Q1. निषेचन के बाद फल में क्या विकसित होता है?
- (a) अंडाशय
- (b) परागकोश
- (c) वर्तिकाग्र
- (d) वर्तिका
उत्तर और व्याख्या
उत्तर: (d) वर्तिका
निषेचन के बाद अंडाशय बढ़कर पकता है और फल बन जाता है।
इसके अंदर के बीजांड बीज बन जाते हैं।
रिवीजन नोट — निषेचन के बाद पुष्प में परिवर्तन
• अंडाशय → फल; बीजांड → बीज; युग्मनज → भ्रूण; अंडाशय भित्ति → फलभित्ति (फल की दीवार)।
• पंखुड़ियाँ, बाह्यदल, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र प्रायः मुरझाकर गिर जाते हैं।
• मादा भाग स्त्रीकेसर (अंडप) है = वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय।
• नर भाग पुंकेसर है = परागकोश (परागकण बनाता है) + तंतु।
• परागण परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है; निषेचन नर और मादा युग्मकों का संलयन है, जिससे युग्मनज बनता है।
• पराग नलिका वर्तिका से होकर बढ़ती है और अंडाशय में स्थित बीजांड तक पहुँचती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अंडाशय बनाम बीजांड — अंडाशय फल बनता है; बीजांड बीज बनता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पुष्प का मादा जनन भाग (जायांग / स्त्रीकेसर); निषेचन का अर्थ (युग्मकों का संलयन)।