Q1. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (versatile nature) का कारण नहीं है?
- (a) कार्बन में चतुःसंयोजकता होती है (Carbon has tetravalency)
- (b) कार्बन, एकल, द्वि और त्रिक आबंध बना सकता है (Carbon can form single, double, and triple bonds)
- (c) कार्बन, श्रृंखलन प्रदर्शित करता है (Carbon exhibits catenation)
- (d) कार्बन, स्वयं के साथ आयनिक आबंध बना सकता है (Carbon can form ionic bonds with itself)
उत्तर और व्याख्या
उत्तर: (d) कार्बन, स्वयं के साथ आयनिक आबंध बना सकता है (Carbon can form ionic bonds with itself)
दो कार्बन परमाणुओं की विद्युतऋणात्मकता समान होती है, इसलिए कोई भी दूसरे से इलेक्ट्रॉन नहीं खींच सकता।
वे इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं — प्रत्येक C–C आबंध सहसंयोजक होता है, कभी आयनिक नहीं।
रिवीजन नोट — कार्बन इतने अधिक यौगिक क्यों बनाता है
• चतुःसंयोजकता: कार्बन में 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन (2, 4) होते हैं और यह 4 सहसंयोजक आबंध बनाता है।
• श्रृंखलन: कार्बन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखाएँ और वलय बनाता है; C–C आबंध प्रबल और स्थायी होता है।
• कार्बन एकल (C–C), द्वि (C=C) और त्रिक (C≡C) आबंध बनाता है।
• कार्बन आसानी से 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण (C⁴⁻) या 4 इलेक्ट्रॉन त्याग (C⁴⁺) नहीं कर सकता — इसलिए यह उनकी साझेदारी करता है।
• इसका छोटा आकार नाभिक को साझा इलेक्ट्रॉनों को मज़बूती से पकड़े रखने देता है, जिससे प्रबल आबंध बनते हैं।
• सिलिकॉन भी श्रृंखलन दर्शाता है, परंतु इसकी श्रृंखलाएँ (लगभग 7–8 परमाणुओं तक) अभिक्रियाशील और छोटी होती हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वे गुण जिनके कारण कार्बन इतने अधिक यौगिक बनाता है (श्रृंखलन और चतुःसंयोजकता); कार्बन अधिक संख्या में यौगिक क्यों बनाता है (C–C आबंध बहुत प्रबल और स्थायी होता है)।