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SSC GD 2026 28 अप्रैल 2026 शिफ्ट 3 – GK प्रश्न – उत्तर व व्याख्या सहित

SSC GD 2026 (28 अप्रैल 2026 शिफ्ट 3) में पूछे गए सभी 18 GK / सामान्य अध्ययन प्रश्न, सही उत्तर और व्याख्या के साथ – विषयवार।

📚 18 प्रश्न🗓️ 28 अप्रैल 2026⏰ शिफ्ट 3
English📥 पूरा पेपर PDF
विषय: Polity (3) · Static GK (4) · Physics (1) · Geography (2) · Economics (4) · Current Affairs (2) · Medieval History (1) · Modern History (1)

Polity (3)

Emergency and Centre-State Relations · President's Rule (Article 356)

Q1. राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने का अधिकार किसे है?

  1. (a) मुख्यमंत्री
  2. (b) राज्यपाल
  3. (c) प्रधानमंत्री
  4. (d) उच्चतम न्यायालय
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) राज्यपाल

सही उत्तर: राज्यपाल — विकल्प (b)
भारत के संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत, किसी राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन (राज्य आपातकाल) की सिफारिश करने का अधिकार है। जब राज्यपाल राष्ट्रपति को यह रिपोर्ट करता है कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 356 के तहत आपातकाल की उद्घोषणा जारी कर सकते हैं। राज्यपाल की रिपोर्ट राष्ट्रपति शासन (जिसे राज्यपाल शासन या संवैधानिक आपातकाल भी कहा जाता है) लगाने का मुख्य कारण होती है। हालांकि, राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर कार्य करता है। 44वें संवैधानिक संशोधन (1978) ने एक सुरक्षा उपाय जोड़ा कि राष्ट्रपति केवल राज्यपाल की लिखित रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है। 38वें संशोधन (1975) ने राष्ट्रपति की संतुष्टि को अंतिम और गैर-न्यायोचित बना दिया था, लेकिन इसे 44वें संशोधन द्वारा उलट दिया गया।
विकल्प (a) मुख्यमंत्री — गलत: मुख्यमंत्री राज्य सरकार का मुखिया होता है और उसके पास अपनी ही सरकार के खिलाफ राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने का कोई कारण नहीं होगा; सिफारिश राज्यपाल द्वारा की जाती है।
विकल्प (c) प्रधानमंत्री — गलत: जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल (प्रधानमंत्री के नेतृत्व में) राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन लगाने की सलाह देता है, यह अनुच्छेद 356 के तहत राज्यपाल की रिपोर्ट होती है जो राज्य स्तर पर इस कार्रवाई की सिफारिश करती है और इसे शुरू करती है।
विकल्प (d) उच्चतम न्यायालय — गलत: उच्चतम न्यायालय सर्वोच्च न्यायिक निकाय है; उसके पास किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने की संवैधानिक भूमिका नहीं है — यह राज्यपाल का संवैधानिक कार्य है।
State Government · Chief Minister and State Council of Ministers

Q2. जब राज्य विधानसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो, तो मुख्यमंत्री की नियुक्ति का अधिकार किसे है?

  1. (a) राष्ट्रपति
  2. (b) विधानसभा अध्यक्ष
  3. (c) प्रधानमंत्री
  4. (d) राज्यपाल
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) राज्यपाल

सही उत्तर: राज्यपाल — विकल्प (d)
जब राज्य विधानसभा में किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता है ('त्रिशंकु विधानसभा' की स्थिति), तो राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति के लिए विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करता है। ऐसी स्थितियों में, राज्यपाल: सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करता है; या सबसे अधिक सीटों वाले चुनाव-पूर्व गठबंधन के नेता को आमंत्रित करता है; या ऐसे किसी भी व्यक्ति को आमंत्रित करता है जो सदन के पटल पर बहुमत साबित करने की क्षमता प्रदर्शित कर सके। राज्यपाल नियुक्त मुख्यमंत्री से विधानसभा में फ्लोर टेस्ट (विश्वास मत) जीतकर एक निर्धारित समय के भीतर बहुमत साबित करने के लिए कहता है। राज्यपाल की यह विवेकाधीन शक्ति संवैधानिक परंपरा द्वारा शासित होती है और यह कई उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का विषय रही है। बोम्मई मामला (1994) और बाद के निर्णयों ने ऐसे मामलों में राज्यपाल के विवेक की सीमाओं को परिभाषित करने का प्रयास किया है।
विकल्प (a) राष्ट्रपति — गलत: राष्ट्रपति केंद्र में स्पष्ट बहुमत न होने की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है, लेकिन राज्य स्तर पर, मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है; राज्य-स्तरीय सरकार गठन में राष्ट्रपति की कोई सीधी भूमिका नहीं होती है।
विकल्प (b) विधानसभा अध्यक्ष — गलत: विधानसभा अध्यक्ष सदस्यों द्वारा चुना जाता है और विधायी कार्यवाही की अध्यक्षता करता है; अध्यक्ष के पास मुख्यमंत्री की नियुक्ति करने की संवैधानिक शक्ति नहीं होती है।
विकल्प (c) प्रधानमंत्री — गलत: प्रधानमंत्री केंद्र सरकार का प्रमुख होता है और उसके पास राज्य-स्तरीय मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं होता है; राज्य सरकार का गठन राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आता है।
Union Executive · Lists of Presidents, Vice-Presidents and Prime Ministers

Q3. अटल बिहारी वाजपेयी किस वर्ष पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने थे?

  1. (a) 1990
  2. (b) 1992
  3. (c) 1994
  4. (d) 1996
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) 1996

सही उत्तर: 1996 — विकल्प (d)
अटल बिहारी वाजपेयी 16 मई, 1996 को पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने, जब अप्रैल-मई 1996 में हुए 11वें आम चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। हालाँकि, उनका पहला कार्यकाल बहुत संक्षिप्त था — उन्होंने केवल 13 दिनों (16-28 मई, 1996) तक सेवा की क्योंकि वे लोकसभा में बहुमत साबित करने में असमर्थ रहे और विश्वास मत का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया। वह फिर से प्रधान मंत्री बने: दूसरा कार्यकाल: 19 मार्च, 1998 से 26 अप्रैल, 1999 तक (एआईएडीएमके द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद 13 महीने में सरकार गिर गई); तीसरा कार्यकाल: 13 अक्टूबर, 1999 से 22 मई, 2004 तक — उनका सबसे लंबा और सबसे उल्लेखनीय कार्यकाल, जिसके दौरान उन्होंने एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) गठबंधन का नेतृत्व किया। अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कारगिल युद्ध (1999), पोखरण परमाणु परीक्षण (हालांकि यह मई 1998 में हुआ था), और आर्थिक सुधारों सहित प्रमुख घटनाओं की देखरेख की।
विकल्प (a) 1990 — गलत: 1990 में, अटल बिहारी वाजपेयी एक विपक्षी नेता थे (वह 1977 में विदेश मंत्री के रूप में 6 दिनों के लिए पीएम रह चुके थे... नहीं, वह 1977 में कभी पीएम नहीं थे। वह पहली बार 1996 में पीएम बने थे); वह 1990 में पीएम नहीं बने।
विकल्प (b) 1992 — गलत: अटल बिहारी वाजपेयी 1992 में प्रधान मंत्री नहीं बने थे; 1992 में, पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और आर्थिक उदारीकरण लागू कर रही थी।
विकल्प (c) 1994 — गलत: वाजपेयी 1994 में प्रधान मंत्री नहीं बने थे; वह पहली बार मई 1996 में 11वें आम चुनाव के बाद पीएम बने। 1994 में, पी.वी. नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार अभी भी सत्ता में थी।

Static GK (4)

Music and Musical Instruments · Indian classical music - overview and traditions

Q4. ऐतिहासिक अवलोकन के अनुसार, भारतीय संगीत के इतिहास का अध्ययन करने के लिए सबसे पहले किन तत्वों को समझना आवश्यक है?

  1. (a) मानव सभ्यता और भाषा
  2. (b) मानव विकास और तकनीकी कौशल
  3. (c) मानव उत्पत्ति और ध्वनि (dhwani), स्वर (swara) तथा लय (laya) जैसे तत्व
  4. (d) संगीत वाद्ययंत्रों और नृत्य का विकास
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) मानव उत्पत्ति और ध्वनि (dhwani), स्वर (swara) तथा लय (laya) जैसे तत्व

सही उत्तर: मानव उत्पत्ति और ध्वनि (dhwani), स्वर (swara) तथा लय (laya) जैसे तत्व — विकल्प (c)
ऐतिहासिक और संगीतशास्त्रीय अवलोकनों के अनुसार, भारतीय संगीत के इतिहास का अध्ययन करने के लिए, सबसे पहले मानव उत्पत्ति और संगीत के मूलभूत तत्वों — विशेष रूप से ध्वनि (dhwani), स्वर (swara), और लय (laya) को समझना चाहिए। भारतीय शास्त्रीय संगीत सिद्धांत मानता है कि संगीत की उत्पत्ति मानव की ध्वनि उत्पन्न करने और उस पर प्रतिक्रिया करने की प्राकृतिक क्षमता से हुई है। नाट्यशास्त्र (भरतमुनि द्वारा) और संगीत रत्नाकर जैसे प्राचीन ग्रंथ संगीत की उत्पत्ति को जीवित प्राणियों द्वारा उत्पन्न प्राकृतिक ध्वनियों से जोड़ते हैं। ध्वनि (आवाज/कंपन), स्वर (संगीत नोट/पिच), और लय (ताल/गति) — ये तीन मूलभूत तत्व आधारभूत निर्माण खंड बनाते हैं जिन पर भारतीय संगीत सिद्धांत और अभ्यास का पूरा ढाँचा निर्मित है। इन आदिकालीन तत्वों को समझे बिना, भारतीय संगीत के ऐतिहासिक विकास का अध्ययन अधूरा है।
विकल्प (a) मानव सभ्यता और भाषा — गलत: जबकि सभ्यता और भाषा व्यापक रूप से सांस्कृतिक विकास से संबंधित हैं, भारतीय संगीत के इतिहास का अध्ययन करने के लिए विशिष्ट मूलभूत तत्व ध्वनि, स्वर और लय के संगीत संबंधी तत्व हैं — न कि भाषा अपने आप में।
विकल्प (b) मानव विकास और तकनीकी कौशल — गलत: तकनीकी कौशल संगीत वाद्ययंत्रों और प्रदर्शन तकनीकों के बाद के विकास के लिए अधिक प्रासंगिक हैं; भारतीय संगीत इतिहास का अध्ययन करने के लिए मूलभूत समझ मानव उत्पत्ति और ध्वनि, स्वर तथा लय के बुनियादी संगीत संबंधी तत्वों से शुरू होती है।
विकल्प (d) संगीत वाद्ययंत्रों और नृत्य का विकास — गलत: संगीत वाद्ययंत्र और नृत्य संगीत के विकास के उत्पाद हैं; वे ध्वनि, स्वर और लय के मूलभूत तत्वों को समझने के बाद आते हैं — ये अध्ययन में बाद में आते हैं, पहले नहीं।
Books and Authors · International books and authors

Q5. "The Other Side of Midnight" का सीक्वल कौन सी पुस्तक है?

  1. (a) Memories of Midnight
  2. (b) Master of the Game
  3. (c) Morning, Noon and Night
  4. (d) Bloodline
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) Memories of Midnight

सही उत्तर: Memories of Midnight — विकल्प (a)
सिडनी शेल्डन द्वारा लिखित 'मेमोरीज ऑफ मिडनाइट' (1990) 'द अदर साइड ऑफ मिडनाइट' (1973) का सीधा सीक्वल है। दोनों उपन्यासों में कैथरीन डगलस का चरित्र है। 'द अदर साइड ऑफ मिडनाइट' नोएल पेज नामक एक फ्रांसीसी लड़की की कहानी है जो एक फिल्म स्टार बन जाती है, और एक अमेरिकी पायलट लैरी डगलस के प्रति उसके जुनूनी प्रेम की कहानी है, साथ ही कैथरीन अलेक्जेंडर भी लैरी से प्यार करती है। 'मेमोरीज ऑफ मिडनाइट' पहली पुस्तक की घटनाओं के बाद कैथरीन डगलस की कहानी को आगे बढ़ाती है। सिडनी शेल्डन एक अत्यधिक लोकप्रिय अमेरिकी लेखक थे जो अपने तेज-तर्रार, कथानक-आधारित थ्रिलर और रोमांटिक सस्पेंस उपन्यासों के लिए जाने जाते थे। उनके अन्य प्रसिद्ध कार्यों में 'मास्टर ऑफ द गेम', 'रेज ऑफ एंजल्स', 'ब्लडलाइन', 'इफ टुमॉरो कम्स' और 'मॉर्निंग, नून एंड नाइट' शामिल हैं।
विकल्प (b) मास्टर ऑफ द गेम — गलत: सिडनी शेल्डन द्वारा लिखित 'मास्टर ऑफ द गेम' (1982) धनी मैकग्रेगर परिवार और दक्षिण अफ्रीका में उनके हीरे खनन साम्राज्य के बारे में एक स्वतंत्र उपन्यास है; यह 'द अदर साइड ऑफ मिडनाइट' का सीक्वल नहीं है।
विकल्प (c) मॉर्निंग, नून एंड नाइट — गलत: सिडनी शेल्डन द्वारा लिखित 'मॉर्निंग, नून एंड नाइट' (1995) एक अरबपति के तीन बच्चों और उसकी मृत्यु के रहस्य के बारे में एक स्वतंत्र थ्रिलर है; यह 'द अदर साइड ऑफ मिडनाइट' से जुड़ा नहीं है।
विकल्प (d) ब्लडलाइन — गलत: सिडनी शेल्डन द्वारा लिखित 'ब्लडलाइन' (1977) फार्मास्युटिकल उद्योग और कॉर्पोरेट साज़िश के बारे में एक स्वतंत्र थ्रिलर है; यह 'द अदर साइड ऑफ मिडनाइट' का सीक्वल नहीं है।
Sports · Sports bodies and headquarters

Q6. विश्व तीरंदाजी को किस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा तीरंदाजी के लिए अंतर्राष्ट्रीय शासी निकाय के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई थी?

  1. (a) 1932
  2. (b) 1972
  3. (c) 1980
  4. (d) 1992
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) 1972

सही उत्तर: 1972 — विकल्प (b)
वर्ल्ड आर्चरी (जिसे पहले FITA — फेडरेशन इंटरनेशनेल डी तिर ए ल'आर्क के नाम से जाना जाता था) को 1972 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा तीरंदाजी के खेल के लिए अंतर्राष्ट्रीय शासी निकाय के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई थी। FITA मूल रूप से 1931 में पोलैंड में सात सदस्य देशों द्वारा स्थापित किया गया था। तीरंदाजी का एक दिलचस्प ओलंपिक इतिहास रहा है: इसे पहली बार 1900 (पेरिस) में ओलंपिक में शामिल किया गया था, फिर यह 1904, 1908 और 1920 में दिखाई दिया, जिसके बाद इसे हटा दिया गया; इसे 1972 में FITA को IOC की आधिकारिक मान्यता के बाद 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में फिर से शामिल किया गया; 1972 से, तीरंदाजी एक नियमित ओलंपिक खेल रहा है। अधिक सुलभ और आधुनिक छवि को दर्शाने के लिए FITA का नाम 2011 में बदलकर वर्ल्ड आर्चरी कर दिया गया था। 1972 में IOC की आधिकारिक मान्यता खेल की ओलंपिक में वापसी के लिए महत्वपूर्ण थी।
विकल्प (a) 1932 — गलत: 1932 में, तीरंदाजी ओलंपिक में शामिल नहीं थी और FITA को अभी तक IOC की मान्यता नहीं मिली थी; संगठन की स्थापना 1931 में हुई थी, लेकिन इसे 1972 में IOC की मान्यता मिली।
विकल्प (c) 1980 — गलत: वर्ल्ड आर्चरी को 1972 में IOC की मान्यता मिली थी, न कि 1980 में; इस मान्यता के बाद तीरंदाजी 1972 के म्यूनिख खेलों में पहले ही ओलंपिक में लौट चुकी थी।
विकल्प (d) 1992 — गलत: 1992 (बार्सिलोना ओलंपिक) तक, तीरंदाजी एक ओलंपिक खेल के रूप में अच्छी तरह से स्थापित हो चुकी थी, जिसे 1972 में IOC द्वारा मान्यता दी गई थी और उसी वर्ष से ओलंपिक में शामिल किया गया था।
Space, Defence and Technology · Launch vehicles and satellites

Q7. किस भारतीय रॉकेट को 'फैट बॉय' कहा जाता है?

  1. (a) PSLV
  2. (b) GSLV MK III
  3. (c) SSLV
  4. (d) ASLV
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) GSLV MK III

सही उत्तर: GSLV MK III — विकल्प (b)
GSLV MK III (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III), जिसे अब आधिकारिक तौर पर LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) नाम दिया गया है, को अन्य भारतीय रॉकेटों की तुलना में इसके बड़े, चौड़े और भारी स्वरूप के कारण 'फैट बॉय' उपनाम दिया गया है। GSLV MK III की प्रमुख विशेषताएं: यह भारत का सबसे भारी और सबसे शक्तिशाली परिचालन रॉकेट है; ऊंचाई: 43.5 मीटर; लिफ्टऑफ द्रव्यमान: 640 टन; यह भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO) में 4,000 किलोग्राम तक और निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 10,000 किलोग्राम तक के पेलोड ले जा सकता है; यह स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (CE-20) का उपयोग करता है जिससे भारत क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बना है; उल्लेखनीय मिशन: चंद्रयान-2 (2019), वनवेब तारामंडल उपग्रह, चंद्रयान-3 (2023)। GSLV MK III को भारत के आगामी गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के लिए भी चुना गया था।
विकल्प (a) PSLV — गलत: PSLV (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) भारत का सबसे विश्वसनीय और कर्मठ रॉकेट है, जो अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाना जाता है; इसे 'फैट बॉय' नहीं कहा जाता है — GSLV MK III को इसके भारी स्वरूप के कारण यह उपनाम मिला है।
विकल्प (c) SSLV — गलत: SSLV (स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) भारत का सबसे नया और सबसे छोटा कक्षीय रॉकेट है जिसे छोटे उपग्रहों को जल्दी और लागत प्रभावी ढंग से लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है; इसे 'फैट बॉय' नहीं कहा जाता है।
विकल्प (d) ASLV — गलत: ASLV (ऑगमेंटेड सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) एक प्रारंभिक ISRO रॉकेट था जिसे 1994 में सेवानिवृत्त कर दिया गया था; इसे 'फैट बॉय' नहीं कहा जाता था — यह उपनाम GSLV MK III का है।

Physics (1)

Gravitation · Universal law of gravitation and G

Q8. यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी छह गुना बढ़ जाती है, तो गुरुत्वाकर्षण बल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

  1. (a) 36 गुना अधिक हो जाता है
  2. (b) 6 गुना अधिक हो जाता है
  3. (c) 36 गुना कम हो जाता है
  4. (d) 1/6 गुना कम हो जाता है
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) 36 गुना कम हो जाता है

सही उत्तर: 36 गुना कम हो जाता है — विकल्प (c)
न्यूटन के सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार: F = Gm₁m₂/r², जहाँ F गुरुत्वाकर्षण बल है, G गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है, m₁ और m₂ दो वस्तुओं के द्रव्यमान हैं, और r उनके बीच की दूरी है। गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है (F ∝ 1/r²)। यदि दूरी 6 गुना बढ़ जाती है (r, 6r हो जाता है), तो: नया बल = Gm₁m₂/(6r)² = Gm₁m₂/36r² = F/36। तो गुरुत्वाकर्षण बल मूल बल का 1/36वाँ हो जाता है, अर्थात 36 गुना कम हो जाता है। यह व्युत्क्रम वर्ग का नियम है — दूरी को दोगुना करने पर बल 1/4 हो जाता है, तीन गुना करने पर 1/9 हो जाता है, और 6 गुना बढ़ाने पर 1/36 हो जाता है।
विकल्प (a) 36 गुना अधिक हो जाता है — गलत: यदि दूरी बढ़ती है, तो व्युत्क्रम वर्ग संबंध के कारण गुरुत्वाकर्षण बल घटता है (बढ़ता नहीं); दूरी को 6 गुना बढ़ाने पर बल 36 गुना कम हो जाता है, न कि अधिक।
विकल्प (b) 6 गुना अधिक हो जाता है — गलत: यह तभी सच होता जब बल दूरी के सीधे आनुपातिक होता, जो कि ऐसा नहीं है; गुरुत्वाकर्षण एक व्युत्क्रम वर्ग नियम (F ∝ 1/r²) का पालन करता है, इसलिए दूरी बढ़ाने से बल कम हो जाता है।
विकल्प (d) 1/6 गुना कम हो जाता है — गलत: यह तब परिणाम होता जब बल दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता (F ∝ 1/r), न कि दूरी के वर्ग के; चूंकि गुरुत्वाकर्षण व्युत्क्रम वर्ग नियम का पालन करता है, इसलिए बल मूल का 1/36 (1/6 नहीं) हो जाता है।

Geography (2)

India - Location, Physiography and Neighbours · Peninsular plateau and hills

Q9. मालवा का पठार मुख्य रूप से किस राज्य में स्थित है?

  1. (a) मध्य प्रदेश
  2. (b) महाराष्ट्र
  3. (c) राजस्थान
  4. (d) गुजरात
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) मध्य प्रदेश

सही उत्तर: मध्य प्रदेश — विकल्प (a)
मालवा का पठार मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में स्थित है, जो राज्य के पश्चिमी और मध्य भागों के एक बड़े हिस्से को कवर करता है। यह ज्वालामुखीय लावा (दक्कन ट्रैप) से निर्मित एक भूवैज्ञानिक रूप से प्राचीन पठार है और इसकी विशेषता काली कपास मृदा (रेगुर) है, जो उपजाऊ और कृषि के लिए उपयुक्त है। मालवा के पठार की प्रमुख विशेषताएँ: यह दक्षिण में विंध्य श्रेणी और उत्तर-पश्चिम में अरावली श्रेणी के बीच स्थित है; यहाँ से निकलने वाली प्रमुख नदियाँ चंबल, बेतवा और काली सिंध हैं; यह पठार राजस्थान और गुजरात में थोड़ा फैला हुआ है, लेकिन यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में है; पठार पर स्थित महत्वपूर्ण शहर इंदौर, उज्जैन, भोपाल और ग्वालियर हैं। मालवा क्षेत्र का भारतीय इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं की पृष्ठभूमि के रूप में ऐतिहासिक महत्व है, जिसमें मौर्य, गुप्त और मुगल काल शामिल हैं।
विकल्प (b) महाराष्ट्र — गलत: महाराष्ट्र का अपना पठारी क्षेत्र (दक्कन का पठार) है, लेकिन मालवा का पठार मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में है, न कि महाराष्ट्र में।
विकल्प (c) राजस्थान — गलत: यद्यपि मालवा का पठार दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में थोड़ा फैला हुआ है, लेकिन यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में स्थित है; राजस्थान का संबंध अरावली पर्वतमाला और थार रेगिस्तान से अधिक है।
विकल्प (d) गुजरात — गलत: गुजरात मालवा पठार क्षेत्र से सटा हुआ है, लेकिन यह वह राज्य नहीं है जहाँ पठार मुख्य रूप से स्थित है; मालवा का पठार मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में है।
India - Minerals, Energy and Industries · Coal, petroleum and natural gas fields

Q10. भारत में पहली तेल रिफाइनरी कहाँ स्थापित की गई थी?

  1. (a) हल्दिया
  2. (b) कोयली
  3. (c) बरौनी
  4. (d) डिगबोई
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) डिगबोई

सही उत्तर: डिगबोई — विकल्प (d)
भारत की पहली तेल रिफाइनरी 1901 में असम के डिगबोई में स्थापित की गई थी, जिससे यह दुनिया की सबसे पुरानी कार्यरत तेल रिफाइनरियों में से एक बन गई। डिगबोई के बारे में मुख्य तथ्य: डिगबोई में सबसे पहले तेल की खोज 1889 में हुई थी, जिससे यह भारत की पहली तेल खोज बन गई; डिगबोई रिफाइनरी असम ऑयल कंपनी द्वारा स्थापित की गई थी (जो बाद में इंडियन ऑयल की डिगबोई रिफाइनरी बन गई); यह भारत के पूर्वोत्तर भाग में असम के तिनसुकिया जिले में स्थित है; रिफाइनरी की प्रसंस्करण क्षमता कम लेकिन ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है; डिगबोई तेल क्षेत्र को दुनिया के सबसे पुराने उत्पादक तेल क्षेत्रों में से एक माना जाता है जो अभी भी संचालन में है; 'डिगबोई' नाम ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा तेल अन्वेषण के दौरान श्रमिकों को दिए गए निर्देश 'डिग, बॉय!' से आया माना जाता है। भारत की बाद की प्रमुख रिफाइनरियां ट्रॉम्बे/मुंबई (1954), विशाखापत्तनम (1957), कोयली (1965), बरौनी (1964) और हल्दिया (1975) में स्थापित की गईं।
विकल्प (a) हल्दिया — गलत: पश्चिम बंगाल में हल्दिया रिफाइनरी 1975 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के विस्तार के रूप में स्थापित की गई थी; यह भारत की पहली तेल रिफाइनरी नहीं थी — यह विशिष्टता डिगबोई (1901) के पास है।
विकल्प (b) कोयली — गलत: कोयली (गुजरात) रिफाइनरी (अब आईओसीएल की वडोदरा रिफाइनरी) 1965 में स्थापित की गई थी; यह एक प्रमुख रिफाइनरी है लेकिन भारत में पहली नहीं — असम में डिगबोई 1901 में स्थापित की गई थी।
विकल्प (c) बरौनी — गलत: बिहार में बरौनी रिफाइनरी 1964 में सोवियत सहायता से दूसरी पंचवर्षीय योजना के हिस्से के रूप में स्थापित की गई थी; यह भारत की तीसरी प्रमुख रिफाइनरी थी लेकिन पहली नहीं — पहली असम के डिगबोई (1901) में थी।

Economics (4)

Government Schemes and Economic Reports · Global indices - publishers and methodology

Q11. ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स किस संगठन द्वारा प्रकाशित किया जाता है?

  1. (a) इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट
  2. (b) विश्व बैंक
  3. (c) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम
  4. (d) विश्व आर्थिक मंच
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट

सही उत्तर: इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट — विकल्प (a)
ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स द इकोनॉमिस्ट ग्रुप के अनुसंधान और विश्लेषण प्रभाग, इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) द्वारा प्रकाशित किया जाता है। यह इंडेक्स दुनिया भर के शहरों में पांच व्यापक श्रेणियों में रहने की स्थितियों का आकलन करता है: स्थिरता (25% भार); स्वास्थ्य सेवा (20%); संस्कृति और पर्यावरण (25%); शिक्षा (10%); बुनियादी ढाँचा (20%)। प्रत्येक शहर को प्रत्येक श्रेणी में 1 (असहनीय) से 100 (आदर्श) तक स्कोर दिया जाता है, और कुल लिवेबिलिटी स्कोर की गणना की जाती है। यह इंडेक्स सालाना प्रकाशित होता है और शहरों के बेंचमार्किंग के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। वियना (ऑस्ट्रिया), कोपेनहेगन (डेनमार्क) और ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड) जैसे शहरों ने हाल के वर्षों में ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स में लगातार शीर्ष स्थान हासिल किया है। स्थिरता और बुनियादी ढाँचे में चुनौतियों के कारण चेन्नई, मुंबई और दिल्ली जैसे भारतीय शहर आमतौर पर निचले पायदान पर रहते हैं।
विकल्प (b) विश्व बैंक — गलत: विश्व बैंक लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPI), ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स (बंद कर दिया गया), और ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स जैसे सूचकांक प्रकाशित करता है; यह ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स प्रकाशित नहीं करता है।
विकल्प (c) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम — गलत: यूएनडीपी मानव विकास सूचकांक (HDI), लैंगिक असमानता सूचकांक (GII), और बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) प्रकाशित करता है; ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
विकल्प (d) विश्व आर्थिक मंच — गलत: WEF ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस रिपोर्ट, ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट, और ट्रैवल एंड टूरिज्म कॉम्पिटिटिवनेस रिपोर्ट प्रकाशित करता है; ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स इसकी प्रकाशनों में शामिल नहीं है।
Industry and Infrastructure · Industrial Policy Resolutions (1948, 1956, 1991)

Q12. किस औद्योगिक नीति ने लघु-स्तरीय उद्योगों को प्रमुखता से बढ़ावा दिया?

  1. (a) औद्योगिक नीति 1948
  2. (b) औद्योगिक नीति 1956
  3. (c) औद्योगिक नीति 1977
  4. (d) औद्योगिक नीति 1980
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) औद्योगिक नीति 1977

सही उत्तर: औद्योगिक नीति 1977 — विकल्प (c)
1977 की औद्योगिक नीति (प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार द्वारा घोषित) विशेष रूप से लघु-स्तरीय, कुटीर और ग्राम उद्योगों को बढ़ावा देने पर अपने प्रबल और स्पष्ट जोर के लिए जानी जाती है। 1977 की औद्योगिक नीति की मुख्य विशेषताएं: इसने उद्योगों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया — कुटीर और घरेलू उद्योग, लघु-स्तरीय उद्योग, और बड़े पैमाने के उद्योग; इसने विशेष रूप से लघु-स्तरीय क्षेत्र के उत्पादन के लिए आरक्षित वस्तुओं की सूची का काफी विस्तार किया; इसने पूंजी-गहन बड़े उद्योगों के बजाय 'जन-उन्मुख' और 'श्रम-गहन' विकास पर जोर दिया; इसने जमीनी स्तर पर छोटे उद्यमों को सहायता प्रदान करने के लिए जिला उद्योग केंद्रों (डीआईसी) को बढ़ावा दिया; इसका उद्देश्य अधिकतम रोजगार सृजित करना और उद्योगों को ग्रामीण क्षेत्रों में लाना था। यह नीति 1956 की नीति के भारी उद्योग-केंद्रित दृष्टिकोण से एक दार्शनिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती थी।
विकल्प (a) औद्योगिक नीति 1948 — गलत: 1948 की औद्योगिक नीति स्वतंत्रता के बाद भारत का पहला नीतिगत वक्तव्य था, जो उद्योगों को सरकारी और निजी क्षेत्रों में वर्गीकृत करने पर केंद्रित था; हालांकि इसमें लघु उद्योगों का उल्लेख किया गया था, लेकिन इसे विशेष रूप से उनके प्रमुख संवर्धन के लिए नहीं जाना जाता था।
विकल्प (b) औद्योगिक नीति 1956 — गलत: 1956 की औद्योगिक नीति (महालानोबिस मॉडल पर आधारित) भारी उद्योगों और सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार पर अपने जोर के लिए जानी जाती है; यह वह नीति नहीं थी जो मुख्य रूप से लघु-स्तरीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती थी।
विकल्प (d) औद्योगिक नीति 1980 — गलत: 1980 की औद्योगिक नीति (प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की वापस लौटी कांग्रेस सरकार के तहत) ने 1977 की नीति को आंशिक रूप से उलट दिया और आधुनिकीकरण, समेकन और बीमार इकाइयों को रोकने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया; यह 1977 की नीति की तरह मुख्य रूप से लघु-स्तरीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नहीं जानी जाती थी।
External Sector and International Economic Organisations · Balance of payments and current account

Q13. भारत के व्यापार संतुलन की मुख्य कमी क्या है?

  1. (a) सेवाओं का अधिशेष निर्यात
  2. (b) कुछ व्यापारिक साझेदारों पर अत्यधिक निर्भरता
  3. (c) आयात के कारण लगातार व्यापार घाटा
  4. (d) उच्च टैरिफ संरचना
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) आयात के कारण लगातार व्यापार घाटा

सही उत्तर: आयात के कारण लगातार व्यापार घाटा — विकल्प (c)
भारत के व्यापार संतुलन (माल/वस्तुओं का व्यापार) में लगातार घाटा रहा है — यानी, भारत का वस्तुओं का आयात उसके वस्तुओं के निर्यात से कहीं अधिक है — और यह भारत के व्यापार संतुलन की मुख्य संरचनात्मक कमी है। भारत के लगातार व्यापार घाटे के मुख्य कारण: कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए उच्च आयात बिल (भारत अपनी तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है); सोने और कीमती धातुओं का बड़ा आयात; इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और पूंजीगत उपकरणों का महत्वपूर्ण आयात; कोयले और प्राकृतिक गैस का बढ़ता आयात; भारत का व्यापारिक व्यापार घाटा वर्षों से बढ़ा है, जो अक्सर सालाना $200 बिलियन से अधिक हो जाता है। जबकि भारत सेवाओं के व्यापार (विशेष रूप से आईटी/सॉफ्टवेयर निर्यात, प्रेषण) में अधिशेष अर्जित करता है, बड़े व्यापारिक व्यापार घाटे के परिणामस्वरूप कई वर्षों में भारत का समग्र चालू खाता घाटा होता है।
विकल्प (a) सेवाओं का अधिशेष निर्यात — गलत: भारत का सेवा क्षेत्र (विशेष रूप से आईटी, सॉफ्टवेयर और व्यावसायिक प्रक्रिया सेवाएँ) वास्तव में व्यापार अधिशेष का आनंद लेता है — यह भारत के समग्र व्यापार खाते की एक ताकत है, कमी नहीं।
विकल्प (b) कुछ व्यापारिक साझेदारों पर अत्यधिक निर्भरता — गलत: जबकि कुछ साझेदारों (जैसे आयात के लिए चीन) के साथ भारत की व्यापार एकाग्रता एक चिंता का विषय है, भारत के व्यापार संतुलन की प्राथमिक/मुख्य कमी वस्तुओं के उच्च आयात के कारण लगातार संरचनात्मक घाटा है।
विकल्प (d) उच्च टैरिफ संरचना — गलत: भारत की टैरिफ संरचना विश्व स्तर पर सबसे अधिक नहीं है; इसके अलावा, एक उच्च टैरिफ संरचना आयात को कम करेगी (व्यापार संतुलन में सुधार), न कि घाटा पैदा करेगी — मुख्य मुद्दा तेल और सोने जैसी आवश्यक वस्तुओं की बड़ी आयात मांग है।
Government Schemes and Economic Reports · Skill development and employment schemes

Q14. 2021-22 से 2025-26 तक ₹450 करोड़ के लिए कौन सी सामाजिक विकास योजना अनुमोदित की गई थी?

  1. (a) SMILE योजना
  2. (b) PM-DAKSH योजना
  3. (c) NAMASTE योजना
  4. (d) नशा मुक्त भारत अभियान
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) PM-DAKSH योजना

सही उत्तर: PM-DAKSH योजना — विकल्प (b)
PM-DAKSH (प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही) योजना को 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए ₹450 करोड़ के बजट के साथ अनुमोदित किया गया था। यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है। PM-DAKSH की मुख्य विशेषताएं: लक्षित लाभार्थी: अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EBC), स्वच्छता कर्मचारी, विमुक्त और खानाबदोश जनजाति (DNT); उद्देश्य: लक्षित समूहों के रोजगार योग्यता में सुधार और उन्हें बेहतर आय अर्जित करने में सक्षम बनाने के लिए उनका कौशल उन्नयन और पुनर्कौशल प्रदान करना; प्रशिक्षण के प्रकार: लघुकालिक प्रशिक्षण, दीर्घकालिक प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, पुनर्कौशल/कौशल उन्नयन कार्यक्रम; प्रशिक्षण वजीफा सहायता के साथ निःशुल्क प्रदान किया जाता है। यह योजना 2021 में शुरू की गई थी और PM-DAKSH पोर्टल लाभार्थियों और प्रशिक्षण संस्थानों के ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा प्रदान करता है।
विकल्प (a) SMILE योजना — गलत: SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक योजना है जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों पर केंद्रित है, लेकिन यह 2021-22 से 2025-26 के लिए ₹450 करोड़ के लिए अनुमोदित योजना नहीं थी।
विकल्प (c) NAMASTE योजना — गलत: NAMASTE (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) सीवेज सफाई को मशीनीकृत करने और खतरनाक हाथ से मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने की एक योजना है; यह 2021-22 से 2025-26 के लिए ₹450 करोड़ के बजट वाली योजना नहीं थी।
विकल्प (d) नशा मुक्त भारत अभियान — गलत: नशा मुक्त भारत अभियान (ड्रग-मुक्त भारत अभियान) सामाजिक न्याय मंत्रालय के तहत एक नशामुक्ति पहल है; यह 2021-22 से 2025-26 के लिए ₹450 करोड़ के आवंटन से जुड़ी योजना नहीं है।

Current Affairs (2)

Science, Technology and Space - Current · Space missions - current

Q15. एक इंजीनियर को पृथ्वी की सतह पर बादलों के माध्यम से और रात में भी परिवर्तनों की निगरानी के लिए रडार का उपयोग करने का काम सौंपा गया है। इसके लिए कौन सा उपग्रह सबसे उपयुक्त है?

  1. (a) चंद्रयान-3
  2. (b) ईओएस-09
  3. (c) निसार
  4. (d) एक्सपोसैट
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) निसार

सही उत्तर: निसार — विकल्प (c)
निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) वह उपग्रह है जो बादलों के माध्यम से और रात में भी पृथ्वी की सतह में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी के लिए रडार का उपयोग करने के लिए सबसे उपयुक्त है। निसार नासा (यूएसए) और इसरो (भारत) के बीच एक संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह मिशन है, जिसे 2024 में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। निसार की मुख्य विशेषताएं: यह दोहरी-आवृत्ति वाले सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) का उपयोग करता है — L-बैंड (नासा) और S-बैंड (इसरो) — जिससे यह बादलों को भेदने और सभी मौसमों में तथा रात में काम करने में सक्षम है; यह भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और भूस्खलन से होने वाली भू-आकृति विरूपण को माप सकता है; यह बर्फ की चादरों, समुद्र के स्तर, आर्द्रभूमि और वन बायोमास में परिवर्तनों की निगरानी करता है; यह हर 12 दिनों में पृथ्वी की सतह का दोहरा कवरेज प्रदान करता है। SAR तकनीक विशेष रूप से सभी मौसमों में, दिन-रात पृथ्वी के अवलोकन की अनुमति देती है — जो निसार को रडार-आधारित सतह निगरानी के लिए सही उत्तर बनाती है।
विकल्प (a) चंद्रयान-3 — गलत: चंद्रयान-3 भारत का चंद्र अन्वेषण मिशन (चंद्रमा लैंडर और रोवर) है जिसे 2023 में लॉन्च किया गया था; इसे पृथ्वी की सतह का नहीं, बल्कि चंद्रमा की सतह का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विकल्प (b) ईओएस-09 — गलत: ईओएस-09 (अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-09) एक इसरो रडार इमेजिंग उपग्रह है, लेकिन निसार (पृथ्वी की सतह की व्यापक निगरानी के लिए अपने दोहरी-आवृत्ति वाले SAR के साथ) विशेष रूप से सभी मौसमों में, दिन-रात पृथ्वी की सतह में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी के लिए वर्णित उपग्रह है।
विकल्प (d) एक्सपोसैट — गलत: एक्सपोसैट (एक्स-रे पोलारिमेटर सैटेलाइट) भारत का पहला समर्पित एक्स-रे पोलारिमेट्री मिशन है जिसे जनवरी 2024 में अंतरिक्ष में एक्स-रे स्रोतों (कॉस्मिक एक्स-रे स्रोतों) का अध्ययन करने के लिए लॉन्च किया गया था; इसे पृथ्वी की सतह की निगरानी के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है।
Defence and Security - Current · Defence personnel, firsts and ceremonial events

Q16. भारत के राष्ट्रपति की 'एडीसी' (Aide-de-Camp) के रूप में सेवा करने वाली पहली महिला नौसेना अधिकारी कौन बनीं?

  1. (a) लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी
  2. (b) लेफ्टिनेंट भावना सिंह
  3. (c) कमांडर प्रिया मेनन
  4. (d) कैप्टन शिखा शर्मा
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी

सही उत्तर: लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी — विकल्प (a)
लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी ने भारत के राष्ट्रपति की 'एडीसी' (Aide-de-Camp) के रूप में सेवा करने वाली पहली महिला नौसेना अधिकारी बनकर इतिहास रचा। राष्ट्रपति के 'एडीसी' एक सैन्य अधिकारी होता है जो राष्ट्रपति के निजी सहायक के रूप में कार्य करता है और औपचारिक तथा आधिकारिक कार्यों में सहायता करता है। यह नियुक्ति भारतीय नौसेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था, जो भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका और मान्यता को दर्शाता है। भारतीय नौसेना ने महिला अधिकारियों के लिए लड़ाकू भूमिकाओं और कमांड सहित अधिक भूमिकाएं उत्तरोत्तर खोली हैं। लेफ्टिनेंट कमांडर सोलंकी की भारत के राष्ट्रपति की पहली महिला नौसेना एडीसी के रूप में नियुक्ति भारतीय सेना में लैंगिक समानता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
विकल्प (b) लेफ्टिनेंट भावना सिंह — गलत: लेफ्टिनेंट भावना सिंह वह नौसेना अधिकारी नहीं हैं जिन्होंने राष्ट्रपति की पहली महिला नौसेना एडीसी के रूप में इतिहास रचा; यह उपलब्धि लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी की है।
विकल्प (c) कमांडर प्रिया मेनन — गलत: कमांडर प्रिया मेनन इस ऐतिहासिक पहली उपलब्धि से जुड़ी अधिकारी नहीं हैं; लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी भारत के राष्ट्रपति की 'एडीसी' के रूप में सेवा करने वाली पहली महिला नौसेना अधिकारी थीं।
विकल्प (d) कैप्टन शिखा शर्मा — गलत: कैप्टन शिखा शर्मा वह नौसेना अधिकारी नहीं हैं जो राष्ट्रपति की पहली महिला नौसेना एडीसी बनीं; यह विशिष्टता लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी की है।

Medieval History (1)

Later Mughals and Regional Powers · Mysore (Hyder Ali, Tipu Sultan)

Q17. मैसूर निम्नलिखित में से किस तट के लाभदायक व्यापार को नियंत्रित करता था?

  1. (a) बॉम्बे
  2. (b) हुगली
  3. (c) कोरोमंडल
  4. (d) मालाबार
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) मालाबार

सही उत्तर: मालाबार — विकल्प (d)
हैदर अली और विशेष रूप से उनके पुत्र टीपू सुल्तान के अधीन मैसूर साम्राज्य ने मालाबार तट (वर्तमान केरल तट) के लाभदायक व्यापार को नियंत्रित किया। यह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संघर्ष का एक प्रमुख स्रोत था, जिससे आंग्ल-मैसूर युद्ध (1767-1799) हुए। मालाबार क्यों महत्वपूर्ण था: मालाबार तट मसालों (विशेषकर काली मिर्च, इलायची और अदरक), नारियल उत्पादों और लकड़ी के अपने आकर्षक व्यापार के लिए प्रसिद्ध था; टीपू सुल्तान इस व्यापार पर एकाधिकार करना और तट पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे; मालाबार के नियंत्रण से मैसूर को विदेशी व्यापार मार्गों तक सीधी पहुँच और फ्रांसीसी तथा अन्य यूरोपीय व्यापारियों से हथियार आयात करने की क्षमता मिली; ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी मालाबार व्यापार पर कब्ज़ा करना चाहती थी और अंततः चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799) में टीपू सुल्तान को हरा दिया, जिसके बाद मालाबार क्षेत्र ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया।
विकल्प (a) बॉम्बे — गलत: बॉम्बे (मुंबई) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की एक प्रेसीडेंसी और व्यापारिक केंद्र था; यह मैसूर साम्राज्य द्वारा नियंत्रित नहीं था। मैसूर का प्रभुत्व मालाबार तट (दक्षिण-पश्चिम भारत) पर था।
विकल्प (b) हुगली — गलत: हुगली बंगाल (पूर्वी भारत) में एक नदी और क्षेत्र है; यह ब्रिटिश नियंत्रण (बंगाल प्रेसीडेंसी) में था और इसका मैसूर के व्यापार नियंत्रण से कोई संबंध नहीं था।
विकल्प (c) कोरोमंडल — गलत: कोरोमंडल तट भारत का दक्षिण-पूर्वी तट (तमिलनाडु) है; हालाँकि मैसूर का इस क्षेत्र के साथ कुछ संपर्क था, लेकिन उसका प्राथमिक और सबसे लाभदायक तटीय व्यापार नियंत्रण कोरोमंडल तट पर नहीं, बल्कि मालाबार तट पर था।

Modern History (1)

Revolt of 1857 · Centres and leaders

Q18. 1857 के विद्रोह के बाद बहादुर शाह ज़फ़र को निम्नलिखित में से किस स्थान पर कैद किया गया था?

  1. (a) शंघाई
  2. (b) ढाका
  3. (c) रंगून
  4. (d) अंडमान
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) रंगून

सही उत्तर: रंगून — विकल्प (c)
1857 के विद्रोह (जिसे स्वतंत्रता का पहला युद्ध या सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है) के बाद, अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र द्वितीय को सितंबर 1857 में दिल्ली में हुमायूँ के मकबरे पर लेफ्टिनेंट विलियम हडसन के अधीन ब्रिटिश सेना ने पकड़ लिया था। उन पर ब्रिटिश सैन्य आयोग द्वारा देशद्रोह और विद्रोह का मुकदमा चलाया गया। अक्टूबर 1858 में, उन्हें रंगून (वर्तमान यांगून, म्यांमार/बर्मा) निर्वासित कर दिया गया, जहाँ उन्होंने अपने अंतिम वर्ष एक कैदी के रूप में बिताए। मुख्य तथ्य: वह 7 नवंबर, 1858 को रंगून पहुँचे; उनकी मृत्यु 7 नवंबर, 1862 को रंगून में लगभग 87 वर्ष की आयु में हुई; निर्वासन में उनकी मृत्यु ने मुगल वंश के औपचारिक अंत को चिह्नित किया; रंगून में उनकी कब्र कई लोगों के लिए तीर्थस्थल बन गई। बहादुर शाह ज़फ़र एक प्रसिद्ध उर्दू कवि भी थे — निर्वासन में उनके दुख को व्यक्त करने वाला उनका प्रसिद्ध छंद उर्दू साहित्य में अच्छी तरह से ज्ञात है।
विकल्प (a) शंघाई — गलत: शंघाई चीन का एक शहर है; बहादुर शाह ज़फ़र को शंघाई निर्वासित नहीं किया गया था — उन्हें 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों द्वारा रंगून (वर्तमान यांगून, म्यांमार) भेजा गया था।
विकल्प (b) ढाका — गलत: ढाका वर्तमान बांग्लादेश में है; बहादुर शाह ज़फ़र को ढाका में कैद नहीं किया गया था — उनके निर्वासन का स्थान रंगून (यांगून), म्यांमार था, जहाँ उन्होंने अपने अंतिम वर्ष बिताए और 1862 में उनकी मृत्यु हो गई।
विकल्प (d) अंडमान — गलत: जबकि अंडमान द्वीप समूह (सेलुलर जेल) भारतीय राजनीतिक कैदियों के लिए एक प्रसिद्ध ब्रिटिश जेल बन गया था, बहादुर शाह ज़फ़र को अंडमान में कैद नहीं किया गया था — उन्हें विशेष रूप से रंगून, बर्मा निर्वासित किया गया था।
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