थित किया था; उन्होंने 'राग तरंगिणी' नहीं लिखी थी, जिसके लेखक पं. लोचन थे।
Space, Defence and Technology · International space missions and agencies

Q5. चंद्रमा के सुदूर भाग पर पहला रोवर किस देश ने उतारा?

  1. (a) USA
  2. (b) चीन
  3. (c) भारत
  4. (d) रूस
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) चीन

सही उत्तर: चीन — विकल्प (b)
चीन चंद्रमा के सुदूर भाग पर रोवर उतारने वाला पहला देश बन गया। चीन के चंद्रमा के सुदूर भाग पर उतरने के बारे में: मिशन: चांग'ई-4 (嫦娥四号); लैंडिंग तिथि: 3 जनवरी, 2019; लैंडिंग स्थल: दक्षिणी ध्रुव-ऐटकेन बेसिन में वॉन कार्मन क्रेटर (सौर मंडल के सबसे बड़े और सबसे पुराने प्रभाव क्रेटरों में से एक); रोवर: यूटू-2 (जेड रैबिट-2); यूटू-2 ने चंद्रमा की सतह पर किसी भी रोवर के सबसे लंबे परिचालन काल का रिकॉर्ड बनाया है; संचार चुनौती: चंद्रमा का सुदूर भाग कभी भी पृथ्वी के सामने नहीं आता है, इसलिए सीधा संचार असंभव है; चीन ने रोवर और पृथ्वी के बीच संकेतों को रिले करने के लिए एक रिले उपग्रह — क्यूकियाओ-1 (पृथ्वी-चंद्रमा एल2 लाग्रेंज बिंदु के चारों ओर एक हेलो कक्षा में) तैनात करके इसे हल किया; सुदूर भाग का अन्वेषण क्यों महत्वपूर्ण है: सुदूर भाग भूवैज्ञानिक रूप से निकट भाग से भिन्न है — इसकी परत मोटी है और भूभाग अधिक प्राचीन है; यह पृथ्वी के रेडियो हस्तक्षेप से सुरक्षित है — रेडियो खगोल विज्ञान के लिए आदर्श; वैज्ञानिक सुदूर भाग से ब्रह्मांड के 'अंधकार युग' (सितारों के बनने से पहले) का अध्ययन करने की उम्मीद करते हैं; बाद के सुदूर-भाग मिशनों के बारे में: चांग'ई-6 (2024): चीन ने अपोलो क्रेटर से चंद्रमा के सुदूर भाग से पहले नमूने पुनर्प्राप्त किए; भारत के चंद्रमा मिशनों के बारे में: चंद्रयान-1 (2008): ऑर्बिटर — चंद्रमा पर पानी की पुष्टि की; चंद्रयान-2 (2019): ऑर्बिटर (सफल) + विक्रम लैंडर (क्रैश-लैंडेड); चंद्रयान-3 (2023): दक्षिणी ध्रुव के पास प्रज्ञान रोवर को सफलतापूर्वक उतारा।
विकल्प (a) यूएसए — गलत: यूएसए के नासा अपोलो मिशनों (1969-1972) ने चंद्रमा के निकट भाग पर मनुष्यों को सफलतापूर्वक उतारा — यूएसए ने चंद्रमा के सुदूर भाग पर रोवर नहीं उतारा है; चीन ने जनवरी 2019 में चांग'ई-4 के साथ इसे हासिल करने वाला पहला देश था। उम्मीदवार ने इस गलत विकल्प का चयन किया।
विकल्प (c) भारत — गलत: भारत के चंद्रयान-3 मिशन (23 अगस्त, 2023) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास प्रज्ञान रोवर को सफलतापूर्वक उतारा — लेकिन यह चंद्रमा के निकट भाग पर था, न कि सुदूर भाग पर; चीन चंद्रमा के सुदूर भाग पर उतरने वाला पहला देश था।
विकल्प (d) रूस — गलत: रूस (पूर्व सोवियत संघ) चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने (लूना 9, 1966) और रोवर तैनात करने वाला पहला देश था (लुनाखोद 1, 1970) — लेकिन सभी सोवियत/रूसी चंद्र मिशन निकट भाग पर उतरे थे; चीन चंद्रमा के सुदूर भाग पर उतरने वाला एकमात्र देश है।
Sports · Olympic Games

Q6. भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता कौन हैं?

  1. (a) मिल्खा सिंह
  2. (b) अभिनव बिंद्रा
  3. (c) लिएंडर पेस
  4. (d) सुशील कुमार
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) अभिनव बिंद्रा

सही उत्तर: अभिनव बिंद्रा — विकल्प (b)
अभिनव बिंद्रा भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं। अभिनव बिंद्रा के बारे में: जन्म: 28 सितंबर, 1982, देहरादून (उत्तराखंड) में; स्पर्धा: 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग; ओलंपिक स्वर्ण: बीजिंग ओलंपिक 2008 (11 अगस्त, 2008); उन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में 700.5 (फाइनलिस्ट का कुल स्कोर) के स्कोर के साथ भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता; अभिनव बिंद्रा के स्वर्ण से पहले, भारत के एकमात्र ओलंपिक स्वर्ण पदक टीम स्पर्धाओं में आए थे — फील्ड हॉकी (8 स्वर्ण पदक: 1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1960, 1964, 1980); करियर की मुख्य बातें: 10 मीटर एयर राइफल में विश्व चैंपियन (2006) — 2006 ISSF विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता; राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक; एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक; आत्मकथा लिखी: 'ए शॉट एट हिस्ट्री: माय ऑब्सेसिव जर्नी टू ओलंपिक गोल्ड'; पुरस्कार: राजीव गांधी खेल रत्न (2001), पद्म भूषण (2009), पद्म विभूषण (2016); 2008 से पहले भारत का ओलंपिक पदक इतिहास: 1900: नॉर्मन प्रिचर्ड — 2 व्यक्तिगत रजत पदक (एथलेटिक्स) — लेकिन उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के तहत प्रतिस्पर्धा की; 1952: के.डी. जाधव — कांस्य (कुश्ती); 1996: लिएंडर पेस — कांस्य (टेनिस); 2000: कर्णम मल्लेश्वरी — कांस्य (भारोत्तोलन); 2004: राज्यवर्धन सिंह राठौड़ — रजत (निशानेबाजी); 2008: अभिनव बिंद्रा — स्वर्ण (निशानेबाजी) ← पहला व्यक्तिगत स्वर्ण!
विकल्प (a) मिल्खा सिंह — गलत: मिल्खा सिंह ('फ्लाइंग सिख') एक दिग्गज भारतीय धावक थे — उन्होंने 1960 के रोम ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ में प्रसिद्ध रूप से चौथा स्थान प्राप्त किया (कांस्य पदक केवल एक सेकंड के अंश से चूके); उन्होंने कभी ओलंपिक पदक नहीं जीता; अभिनव बिंद्रा भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं।
विकल्प (c) लिएंडर पेस — गलत: लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में पुरुषों के एकल टेनिस में कांस्य पदक जीता था — जबकि यह दशकों में भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक के रूप में ऐतिहासिक था, यह कांस्य पदक था, स्वर्ण नहीं; अभिनव बिंद्रा ने 2008 में भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण जीता था।
विकल्प (d) सुशील कुमार — गलत: सुशील कुमार ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कुश्ती (66 किलोग्राम फ्रीस्टाइल) में कांस्य पदक और 2012 के लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीता था — वह दो बार के ओलंपिक पदक विजेता हैं, लेकिन उनके पदक कांस्य और रजत हैं, स्वर्ण नहीं; अभिनव बिंद्रा भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं।
Sports · Cricket

Q7. टी20 क्रिकेट में, पावरप्ले के बाद 30-यार्ड सर्कल के बाहर कितने फील्डर को अनुमति दी जाती है?

  1. (a) 4
  2. (b) 5
  3. (c) 3
  4. (d) 6
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) 5

सही उत्तर: 5 — विकल्प (b)
टी20 क्रिकेट में, पावरप्ले ओवर के बाद 30-यार्ड सर्कल के बाहर 5 फील्डर को अनुमति दी जाती है। टी20 क्रिकेट में फील्डिंग प्रतिबंधों के बारे में: पावरप्ले (ओवर 1-6): पहले 6 ओवरों के लिए अनिवार्य पावरप्ले; 30-यार्ड सर्कल के बाहर अधिकतम 2 फील्डर की अनुमति; भीतरी सर्कल (30 यार्ड के भीतर) में न्यूनतम 2 फील्डर होने चाहिए; पावरप्ले के बाद (ओवर 7-20): 30-यार्ड सर्कल के बाहर अधिकतम 5 फील्डर की अनुमति; 30-यार्ड सर्कल (भीतरी सर्कल) के भीतर न्यूनतम 4 फील्डर होने चाहिए; हर समय: पहले 6 ओवरों के दौरान कम से कम 2 फील्डर कैचिंग पोजीशन में (बल्लेबाज से 15 यार्ड के भीतर) होने चाहिए; विभिन्न प्रारूपों में फील्डिंग प्रतिबंधों के बारे में: वनडे क्रिकेट (50 ओवर): पावरप्ले 1 (ओवर 1-10): 30-यार्ड सर्कल के बाहर अधिकतम 2; पावरप्ले 2 (ओवर 11-40): बाहर अधिकतम 4; अंतिम 10 ओवर (41-50): बाहर अधिकतम 5; टी20आई: पावरप्ले (ओवर 1-6): बाहर अधिकतम 2; ओवर 7-20: बाहर अधिकतम 5; टेस्ट क्रिकेट: कोई फील्डिंग प्रतिबंध नहीं; 30-यार्ड सर्कल के बारे में: पिच के केंद्र से 30 गज (27.4 मीटर) की त्रिज्या वाला एक वृत्त; फील्डिंग टीम इसका उपयोग फील्डरों को रणनीतिक रूप से स्थापित करने के लिए करती है; पावरप्ले के दौरान, कम फील्डर बाहर होते हैं, जिससे बल्लेबाजों को गैप्स में अधिक स्वतंत्र रूप से स्कोर करने की अनुमति मिलती है; टी20 क्रिकेट के बारे में: टी20 क्रिकेट का सबसे छोटा प्रारूप है; प्रत्येक टीम 20 ओवर के लिए बल्लेबाजी करती है; आईसीसी (अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) खेल नियमों द्वारा शासित।
विकल्प (a) 4 — गलत: टी20 क्रिकेट में पावरप्ले के बाद, 30-यार्ड सर्कल के बाहर 5 फील्डर (4 नहीं) को अनुमति दी जाती है; टी20 में पावरप्ले के बाद के प्रतिबंधों के लिए 4 फील्डर बाहर एक वैध संख्या नहीं है।
विकल्प (c) 3 — गलत: टी20 क्रिकेट में पावरप्ले के बाद, 30-यार्ड सर्कल के बाहर 5 फील्डर को अनुमति दी जाती है — 3 नहीं; 30-यार्ड सर्कल के बाहर केवल 3 फील्डर होने का मतलब है कि यह आईसीसी के नियमों द्वारा पावरप्ले के बाद के ओवरों में अनुमत से अधिक प्रतिबंधात्मक है।
विकल्प (d) 6 — गलत: टी20 में पावरप्ले के बाद 30-यार्ड सर्कल के बाहर अधिकतम 5 फील्डर को अनुमति दी जाती है; बाहर 6 फील्डर होने का मतलब होगा कि अंदर केवल 5 फील्डर (विकेटकीपर और गेंदबाज सहित) हैं, जो आईसीसी का नियम नहीं है; सही संख्या 5 है।
Space, Defence and Technology · ISRO - history and centres

Q8. पर्यावरण अध्ययन के लिए उपग्रह सुदूर संवेदन (सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग) के प्रबंधन के लिए निम्नलिखित में से कौन सी भारतीय एजेंसी जिम्मेदार है?

  1. (a) FSI - भारतीय वन सर्वेक्षण
  2. (b) CPCB - केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
  3. (c) ISRO - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
  4. (d) MoEFCC - पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) ISRO - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

सही उत्तर: ISRO - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन — विकल्प (c)
ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) भारत में पर्यावरण अध्ययन के लिए उपग्रह सुदूर संवेदन (सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग) के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। ISRO और सुदूर संवेदन के बारे में: ISRO सुदूर संवेदन के लिए भारत के पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का प्रबंधन और संचालन करता है; प्रमुख सुदूर संवेदन पहल: राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) — हैदराबाद में स्थित ISRO की एक इकाई; NRSC उपग्रह डेटा और सुदूर संवेदन सेवाएं प्रदान करता है: पर्यावरणीय निगरानी, वन आवरण मूल्यांकन, भूमि उपयोग/भूमि आवरण मानचित्रण, जल संसाधन मानचित्रण, आपदा प्रबंधन, कृषि निगरानी, शहरी फैलाव निगरानी; ISRO के पृथ्वी अवलोकन उपग्रह: RESOURCESAT श्रृंखला: भूमि संसाधनों की निगरानी (वनस्पति, फसलें, वन); CARTOSAT श्रृंखला: उच्च-रिज़ॉल्यूशन कार्टोग्राफिक अनुप्रयोग; OCEANSAT श्रृंखला: महासागर का रंग, पवन सदिश, समुद्री सतह का तापमान; RISAT श्रृंखला: हर मौसम की निगरानी के लिए रडार इमेजिंग; INSAT/KALPANA: मौसम संबंधी अवलोकन; सुदूर संवेदन पर्यावरण में कैसे मदद करता है: वनों की कटाई, मरुस्थलीकरण, ग्लेशियरों का पीछे हटना, आर्द्रभूमि में परिवर्तन, तटीय क्षरण, वायु गुणवत्ता (उपग्रह सेंसर का उपयोग करके), और जैव विविधता में परिवर्तन की निगरानी; अन्य एजेंसियों के बारे में: FSI (भारतीय वन सर्वेक्षण): वन आवरण का आकलन करने के लिए ISRO के उपग्रह डेटा का उपयोग करता है — लेकिन FSI सुदूर संवेदन डेटा का एक उपयोगकर्ता है, उपग्रहों का प्रबंधक नहीं; CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड): जल और वायु प्रदूषण की निगरानी करता है — उपग्रहों का प्रबंधन नहीं करता है; MoEFCC: पर्यावरण के लिए नीति बनाने वाला निकाय है — उपग्रहों का प्रबंधन नहीं करता है।
विकल्प (a) FSI - भारतीय वन सर्वेक्षण — गलत: भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) MoEFCC के तहत एक संगठन है जो उपग्रह सुदूर संवेदन डेटा का उपयोग करके वन आवरण का आकलन करता है — लेकिन यह उपग्रहों का प्रबंधन नहीं करता है; ISRO उपग्रह डेटा प्रदान करता है जिसका उपयोग FSI अपनी द्विवार्षिक वन स्थिति रिपोर्ट के लिए करता है।
विकल्प (b) CPCB - केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड — गलत: CPCB भू-आधारित निगरानी स्टेशनों (CAAQMS — कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशंस) के माध्यम से वायु और जल प्रदूषण की निगरानी करता है — यह उपग्रह सुदूर संवेदन प्रणालियों का प्रबंधन नहीं करता है; ISRO सही उत्तर है। उम्मीदवार ने यह गलत विकल्प चुना।
विकल्प (d) MoEFCC - पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय — गलत: MoEFCC पर्यावरणीय नीति और विनियमन के लिए नोडल मंत्रालय है — यह ISRO के उपग्रहों सहित विभिन्न स्रोतों से डेटा का उपयोग करता है, लेकिन यह उपग्रह सुदूर संवेदन प्रणालियों का प्रबंधन नहीं करता है; ISRO उपग्रह सुदूर संवेदन के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
Dances · Folk dances by state

Q9. 'बयालाटा' निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य का लोक नृत्य/नाट्य रूप है?

  1. (a) बिहार
  2. (b) छत्तीसगढ़
  3. (c) कर्नाटक
  4. (d) हरियाणा
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) कर्नाटक

सही उत्तर: कर्नाटक — विकल्प (c)
'बयालाटा' कर्नाटक से संबंधित एक लोक नृत्य और नाट्य परंपरा है। बयालाटा के बारे में: नाम की उत्पत्ति: कन्नड़ में 'बयालु' का अर्थ है 'खुला मैदान/खुली हवा' + 'अटा' का अर्थ है 'खेल/नृत्य'; तो बयालाटा का शाब्दिक अर्थ है 'खुले हवा में नाटक' या 'खुले मैदान में प्रदर्शन'; प्रकार: लोक नाटक/नाट्य — बिना विस्तृत मंच व्यवस्था के खुले स्थानों (गाँव के चौक, मंदिर के आँगन) में प्रदर्शित किया जाता है; क्षेत्र: कर्नाटक, दक्षिण भारत; बयालाटा के रूपों में शामिल हैं: यक्षगान: बयालाटा का सबसे प्रसिद्ध रूप; पौराणिक कथाओं पर आधारित विषयों, विस्तृत वेशभूषा और मेकअप, संगीत और नृत्य के साथ विस्तृत प्रदर्शन; दद्दाटा: बड़े पैमाने का लोक नाटक; सन्नाटा: छोटा लोक नाटक; दसराटा: रामायण के विषयों पर आधारित; प्रदर्शन: आमतौर पर त्योहारों के अवसरों पर पूरी रात चलने वाले प्रदर्शन होते हैं; विषय: रामायण, महाभारत, पुराणों और स्थानीय किंवदंतियों के प्रसंग; उपयोग किए जाने वाले वाद्ययंत्र: चंडे (ढोल), मद्दले (दो सिरों वाला ढोल), हारमोनियम, झाँझ; महत्व: बयालाटा सदियों से कर्नाटक के सांस्कृतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है; यह मनोरंजन और धार्मिक अभिव्यक्ति दोनों के रूप में कार्य करता है; यक्षगान (बयालाटा का एक रूप) को एक महत्वपूर्ण अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त है; कर्नाटक की अन्य लोक कलाएँ: डोलू कुनिथा (ढोल नृत्य), वीरगैसे (भक्तिपूर्ण योद्धा नृत्य), पूजा कुनिथा (भक्ति नृत्य), कोलाटा (छड़ी नृत्य)।
विकल्प (a) बिहार — गलत: बिहार की लोक नृत्य परंपराओं में जटा-जटिन, बिदेसिया, कजरी शामिल हैं — 'बयालाटा' बिहार का लोक रूप नहीं है; बयालाटा विशेष रूप से कर्नाटक से संबंधित है।
विकल्प (b) छत्तीसगढ़ — गलत: छत्तीसगढ़ की लोक नृत्य परंपराओं में पंथी, राउत नाचा, कर्मा, सुआ शामिल हैं — 'बयालाटा' छत्तीसगढ़ का नहीं है; यह कर्नाटक की एक लोक नाट्य परंपरा है। अभ्यर्थी ने यह गलत विकल्प चुना।
विकल्प (d) हरियाणा — गलत: हरियाणा की लोक परंपराओं में फाग नृत्य, धमाल, झूमर, सांग (लोक नाट्य) शामिल हैं — 'बयालाटा' हरियाणा का नहीं है; यह कर्नाटक की खुले हवा में की जाने वाली लोक नाट्य परंपरा है।
Dances · Folk dances by state

Q10. मिल्खा सिंह ने निम्नलिखित में से किस वर्ष एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था?

  1. (a) घुमुरा
  2. (b) किकली
  3. (c) लूड़ी
  4. (d) सिंधी चम
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) घुमुरा

सही उत्तर: घुमुरा — विकल्प (a)
घुमुरा ओडिशा के कालाहांडी जिले के आदिवासियों का सबसे लोकप्रिय पारंपरिक लोक नृत्य है। घुमुरा नृत्य के बारे में: उत्पत्ति: कालाहांडी जिला, ओडिशा; प्रकार: पारंपरिक आदिवासी युद्ध नृत्य (मूल रूप से योद्धाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए युद्धों से पहले किया जाता था); कलाकार: पारंपरिक रूप से कालाहांडी के आदिवासी समुदायों के पुरुषों द्वारा किया जाता है; घुमुरा ढोल: नृत्य का नाम 'घुमुरा' से मिलता है — एक बड़ा, गोल मिट्टी का ढोल जिसमें एक संकीर्ण गर्दन और दोनों सिरों पर जानवरों की खाल होती है; ढोल को कलाकार के गले में बाँधा जाता है; कलाकार घुमुरा ढोल बजाते हुए एक साथ नृत्य करते हैं; विशेषताएँ: ऊर्जावान और लयबद्ध; समूहों में किया जाता है; इसमें ज़ोरदार पैर संचालन और शारीरिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं; निशान (एक और बड़ा ढोल), मुहुरी (सींग), और तासा के साथ होता है; वेशभूषा: कलाकार पारंपरिक आदिवासी पोशाक पहनते हैं जिसमें मोर पंख और सजावटी सामान होते हैं; सांस्कृतिक महत्व: घुमुरा को कालाहांडी का सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक निर्यात माना जाता है; प्रदर्शन: आदिवासी त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, गणतंत्र दिवस परेड (राष्ट्रीय स्तर) पर किया जाता है; मान्यता: घुमुरा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय त्योहारों में प्रदर्शित किया गया है, जिससे कालाहांडी की आदिवासी संस्कृति को पहचान मिली है; अन्य विकल्पों के बारे में: किकली: पंजाब का एक लोक खेल/नृत्य — युवा लड़कियाँ हाथ पकड़कर घूमती हैं; ओडिशा से नहीं है; लूड़ी: राजस्थान/उत्तर भारत का एक लोक नृत्य/खेल; सिंधी चम: सिक्किम/पूर्वोत्तर भारत की बौद्ध परंपरा का एक मुखौटा नृत्य (मठों में भी किया जाता है)।
विकल्प (b) किकली — गलत: किकली पंजाब का एक लोकप्रिय लोक खेल और नृत्य है — युवा लड़कियाँ (और कभी-कभी लड़के) एक-दूसरे के हाथ पकड़कर तेज़ी से घूमते हैं; इसका ओडिशा के कालाहांडी जिले के आदिवासी समुदायों से कोई संबंध नहीं है; घुमुरा कालाहांडी का आदिवासी नृत्य है। अभ्यर्थी ने यह गलत विकल्प चुना।
विकल्प (c) लूड़ी — गलत: लूड़ी राजस्थान/उत्तर भारत से संबंधित एक लोक नृत्य है — यह कालाहांडी, ओडिशा का आदिवासी नृत्य नहीं है; कालाहांडी का सबसे लोकप्रिय आदिवासी नृत्य घुमुरा है।
विकल्प (d) सिंधी चम — गलत: सिंधी चम बौद्ध मठों में किया जाने वाला एक मुखौटा नृत्य है — मुख्य रूप से सिक्किम, लद्दाख और भारत के अन्य बौद्ध-बहुल क्षेत्रों में; इसका ओडिशा के कालाहांडी जिले के आदिवासी समुदायों से कोई संबंध नहीं है।
Sports · Asian Games and Commonwealth Games

Q11. मिल्खा सिंह ने निम्नलिखित में से किस वर्ष एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था?

  1. (a) 1951
  2. (b) 1954
  3. (c) 1958
  4. (d) 1970
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) 1958

सही उत्तर: 1958 — विकल्प (c)
मिल्खा सिंह ने 1958 (टोक्यो, जापान में आयोजित) में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीते थे। मिल्खा सिंह की एशियाई खेलों की उपलब्धियाँ: 1958 एशियाई खेल (टोक्यो, जापान): मिल्खा सिंह ने दो स्वर्ण पदक जीते — 200 मीटर और 400 मीटर स्प्रिंटिंग स्पर्धाओं में; इससे वह भारत के सबसे प्रसिद्ध ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों में से एक बन गए; 1962 एशियाई खेल (जकार्ता, इंडोनेशिया): मिल्खा सिंह ने 400 मीटर स्पर्धा में एक और स्वर्ण पदक जीता; मिल्खा सिंह के बारे में: पूरा नाम: मिल्खा सिंह; जन्म: 20 नवंबर, 1929 (विवादित), लायलपुर (अब फैसलाबाद, पाकिस्तान) में; निधन: 18 जून, 2021; उपनाम: 'फ्लाइंग सिख' (1960 में पाकिस्तानी एथलीट अब्दुल खालिक को एक दौड़ में हराने के बाद पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान द्वारा दिया गया); उल्लेखनीय प्रदर्शन: 1958 एशियाई खेल (टोक्यो): 200 मीटर और 400 मीटर में स्वर्ण; 1958 ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स: 440 गज में स्वर्ण — इससे वह ट्रैक एंड फील्ड में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बन गए; 1960 रोम ओलंपिक: 400 मीटर में चौथा स्थान (कांस्य से 0.1 सेकंड पीछे) — उनका सबसे हृदय विदारक प्रदर्शन; 1962 एशियाई खेल (जकार्ता): 400 मीटर में स्वर्ण; पुरस्कार: पद्म श्री (1959); अर्जुन पुरस्कार (प्रस्तावित था लेकिन अस्वीकार कर दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि यह बहुत देर से आया है); उनके जीवन को बॉलीवुड फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' (2013) में दर्शाया गया था, जिसमें फरहान अख्तर ने अभिनय किया था।
विकल्प (a) 1951 — गलत: 1951 के एशियाई खेल नई दिल्ली, भारत में आयोजित किए गए थे (यह उद्घाटन संस्करण था) — मिल्खा सिंह ने 1951 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता था; तब वह अपेक्षाकृत युवा थे; उनका एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक 1958 में टोक्यो में आया था।
विकल्प (b) 1954 — गलत: 1954 के एशियाई खेल मनीला, फिलीपींस में आयोजित किए गए थे — मिल्खा सिंह ने 1954 में एशियाई खेलों में स्वर्ण नहीं जीता था; उनके पहले एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक 1958 के एशियाई खेलों में टोक्यो में थे।
विकल्प (d) 1970 — गलत: 1970 के एशियाई खेल बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित किए गए थे — मिल्खा सिंह 1970 से काफी पहले प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स से संन्यास ले चुके थे; उनके एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक 1958 (टोक्यो) और 1962 (जकार्ता) में थे।

Physics (2)

Gravitation · Universal law of gravitation and G

Q12. निम्नलिखित में से कौन सी घटना गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम द्वारा समझाई जाती है?

  1. (a) सूर्य में नाभिकीय संलयन
  2. (b) चंद्रमा और सूर्य के कारण ज्वार-भाटा
  3. (c) ध्रुवों के बीच चुंबकीय आकर्षण
  4. (d) नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की गति
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) चंद्रमा और सूर्य के कारण ज्वार-भाटा

सही उत्तर: चंद्रमा और सूर्य के कारण ज्वार-भाटा — विकल्प (b)
चंद्रमा और सूर्य के कारण ज्वार-भाटा न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम द्वारा समझाए जाते हैं। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के बारे में: ब्रह्मांड में प्रत्येक वस्तु दूसरी वस्तु को उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती बल से आकर्षित करती है; सूत्र: F = G × (m1 × m2) / r²; G = सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (6.67 × 10⁻¹¹ N⋅m²/kg²); ज्वार-भाटा और गुरुत्वाकर्षण के बारे में: ज्वार-भाटा पृथ्वी के महासागरों पर चंद्रमा (मुख्य रूप से) और सूर्य के विभेदक गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण होते हैं; चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव चंद्रमा की ओर वाले हिस्से पर (उच्च ज्वार) और विपरीत हिस्से पर (जड़ता के कारण) समुद्री जल का एक उभार बनाता है; जैसे-जैसे पृथ्वी घूमती है, विभिन्न क्षेत्रों में उच्च और निम्न ज्वार आते हैं; यह न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम द्वारा सीधे समझाया गया है ✓; गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम द्वारा समझाई गई अन्य घटनाएँ: सूर्य के चारों ओर ग्रहों की कक्षाएँ; पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गति; वस्तुओं का वजन; वस्तुओं का पृथ्वी पर गिरना; गुरुत्वाकर्षण नियम द्वारा नहीं समझाई जाने वाली घटनाएँ: सूर्य में नाभिकीय संलयन: नाभिकीय बल (प्रबल बल) द्वारा समझाया गया है — जो उप-परमाणु स्तर पर एक मौलिक बल है; ध्रुवों के बीच चुंबकीय आकर्षण: विद्युत चुम्बकीय बल (मैक्सवेल के समीकरण) द्वारा समझाया गया है; नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की गति: विद्युत चुम्बकीय बल और क्वांटम यांत्रिकी द्वारा समझाई गई है (गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा नहीं — परमाणु स्तर पर गुरुत्वाकर्षण नगण्य होता है)।
विकल्प (a) सूर्य में नाभिकीय संलयन — गलत: सूर्य में नाभिकीय संलयन प्रबल नाभिकीय बल द्वारा समझाया जाता है — इसमें हाइड्रोजन नाभिक अत्यधिक उच्च तापमान और दबाव पर हीलियम बनाने के लिए संलयन करते हैं; यह एक परमाणु भौतिकी घटना है, न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम द्वारा नहीं समझाई जाती है।
विकल्प (c) ध्रुवों के बीच चुंबकीय आकर्षण — गलत: ध्रुवों के बीच चुंबकीय आकर्षण विद्युत चुम्बकीय बल (चार मौलिक बलों में से एक) द्वारा समझाया जाता है — यह मैक्सवेल के समीकरणों और बायो-सावर्ट नियम द्वारा नियंत्रित होता है, न कि गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम द्वारा।
विकल्प (d) नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की गति — गलत: नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की गति विद्युत चुम्बकीय बल (ऋणात्मक आवेशित इलेक्ट्रॉनों और धनात्मक आवेशित प्रोटॉनों के बीच आकर्षण) और क्वांटम यांत्रिकी (तरंग-कण द्वैत) द्वारा समझाई जाती है — परमाणु स्तर पर गुरुत्वाकर्षण बल विद्युत चुम्बकीय बल की तुलना में नगण्य रूप से छोटा होता है।
Force and Laws of Motion · Newton's first law and inertia

Q13. किसी वस्तु का द्रव्यमान क्या मापता है?

  1. (a) उसका भार
  2. (b) उसकी जड़ता
  3. (c) उसका आयतन
  4. (d) उसका घनत्व
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) उसकी जड़ता

सही उत्तर: उसकी जड़ता — विकल्प (b)
किसी वस्तु का द्रव्यमान उसकी जड़ता का एक माप है — किसी वस्तु का अपनी गति की अवस्था में परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध। द्रव्यमान और जड़ता के बारे में: द्रव्यमान: पदार्थ का एक मूलभूत गुण; यह किसी वस्तु में पदार्थ की मात्रा को मापता है; SI इकाई: किलोग्राम (kg); द्रव्यमान एक अदिश राशि है; द्रव्यमान हर जगह (पृथ्वी, चंद्रमा या अंतरिक्ष में) स्थिर रहता है; जड़ता: किसी वस्तु की अपनी विराम या गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करने की प्रवृत्ति; न्यूटन का गति का पहला नियम (जड़ता का नियम) कहता है कि यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है तो वह विराम अवस्था में ही रहती है और यदि गति में है तो वह गति में ही रहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल न लगे; द्रव्यमान जड़ता का माप है: द्रव्यमान जितना अधिक → जड़ता उतनी अधिक → उसकी अवस्था को बदलने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है; एक भारी ट्रक में साइकिल की तुलना में अधिक जड़ता होती है — उसे शुरू करना या रोकना कठिन होता है; न्यूटन का दूसरा नियम: F = ma; यहाँ 'm' जड़ता (त्वरण के प्रति प्रतिरोध) का माप है; महत्वपूर्ण अंतर: द्रव्यमान बनाम भार: द्रव्यमान = पदार्थ की मात्रा (kg); भार = द्रव्यमान पर गुरुत्वाकर्षण बल (W = mg); भार गुरुत्वाकर्षण के साथ बदलता रहता है लेकिन द्रव्यमान स्थिर रहता है; द्रव्यमान बनाम आयतन: आयतन घेरा हुआ स्थान है; द्रव्यमान पदार्थ की मात्रा है; द्रव्यमान बनाम घनत्व: घनत्व = द्रव्यमान/आयतन; घनत्व प्रति इकाई आयतन द्रव्यमान है, न कि वह जो द्रव्यमान मापता है; उदाहरण: समान आकार की एक क्रिकेट गेंद और एक टेनिस गेंद का द्रव्यमान अलग-अलग होता है — भारी क्रिकेट गेंद में अधिक जड़ता होती है और उसे त्वरित करने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है।
विकल्प (a) उसका भार — गलत: भार किसी वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल है (W = mg) — भार गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है और स्थान के साथ बदलता रहता है; द्रव्यमान भार का माप नहीं है; द्रव्यमान जड़ता को मापता है, जबकि भार द्रव्यमान पर गुरुत्वाकर्षण बल है।
विकल्प (c) उसका आयतन — गलत: आयतन किसी वस्तु द्वारा घेरा गया त्रि-आयामी स्थान है — यह द्रव्यमान से पूरी तरह से अलग एक भौतिक राशि है; द्रव्यमान आयतन को नहीं मापता; यह पदार्थ की मात्रा और जड़ता को मापता है।
विकल्प (d) उसका घनत्व — गलत: घनत्व प्रति इकाई आयतन द्रव्यमान है (ρ = m/V) — यह द्रव्यमान और आयतन दोनों को मिलाकर एक व्युत्पन्न राशि है; द्रव्यमान घनत्व को नहीं मापता; द्रव्यमान जड़ता (गति में परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध) को मापता है। अभ्यर्थी ने यह गलत विकल्प चुना।

Geography (2)

Universe and Solar System · Eclipses, seasons, day and night

Q14. उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन कब होता है?

  1. (a) वसंत विषुव
  2. (b) शरद विषुव
  3. (c) शीतकालीन संक्रांति (दक्षिण संक्रांति)
  4. (d) ग्रीष्म संक्रांति (उत्तर संक्रांति)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) ग्रीष्म संक्रांति (उत्तर संक्रांति)

सही उत्तर: ग्रीष्म संक्रांति (उत्तर संक्रांति) — विकल्प (d)
उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन ग्रीष्म संक्रांति (उत्तर अयनांत) पर होता है, जो हर साल 21 जून के आसपास पड़ता है। ग्रीष्म संक्रांति के बारे में: ग्रीष्म संक्रांति (जून संक्रांति): हर साल 20-21 जून के आसपास होती है; सूर्य अपनी सबसे उत्तरी स्थिति पर पहुँचता है — कर्क रेखा (23.5°N) के ठीक ऊपर; उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अधिकतम झुका होता है; इससे उत्तरी गोलार्ध में अधिकतम दिन के घंटे मिलते हैं — सबसे लंबा दिन; आर्कटिक वृत्त में 24 घंटे दिन का प्रकाश (आधी रात का सूर्य) होता है; अंटार्कटिक वृत्त में 24 घंटे अंधेरा रहता है; चार प्रमुख खगोलीय घटनाओं के बारे में: वसंत विषुव (20-21 मार्च): दोनों गोलार्धों में दिन और रात बराबर होते हैं (लगभग 12 घंटे प्रत्येक); सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है; शरद विषुव (22-23 सितंबर): फिर से, दिन और रात लगभग बराबर होते हैं; सूर्य फिर से भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है; शीतकालीन संक्रांति/दक्षिण संक्रांति (21-22 दिसंबर): सूर्य अपनी सबसे दक्षिणी स्थिति पर होता है (मकर रेखा के ऊपर); उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन होता है; दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है; ग्रीष्म संक्रांति/उत्तर संक्रांति (20-21 जून): सूर्य अपनी सबसे उत्तरी स्थिति पर होता है (कर्क रेखा के ऊपर); उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है ← सही उत्तर; दक्षिणी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन होता है।
विकल्प (a) वसंत विषुव — गलत: वसंत विषुव (लगभग 21 मार्च) पर, दोनों गोलार्धों में दिन और रात लगभग बराबर होते हैं (प्रत्येक 12 घंटे) — यह सबसे लंबा दिन नहीं है; उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन ग्रीष्म संक्रांति (21 जून) होता है। अभ्यर्थी ने यह गलत विकल्प चुना।
विकल्प (b) शरद विषुव — गलत: शरद विषुव (लगभग 23 सितंबर) पर, दिन और रात फिर से लगभग बराबर होते हैं — यह उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन नहीं है; सबसे लंबा दिन ग्रीष्म संक्रांति होता है।
विकल्प (c) शीतकालीन संक्रांति (दक्षिण संक्रांति) — गलत: शीतकालीन संक्रांति (लगभग 22 दिसंबर) उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन (और सबसे लंबी रात) देती है — यह सबसे लंबे दिन के विपरीत है; उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन ग्रीष्म संक्रांति (21 जून) होता है।

Q15. दी गई जानकारी के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
"यह दिन में दो बार समुद्री जल का नियमित रूप से ऊपर उठना और गिरना है। इसका कारण सूर्य और चंद्रमा द्वारा पृथ्वी की सतह पर लगाया गया तीव्र गुरुत्वाकर्षण बल है।"

  1. (a) सुनामी
  2. (b) चक्रवात
  3. (c) ज्वार-भाटा
  4. (d) पश्चिमी विक्षोभ
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) ज्वार-भाटा

सही उत्तर: ज्वार-भाटा — विकल्प (c)
दी गई व्याख्या ज्वार-भाटा को पूरी तरह से परिभाषित करती है। ज्वार-भाटा के बारे में: परिभाषा: चंद्रमा और सूर्य द्वारा लगाए गए गुरुत्वाकर्षण बलों और पृथ्वी के घूर्णन के कारण समुद्री जल स्तर का आवधिक रूप से ऊपर उठना और गिरना; आवृत्ति: अर्द्ध-दैनिक ज्वार = दिन में दो बार ऊपर उठना और गिरना (लगभग हर 12 घंटे 25 मिनट पर); कारण: पृथ्वी के महासागरों पर चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव (प्राथमिक कारण — अधिक दूरी के बावजूद अधिक मजबूत प्रभाव) और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव (द्वितीयक कारण); चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव पृथ्वी के चंद्रमा की ओर वाले हिस्से (उच्च ज्वार) और विपरीत हिस्से (अपकेन्द्री प्रभाव के कारण) पर पानी का उभार बनाता है; जैसे-जैसे पृथ्वी घूमती है, विभिन्न क्षेत्र इन उभारों से गुजरते हैं, जिससे प्रतिदिन दो उच्च ज्वार और दो निम्न ज्वार आते हैं; ज्वार के प्रकार: वृहद ज्वार (Spring tides): जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं (अमावस्या या पूर्णिमा) — बहुत उच्च ज्वार; लघु ज्वार (Neap tides): जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के समकोण पर होते हैं — मध्यम ज्वार; दैनिक ज्वार (Diurnal tides): प्रति दिन एक उच्च ज्वार और एक निम्न ज्वार; अर्द्ध-दैनिक ज्वार (Semidiurnal tides): प्रति दिन दो उच्च ज्वार और दो निम्न ज्वार (सबसे आम — जैसा कि प्रश्न में वर्णित है); ज्वार का महत्व: नौवहन और शिपिंग; ज्वारीय ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा); मछली पकड़ने की गतिविधियाँ; प्रश्न में दिया गया विवरण ज्वार-भाटा से बिल्कुल मेल खाता है: 'दिन में दो बार ऊपर उठना और गिरना' = अर्द्ध-दैनिक ज्वार ✓; 'सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल' = ज्वार का कारण ✓।
विकल्प (a) सुनामी — गलत: सुनामी पानी के भीतर भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या भूस्खलन के कारण होने वाली समुद्री लहरों की एक श्रृंखला है — यह सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण नहीं होता है; सुनामी नियमित रूप से प्रतिदिन घटित नहीं होती है (ये अचानक आने वाली विनाशकारी घटनाएँ हैं); विवरण सुनामी से मेल नहीं खाता है। उम्मीदवार ने इस गलत विकल्प का चयन किया।
विकल्प (b) चक्रवात — गलत: चक्रवात एक बड़े पैमाने की मौसम प्रणाली है जिसकी विशेषता कम वायुमंडलीय दबाव और तेज घूमने वाली हवाएँ हैं — यह वायुमंडलीय दबाव में अंतर और कोरिओलिस प्रभाव के कारण होता है, न कि सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण; चक्रवात नियमित रूप से दिन में दो बार होने वाली घटनाएँ नहीं हैं।
विकल्प (d) पश्चिमी विक्षोभ — गलत: पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी घटना (अतिरिक्त-उष्णकटिबंधीय चक्रवात) है जो उत्तर-पश्चिमी भारत में गैर-मानसूनी शीतकालीन वर्षा लाती है — यह भूमध्य सागर से आने वाली नमी युक्त हवाओं के कारण होता है; इसका गुरुत्वाकर्षण बलों के कारण समुद्री जल के नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठने और गिरने से कोई संबंध नहीं है।

Economics (1)

Planning and NITI Aayog · Indian economy at independence and the 1950-90 phase

Q16. 1991 से पहले किस क्षेत्र को लाइसेंसिंग, कोटा और मूल्य नियंत्रण के माध्यम से भारी विनियमन का सामना करना पड़ा था?

  1. (a) कृषि
  2. (b) उपभोक्ता और लघु-स्तरीय उद्योग
  3. (c) भारी उद्योग
  4. (d) केवल बैंकिंग
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) भारी उद्योग

सही उत्तर: भारी उद्योग — विकल्प (c)
भारत में 1991 के उदारीकरण सुधारों से पहले भारी उद्योग को लाइसेंसिंग, कोटा और मूल्य नियंत्रण के माध्यम से भारी विनियमन का सामना करना पड़ा था। 1991 से पहले भारत के औद्योगिक विनियमन (लाइसेंस राज) के बारे में: 'लाइसेंस राज' प्रणाली ने 1947 से 1991 तक भारतीय उद्योग को नियंत्रित किया; प्रमुख कानून: उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम (IDRA), 1951; औद्योगिक नीति संकल्प, 1956; लाइसेंस राज के तहत: बड़े और भारी उद्योगों को उत्पादन स्थापित करने, विस्तार करने या बदलने के लिए सरकारी लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक था; सरकार ने उत्पादन कोटा और मूल्य नियंत्रण निर्धारित किए; इस्पात, सीमेंट, चीनी, पेट्रोलियम और पूंजीगत वस्तुओं जैसे भारी उद्योग सख्त विनियमन के अधीन थे; कई भारी उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थे; विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी आयात को कड़ाई से नियंत्रित किया गया था; उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम ने सरकार को अनुमति दी: लाइसेंस जारी करना (औद्योगिक लाइसेंस), उत्पादन क्षमता निर्धारित करना, कीमतों को नियंत्रित करना, वितरण को विनियमित करना; लघु-स्तरीय उद्योग: विडंबना यह है कि लघु-स्तरीय उद्योगों को वास्तव में संरक्षित किया गया था — बड़े पैमाने की प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए सैकड़ों उत्पादों को विशेष रूप से लघु-स्तरीय क्षेत्र के लिए आरक्षित किया गया था; प्रधान मंत्री नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के तहत 1991 के आर्थिक सुधारों ने लाइसेंस राज को समाप्त कर दिया: अधिकांश उद्योगों के लिए औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त कर दी गई; विदेशी निवेश को उदार बनाया गया; सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार कम किए गए; अधिकांश क्षेत्रों में मूल्य नियंत्रण हटा दिए गए।
विकल्प (a) कृषि — गलत: कृषि को भारी उद्योग की तरह औद्योगिक लाइसेंसिंग, कोटा और मूल्य नियंत्रण के माध्यम से भारी रूप से विनियमित नहीं किया गया था; कृषि क्षेत्र विभिन्न नीतियों द्वारा शासित था; लाइसेंस राज ने मुख्य रूप से औद्योगिक उत्पादन को प्रभावित किया, न कि खेती को।
विकल्प (b) उपभोक्ता और लघु-स्तरीय उद्योग — गलत: लघु-स्तरीय उद्योगों को वास्तव में 1991 से पहले संरक्षित किया गया था (केवल विनियमित नहीं) — सैकड़ों वस्तुएं विशेष रूप से लघु-स्तरीय उत्पादन के लिए आरक्षित थीं; भारी लाइसेंसिंग का बोझ मुख्य रूप से बड़े/भारी उद्योगों पर पड़ा था; उम्मीदवार ने इस गलत विकल्प का चयन किया।
विकल्प (d) केवल बैंकिंग — गलत: जबकि बैंकिंग क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण किया गया था (1969 में 14 प्रमुख बैंक, 1980 में 6 और) और विनियमित किया गया था, 'लाइसेंसिंग, कोटा और मूल्य नियंत्रण' का विवरण विशेष रूप से औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली को संदर्भित करता है जिसने मुख्य रूप से भारी उद्योग को प्रभावित किया; बैंकिंग विनियमन औद्योगिक कोटा से अलग है।

Modern History (1)

Post-Independence India · Economic and social milestones

Q17. डेक्कन एयरवेज का राष्ट्रीयकरण किस वर्ष किया गया था?

  1. (a) 1949
  2. (b) 1951
  3. (c) 1955
  4. (d) 1953
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) 1953

सही उत्तर: 1953 — विकल्प (d)
डेक्कन एयरवेज का राष्ट्रीयकरण 1953 में हुआ था, जब भारत सरकार ने सभी निजी एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। भारतीय विमानन के राष्ट्रीयकरण (1953) के बारे में: भारतीय संसद द्वारा वायु निगम अधिनियम, 1953 अधिनियमित किया गया था; इस अधिनियम के तहत, भारत में संचालित सभी निजी एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण किया गया; दो सार्वजनिक क्षेत्र के निगम बनाए गए: इंडियन एयरलाइंस कॉर्पोरेशन: घरेलू मार्गों के लिए; एयर इंडिया इंटरनेशनल: अंतर्राष्ट्रीय मार्गों के लिए; इंडियन एयरलाइंस में विलय की गई निजी एयरलाइंस में शामिल थे: डेक्कन एयरवेज, एयर सर्विसेज ऑफ इंडिया, हिमालयन एविएशन, भारत एयरवेज, एयरवेज इंडिया, ओरिएंट एयरवेज, इंडियन नेशनल एयरवेज, एयर इंडिया (टाटा संस की एयरलाइन — जे.आर.डी. टाटा की), कलिंगा एयरलाइंस; राष्ट्रीयकरण क्यों किया गया: खंडित विमानन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए; बेहतर समन्वय और सुरक्षा मानक प्रदान करने के लिए; नव स्वतंत्र राष्ट्र के लिए हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए; डेक्कन एयरवेज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: डेक्कन एयरवेज की स्थापना 1945 में हैदराबाद (तत्कालीन हैदराबाद राज्य) में हुई थी; यह भारत की शुरुआती वाणिज्यिक एयरलाइंस में से एक थी; 1953 में राष्ट्रीयकरण के बाद, इसे इंडियन एयरलाइंस कॉर्पोरेशन में विलय कर दिया गया; भारतीय विमानन में महत्वपूर्ण तिथियाँ: 1932: भारत में पहली वाणिज्यिक एयरलाइन — टाटा एयरलाइंस (जे.आर.डी. टाटा ने पहली उड़ान भरी); 1946: टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया; 1953: सभी निजी एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण किया गया; 2007: एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का एयर इंडिया में विलय हो गया।
विकल्प (a) 1949 — गलत: 1949 भारत में विमानन के राष्ट्रीयकरण का वर्ष नहीं था; डेक्कन एयरवेज सहित सभी निजी एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण 1953 में वायु निगम अधिनियम, 1953 के तहत हुआ था।
विकल्प (b) 1951 — गलत: 1951 वह वर्ष नहीं था जब डेक्कन एयरवेज का राष्ट्रीयकरण हुआ था; वह वायु निगम अधिनियम जिसने सभी निजी एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण किया, 1953 में पारित किया गया था।
विकल्प (c) 1955 — गलत: डेक्कन एयरवेज सहित भारतीय निजी एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण 1953 में हुआ था — न कि 1955 में; वायु निगम अधिनियम, 1953 ने सभी निजी एयरलाइंस को सरकारी नियंत्रण में ला दिया था।

Medieval History (1)

Bhakti, Sufi and Sikh Movements · Sikh Gurus and Sikhism

Q18. करतारपुर किस नदी के पास स्थित है?

  1. (a) गंगा
  2. (b) रावी
  3. (c) यमुना
  4. (d) सतलुज
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) रावी

सही उत्तर: रावी — विकल्प (b)
करतारपुर रावी नदी के तट पर स्थित है। करतारपुर के बारे में: स्थान: करतारपुर साहिब नरोवाल जिले, पंजाब प्रांत, पाकिस्तान में स्थित है; यह रावी नदी (रवी नदी) के दाहिने किनारे पर स्थित है; महत्व: करतारपुर वह स्थान है जहाँ गुरु नानक देव जी (सिख धर्म के संस्थापक) बस गए थे और अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष (1521-1539) बिताए थे; उन्होंने यहाँ 'करतारपुर साहिब' (अर्थ 'ईश्वर का शहर' या 'भगवान का शहर') नामक एक समुदाय की स्थापना की; गुरु नानक देव जी का 1539 में करतारपुर में निधन हो गया; गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर: करतारपुर में मुख्य सिख तीर्थस्थल; पाकिस्तान में स्थित, भारत-पाकिस्तान सीमा से लगभग 4 किमी दूर; करतारपुर कॉरिडोर के बारे में: करतारपुर कॉरिडोर एक वीजा-मुक्त सीमा पारगमन है जिसका उद्घाटन नवंबर 2019 में किया गया था; यह डेरा बाबा नानक तीर्थ (गुरदासपुर जिले, पंजाब, भारत में) को गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर (पाकिस्तान में) से जोड़ता है; भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को बिना वीजा के करतारपुर साहिब जाने की अनुमति देता है; दूरी: लगभग 4.7 किमी लंबा कॉरिडोर; रावी नदी के बारे में: पंजाब की पाँच नदियों में से एक (पंज-आब = पाँच जल); हिमालय (कुल्लू जिला, हिमाचल प्रदेश, भारत) में उद्गमित होती है; पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले जम्मू और कश्मीर और पंजाब (भारत) से होकर बहती है; कुल लंबाई: ~720 किमी; चिनाब नदी (जो सिंधु में मिलती है) की एक सहायक नदी।
विकल्प (a) गंगा — गलत: करतारपुर गंगा नदी के पास नहीं है — गंगा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर बहती है, जो पाकिस्तान के पंजाब में करतारपुर से बहुत दूर है; करतारपुर रावी नदी के तट पर स्थित है।
विकल्प (c) यमुना — गलत: यमुना नदी उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से होकर बहती है — यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में करतारपुर के पास से नहीं बहती है; करतारपुर रावी नदी पर है।
विकल्प (d) सतलुज — गलत: जबकि सतलुज पंजाब की पाँच नदियों में से एक है (रावी की तरह), करतारपुर विशेष रूप से रावी नदी के तट पर स्थित है — सतलुज पर नहीं; उम्मीदवार ने यह गलत विकल्प चुना।

Current Affairs (1)

Science, Technology and Space - Current · Technology launches and AI

Q19. दिसंबर 2024 में ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर (CIFA) द्वारा कौन सा ऐप विकसित किया गया था?

  1. (a) मत्स्य मित्र
  2. (b) जल संवर्धन
  3. (c) रंगीन मछली
  4. (d) एक्वा सुरक्षा
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) रंगीन मछली

सही उत्तर: रंगीन मछली — विकल्प (c)
'रंगीन मछली' ऐप ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर (CIFA) द्वारा दिसंबर 2024 में विकसित किया गया था। रंगीन मछली ऐप के बारे में: द्वारा विकसित: ICAR-CIFA (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद — केंद्रीय मीठाजल मत्स्यपालन संस्थान); विकास तिथि: दिसंबर 2024; ICAR-CIFA का मुख्यालय: भुवनेश्वर, ओडिशा; उद्देश्य: 'रंगीन मछली' (अर्थ 'रंग-बिरंगी मछली') ऐप सजावटी मत्स्यपालन/एक्वाकल्चर का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है; यह मछली किसानों, शौकीनों और एक्वाकल्चर उत्साही लोगों की मदद करता है: सजावटी (रंग-बिरंगी) मछली प्रजातियों की पहचान करें; सजावटी मछली के प्रजनन और खेती पर जानकारी प्राप्त करें; सजावटी मछली के लिए बाजार की जानकारी प्राप्त करें; भारत में बढ़ते सजावटी मछली व्यापार का समर्थन करें; भारत में सजावटी मत्स्यपालन के बारे में: भारत में एक बढ़ता हुआ सजावटी मछली उद्योग है; भारत में 400 से अधिक प्रजातियों की मीठे पानी की सजावटी मछली उपलब्ध हैं; प्रमुख उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक; सजावटी मछली एक्वैरियम और जल सजावट में लोकप्रिय हैं; ICAR-CIFA के बारे में: स्थापित: 1987; स्थान: भुवनेश्वर, ओडिशा; फोकस: मीठे पानी के एक्वाकल्चर पर अनुसंधान — मछली प्रजनन, रोग प्रबंधन, पोषण, आनुवंशिकी; मछली किसानों के उत्पादन और आजीविका में सुधार के लिए मछली पालन प्रौद्योगिकियों का विकास करता है।
विकल्प (a) मत्स्य मित्र — गलत: 'मत्स्य मित्र' मत्स्यपालन क्षेत्र में एक अलग पहल/ऐप है — यह दिसंबर 2024 में ICAR-CIFA द्वारा विकसित ऐप नहीं था; रंगीन मछली ऐप ICAR-CIFA के दिसंबर 2024 के विकास के लिए सही उत्तर है। उम्मीदवार ने यह गलत विकल्प चुना।
विकल्प (b) जल संवर्धन — गलत: 'जल संवर्धन' (Water Conservation) दिसंबर 2024 में ICAR-CIFA द्वारा सजावटी मत्स्यपालन के लिए विकसित ऐप नहीं है; सही ऐप 'रंगीन मछली' (Colourful Fish) है।
विकल्प (d) एक्वा सुरक्षा — गलत: 'एक्वा सुरक्षा' दिसंबर 2024 में ICAR-CIFA द्वारा विकसित ऐप नहीं था; संस्थान ने 'रंगीन मछली' — विशेष रूप से सजावटी (रंग-बिरंगी) मछली की पहचान और एक्वाकल्चर के लिए एक ऐप विकसित किया।
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