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RRB JE CBT-1 2024-25 17 दिसंबर 2024 शिफ्ट 1 – GK प्रश्न – उत्तर व व्याख्या सहित

RRB JE CBT-1 2024-25 (17 दिसंबर 2024 शिफ्ट 1) में पूछे गए सभी 43 GK / सामान्य अध्ययन प्रश्न, सही उत्तर और व्याख्या के साथ – विषयवार।

📚 43 प्रश्न🗓️ 17 दिसंबर 2024⏰ शिफ्ट 1
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विषय: Chemistry (9) · Biology (10) · Modern History (1) · Polity (3) · Physics (9) · Static GK (3) · Economics (1) · Current Affairs (5) · Geography (2)

Chemistry (9)

Carbon and its Compounds · Bonding in carbon and catenation

Q1. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (versatile nature) का कारण नहीं है?

  1. (a) कार्बन में चतुःसंयोजकता होती है (Carbon has tetravalency)
  2. (b) कार्बन, एकल, द्वि और त्रिक आबंध बना सकता है (Carbon can form single, double, and triple bonds)
  3. (c) कार्बन, श्रृंखलन प्रदर्शित करता है (Carbon exhibits catenation)
  4. (d) कार्बन, स्वयं के साथ आयनिक आबंध बना सकता है (Carbon can form ionic bonds with itself)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) कार्बन, स्वयं के साथ आयनिक आबंध बना सकता है (Carbon can form ionic bonds with itself)

उत्तर: विकल्प 4 — कार्बन, स्वयं के साथ आयनिक आबंध बना सकता है
दो कार्बन परमाणुओं की विद्युतऋणात्मकता समान होती है, इसलिए कोई भी दूसरे से इलेक्ट्रॉन नहीं खींच सकता।
वे इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं — प्रत्येक C–C आबंध सहसंयोजक होता है, कभी आयनिक नहीं।
रिवीजन नोट — कार्बन इतने अधिक यौगिक क्यों बनाता है
• चतुःसंयोजकता: कार्बन में 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन (2, 4) होते हैं और यह 4 सहसंयोजक आबंध बनाता है।
• श्रृंखलन: कार्बन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखाएँ और वलय बनाता है; C–C आबंध प्रबल और स्थायी होता है।
• कार्बन एकल (C–C), द्वि (C=C) और त्रिक (C≡C) आबंध बनाता है।
• कार्बन आसानी से 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण (C⁴⁻) या 4 इलेक्ट्रॉन त्याग (C⁴⁺) नहीं कर सकता — इसलिए यह उनकी साझेदारी करता है।
• इसका छोटा आकार नाभिक को साझा इलेक्ट्रॉनों को मज़बूती से पकड़े रखने देता है, जिससे प्रबल आबंध बनते हैं।
• सिलिकॉन भी श्रृंखलन दर्शाता है, परंतु इसकी श्रृंखलाएँ (लगभग 7–8 परमाणुओं तक) अभिक्रियाशील और छोटी होती हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वे गुण जिनके कारण कार्बन इतने अधिक यौगिक बनाता है (श्रृंखलन और चतुःसंयोजकता); कार्बन अधिक संख्या में यौगिक क्यों बनाता है (C–C आबंध बहुत प्रबल और स्थायी होता है)।
Acids, Bases and Salts · Neutralisation reaction

Q2. यदि NaOH के 20 ml को HNO_(3) के 10 ml द्वारा उदासीन किया जाता है। HNO_(3) के 15 ml को उदासीन करने के लिए कितने NaOH की आवश्यकता होगी?

  1. (a) 20 ml
  2. (b) 30 ml
  3. (c) 40 ml
  4. (d) 25 ml
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) 30 ml

नियम — एक ही अम्ल और क्षारक का उदासीनीकरण।
पूर्ण उदासीनीकरण के लिए, अम्ल से H^(+) के मोल = क्षारक से OH^(−) के मोल।
उन्हीं दो विलयनों में, आवश्यक NaOH का आयतन HNO_(3) के आयतन के अनुक्रमानुपाती होता है।
दिए गए आँकड़ों से अनुपात ज्ञात करें।
20 ml NaOH ↔ 10 ml HNO_(3)
प्रति ml HNO_(3) आवश्यक NaOH = 20 ÷ 10 = 2 ml
इसे 15 ml HNO_(3) पर लागू करें।
NaOH = 15 × 2 = 30 ml
उत्तर: 30 ml
रिवीजन नोट — उदासीनीकरण
• अम्ल + क्षारक → लवण + जल; यहाँ HNO_(3) + NaOH → NaNO_(3) + H_(2)O।
• विलयन में अम्ल का H^(+) और क्षारक का OH^(−) मिलकर जल बनाते हैं।
• उदासीनीकरण एक प्रकार की द्विविस्थापन अभिक्रिया है और ऊष्माक्षेपी होती है।
• HNO_(3) और HCl एकक्षारकीय अम्ल हैं; NaOH एक-अम्लीय क्षारक है — ये मोलों में 1 : 1 अनुपात में अभिक्रिया करते हैं।
• दैनिक उपयोग: अम्लता के लिए प्रतिअम्ल (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया), मधुमक्खी के डंक पर बेकिंग सोडा, अम्लीय मृदा के लिए चूना।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अम्ल–क्षारक अभिक्रिया के उत्पाद (लवण और जल); HCl + NaOH → NaCl + H_(2)O अभिक्रिया का प्रकार (द्विविस्थापन); जल बनाने वाले आयन (H^(+) और OH^(−))।
आधे अम्ल को आधा क्षारक चाहिए — पहली पंक्ति में तय हुआ 2 : 1 का अनुपात सीधे 15 ml पर लागू होता है।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन धावन सोडा के सामान्य औद्योगिक उपयोग का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

  1. (a) सीमेंट उत्पादन (Cement production)
  2. (b) उर्वरक निर्माण (Fertiliser manufacturing)
  3. (c) कांच निर्माण (Glass manufacturing)
  4. (d) सिरका उत्पादन (Vinegar production)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) कांच निर्माण (Glass manufacturing)

उत्तर: विकल्प 3 — कांच निर्माण (Glass manufacturing)
धावन सोडा (सोडियम कार्बोनेट, Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O) रेत और चूना पत्थर के साथ कांच उद्योग का एक प्रमुख कच्चा माल है।
इसका उपयोग साबुन और कागज़ उद्योगों में भी होता है।
रिवीजन नोट — चार सामान्य लवण (कक्षा 10 अम्ल, क्षारक एवं लवण)
• धावन सोडा — Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O; सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलीकरण से बनता है।
• धावन सोडा के उपयोग: कांच, साबुन, कागज़, बोरेक्स बनाने में, सफाई में, जल की स्थायी कठोरता दूर करने में।
• बेकिंग सोडा — NaHCO_(3); उपयोग: बेकिंग पाउडर, प्रतिअम्ल, सोडा-अम्ल अग्निशामक।
• विरंजक चूर्ण — CaOCl_(2); शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन प्रवाहित करके बनता है; उपयोग: विरंजन, पेयजल को रोगाणुमुक्त करना, ऑक्सीकारक।
• प्लास्टर ऑफ पेरिस — CaSO_(4)·½H_(2)O; जिप्सम को 373 K पर गर्म करके बनता है; उपयोग: टूटी हड्डियों पर प्लास्टर, खिलौने, सजावट।
• Na_(2)CO_(3) का विलयन क्षारकीय होता है (प्रबल क्षारक और दुर्बल अम्ल का लवण)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• धावन सोडा बनाम बेकिंग सोडा — धावन सोडा Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O है (सफाई, कांच); बेकिंग सोडा NaHCO_(3) है (खाना पकाना, प्रतिअम्ल)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: सोडियम कार्बोनेट का उपयोग करने वाले उद्योग (कांच, साबुन और कागज़); बेकिंग सोडा अग्निशामक के लिए उपयुक्त क्यों है (अम्ल के साथ आसानी से CO_(2) मुक्त करता है); विरंजक चूर्ण का एक उपयोग (ऑक्सीकारक)।
Metals and Non-metals · Reactivity series

Q4. जिंक के एक टुकड़े को तीन अलग-अलग विलयनों में रखा गया है: लेड नाइट्रेट (lead nitrate), ऐलुमिनियम सल्फेट (aluminium sulphate) और सिल्वर नाइट्रेट (silver nitrate)। जिंक निम्नलिखित में से कौन-सा/से विलयन में, धातु को उसके विलयन से विस्थापित करने में सक्षम होगा?

  1. (a) लेड नाइट्रेट और सिल्वर नाइट्रेट
  2. (b) लेड नाइट्रेट और ऐलुमिनियम सल्फेट
  3. (c) केवल सिल्वर नाइट्रेट
  4. (d) ऐलुमिनियम सल्फेट और सिल्वर नाइट्रेट
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) लेड नाइट्रेट और सिल्वर नाइट्रेट

उत्तर: विकल्प 1 — लेड नाइट्रेट और सिल्वर नाइट्रेट
कोई धातु अपने लवण विलयन से केवल कम अभिक्रियाशील धातु को ही विस्थापित करती है।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी में जिंक, लेड और सिल्वर से ऊपर है, लेकिन ऐलुमिनियम से नीचे है।
रिवीजन नोट — अभिक्रियाशीलता श्रेणी और विस्थापन
• क्रम (NCERT): K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au।
• Zn + Pb(NO_(3))_(2) → Zn(NO_(3))_(2) + Pb; Zn + 2AgNO_(3) → Zn(NO_(3))_(2) + 2Ag।
• Zn + Al_(2)(SO_(4))_(3) → कोई अभिक्रिया नहीं — ऐलुमिनियम, जिंक से अधिक अभिक्रियाशील है।
• Fe + CuSO_(4) → FeSO_(4) + Cu — नीला विलयन हल्का हरा हो जाता है।
• हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ तनु अम्लों से H_(2) मुक्त करती हैं; Cu, Ag, Au नहीं करतीं।
• Cu + 2AgNO_(3) → Cu(NO_(3))_(2) + 2Ag — विलयन नीला हो जाता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: जिंक की पट्टी को आयरन(II) सल्फेट में डुबोने पर क्या होता है (जिंक, आयरन को विस्थापित करता है); लेड, आयरन(II) सल्फेट से अभिक्रिया क्यों नहीं करता (लेड, आयरन से कम अभिक्रियाशील है)।
Chemical Reactions and Equations · Decomposition reactions (thermal, electrolytic, photolytic)

Q5. __________________, हाइड्रोजन परॉक्साइड (hydrogen peroxide) के अपघटन को दर्शाने वाला संतुलित समीकरण है।

  1. (a) 2H_(2)O_(2) → 2H_(2)O + O_(2)
  2. (b) H_(2)O_(2) → H_(2)O + O_(2)
  3. (c) H_(2)O_(2) → 2H_(2)O + O_(2)
  4. (d) 2HO_(2) → 2HO + O_(2)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) 2H_(2)O_(2) → 2H_(2)O + O_(2)

उत्तर: विकल्प 1 — 2H_(2)O_(2) → 2H_(2)O + O_(2)
हाइड्रोजन परॉक्साइड टूटकर जल और ऑक्सीजन बनाता है।
परमाणुओं की जाँच: बायाँ पक्ष 4 H, 4 O; दायाँ पक्ष 4 H, 2 + 2 = 4 O — संतुलित।
रिवीजन नोट — अपघटन अभिक्रियाएँ
• एक यौगिक टूटकर दो या अधिक सरल पदार्थ बनाता है (AB → A + B)।
• ऊष्मीय: गर्म करने पर CaCO_(3) → CaO + CO_(2); 2Pb(NO_(3))_(2) → 2PbO + 4NO_(2) + O_(2) (भूरा धुआँ)।
• विद्युत-अपघटनी: 2H_(2)O → 2H_(2) + O_(2) — आयतन के अनुसार हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात 2 : 1।
• प्रकाश-अपघटनी: सूर्य के प्रकाश में 2AgCl → 2Ag + Cl_(2) — श्वेत-श्याम फोटोग्राफी में उपयोग।
• H_(2)O_(2) स्वयं धीरे-धीरे अपघटित होता है; MnO_(2) इसे तेज करने के लिए उत्प्रेरक का कार्य करता है।
• संतुलित समीकरण में दोनों ओर प्रत्येक परमाणु की संख्या समान होती है — द्रव्यमान संरक्षण का नियम।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• विकल्प 2 में बाईं ओर 2 O हैं पर दाईं ओर 3 O; विकल्प 3 में बाईं ओर 2 H और दाईं ओर 4 H हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: जल के विद्युत-अपघटन में H_(2) : O_(2) का अनुपात (2 : 1); श्वेत-श्याम फोटोग्राफी में प्रयुक्त सिल्वर लवण (AgCl, AgBr)।
Chemical Reactions and Equations · Writing and balancing chemical equations

Q6. संतुलित रासायनिक समीकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

  1. (a) दोनों पक्षों में मोलों की कुल संख्या समान होती है।
  2. (b) दोनों पक्षों में अणुओं की कुल संख्या समान होती है।
  3. (c) दोनों पक्षों में अणुओं का कुल द्रव्यमान असमान होता है।
  4. (d) दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की कुल संख्या समान होती है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की कुल संख्या समान होती है।

उत्तर: विकल्प 4 — दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की कुल संख्या समान होती है।
किसी अभिक्रिया में परमाणु न तो बनते हैं और न ही नष्ट होते हैं (द्रव्यमान संरक्षण का नियम)।
अतः संतुलित समीकरण में दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है।
रिवीजन नोट — रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना
• उदाहरण: 2H_(2) + O_(2) → 2H_(2)O — 3 अणु मिलकर 2 अणु बनते हैं, फिर भी H (4 = 4) और O (2 = 2) बराबर हैं।
• अतः दोनों पक्षों में अणुओं या मोलों की संख्या का बराबर होना आवश्यक नहीं है।
• अभिकारकों का कुल द्रव्यमान उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।
• संतुलित करने के लिए केवल गुणांक बदलें, सूत्र के पादांक कभी नहीं।
• NCERT में सिखाई गई विधि: हिट-एंड-ट्रायल (अनुमान और परीक्षण), उस यौगिक से शुरू करें जिसमें सबसे अधिक परमाणु हों।
• द्रव्यमान संरक्षण का नियम — एंटोनी लैवोजियर (1789) ने दिया।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: द्रव्यमान संरक्षण का नियम किसने दिया (एंटोनी लैवोजियर); इस नियम का उल्लंघन करने वाली अभिक्रिया (2Mg + O_(2) → MgO); स्टॉइकियोमीट्रिक गणनाओं के लिए क्या आवश्यक है (संतुलित समीकरण)।
Chemical Reactions and Equations · Double displacement and precipitation reactions

Q7. जब सोडियम सल्फेट दोहरी विस्थापन (double displacement) अभिक्रिया में बेरियम क्लोराइड (barium chloride) के साथ अभिक्रिया करता है तो क्या बनता है?

  1. (a) सोडियम क्लोराइड और बेरियम सल्फेट
  2. (b) सोडियम हाइड्रॉक्साइड और बेरियम क्लोराइड
  3. (c) सोडियम क्लोराइड और बेरियम हाइड्रॉक्साइड
  4. (d) सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) सोडियम क्लोराइड और बेरियम सल्फेट

उत्तर: विकल्प 1 — सोडियम क्लोराइड और बेरियम सल्फेट
द्विविस्थापन में दोनों यौगिक आयनों का आदान-प्रदान करते हैं।
Na_(2)SO_(4)(aq) + BaCl_(2)(aq) → BaSO_(4)(s) + 2NaCl(aq)
रिवीजन नोट — द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ
• Ba^(2+), SO_(4)^(2−) के साथ जुड़ता है; Na^(+), Cl^(−) के साथ जुड़ता है।
• बेरियम सल्फेट अविलेय है — यह सफेद अवक्षेप के रूप में अलग हो जाता है।
• जिस अभिक्रिया में अविलेय ठोस बनता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।
• NCERT का एक अन्य उदाहरण: लेड नाइट्रेट + पोटैशियम आयोडाइड → लेड आयोडाइड का पीला अवक्षेप।
• उदासीनीकरण (अम्ल + क्षारक → लवण + जल) भी एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है।
• एकल विस्थापन में अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को हटा देती है — जैसे Fe + CuSO_(4) → FeSO_(4) + Cu।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: इस अभिक्रिया में BaSO_(4) की भौतिक अवस्था ((s), ठोस अवक्षेप); अभिक्रिया होने का प्रमाण (अवक्षेप का बनना)।
Metals and Non-metals · Reactivity series

Q8. चार धातुओं A, B, C और D के नमूने लिए गए और उन्हें अलग-अलग विलयन में मिलाया गया। प्राप्त परिणामों को निम्‍नानुसार सूचीबद्ध किया गया है। A, B को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है B, D को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है C, D को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है C, A को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौन-सी है?

  1. (a) C
  2. (b) B
  3. (c) D
  4. (d) A
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) C

उत्तर: विकल्प 1 — C
कोई धातु किसी अन्य धातु को उसके लवण विलयन से तभी विस्थापित कर सकती है,
जब वह उससे अधिक अभिक्रियाशील हो।
संकेतों से C > A, A > B और B > D मिलता है,
अतः क्रम C > A > B > D है और C सबसे अधिक अभिक्रियाशील है।
रिवीजन नोट — अभिक्रियाशीलता श्रेणी और विस्थापन
• अभिक्रियाशीलता श्रेणी: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > (H) > Cu > Hg > Ag > Au।
• अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित करती है — यह विस्थापन अभिक्रिया है।
• Fe + CuSO_(4) → FeSO_(4) + Cu: नीला विलयन हल्का हरा हो जाता है और लोहे की कील पर लाल-भूरा ताँबा जम जाता है।
• हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ तनु अम्लों से H_(2) विस्थापित करती हैं; Cu, Ag, Au (हाइड्रोजन से नीचे) नहीं करतीं।
• K और Na इतनी अभिक्रियाशील हैं कि इन्हें केरोसिन में रखा जाता है; सोना और प्लैटिनम प्रकृति में मुक्त (प्राकृत) अवस्था में मिलते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: जब P, Q, R, S में से प्रत्येक अगले को विस्थापित करे तो सबसे अधिक अभिक्रियाशील (P); सीसा लोहे को विस्थापित क्यों नहीं कर सकता (सीसा कम अभिक्रियाशील है)।
Carbon and its Compounds · Homologous series

Q9. समजातीय श्रेणी के यौगिकों के भौतिक गुणों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

  1. (a) कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ने पर उनके क्वथनांक घटते हैं।
  2. (b) उनके गलनांक और क्वथनांक में नियमित परिवर्तन होता है।
  3. (c) उनके भौतिक गुण नहीं बदलते।
  4. (d) उनके गलनांक और क्वथनांक समान होते हैं।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) उनके गलनांक और क्वथनांक में नियमित परिवर्तन होता है।

उत्तर: विकल्प 2 — उनके गलनांक और क्वथनांक में नियमित परिवर्तन होता है।
प्रत्येक सदस्य अगले सदस्य से –CH_(2)– (14 u) से भिन्न होता है, इसलिए आण्विक द्रव्यमान क्रमशः बढ़ता है।
अतः गलनांक और क्वथनांक जैसे भौतिक गुण क्रमशः बदलते हैं (क्रमिकता)।
रिवीजन नोट — समजातीय श्रेणी
• समजातीय श्रेणी के यौगिकों में एक ही प्रकार्यात्मक समूह और एक ही सामान्य सूत्र होता है।
• क्रमागत सदस्यों में –CH_(2)– का, अर्थात् आण्विक द्रव्यमान में 14 u का अंतर होता है।
• रासायनिक गुण समान होते हैं (एक ही प्रकार्यात्मक समूह); भौतिक गुणों में क्रमिकता होती है।
• कार्बन परमाणुओं की संख्या के साथ क्वथनांक बढ़ता है: मेथेन < एथेन < प्रोपेन।
• ऐल्केन C_(n)H_(2n+2) (CH_(4), C_(2)H_(6), C_(3)H_(8)); ऐल्कीन C_(n)H_(2n); ऐल्काइन C_(n)H_(2n−2)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• रासायनिक बनाम भौतिक गुण — रासायनिक गुण समान रहते हैं; भौतिक गुण नियमित रूप से बदलते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: –CH_(2)– से भिन्न यौगिक (समजातीय श्रेणी); श्रेणी में क्या समान रहता है (रासायनिक गुण); ऐल्केन श्रृंखला बढ़ने पर क्या बढ़ता है (क्वथनांक)।

Biology (10)

Heredity and Evolution · Mendel's laws and experiments

Q10. मान लीजिए कि एक माली मटर लगाना चाहता है जो बौने किस्म (dwarf varieties) का होना चाहिए। माली द्वारा जनक पौधे के बीज के चयन के लिए उसे क्या सुझाव दिया जाना चाहिए?

  1. (a) सभी बीज लंबे किस्म के होने चाहिए।
  2. (b) सभी बीज बौने किस्म के होने चाहिए।
  3. (c) सभी बीज मिश्रित किस्म के होने चाहिए।
  4. (d) किसी भी प्रकार के बीज का उपयोग किया जा सकता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) सभी बीज बौने किस्म के होने चाहिए।

उत्तर: विकल्प 2 — सभी बीज बौने किस्म के होने चाहिए।
बौनापन एक अप्रभावी लक्षण है, इसलिए बौना पौधा सदैव tt होता है।
tt × tt से केवल tt प्राप्त होता है — प्रत्येक संतति बौनी होती है।
लंबा जनक T धारण कर सकता है और लंबे पौधे दे सकता है।
रिवीजन नोट — मेंडल का एकसंकर संकरण
• मेंडल ने उद्यान मटर (Pisum sativum) पर कार्य किया; लंबा (T), बौने (t) पर प्रभावी है।
• TT और Tt दोनों लंबे होते हैं; केवल tt बौना होता है।
• लंबा (TT) × बौना (tt) → F_(1) में सभी लंबे (Tt)।
• F_(1) का स्वपरागण (Tt × Tt) → F_(2) में लक्षणप्ररूप 3 : 1 (लंबा : बौना), जीनप्ररूप 1 : 2 : 1 (TT : Tt : tt)।
• अप्रभावी लक्षण तभी प्रकट होता है जब दोनों प्रतियाँ अप्रभावी हों — इसलिए बौना पौधा शुद्ध प्रजनन (true-breeding) करता है।
• बौना लक्षण F_(2) में फिर प्रकट होता है — कारक लुप्त नहीं होता, F_(1) में केवल छिपा रहता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• जीनप्ररूप बनाम लक्षणप्ररूप — जीनप्ररूप जीन युग्म है (Tt); लक्षणप्ररूप वह है जो दिखाई देता है (लंबा)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह युग्मविकल्पी संयोजन जिससे बौना मटर पौधा बनता है (tt); मटर के पौधों में लंबाई किस प्रकार का लक्षण है (प्रभावी)।
Reproduction · Pollination and fertilisation in plants

Q11. परागकण स्त्रीकेसर के किस भाग पर स्थानांतरित होते हैं?

  1. (a) वर्तिका
  2. (b) अंडाशय
  3. (c) बीजांड
  4. (d) वर्तिकाग्र
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) वर्तिकाग्र

उत्तर: विकल्प 4 — वर्तिकाग्र
परागण में परागकण परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, जो स्त्रीकेसर का चिपचिपा शीर्ष भाग है और उन्हें ग्रहण करता है।
रिवीजन नोट — स्त्रीकेसर और परागण
• स्त्रीकेसर (अंडप) = वर्तिकाग्र (पराग ग्रहण करता है) + वर्तिका (नली) + अंडाशय (बीजांडों को धारण करता है)।
• पुंकेसर = परागकोश (पराग बनाता है) + तंतु।
• स्व-परागण: पराग उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचता है; पर-परागण: दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर।
• पर-परागण के वाहक: वायु, जल, कीट, पक्षी।
• वर्तिकाग्र पर परागकण से एक पराग नलिका निकलती है, जो वर्तिका से होकर बीजांड तक जाती है।
• निषेचन = बीजांड के भीतर नर युग्मक का अंड के साथ संलयन।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• परागण बनाम निषेचन — परागण पराग का स्थानांतरण है; निषेचन युग्मकों का संलयन है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: परागण : पराग का स्थानांतरण :: निषेचन : ? (युग्मकों का संलयन); पुष्प का मादा जनन भाग (जायांग या स्त्रीकेसर)।
Reproduction · Flower structure and sexual reproduction in plants

Q12. पौधों में निषेचन की प्रक्रिया में अंडाशय की क्या भूमिका है?

  1. (a) परागकणों को पोषक तत्व प्रदान करना
  2. (b) नर युग्मकों का भंडारण करना
  3. (c) अंड कोशिका का निर्माण करना
  4. (d) पराग का निर्माण करना
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) अंड कोशिका का निर्माण करना

उत्तर: विकल्प 3 — अंड कोशिका का निर्माण करना
अंडाशय में बीजांड होते हैं, और प्रत्येक बीजांड में अंड कोशिका होती है — जो मादा युग्मक है।
पराग नलिका से आया नर युग्मक निषेचन में इसी अंड के साथ संलयित होता है।
रिवीजन नोट — स्त्रीकेसर के भाग और वे क्या बनते हैं
• परागकोश परागकण (नर युग्मक) बनाता है; अंडाशय में अंड युक्त बीजांड होते हैं।
• पराग नलिका वर्तिका से होकर बीजांड में पहुँचती है — इसका मार्गदर्शन रासायनिक रूप से (रसायनानुवर्तन) होता है।
• युग्मनज → भ्रूण; बीजांड → बीज; अंडाशय → फल; अंडाशय भित्ति → फलभित्ति।
• पंखुड़ियाँ, बाह्यदल, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र सामान्यतः निषेचन के बाद मुरझाकर गिर जाते हैं।
• एकलिंगी पुष्प (पपीता, तरबूज) में या तो पुंकेसर होते हैं या स्त्रीकेसर; उभयलिंगी पुष्प (गुड़हल, सरसों) में दोनों होते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अंडाशय बनाम बीजांड — अंडाशय फल बनता है; उसके भीतर का बीजांड बीज बनता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: परागण : पराग का स्थानांतरण :: निषेचन : ? (युग्मकों का संलयन); बीजांड की ओर बढ़ती पराग नलिका द्वारा दर्शाया गया अनुवर्तन (रसायनानुवर्तन)।
Heredity and Evolution · Heredity and variation

Q13. विकास (evolution) के लिए पहला मूलभूत कारक _________ है।

  1. (a) व्यष्‍टियों के बीच प्रतिस्पर्धा (competition among individuals)
  2. (b) स्वस्थ संतति (healthy offsprings)
  3. (c) आनुवंशिक विभिन्नता (genetic variation)
  4. (d) वृद्धि के लिए कोशिका विभाजन (cell division for growth)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) आनुवंशिक विभिन्नता (genetic variation)

उत्तर: विकल्प 3 — आनुवंशिक विभिन्नता (genetic variation)
विकास तभी कार्य कर सकता है जब किसी समष्टि के सदस्य एक-दूसरे से भिन्न हों।
ये वंशागत भिन्नताएँ (आनुवंशिक विभिन्नताएँ) वह कच्चा माल हैं जिस पर प्राकृतिक वरण कार्य करता है, इसलिए विभिन्नता पहला और मूलभूत कारक है।
रिवीजन नोट — विभिन्नता और विकास
• विभिन्नता मुख्यतः जनन के दौरान उत्पन्न होती है — DNA प्रतिकृति में छोटी त्रुटियों और लैंगिक जनन में जीनों के मिश्रण से।
• लैंगिक जनन अलैंगिक जनन की तुलना में अधिक विभिन्नता उत्पन्न करता है।
• जीवित रहने में सहायक विभिन्नताओं को प्राकृतिक वरण बढ़ावा देता है (चार्ल्स डार्विन, ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़, 1859)।
• आनुवंशिक विचलन (genetic drift) — जीन आवृत्ति में संयोगवश परिवर्तन, जो छोटी समष्टियों में सबसे अधिक स्पष्ट होता है।
• अनेक पीढ़ियों में विभिन्नताओं के संचय से जाति-उद्भवन (नई जातियाँ) होता है।
• उत्परिवर्तन DNA अनुक्रम में परिवर्तन है; यह नई विभिन्नता का अंतिम स्रोत है।
• जीवनकाल में उपार्जित लक्षण (जैसे बॉडी बिल्डर की मांसपेशियाँ) वंशागत नहीं होते — इनसे विकास नहीं होता।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• विभिन्नता बनाम प्राकृतिक वरण — विभिन्नता भिन्नताएँ उपलब्ध कराती है; प्राकृतिक वरण उनमें से चयन करता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह प्रक्रिया जिसमें पीढ़ियों तक छोटी वंशागत भिन्नताओं से नए जीव रूप बनते हैं (विकास); DNA अनुक्रम में ऐसा परिवर्तन जो जीनोटाइप और फीनोटाइप बदल दे (उत्परिवर्तन)।
Reproduction · Seed, fruit and germination

Q14. पशुओं द्वारा फैलाए जाने वाले बीजों में अक्सर ________________।

  1. (a) हुक या खाने योग्य मांस होता है
  2. (b) पानी में आसानी से तैर सकते हैं
  3. (c) बहुत छोटे और हल्के वजन वाले होते हैं
  4. (d) पंख या पैराशूट होते हैं
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) हुक या खाने योग्य मांस होता है

उत्तर: विकल्प 1 — हुक या खाने योग्य मांस होता है
जंतु बीजों को दो तरह से ले जाते हैं: हुक या काँटेदार फल उनके बालों (फर) से चिपक जाते हैं,
और गूदेदार फल खा लिए जाते हैं तथा बीज बाहर निकल जाते हैं।
रिवीजन नोट — बीजों का प्रकीर्णन
• प्रकीर्णन क्यों: मूल पौधे के साथ प्रकाश, जल और खनिजों के लिए प्रतिस्पर्धा से बचाव; पौधा नए स्थानों तक पहुँचता है।
• जंतु: हुक या काँटे — ज़ैंथियम, यूरेना; गूदेदार खाने योग्य फल — आम, अमरूद, बेरी।
• पवन: छोटे, हल्के, पंखयुक्त या रोमयुक्त बीज — सहजन, मेपल, मदार (आक), सूरजमुखी, कपास।
• जल: हल्के, स्पंजी या रेशेदार आवरण वाले तैरने वाले बीज — नारियल, कमल।
• विस्फोट: फल फटकर बीजों को दूर फेंकते हैं — अरंडी, बालसम।
• निषेचन के बाद अंडाशय फल बन जाता है और बीजांड बीज बन जाते हैं।
पंख या पैराशूट का अर्थ पवन, तैरने का अर्थ जल — हुक या गूदे का अर्थ जंतु।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q15. बहुकोशिकीय जीव परिपक्व होने पर, किस प्रक्रिया में छोटे टुकड़ों में विखंडित हो जाते हैं?

  1. (a) खंडन (Fragmentation)
  2. (b) बीजाणुजनन (Sporulation)
  3. (c) विखंडन (Fission)
  4. (d) पुनर्जनन (Regeneration)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) खंडन (Fragmentation)

उत्तर: विकल्प 1 — खंडन (Fragmentation)
खंडन में एक सरल बहुकोशिकीय जीव परिपक्व होने पर छोटे टुकड़ों में टूट जाता है।
प्रत्येक टुकड़ा एक नए जीव में विकसित हो जाता है — जैसे तंतुमय शैवाल स्पाइरोगायरा।
रिवीजन नोट — अलैंगिक जनन की विधियाँ
• विखंडन — एककोशिकीय जीव विभाजित होता है; अमीबा, पैरामीशियम में द्विखंडन; प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी) में बहुखंडन।
• मुकुलन — एक मुकुल बाहर निकलकर अलग हो जाती है; हाइड्रा और यीस्ट।
• खंडन — परिपक्व शरीर अपने आप टुकड़ों में टूट जाता है; स्पाइरोगायरा।
• पुनर्जनन — कटा या टूटा भाग बढ़कर पूर्ण जीव बन जाता है; प्लेनेरिया, हाइड्रा। इसके लिए विशिष्ट कोशिकाओं की आवश्यकता होती है।
• बीजाणु निर्माण — बीजाणुधानी के भीतर बीजाणु; राइज़ोपस (ब्रेड मोल्ड)।
• कायिक प्रवर्धन — जड़, तने या पत्ती से नए पौधे; ब्रायोफिलम की पत्तियाँ, आलू के कंद।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• खंडन बनाम पुनर्जनन — खंडन परिपक्व होने पर स्वाभाविक रूप से होता है; पुनर्जनन किसी आकस्मिक कटाव या चोट के बाद होता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अमीबा, यीस्ट और हाइड्रा का एक ही जनक से जनन अलैंगिक जनन के बारे में क्या दर्शाता है (यह युग्मकों के संलयन के बिना होता है)।
Heredity and Evolution · Mendel's laws and experiments

Q16. मेंडल ने कुछ अनुकूल कारणों से मटर (garden pea) का चयन किया था। निम्नलिखित में से कौन-सा कारण उनके प्रयोगों के लिए आवश्यक चयन का कारण नहीं है?

  1. (a) वे अनेक संतति उत्पन्न करते हैं।
  2. (b) उनमें आसानी से देखे जा सकने वाले विशेषक होते हैं।
  3. (c) वे स्व-परागित तथा पर-परागित हो सकते हैं।
  4. (d) उनमें दीर्घ जनन काल होता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) उनमें दीर्घ जनन काल होता है।

उत्तर: विकल्प 4 — उनमें दीर्घ जनन काल होता है।
मटर का जीवन-चक्र छोटा होता है, इसलिए मेंडल कई पीढ़ियों का अध्ययन शीघ्रता से कर सके।
दीर्घ जनन काल एक हानि होता, कारण नहीं।
रिवीजन नोट — मेंडल और मटर
• ग्रेगर जॉन मेंडल — आनुवंशिकी के जनक; उन्होंने 1856 से 1863 तक मटर (Pisum sativum) पर कार्य किया।
• मटर चुनने के कारण: छोटा जीवन-चक्र, अनेक बीज (संतति), स्पष्ट विपरीत विशेषक, और ऐसे पुष्प जो स्व-परागित तथा पर-परागित दोनों हो सकते हैं।
• उन्होंने विपरीत विशेषकों के 7 युग्मों का अध्ययन किया — जैसे लंबा/बौना पौधा, गोल/झुर्रीदार बीज, पीला/हरा बीज।
• एकसंकर संकरण (लंबा × बौना): F2 लक्षणप्ररूप अनुपात 3 : 1, जीनप्ररूप अनुपात 1 : 2 : 1।
• द्विसंकर संकरण: F2 लक्षणप्ररूप अनुपात 9 : 3 : 3 : 1।
• मेंडल के नियम: प्रभाविता, पृथक्करण (युग्मकों की शुद्धता), स्वतंत्र अपव्यूहन।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: बौने मटर के पौधे देने वाला एलील संयोजन (tt); लंबाई किस प्रकार का विशेषक है (प्रभावी); एलीलों के अलग होने का नियम (पृथक्करण का नियम)।
Heredity and Evolution · Genetic terms (dominant, recessive, genotype, phenotype)

Q17. किसी विशेषक को नियंत्रित करने वाले जीन के दो संस्करण क्या कहलाते हैं?

  1. (a) एलील (Alleles)
  2. (b) गुणसूत्र (Chromosomes)
  3. (c) उत्परिवर्तन (Mutations)
  4. (d) प्रोटीन (Proteins)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) एलील (Alleles)

उत्तर: विकल्प 1 — एलील (Alleles)
किसी एक विशेषक को नियंत्रित करने वाले जीन के दो वैकल्पिक रूप उसके एलील कहलाते हैं।
मटर में, T (लंबा) और t (बौना) पौधे की लंबाई के जीन के एलील हैं।
रिवीजन नोट — आनुवंशिकी के मूल पद
• जीन — DNA का वह खंड जो किसी प्रोटीन का कूट देता है; आनुवंशिकता की इकाई।
• समयुग्मजी — दोनों एलील समान (TT या tt); विषमयुग्मजी — भिन्न (Tt)।
• प्रभावी एलील एक प्रति में भी प्रकट होता है (T); अप्रभावी केवल युग्म में प्रकट होता है (tt)।
• जीनप्ररूप — एलीलों की संरचना (Tt); लक्षणप्ररूप — दिखाई देने वाला विशेषक (लंबा)।
• एलील समजात गुणसूत्रों के एक युग्म पर एक ही स्थान (लोकस) पर स्थित होते हैं।
• मनुष्य में 46 गुणसूत्र होते हैं — 22 युग्म अलिंग गुणसूत्र और 1 युग्म लिंग गुणसूत्र।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• एलील बनाम जीन — जीन विशेषक का निर्देश है; एलील उसके संस्करण हैं (T और t)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: बौने मटर के पौधे देने वाला एलील संयोजन (tt); युग्मक निर्माण के समय एलीलों के अलग होने की व्याख्या करने वाला नियम (पृथक्करण का नियम)।
Reproduction · Vegetative propagation

Q18. कायिक प्रवर्धन (vegetative propagation) की प्रक्रिया में, रोपण (grafting ) में पौधे के किस भाग का उपयोग किया जाता है?

  1. (a) तना (Stem)
  2. (b) बीज (Seed)
  3. (c) पत्ता (Leaf)
  4. (d) जड़ (Root)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) तना (Stem)

उत्तर: विकल्प 1 — तना (Stem)
रोपण (grafting) में एक पौधे का तने का टुकड़ा (कलम / सायन) दूसरे पौधे के जड़युक्त तने (स्टॉक) से जोड़ा जाता है।
दोनों मिलकर एक पौधे के रूप में बढ़ते हैं।
रिवीजन नोट — कायिक प्रवर्धन
• बीज के बिना कायिक भागों — जड़, तना या पत्ती — से नए पौधे।
• प्राकृतिक: आलू (तना कंद), अदरक (प्रकंद), ब्रायोफिलम (पत्ती के किनारों पर कलिकाएँ), शकरकंद (जड़)।
• कृत्रिम: कर्तन (गुलाब, गन्ना), दाब कलम (चमेली), रोपण (आम, सेब, नींबू वर्गीय)।
• रोपण में कलम (सायन) फल की गुणवत्ता देता है; स्टॉक जड़ तंत्र देता है।
• लाभ: पौधे जनक के आनुवंशिक रूप से समान, जल्दी फल देते हैं, और बीज बनाने की क्षमता खो चुके पौधे — केला, गुलाब, चमेली — उगाए जा सकते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• कलम (सायन) बनाम स्टॉक — कलम ऊपर लगाया जाने वाला प्ररोह है; स्टॉक नीचे का जड़युक्त भाग है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: किसान कर्तन, रोपण और ऊतक संवर्धन को क्यों पसंद करते हैं (आनुवंशिक रूप से समान पौधे); कायिक प्रवर्धन के बारे में गलत कथन (नए पौधे बीज धारण करने वाली संरचनाओं से उगते हैं)।
Reproduction · Reproductive health and contraception

Q19. हार्मोन आधारित गर्भनिरोधक (hormonal contraceptives prevent), गर्भावस्था को कैसे रोकते हैं?

  1. (a) अंडे का मोचन रोकने के लिए हार्मोन संतुलन को बदलकर (By changing the hormonal balance to prevent egg release)
  2. (b) शुक्राणु उत्पादन को बढ़ाकर (By increasing sperm production)
  3. (c) डिम्बवाहिनी को अवरुद्ध करके (By blocking the fallopian tubes)
  4. (d) भौतिक अवरोध उत्‍पन्‍न करके (By creating a physical barrier)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) अंडे का मोचन रोकने के लिए हार्मोन संतुलन को बदलकर (By changing the hormonal balance to prevent egg release)

उत्तर: विकल्प 1 — अंडे का मोचन रोकने के लिए हार्मोन संतुलन को बदलकर (By changing the hormonal balance to prevent egg release)
मुख से ली जाने वाली गोलियों जैसे हार्मोनल गर्भनिरोधक शरीर का हार्मोन संतुलन बदल देते हैं,
जिससे अंडाशय से अंडे मुक्त नहीं होते।
अंडा न होने पर निषेचन नहीं हो सकता।
रिवीजन नोट — गर्भनिरोधन की विधियाँ
• रोधिका (अवरोधक) विधियाँ — कंडोम, डायाफ्राम, गर्भाशय ग्रीवा आवरण शुक्राणुओं को अंडे तक पहुँचने से रोकते हैं; कंडोम यौन संचारित रोगों (STD) से भी बचाता है।
• हार्मोनल (रासायनिक) विधियाँ — मुख से ली जाने वाली गोलियाँ; इनके दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
• अंतर्गर्भाशयी युक्तियाँ (IUCD) — लूप या कॉपर-T गर्भाशय में लगाए जाते हैं; इनसे जलन हो सकती है।
• शल्य विधियाँ — पुरुष नसबंदी (vasectomy) में शुक्रवाहक (vas deferens) अवरुद्ध की जाती है; महिला नसबंदी (tubectomy) में डिम्बवाहिनी (fallopian tube) अवरुद्ध की जाती है।
• शल्य क्रिया गर्भधारण रोकती है, पर गोनोरिया, सिफलिस, मस्से और HIV-AIDS जैसे यौन संचारित रोगों से कोई सुरक्षा नहीं देती।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• हार्मोनल बनाम रोधिका — गोलियाँ अंडे का मोचन रोकती हैं; कंडोम और डायाफ्राम शुक्राणुओं को भौतिक रूप से रोकते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: शल्य गर्भनिरोधन की सीमा (यह यौन संचारित संक्रमणों को नहीं रोकता); स्त्री की अंडवाहिनियाँ अवरुद्ध होने पर प्रयुक्त तकनीक (इन विट्रो निषेचन (IVF))।

Modern History (1)

Socio-Religious Reform Movements · Anti-caste and depressed-class movements

Q20. जल निकायों, मंदिरों और स्कूलों जैसे सार्वजनिक संसाधनों तक पहुंच के लिए डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में महाराष्ट्र में 1927 में शुरू किए गए आंदोलन का नाम क्या था?

  1. (a) बंबई किसान विद्रोह (Bombay Peasants Revolt)
  2. (b) खेड़ा सत्‍याग्रह (Kheda Satyagraha)
  3. (c) शहादा आंदोलन (Shahada Movement)
  4. (d) महाड़ सत्याग्रह (Mahad Satyagraha)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) महाड़ सत्याग्रह (Mahad Satyagraha)

उत्तर: विकल्प 4 — महाड़ सत्याग्रह
मार्च 1927 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में दलितों ने महाड़ (रायगढ़ जिला, महाराष्ट्र) के सार्वजनिक चवदार तालाब से जल पिया।
इसने सार्वजनिक जल स्रोतों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के उपयोग के उनके अधिकार को स्थापित किया।
रिवीजन नोट — डॉ. बी.आर. अंबेडकर और जाति-विरोधी आंदोलन
• बहिष्कृत हितकारिणी सभा — 1924 में बंबई में दलित वर्गों की शिक्षा और कल्याण के लिए स्थापित।
• महाड़ सत्याग्रह — 20 मार्च 1927; 25 दिसंबर 1927 को अंबेडकर ने महाड़ में सार्वजनिक रूप से मनुस्मृति का दहन किया।
• कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह — नासिक, 1930।
• दलित वर्ग संघ (Depressed Classes Association) — 1930।
• गांधीजी के साथ पूना समझौता — 1932: पृथक निर्वाचक मंडल के स्थान पर दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटें।
• समाचार पत्र: मूकनायक (1920), बहिष्कृत भारत (1927); पुस्तक जाति का विनाश (Annihilation of Caste, 1936)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• महाड़ सत्याग्रह बनाम वैकोम सत्याग्रह — महाड़ (1927, महाराष्ट्र) जल के लिए था, जिसका नेतृत्व अंबेडकर ने किया; वैकोम (1924–25, केरल) मंदिर की सड़कों के उपयोग के लिए था, जो टी.के. माधवन और ई.वी. रामासामी पेरियार से जुड़ा है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: महाड़ सत्याग्रह के नेता (बी.आर. अंबेडकर); बहिष्कृत हितकारिणी सभा के संस्थापक (बी.आर. अंबेडकर, 1924); अंबेडकर के दलित वर्ग संघ का वर्ष (1930)।

Polity (3)

Union Executive · President - election and qualifications

Q21. राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी योग्यता आवश्यक नहीं है?

  1. (a) उच्च शिक्षित होना
  2. (b) भारत का नागरिक होना
  3. (c) लोकसभा के सदस्य के रूप में चुनाव के लिए योग्य होना
  4. (d) 35 वर्ष की आयु पूर्ण करना
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) उच्च शिक्षित होना

उत्तर: विकल्प 1 — उच्च शिक्षित होना
अनुच्छेद 58 राष्ट्रपति पद के लिए योग्यताएँ निर्धारित करता है।
इसमें कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं है।
रिवीजन नोट — राष्ट्रपति की योग्यताएँ और निर्वाचन
• अनुच्छेद 58: भारत का नागरिक हो, 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो और लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने के योग्य हो।
• संघ, किसी राज्य या स्थानीय प्राधिकरण के अधीन कोई लाभ का पद धारण न करता हो।
• अनुच्छेद 54: निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचन — दोनों सदनों के निर्वाचित सांसद + राज्यों, दिल्ली और पुदुचेरी के निर्वाचित विधायक।
• नामांकन के लिए 50 प्रस्तावक और 50 अनुमोदक आवश्यक; जमानत राशि ₹15,000।
• अनुच्छेद 56: कार्यकाल 5 वर्ष; पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र (अनुच्छेद 57)।
• अनुच्छेद 71: निर्वाचन संबंधी विवादों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय करता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• राष्ट्रपति बनाम उपराष्ट्रपति — दोनों के लिए 35 वर्ष आवश्यक हैं, परंतु राष्ट्रपति को लोकसभा का और उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने के योग्य होना चाहिए।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की न्यूनतम आयु (35 वर्ष); निर्दलीय के रूप में निर्वाचित एकमात्र राष्ट्रपति (वी. वी. गिरि); राष्ट्रपति निर्वाचन विवादों का निपटारा कौन करता है (सर्वोच्च न्यायालय, अनु. 71)।
Fundamental Rights · Right to Freedom (Articles 19-22)

Q22. भारतीय संविधान के______ अनुच्‍छेद में दोहरे दंड, आत्‍म-दोषारोपण और पूर्वव्‍यापी कानूनों से सुरक्षा जैसी अवधारणाओं का उल्लेख किया गया है।

  1. (a) अनुच्छेद 19
  2. (b) अनुच्छेद 21
  3. (c) अनुच्छेद 23
  4. (d) अनुच्छेद 20
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) अनुच्छेद 20

उत्तर: विकल्प 4 — अनुच्छेद 20
अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण देता है।
इसमें कार्योत्तर (ex post facto) कानून, दोहरा दंड और आत्म-दोषारोपण शामिल हैं।
रिवीजन नोट — अनुच्छेद 20 और उसके निकटवर्ती अनुच्छेद
• अनुच्छेद 20(1) — किसी कार्योत्तर (भूतलक्षी) आपराधिक कानून के अंतर्गत दंड नहीं।
• अनुच्छेद 20(2) — किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा (दोहरा दंड)।
• अनुच्छेद 20(3) — किसी अभियुक्त को स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी बनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा (आत्म-दोषारोपण)।
• अनुच्छेद 20 और 21 को राष्ट्रीय आपातकाल में भी निलंबित नहीं किया जा सकता (44वाँ संशोधन, 1978)।
• अनुच्छेद 21 — प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण; अनुच्छेद 21A — निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा (6–14 वर्ष), 86वें संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया।
• अनुच्छेद 22 — गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण; अनुच्छेद 23 — मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम (बेगार) पर प्रतिबंध।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अनुच्छेद 21A जोड़ने वाला संशोधन (86वाँ संशोधन अधिनियम); अनुच्छेद 22 के अंतर्गत आने वाले निरोध के दो प्रकार (दंडात्मक और निवारक)।
Union Executive · Attorney General and Solicitor General

Q23. निम्नलिखित में से कौन, स्वतंत्र भारत के प्रथम महान्यायवादी (first attorney General) थे?

  1. (a) सोली सोराबजी (Soli Sorabjee)
  2. (b) एस.वी. गुप्ता (SV Gupta)
  3. (c) नीरेन डे (Niren de)
  4. (d) एम.सी. सीतलवाड़ (MC Setalvad)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) एम.सी. सीतलवाड़ (MC Setalvad)

उत्तर: विकल्प 4 — एम.सी. सीतलवाड़ (MC Setalvad)
एम.सी. (मोतीलाल चिमनलाल) सीतलवाड़ स्वतंत्र भारत के प्रथम महान्यायवादी थे,
जिन्होंने 1950 से 1963 तक पद सँभाला।
वे आज भी सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले महान्यायवादी हैं।
रिवीजन नोट — भारत का महान्यायवादी
• अनुच्छेद 76 — भारत का सर्वोच्च विधि अधिकारी, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
• योग्यता: सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता होनी चाहिए।
• कोई निश्चित कार्यकाल नहीं; वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
• उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है — अनुच्छेद 76(3)।
• वह संसद में बोल सकता है, पर उसे मत देने का अधिकार नहीं है — अनुच्छेद 88; वह मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता।
• अन्य महान्यायवादी: नीरेन डे (1968–77), सोली सोराबजी (1989–90, 1998–2004); आर. वेंकटरमणी अक्टूबर 2022 से इस पद पर हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• महान्यायवादी बनाम महाधिवक्ता — संघ का विधि अधिकारी (अनुच्छेद 76) बनाम राज्य का विधि अधिकारी (अनुच्छेद 165, राज्यपाल द्वारा नियुक्त)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: महान्यायवादी से संबंधित अनुच्छेद (अनुच्छेद 76); उसकी नियुक्ति कौन करता है (राष्ट्रपति); उसका कार्यकाल (संविधान द्वारा निश्चित नहीं); राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी (महाधिवक्ता)।

Physics (9)

Electricity · Electric power and electrical energy

Q24. प्रकाश बल्बों और पंखों की तुलना में गीज़र और एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों को आवश्यकता होती है:

  1. (a) अधिक शक्ति की
  2. (b) कम वोल्टता की
  3. (c) कम शक्ति की
  4. (d) अधिक वोल्टता की
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) अधिक शक्ति की

उत्तर: विकल्प 1 — अधिक शक्ति की
घर के प्रत्येक उपकरण को समान 220 V मिलता है, क्योंकि घरेलू वायरिंग पार्श्वक्रम (समांतर) में होती है।
गीज़र और AC की शक्ति रेटिंग कहीं अधिक (लगभग 1,500–2,000 W) होती है, जबकि बल्ब की लगभग 60 W और पंखे की लगभग 75 W होती है।
चूँकि P = VI, समान वोल्टता पर ये अधिक धारा लेते हैं।
रिवीजन नोट — घरेलू उपकरणों की शक्ति
• P = V × I; मात्रक वाट (W); 1 kW = 1000 W।
• भारत में घरेलू आपूर्ति: 220 V AC, 50 Hz।
• अधिक शक्ति वाले उपकरण (गीज़र, AC, हीटर, इस्त्री) 15 A परिपथ पर चलते हैं; बल्ब और पंखे 5 A परिपथ पर।
• तापन उपकरण धारा के तापीय प्रभाव (H = I²Rt) का उपयोग करते हैं — इसलिए अधिक धारा लेते हैं।
• व्यय ऊर्जा = शक्ति × समय; 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10⁶ J।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अधिक शक्ति बनाम अधिक वोल्टता — सभी उपकरणों को समान वोल्टता मिलती है; अंतर शक्ति और धारा में है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: गीज़र और एयर कूलर के लिए प्रयुक्त परिपथ की धारा रेटिंग (15 A)।
Electricity · Resistors in series and parallel

Q25. जब कई प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है, तो संयोजन का तुल्य प्रतिरोध होता है:

  1. (a) अलग-अलग प्रतिरोधों के योग से कम
  2. (b) अलग-अलग प्रतिरोधों के योग से अधिक
  3. (c) अलग-अलग प्रतिरोधों के योग के बराबर
  4. (d) अलग-अलग प्रतिरोधों के गुणनफल के बराबर
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) अलग-अलग प्रतिरोधों के योग के बराबर

उत्तर: विकल्प 3 — अलग-अलग प्रतिरोधों के योग के बराबर
श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक से समान धारा प्रवाहित होती है और विभवांतर जुड़ते जाते हैं।
इसलिए R_(s) = R_(1) + R_(2) + R_(3) + …
रिवीजन नोट — प्रतिरोधकों का श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजन
• श्रेणीक्रम: प्रत्येक में समान धारा; V = V_(1) + V_(2) + V_(3); R_(s) सबसे बड़े प्रतिरोधक से भी अधिक होता है।
• पार्श्वक्रम: प्रत्येक के सिरों पर समान विभवांतर; 1/R_(p) = 1/R_(1) + 1/R_(2) + …
• R_(p) संयोजन के सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी कम होता है।
• n समान प्रतिरोधक R: श्रेणीक्रम = nR, पार्श्वक्रम = R/n; अनुपात R_(s) : R_(p) = n² : 1।
• घरेलू वायरिंग पार्श्वक्रम में होती है — प्रत्येक उपकरण को पूरा 220 V मिलता है और उसे अलग से चालू/बंद किया जा सकता है।
• श्रेणीक्रम में एक अवयव खराब होने पर पूरा परिपथ टूट जाता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• योग बनाम योग से अधिक — श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध ठीक योग के बराबर है; यह प्रत्येक प्रतिरोधक से अधिक है, योग से अधिक नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: श्रेणीक्रम में जुड़े 3 Ω, 2 Ω और 1 Ω को 9 V की बैटरी से जोड़ने पर धारा (1.5 A); श्रेणीक्रम संयोजन का एक व्यावहारिक कारण (कुल प्रतिरोध बढ़ाना और धारा सीमित करना)।
Light - Refraction and Lenses · Convex lens - image formation and uses

Q26. पतले लेंसों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन किसी लेंस के द्वारक और उसकी वक्रता त्रिज्या के बीच के संबंध का वर्णन करता है?

  1. (a) द्वारक, वक्रता त्रिज्या से बहुत छोटा होता है।
  2. (b) द्वारक, वक्रता त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता है।
  3. (c) द्वारक, वक्रता त्रिज्या के बराबर होता है।
  4. (d) द्वारक, वक्रता त्रिज्या से बहुत बड़ा होता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) द्वारक, वक्रता त्रिज्या से बहुत छोटा होता है।

उत्तर: विकल्प 1 — द्वारक, वक्रता त्रिज्या से बहुत छोटा होता है।
NCERT में केवल उन्हीं लेंसों का अध्ययन किया जाता है जिनका द्वारक, वक्रता त्रिज्या से बहुत कम होता है।
ऐसे लेंसों को छोटे द्वारक वाले पतले लेंस कहते हैं; लेंस सूत्र और किरण नियम इन्हीं पर लागू होते हैं।
रिवीजन नोट — गोलीय लेंस से जुड़े पद
• द्वारक: लेंस की वृत्ताकार रूपरेखा का प्रभावी व्यास।
• वक्रता केंद्र (C): उस गोले का केंद्र जिसका भाग लेंस का पृष्ठ है; लेंस के दो वक्रता केंद्र होते हैं (C_(1), C_(2))।
• मुख्य अक्ष: दोनों वक्रता केंद्रों से गुजरने वाली रेखा।
• प्रकाशिक केंद्र (O): लेंस का केंद्रीय बिंदु; इससे गुजरने वाली किरण बिना विचलन के निकल जाती है।
• क्षमता P = 1/f (f मीटर में); SI मात्रक डाइऑप्टर (D)।
• उत्तल लेंस प्रकाश को अभिसरित करता है (f धनात्मक); अवतल लेंस प्रकाश को अपसरित करता है (f ऋणात्मक)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• द्वारक बनाम फोकस दूरी — द्वारक लेंस की चौड़ाई है; फोकस दूरी अक्ष के अनुदिश एक दूरी है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पतले लेंस के प्रकाशिक केंद्र से गुजरने वाली किरण का पथ (यह बिना विचलन के सीधी निकल जाती है)।
Light - Reflection and Mirrors · Mirror formula and magnification

Q27. यदि कोई प्रतिबिंब +1 आवर्धन वाले गोलीय दर्पण द्वारा बनाया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

  1. (a) प्रतिबिम्ब आभासी तथा वस्तु के आकार के बराबर होता है।
  2. (b) प्रतिबिम्ब वास्तविक और आकार में वस्तु के आकार के बराबर होता है।
  3. (c) प्रतिबिम्ब वास्तविक है और वस्तु के आकार का दोगुना होता है।
  4. (d) प्रतिबिम्ब आभासी तथा वस्तु के आकार का आधा होता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) प्रतिबिम्ब आभासी तथा वस्तु के आकार के बराबर होता है।

उत्तर: विकल्प 1 — प्रतिबिम्ब आभासी तथा वस्तु के आकार के बराबर होता है।
धनात्मक आवर्धन का अर्थ है प्रतिबिंब सीधा है, और एक दर्पण से बना सीधा प्रतिबिंब सदैव आभासी होता है।
परिमाण 1 का अर्थ है प्रतिबिंब वस्तु के समान आकार का है।
रिवीजन नोट — गोलीय दर्पण द्वारा आवर्धन
• m = प्रतिबिंब की ऊँचाई ÷ वस्तु की ऊँचाई = −v/u।
• m धनात्मक ⇒ आभासी और सीधा; m ऋणात्मक ⇒ वास्तविक और उल्टा।
• |m| > 1 आवर्धित, |m| = 1 समान आकार, |m| < 1 छोटा।
• उत्तल दर्पण सदैव m धनात्मक और 1 से कम देता है।
• अवतल दर्पण वस्तु C पर होने पर m = −1 देता है, और वस्तु P और F के बीच होने पर m धनात्मक और 1 से अधिक देता है।
• समतल दर्पण सदैव m = +1 देता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• m = +1 बनाम m = −1 — +1 आभासी और सीधा (समतल दर्पण); −1 वास्तविक और उल्टा (अवतल दर्पण, वस्तु C पर)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: उल्टे, छोटे प्रतिबिंब के लिए आवर्धन का चिह्न और परिमाण (ऋणात्मक, एक से कम); f = 10 cm वाले अवतल दर्पण से 15 cm पर रखी वस्तु का आवर्धन (−2)।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Solenoid and electromagnet

Q28. किसी परिनालिका की चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न निम्नलिखित में से किसके पैटर्न के समान होता है?

  1. (a) वलय चुंबक (ring magnet)
  2. (b) नाल-चुंबक (horseshoe magnet)
  3. (c) बटन चुंबक (button magnet)
  4. (d) दंड चुंबक (bar magnet)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) दंड चुंबक (bar magnet)

उत्तर: विकल्प 4 — दंड चुंबक (bar magnet)
धारावाही परिनालिका की क्षेत्र रेखाएँ दंड चुंबक जैसी होती हैं।
इसका एक सिरा उत्तरी ध्रुव और दूसरा दक्षिणी ध्रुव की तरह व्यवहार करता है।
रिवीजन नोट — परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र
• परिनालिका — बेलन के आकार में विद्युतरोधी ताँबे के तार के निकट-निकट लिपटे अनेक फेरों वाली कुंडली।
• परिनालिका के भीतर क्षेत्र रेखाएँ समांतर सरल रेखाएँ होती हैं — वहाँ क्षेत्र एकसमान होता है।
• बाहर रेखाएँ N सिरे से S सिरे की ओर जाती हैं, ठीक दंड चुंबक के चारों ओर की तरह।
• फेरों की संख्या अधिक, धारा अधिक और नरम लोहे की क्रोड होने पर क्षेत्र की प्रबलता बढ़ती है।
• नरम लोहे की क्रोड वाली परिनालिका विद्युत चुंबक है — चुंबकत्व केवल तब तक रहता है जब तक धारा बहती है।
• प्रत्येक सिरे की ध्रुवता दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम से ज्ञात होती है (किसी सिरे से देखने पर दक्षिणावर्त धारा = S ध्रुव)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• विद्युत चुंबक बनाम स्थायी चुंबक — विद्युत चुंबक में नरम लोहा होता है, यह अस्थायी और समायोज्य होता है; स्थायी चुंबक में इस्पात / ऐल्निको होता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: परिनालिका की क्षेत्र रेखाओं का आकार (भीतर समांतर सरल रेखाएँ); परिनालिका अपने भीतर रखे नरम लोहे को चुंबकित क्यों कर सकती है (भीतर प्रबल, एकसमान क्षेत्र)।
Human Eye and the Colourful World · Scattering of light (blue sky, red sunset, Tyndall effect)

Q29. खतरे के संकेत प्रायः लाल रंग के क्यों होते हैं?

  1. (a) लाल प्रकाश अन्य रंगों की तुलना में अधिक परावर्तक होता है।
  2. (b) लाल रंग सौंदर्य की दृष्टि से मनभावन होता है।
  3. (c) लाल प्रकाश को कृत्रिम रूप से बनाना आसान है।
  4. (d) लाल प्रकाश की तरंगदैर्ध्य लंबी होती है और यह सबसे कम प्रकीर्णित होता है, जिससे यह दूर से दिखाई देता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) लाल प्रकाश की तरंगदैर्ध्य लंबी होती है और यह सबसे कम प्रकीर्णित होता है, जिससे यह दूर से दिखाई देता है।

उत्तर: विकल्प 4 — लाल प्रकाश की तरंगदैर्ध्य लंबी होती है और यह सबसे कम प्रकीर्णित होता है, जिससे यह दूर से दिखाई देता है।
सूक्ष्म कण छोटी तरंगदैर्ध्य को लंबी तरंगदैर्ध्य की तुलना में कहीं अधिक प्रकीर्णित करते हैं।
दृश्य प्रकाश में लाल की तरंगदैर्ध्य सबसे लंबी होती है, इसलिए यह कोहरे और धुएँ से सबसे कम प्रकीर्णन के साथ गुजर जाता है।
रिवीजन नोट — प्रकाश का प्रकीर्णन
• रैले प्रकीर्णन: तीव्रता ∝ 1/λ^(4) — तरंगदैर्ध्य आधी करने पर प्रकीर्णन 16 गुना बढ़ जाता है।
• तरंगदैर्ध्य के अनुसार दृश्य क्रम: VIBGYOR — बैंगनी सबसे छोटी (लगभग 400 nm), लाल सबसे लंबी (लगभग 700 nm)।
• नीला आकाश — वायु के अणु लाल की तुलना में नीले प्रकाश को अधिक प्रकीर्णित करते हैं।
• सूर्योदय और सूर्यास्त पर लाल सूर्य — प्रकाश वायु की मोटी परत से गुजरता है, नीला प्रकीर्णित होकर हट जाता है, लाल आँख तक पहुँचता है।
• अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों को आकाश काला दिखता है — प्रकाश को प्रकीर्णित करने के लिए वायुमंडल नहीं होता।
• टिंडल प्रभाव — कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन, जैसे धूल भरे कमरे में सूर्य की किरण।
• बहुत बड़े कण (बादल) सभी रंगों को समान रूप से प्रकीर्णित करते हैं, इसलिए बादल सफेद दिखते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: दिन में आकाश नीला क्यों दिखता है (नीला, छोटी तरंगदैर्ध्य, अधिक प्रकीर्णित होता है); कणों का आकार प्रकीर्णन को कैसे प्रभावित करता है (छोटे कण छोटी तरंगदैर्ध्य को अधिक प्रकीर्णित करते हैं)।
Light - Reflection and Mirrors · Numericals on mirrors

Q30. एक वस्तु 8 cm फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण के सामने 12 cm की दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब दूरी (v) कितनी है?

  1. (a) +20 cm
  2. (b) −20 cm
  3. (c) +4.8 cm
  4. (d) −4.8 cm
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) +4.8 cm

दर्पण सूत्र।
1/v + 1/u = 1/f
अतः 1/v = 1/f − 1/u
चिह्न (नई कार्तीय चिह्न परिपाटी)।
वस्तु दर्पण के सामने ⇒ u = −12 cm
उत्तल दर्पण ⇒ फोकस पीछे ⇒ f = +8 cm
मान रखें।
1/v = 1/8 − 1/(−12)
= 1/8 + 1/12
= 3/24 + 2/24
= 5/24
v = 24/5 = +4.8 cm
उत्तर: +4.8 cm
रिवीजन नोट — उत्तल दर्पण
• उत्तल दर्पण सदैव दर्पण के पीछे, P और F के बीच आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
• उत्तल दर्पण की f और R धनात्मक होती हैं; R = 2f।
• यहाँ आवर्धन: m = −v/u = −4.8/(−12) = +0.4 (सीधा, छोटा)।
• वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में प्रयुक्त — अधिक विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र देता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: 2 m त्रिज्या वाले उत्तल दर्पण से 3 m दूर कार का प्रतिबिंब (दर्पण के पीछे 0.75 m); 50 cm त्रिज्या वाले उत्तल दर्पण का फोकस (दर्पण के पीछे 25 cm)।
उत्तल दर्पण के लिए धनात्मक v का अर्थ बस यह है कि प्रतिबिंब उसके पीछे है — −4.8 cm, f को धनात्मक लेना भूल जाने से आता है।
Electricity · Numericals on electricity

Q31. एक इलैक्ट्रिक पंखा 220 V जनित्र (generator) से संयोजित है। धारा 0.50 A है। पंखे द्वारा उपयोग की जाने वाली शक्ति कितनी है?

  1. (a) 440 वॉट
  2. (b) 11 वॉट
  3. (c) 110 वॉट
  4. (d) 220 वॉट
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) 110 वॉट

सूत्र — विद्युत शक्ति।
शक्ति = विभवांतर × धारा
P = V × I
मान रखें।
V = 220 V, I = 0.50 A
P = 220 × 0.50 = 110 W
उत्तर: 110 वॉट
रिवीजन नोट — विद्युत शक्ति
• P = VI = I²R = V²/R; SI मात्रक वॉट (W): 1 W = 1 V × 1 A।
• विद्युत ऊर्जा = शक्ति × समय; व्यावसायिक मात्रक किलोवाट घंटा (kWh) = 1 यूनिट।
• 1 kWh = 3.6 × 10^(6) J।
• 220 V, 100 W अंकित उपकरण I = P ÷ V ≈ 0.45 A धारा लेता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: विद्युत ऊर्जा का सूत्र (ऊर्जा = शक्ति × समय); 1 किलोवाट घंटा जूल में (3.6 × 10^(6) J); प्रतिदिन 5 घंटे, 30 दिन तक चलने वाले 60 W बल्ब द्वारा खर्च यूनिट (9 यूनिट)।
शक्ति के लिए V को I से गुणा करें; भाग देने पर प्रतिरोध (V ÷ I = 440 Ω) मिलता है, शक्ति नहीं।
Electricity · Resistance, resistivity and their factors

Q32. किसी चालक का प्रतिरोध न्यूनतम होने के लिए कारकों का कौन-सा संयोजन होगा?

  1. (a) अधिक लंबाई और कम अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल
  2. (b) कम लंबाई और अधिक अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल
  3. (c) अधिक लंबाई और अधिक अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल
  4. (d) कम लंबाई और कम अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) कम लंबाई और अधिक अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल

उत्तर: विकल्प 2 — कम लंबाई और अधिक अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल
प्रतिरोध R = ρL/A: यह लंबाई के साथ बढ़ता है और अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल के साथ घटता है।
अतः सबसे छोटे, सबसे मोटे चालक का प्रतिरोध न्यूनतम होता है।
रिवीजन नोट — प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक
• R ∝ L (लंबाई) और R ∝ 1/A (अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल); SI मात्रक ओम (Ω)।
• ρ (प्रतिरोधकता) केवल पदार्थ और ताप पर निर्भर करती है; SI मात्रक Ω m।
• तार को खींचकर लंबाई दोगुनी करने पर क्षेत्रफल आधा हो जाता है, अतः प्रतिरोध 4 गुना हो जाता है।
• ताँबा और ऐलुमिनियम (कम ρ) विद्युत संचरण तारों में प्रयुक्त होते हैं।
• नाइक्रोम जैसी मिश्रातुएँ (अधिक ρ, आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होतीं) तापन अवयवों में प्रयुक्त होती हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: लंबाई दोगुनी और क्षेत्रफल आधा करने पर प्रतिरोध (चार गुना); एक ही पदार्थ और समान लंबाई के दो तारों में से किसका प्रतिरोध अधिक है (कम अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल वाले का)।
लंबा और पतला अर्थात् अधिक प्रतिरोध; छोटा और मोटा अर्थात् कम प्रतिरोध।

Static GK (3)

Books and Authors · Modern Indian books and authors

Q33. 2018 में प्रकाशित "पोस्टकोलोनियल एलिमेंट्स इन अमिताव घोष'स 'द शैडो लाइन्स' (Postcolonial Elements in Amitav Ghosh's 'The Shadow Lines')" के लेखक कौन हैं?

  1. (a) अमिताव घोष
  2. (b) अरुंधति रॉय
  3. (c) निवेधा निवि
  4. (d) सलमान रुश्दी
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) निवेधा निवि

उत्तर: विकल्प 3 — निवेधा निवि
यह कृति अमिताव घोष के उपन्यास द शैडो लाइन्स का 2018 का आलोचनात्मक अध्ययन है, जिसका श्रेय निवेधा निवि को जाता है।
उपन्यास स्वयं अमिताव घोष ने लिखा; "पोस्टकोलोनियल एलिमेंट्स इन अमिताव घोष'स …" शीर्षक वाला अध्ययन उन पर लिखा गया है, उनके द्वारा नहीं।
रिवीजन नोट — अमिताव घोष और द शैडो लाइन्स
• द शैडो लाइन्स (1988) — कलकत्ता, ढाका और लंदन की पृष्ठभूमि; विषय स्मृति, सीमाएँ, राष्ट्रवाद और विभाजन।
• इसे साहित्य अकादमी पुरस्कार (1989) मिला।
• अमिताव घोष को ज्ञानपीठ पुरस्कार (2018) मिला — यह पाने वाले वे पहले अंग्रेज़ी भाषा के लेखक हैं।
• आइबिस त्रयी (Ibis Trilogy): सी ऑफ पॉपीज़ (2008, बुकर शॉर्टलिस्ट), रिवर ऑफ स्मोक, फ्लड ऑफ फायर।
• अन्य कृतियाँ: द कलकत्ता क्रोमोसोम, द हंग्री टाइड (सुंदरबन), द ग्लास पैलेस, गन आइलैंड, द ग्रेट डिरेंजमेंट (जलवायु परिवर्तन)।
• अरुंधति रॉय — द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स (बुकर 1997); सलमान रुश्दी — मिडनाइट्स चिल्ड्रन (बुकर 1981)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• उपन्यास का लेखक बनाम उस पर अध्ययन का लेखक — "अमिताव घोष'स" पुस्तक का नाम लेने वाला शीर्षक किसी अन्य लेखक की आलोचना है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: द शैडो लाइन्स के लेखक (अमिताव घोष); द कलकत्ता क्रोमोसोम के लेखक (अमिताव घोष); आइबिस त्रयी की पहली पुस्तक (सी ऑफ पॉपीज़)।
Monuments and Heritage · Temples and religious places

Q34. भारत के प्रसिद्ध काली मंदिरों में से एक, कालीघाट, निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य में स्थित है?

  1. (a) महाराष्ट्र
  2. (b) ओडिशा
  3. (c) असम
  4. (d) पश्चिम बंगाल
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) पश्चिम बंगाल

उत्तर: विकल्प 4 — पश्चिम बंगाल
कालीघाट काली मंदिर कोलकाता, पश्चिम बंगाल में आदि गंगा (हुगली की एक पुरानी धारा) के तट पर स्थित है।
इसकी गणना 51 शक्तिपीठों में होती है।
रिवीजन नोट — प्रसिद्ध शक्ति और काली मंदिर
• कालीघाट काली मंदिर — कोलकाता; शक्तिपीठों में से एक; 19वीं शताब्दी की कालीघाट चित्रकला (पटचित्र) का नाम इसी से पड़ा।
• दक्षिणेश्वर काली मंदिर — कोलकाता, रानी रासमणि द्वारा निर्मित (1855); रामकृष्ण परमहंस इसके पुजारी थे।
• कामाख्या मंदिर — नीलाचल पहाड़ी, गुवाहाटी (असम); यहाँ हर जून में अंबुबाची मेला लगता है।
• तारापीठ — बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल; देवी तारा का मंदिर।
• वैष्णो देवी — त्रिकूट पहाड़ियाँ, जम्मू और कश्मीर; ज्वालामुखी — कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• कालीघाट बनाम दक्षिणेश्वर — दोनों कोलकाता में काली मंदिर हैं; दक्षिणेश्वर का संबंध रामकृष्ण और विवेकानंद से है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह मंदिर जहाँ स्वामी विवेकानंद पहली बार रामकृष्ण परमहंस से मिले (दक्षिणेश्वर काली मंदिर); वह राज्य जहाँ कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला लगता है (असम)।
Monuments and Heritage · Monuments - builders and locations

Q35. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद (Quwwat-al-islam mosque), निम्नलिखित में से किस शहर में स्थित है?

  1. (a) सीकर
  2. (b) हैदराबाद
  3. (c) नई दिल्ली
  4. (d) अजमेर
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) नई दिल्ली

उत्तर: विकल्प 3 — नई दिल्ली
कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद महरौली, दिल्ली के कुतुब परिसर में स्थित है।
इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने लगभग 1192–93 में शुरू कराया था, और यह भारत की सबसे प्राचीन विद्यमान मस्जिद है।
रिवीजन नोट — कुतुब परिसर, दिल्ली
• मस्जिद ध्वस्त किए गए हिंदू और जैन मंदिरों की सामग्री से बनाई गई थी।
• बाद में इल्तुतमिश और अलाउद्दीन खिलजी ने इसका विस्तार किया।
• कुतुब मीनार — ऐबक ने आरंभ की, इल्तुतमिश ने पूरी की; ऊँचाई लगभग 72.5 मी; यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (1993)।
• अलाई दरवाजा (1311) — अलाउद्दीन खिलजी द्वारा निर्मित दक्षिणी प्रवेश द्वार, जो अपने वास्तविक मेहराब और गुंबद के लिए प्रसिद्ध है।
• प्रांगण का लौह स्तंभ गुप्त काल का है और उसमें जंग नहीं लगी है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• कुव्वत-उल-इस्लाम बनाम अढ़ाई दिन का झोंपड़ा — दोनों ऐबक ने बनवाए; पहली दिल्ली में है, दूसरी अजमेर में।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अलाई दरवाजा किसने बनवाया (अलाउद्दीन खिलजी); कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माता (कुतुबुद्दीन ऐबक); कुतुब मीनार की शैली (मामलुक / इंडो-इस्लामिक)।

Economics (1)

Basic Concepts and Economic Systems · Market structures (perfect competition, monopoly, oligopoly)

Q36. निम्नलिखित में से कौन-सा, प्राकृतिक एकाधिकार (natural monopoly) का एक उदाहरण है?

  1. (a) मॉल
  2. (b) रेलवे
  3. (c) दिल्ली में स्थित एक एप्पल स्टोर
  4. (d) किताब की दुकान
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) रेलवे

उत्तर: विकल्प 2 — रेलवे
प्राकृतिक एकाधिकार तब बनता है जब एक फर्म पूरे बाज़ार को दो या अधिक फर्मों की तुलना में कम लागत पर सेवा दे सकती है।
रेलवे को भारी स्थिर निवेश (पटरियाँ, स्टेशन, सिग्नलिंग) चाहिए; नेटवर्क की नकल करना व्यर्थ होगा, इसलिए एक ही आपूर्तिकर्ता स्वाभाविक परिणाम है।
रिवीजन नोट — बाज़ार संरचनाएँ
• एकाधिकार — एक ही विक्रेता, कोई निकट स्थानापन्न नहीं, प्रवेश में कड़ी बाधाएँ; फर्म कीमत निर्धारक होती है।
• प्राकृतिक एकाधिकार — पैमाने की मितव्ययिताओं और बहुत अधिक स्थिर लागत के कारण; जैसे रेलवे, विद्युत पारेषण, जल आपूर्ति, गैस पाइपलाइन।
• अल्पाधिकार — कुछ बड़े, परस्पर निर्भर विक्रेता; जैसे दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, एयरलाइंस।
• एकाधिकारी प्रतियोगिता — विभेदित उत्पादों के अनेक विक्रेता; जैसे मॉल, किताब की दुकानें, रेस्तराँ, ब्रांडेड स्टोर।
• पूर्ण प्रतियोगिता — बहुत अधिक क्रेता और विक्रेता, समरूप उत्पाद, निर्बाध प्रवेश और निकास; फर्में कीमत स्वीकारक होती हैं।
• भारतीय रेलवे का संचालन रेल मंत्रालय करता है — यह एक सरकारी उपक्रम है जिसके सामने कोई प्रतिस्पर्धी रेल नेटवर्क नहीं है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• प्राकृतिक बनाम कानूनी एकाधिकार — प्राकृतिक एकाधिकार लागत की दशाओं से बनता है; कानूनी एकाधिकार किसी कानून, पेटेंट या लाइसेंस से बनता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह विशेषता जो अल्पाधिकार की नहीं है (अनंत विक्रेता); पूर्ण प्रतियोगी बाज़ार की एक विशेषता (फर्मों का निर्बाध प्रवेश और निकास)।

Current Affairs (5)

Appointments and Resignations · National appointments

Q37. जुलाई 2024 में भारत में MotoGP के लिए किस भारतीय क्रिकेटर को ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया?

  1. (a) रोहित शर्मा
  2. (b) विराट कोहली
  3. (c) शिखर धवन
  4. (d) जसप्रीत बुमराह
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) शिखर धवन

उत्तर: विकल्प 3 — शिखर धवन
जुलाई 2024 में, भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन को MotoGP भारत — MotoGP विश्व चैंपियनशिप के भारतीय चरण — का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया।
रिवीजन नोट — MotoGP भारत
• MotoGP मोटरसाइकिल रोड रेसिंग की शीर्ष श्रेणी है, जिसका संचालन FIM के अंतर्गत डोर्ना (Dorna) करता है।
• भारत ने अपनी पहली MotoGP रेस (इंडियन ऑयल ग्रां प्री ऑफ इंडिया) की मेज़बानी सितंबर 2023 में की।
• स्थल: बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) — यह भारत का पूर्व फॉर्मूला वन स्थल भी है (2011–2013)।
• 2023 की रेस मार्को बेज़ेकी (इटली) ने जीती।
• भारत में प्रमोटर: फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स।
• शिखर धवन ने अगस्त 2024 में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: MotoGP भारत 2023 का स्थल (बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, ग्रेटर नोएडा)।
Appointments and Resignations · National appointments

Q38. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

  1. (a) नरेंद्र मोदी ने जून 2024 में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
  2. (b) अमित शाह ने जून 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया।
  3. (c) ओम बिरला 18वीं लोकसभा के अध्यक्ष चुने गए।
  4. (d) सोनिया गांधी 18वीं लोकसभा में विपक्ष की नेता बनीं।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) सोनिया गांधी 18वीं लोकसभा में विपक्ष की नेता बनीं।

उत्तर: विकल्प 4 — सोनिया गांधी 18वीं लोकसभा में विपक्ष की नेता बनीं।
18^(वीं) लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (कांग्रेस) हैं, जिन्हें जून 2024 में मान्यता मिली।
सोनिया गांधी राज्यसभा की सदस्य हैं (राजस्थान से, 2024 में निर्वाचित), लोकसभा की नहीं।
रिवीजन नोट — 18^(वीं) लोकसभा (2024)
• नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
• अमित शाह के पास गृह और सहकारिता मंत्रालय बने रहे (सहकारिता मंत्रालय जुलाई 2021 में बना)।
• ओम बिरला (कोटा, राजस्थान से सांसद) 26 जून 2024 को ध्वनि मत से अध्यक्ष चुने गए — अध्यक्ष के रूप में उनका दूसरा कार्यकाल।
• राहुल गांधी (रायबरेली से सांसद) विपक्ष के नेता बने — यह पद 2014 से रिक्त था।
• किसी दल के नेता को विपक्ष के नेता की मान्यता के लिए सदन की कम-से-कम 10% (55 सीटें) सीटें चाहिए; विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• लोकसभा बनाम राज्यसभा में विपक्ष के नेता — लोकसभा: राहुल गांधी; राज्यसभा: मल्लिकार्जुन खड़गे।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: मान्यता प्राप्त विपक्ष के नेता के लिए आवश्यक सीटें (सदन का 10%); 18वीं लोकसभा के अध्यक्ष (ओम बिरला); अमित शाह के मंत्रालय (गृह और सहकारिता)।
National Affairs and Government Initiatives · Health policy and programmes - current

Q39. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और _________ ने 11 सितंबर को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य एक अभिनव डेटा प्लेटफ़ॉर्म (innovative data platform) के साथ स्वास्थ्य अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) में क्रांति लाना है।

  1. (a) आईआईटी कानपुर
  2. (b) आईआईटी दिल्ली
  3. (c) आईआईटी खड़गपुर
  4. (d) आईआईटी मद्रास
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) आईआईटी कानपुर

उत्तर: विकल्प 1 — आईआईटी कानपुर
11 सितंबर 2024 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने आईआईटी कानपुर के साथ एक MoU पर हस्ताक्षर किए।
इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा में AI अनुसंधान के लिए एक डेटा प्लेटफ़ॉर्म और डिजिटल सार्वजनिक वस्तुएँ तैयार करना है।
रिवीजन नोट — राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA)
• NHA वह शीर्ष निकाय है जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) चलाता है।
• यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) भी चलाता है, जो 27 सितंबर 2021 को शुरू हुआ।
• NHA स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
• AB PM-JAY प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख का स्वास्थ्य कवर देती है; इसे 23 सितंबर 2018 को राँची से शुरू किया गया।
• ABDM के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक ABHA संख्या (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) प्राप्त कर सकता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह योजना जिसे पश्चिम बंगाल 2026 में 36वें राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के रूप में लागू करने वाला था (AB PM-JAY)।
Art, Culture and Events - Current · New UNESCO inscriptions

Q40. यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र का आयोजन स्थल निम्नलिखित में से कौन-सा था?

  1. (a) नई दिल्ली, भारत
  2. (b) पेरिस, फ्रांस
  3. (c) न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका
  4. (d) दुबई, संयुक्त अरब अमीरात
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) नई दिल्ली, भारत

उत्तर: विकल्प 1 — नई दिल्ली, भारत
यूनेस्को विश्व धरोहर समिति का 46वाँ सत्र भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
यह 21 से 31 जुलाई 2024 तक चला — भारत ने पहली बार इस समिति की मेजबानी की।
रिवीजन नोट — विश्व धरोहर समिति का 46वाँ सत्र
• 21 जुलाई 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया।
• अध्यक्षता यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने की।
• भारत का नामांकन मोइदम — अहोम राजवंश की टीला-समाधि प्रणाली (चराइदेव, असम) भारत के 43वें विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध हुआ।
• मोइदम इस सूची में पूर्वोत्तर का पहला सांस्कृतिक स्थल है।
• यूनेस्को मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस; विश्व धरोहर अभिसमय 1972 में अपनाया गया।
• समिति में 21 सदस्य देश हैं और इसकी बैठक वर्ष में एक बार होती है।
• 2026 तक: 47वाँ सत्र पेरिस (जुलाई 2025) में हुआ, जिसमें मराठा सैन्य परिदृश्य भारत के 44वें स्थल के रूप में सूचीबद्ध हुए।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह स्मारक जो भारत में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नहीं है (इंडिया गेट)।
Awards and Honours - Current · National awards - current

Q41. निम्नलिखित में से किस शहर ने अपने अभिनव जल संरक्षण कार्यक्रमों के लिए 5वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय श्रेणी में शीर्ष सम्मान प्राप्त किया?

  1. (a) पुणे, महाराष्ट्र
  2. (b) इंदौर, मध्य प्रदेश
  3. (c) भोपाल, मध्य प्रदेश
  4. (d) सूरत, गुजरात
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) सूरत, गुजरात

उत्तर: विकल्प 4 — सूरत, गुजरात
सूरत नगर निगम ने 5वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय श्रेणी में प्रथम पुरस्कार जीता।
पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 22 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली में प्रदान किए।
रिवीजन नोट — राष्ट्रीय जल पुरस्कार
• जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
• 2018 में जल संरक्षण और प्रबंधन के कार्यों को सम्मानित करने हेतु शुरू किए गए, जल शक्ति अभियान के अनुरूप।
• 5वाँ संस्करण (2023 के लिए) अक्टूबर 2024 में प्रदान किया गया।
• 5वें संस्करण में ओडिशा ने सर्वश्रेष्ठ राज्य पुरस्कार जीता।
• श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, सर्वश्रेष्ठ विद्यालय, सर्वश्रेष्ठ उद्योग और सर्वश्रेष्ठ NGO शामिल हैं।
राष्ट्रीय जल पुरस्कार जल शक्ति मंत्रालय देता है — पर्यावरण मंत्रालय नहीं।

Geography (2)

Q42. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में राष्ट्रीय जलमार्ग 2 है?

  1. (a) पूर्वी तट नहर और मटाई नदी
  2. (b) काकीनाडा नहर (काकीनाडा से राजमुंदरी)
  3. (c) ब्रह्मपुत्र नदी
  4. (d) पश्चिमी तट नहर और चंपकारा और उद्योगमंडल नहरें
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) ब्रह्मपुत्र नदी

उत्तर: विकल्प 3 — ब्रह्मपुत्र नदी
राष्ट्रीय जलमार्ग 2 असम में ब्रह्मपुत्र पर सदिया से धुबरी तक है, लगभग 891 किमी।
रिवीजन नोट — भारत के राष्ट्रीय जलमार्ग
• NW-1: गंगा–भागीरथी–हुगली, प्रयागराज से हल्दिया (लगभग 1,620 किमी) — सबसे लंबा।
• NW-2: ब्रह्मपुत्र, सदिया से धुबरी (891 किमी), असम।
• NW-3: पश्चिमी तट नहर (कोट्टापुरम–कोल्लम) के साथ चंपकारा और उद्योगमंडल नहरें, केरल।
• NW-4: गोदावरी–कृष्णा नदियाँ, काकीनाडा और अन्य नहरों के साथ (आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी)।
• NW-5: ब्राह्मणी–महानदी डेल्टा, पूर्वी तट नहर और मटाई नदी के साथ (ओडिशा, पश्चिम बंगाल)।
• राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 ने इनकी संख्या बढ़ाकर 111 कर दी; इनका प्रबंधन भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (1986) करता है, मुख्यालय नोएडा।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अन्य तीन विकल्प NW-3, NW-4 और NW-5 के भाग हैं — ये भ्रामक विकल्प वास्तविक जलमार्ग हैं, बस इनकी संख्या अलग है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: NW-2 की लंबाई (891 किमी); NW-2 पर स्थित स्थलरुद्ध नदी पत्तन (पांडु, गुवाहाटी)।
India - Drainage System · West-flowing rivers

Q43. निम्नलिखित में से कौन सी नदी अल्पकालिक (ephemeral) है?

  1. (a) ब्यास (Beas)
  2. (b) चंबल (Chambal)
  3. (c) यमुना (Yamuna)
  4. (d) लूनी (Luni)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) लूनी (Luni)

उत्तर: विकल्प 4 — लूनी (Luni)
अल्पकालिक (ephemeral) नदी केवल वर्षा के बाद थोड़े समय तक बहती है और वर्ष के अधिकांश समय सूखी रहती है।
थार मरुस्थल की लूनी इसका पाठ्यपुस्तकीय उदाहरण है।
रिवीजन नोट — लूनी और मरुस्थलीय अपवाह
• लूनी का उद्गम पुष्कर (अजमेर) के निकट अरावली श्रेणी से होता है और यह दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है।
• यह बाड़मेर और जालोर से होकर बहती है और कच्छ के रन के दलदल में समाप्त हो जाती है — यह समुद्र तक नहीं पहुँचती।
• इसका जल बालोतरा तक मीठा और उसके आगे खारा है।
• यह मरुस्थल की एकमात्र बड़ी नदी है; अधिकांश मरुस्थलीय धाराएँ रेत में विलीन हो जाती हैं — अंतःस्थलीय अपवाह।
• बारहमासी नदियाँ पूरे वर्ष बहती हैं: हिमालयी नदियाँ (यमुना, ब्यास) हिम और हिमनदों से पोषित होती हैं।
• चंबल (महू, मध्य प्रदेश के निकट जानापाव पहाड़ियों से) यमुना की सहायक नदी है, जो अपने बीहड़ों (उत्खात भूमि) के लिए जानी जाती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अल्पकालिक बनाम बारहमासी — अल्पकालिक नदी केवल वर्षा के बाद बहती है; बारहमासी नदी पूरे वर्ष बहती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: थार मरुस्थल की मुख्य नदी (लूनी); लूनी कहाँ समाप्त होती है (समुद्र तक पहुँचे बिना कच्छ के रन में); उत्खात भूमि (बीहड़) स्थलाकृति के लिए प्रसिद्ध नदी (चंबल)।
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