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RRB JE CBT-1 2024-25 16 दिसंबर 2024 शिफ्ट 1 – GK प्रश्न – उत्तर व व्याख्या सहित

RRB JE CBT-1 2024-25 (16 दिसंबर 2024 शिफ्ट 1) में पूछे गए सभी 43 GK / सामान्य अध्ययन प्रश्न, सही उत्तर और व्याख्या के साथ – विषयवार।

📚 43 प्रश्न🗓️ 16 दिसंबर 2024⏰ शिफ्ट 1
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विषय: Economics (2) · Biology (10) · Current Affairs (5) · Chemistry (9) · Physics (10) · Geography (1) · Polity (3) · Modern History (1) · Medieval History (1) · Static GK (1)

Economics (2)

Q1. प्रत्येक वर्ष, भारत सरकार के किस मंत्रालय द्वारा विदेशी व्यापार नीति घोषित की जाती है?

  1. (a) गृह मंत्रालय
  2. (b) सूचना मंत्रालय
  3. (c) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
  4. (d) विदेश मंत्रालय
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

उत्तर: विकल्प 3 — वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
भारत की विदेशी व्यापार नीति (FTP) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा
अपने विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के माध्यम से बनाई और घोषित की जाती है।
रिवीजन नोट — भारत की विदेशी व्यापार नीति
• FTP विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के अंतर्गत अधिसूचित की जाती है।
• DGFT, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, FTP बनाता और लागू करता है; इसका गठन 1991 में आयात और निर्यात के मुख्य नियंत्रक के कार्यालय से हुआ था।
• FTP 2023 1 अप्रैल 2023 से लागू हुई; पहले की पंचवर्षीय नीतियों (जैसे FTP 2015–20) के विपरीत इसकी कोई समाप्ति तिथि नहीं है और आवश्यकतानुसार इसे अद्यतन किया जाता है।
• FTP 2023 का लक्ष्य 2030 तक USD 2 ट्रिलियन का निर्यात है और यह रुपये में व्यापार निपटान को बढ़ावा देती है।
• FTP के अंतर्गत निर्यात योजनाएँ: RoDTEP (1 जनवरी 2021 से MEIS के स्थान पर), EPCG, अग्रिम प्राधिकार (Advance Authorisation)।
• डंपिंग-रोधी (Anti-dumping) जाँच व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) करता है, जो वाणिज्य मंत्रालय के ही अधीन है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• वाणिज्य मंत्रालय बनाम विदेश मंत्रालय — व्यापार नीति वाणिज्य मंत्रालय का विषय है; कूटनीति और विदेश संबंध विदेश मंत्रालय के।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: भारत की विदेशी व्यापार नीति बनाने वाली संस्था (DGFT); DGFT के गठन का वर्ष (1991); डंपिंग-रोधी जाँच संभालने वाला मंत्रालय (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय)।
Money and Banking · Monetary policy tools (repo, reverse repo, CRR, SLR, MSF, bank rate)

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, मुद्रा को नियंत्रित करने में नैतिक प्रत्यायन की भूमिका का सटीक वर्णन करता है?

  1. (a) यह आरबीआई (RBI) द्वारा बैंकों के ऋण देने के व्यवहार को प्रभावित करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला अनुनय और दबाव का मिश्रण है।
  2. (b) यह आरबीआई द्वारा ब्याज दरें निर्धारित करके मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक प्रत्यक्ष उपकरण है।
  3. (c) इसमें मुद्रा आपूर्ति को प्रभावित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री और खरीद शामिल है।
  4. (d) यह बैंक ऋण के आवंटन को विनियमित करने के लिए वैधानिक तरलता अनुपात में परिवर्तन को संदर्भित करता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) यह आरबीआई (RBI) द्वारा बैंकों के ऋण देने के व्यवहार को प्रभावित करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला अनुनय और दबाव का मिश्रण है।

उत्तर: विकल्प 1 — यह आरबीआई (RBI) द्वारा बैंकों के ऋण देने के व्यवहार को प्रभावित करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला अनुनय और दबाव का मिश्रण है।
नैतिक प्रत्यायन में RBI सलाह, अनुरोध, बैठकों और पत्रों के माध्यम से बैंकों को अधिक या कम ऋण देने, या कुछ विशेष क्षेत्रों को ऋण देने के लिए प्रेरित करता है।
इसका कोई कानूनी बल नहीं होता — यह नियामक के रूप में RBI के अधिकार के बल पर काम करता है।
रिवीजन नोट — RBI के साख नियंत्रण के उपकरण
• मात्रात्मक (सामान्य) उपकरण साख की मात्रा नियंत्रित करते हैं: रेपो, रिवर्स रेपो, बैंक दर, CRR, SLR, MSF, OMO।
• गुणात्मक (चयनात्मक) उपकरण साख की दिशा नियंत्रित करते हैं: नैतिक प्रत्यायन, मार्जिन आवश्यकताएँ, साख राशनिंग, चयनात्मक साख नियंत्रण, प्रत्यक्ष कार्रवाई।
• रेपो दर — वह दर जिस पर RBI प्रतिभूतियों के बदले बैंकों को ऋण देता है; मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा तय।
• खुले बाजार की क्रियाएँ (OMO) — RBI सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता या बेचता है: खरीदने से मुद्रा बढ़ती है; बेचने से मुद्रा घटती है।
• SLR — जमा का वह हिस्सा जो बैंक तरल परिसंपत्तियों (नकद, सोना, सरकारी प्रतिभूतियाँ) में रखते हैं; CRR — वह हिस्सा जो RBI के पास नकद रखा जाता है।
• भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना RBI अधिनियम, 1934 के तहत 1 अप्रैल 1935 को हुई, और 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण हुआ।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• नैतिक प्रत्यायन बनाम OMO — नैतिक प्रत्यायन अनुनय है; OMO सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री है।
• नैतिक प्रत्यायन बनाम SLR / रेपो — SLR या रेपो में बदलाव मात्रात्मक, बाध्यकारी उपाय है; नैतिक प्रत्यायन गुणात्मक और स्वैच्छिक है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: RBI का वह उपकरण जो गुणात्मक है, मात्रात्मक नहीं (नैतिक प्रत्यायन); खुले बाजार की क्रियाएँ संचालित करने वाली संस्था (RBI)।

Biology (10)

Ecology and Environment · Waste management and biodegradable substances

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी सामग्री, अजैवनिम्नीकरणीय (non-biodegradable) होती है?

  1. (a) कागज़
  2. (b) प्लास्टिक
  3. (c) सब्जी के छिलके
  4. (d) लकड़ी
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) प्लास्टिक

उत्तर: विकल्प 2 — प्लास्टिक
प्लास्टिक को सूक्ष्मजीव (जीवाणु, कवक) अपघटित नहीं कर पाते,
इसलिए यह सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में बना रहता है।
कागज़, लकड़ी और सब्जी के छिलके सभी पादप पदार्थ हैं, जिन्हें अपघटक तोड़ देते हैं।
रिवीजन नोट — जैवनिम्नीकरणीय और अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थ
• जैवनिम्नीकरणीय: जैविक प्रक्रमों (अपघटकों) द्वारा अपघटित होते हैं — कागज़, लकड़ी, कपास, भोजन का अपशिष्ट, सूखी पत्तियाँ, मृत जंतु।
• अजैवनिम्नीकरणीय: सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होते — प्लास्टिक, पॉलीथीन, काँच, एल्युमिनियम के डिब्बे, DDT, स्टायरोफोम।
• DDT जैसे अजैवनिम्नीकरणीय रसायन आहार श्रृंखला में ऊपर पहुँचते हैं और प्रत्येक स्तर पर सांद्रित होते जाते हैं — जैव आवर्धन।
• सूक्ष्मजीवों में प्लास्टिक की लंबी कार्बन श्रृंखलाओं को तोड़ने के लिए आवश्यक एंजाइम नहीं होते।
• अपशिष्ट प्रबंधन 3R — Reduce (कम उपयोग), Reuse (पुनः उपयोग), Recycle (पुनर्चक्रण) पर आधारित है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट का एक उदाहरण (मृत जंतु); प्लास्टिक के कपों की तुलना में कागज़ के कपों का लाभ (वे जैवनिम्नीकरणीय होते हैं)।
Heredity and Evolution · Sex determination

Q4. यदि किसी बच्चे को पिता से वंशानुक्रम में Y गुणसूत्र प्राप्त होता है, तो बच्चे का लिंग क्या होगा?

  1. (a) उभयलिंगी
  2. (b) मादा
  3. (c) निर्धारित नहीं किया जा सकता
  4. (d) नर
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) नर

उत्तर: विकल्प 4 — नर
माता हमेशा X देती है। यदि पिता का शुक्राणु Y वहन करता है,
तो युग्मनज XY होता है — नर शिशु।
रिवीजन नोट — मनुष्य में लिंग निर्धारण
• मनुष्य में 46 गुणसूत्र = 23 जोड़े होते हैं: 22 जोड़े अलिंग गुणसूत्र (ऑटोसोम) + 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र।
• स्त्रियाँ XX होती हैं; पुरुष XY (Y छोटा होता है)।
• प्रत्येक अंडाणु X वहन करता है; आधे शुक्राणु X और आधे Y वहन करते हैं।
• X शुक्राणु + अंडाणु → XX (लड़की); Y शुक्राणु + अंडाणु → XY (लड़का)।
• अतः शिशु का लिंग पिता के शुक्राणु से निर्धारित होता है; लड़का या लड़की होने की संभावना 50 : 50 होती है।
• कुछ सरीसृपों (कछुए, कुछ छिपकलियाँ) में अंडों के ऊष्मायन का तापमान लिंग निर्धारित करता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: मनुष्य में अलिंग गुणसूत्रों के जोड़ों की संख्या (22)।
Ecology and Environment · Waste management and biodegradable substances

Q5. प्लास्टिक अपशिष्ट को कम करने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी एक प्रभावी विधि है?

  1. (a) प्लास्टिक सामग्री का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग
  2. (b) डिस्पोजेबल प्लास्टिक बैग का उपयोग
  3. (c) प्लास्टिक अपशिष्ट को भराव क्षेत्र में डंप करना
  4. (d) प्लास्टिक अपशिष्ट को जलाना
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) प्लास्टिक सामग्री का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग

उत्तर: विकल्प 1 — प्लास्टिक सामग्री का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग
पुनः उपयोग से प्लास्टिक की वस्तु अधिक समय तक उपयोग में रहती है और पुनर्चक्रण प्लास्टिक अपशिष्ट को नए उत्पादों में बदल देता है
— दोनों अपशिष्ट बनने वाले प्लास्टिक को कम करते हैं।
जलाने से विषैली गैसें निकलती हैं; भराव क्षेत्र केवल उस प्लास्टिक को जमा रखते हैं जो कभी अपघटित नहीं होता।
रिवीजन नोट — प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट का प्रबंधन
• 3R: Reduce (कम उपयोग — कपड़े या जूट के थैले), Reuse (पुनः उपयोग), Recycle (पुनर्चक्रण — नई वस्तुओं में बदलना)।
• प्लास्टिक अजैवनिम्नीकरणीय है; यह मृदा और जल में सैकड़ों वर्षों तक बना रह सकता है।
• प्लास्टिक जलाने से डाइऑक्सिन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं।
• नालियों और जलाशयों में प्लास्टिक नालियों को अवरुद्ध करता है और जलीय जंतुओं को हानि पहुँचाता है।
• भारत के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों ने 1 जुलाई 2022 से चिह्नित एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया और उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) डाला।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• कम उपयोग बनाम पुनः उपयोग — प्लास्टिक की थैली लेने के बजाय जूट का थैला ले जाना कम उपयोग (Reduce) है; चीज़ें रखने के लिए पुरानी बाल्टी का उपयोग करना पुनः उपयोग (Reuse) है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अपशिष्ट प्रबंधन में "कम उपयोग" का एक उदाहरण (प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर जूट के थैले अपनाना); एक अच्छी अपशिष्ट प्रबंधन पद्धति (पुनः उपयोग योग्य और पुनर्चक्रण योग्य उत्पादों का उपयोग करें)।
Ecology and Environment · Ecosystem and its components

Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्राकृतिक पारिस्थतिक तंत्र है?

  1. (a) एक्वेरियम
  2. (b) वन
  3. (c) फसल क्षेत्र (खेत)
  4. (d) बगीचा
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) वन

उत्तर: विकल्प 2 — वन
वन मानव सहायता के बिना विकसित होता है और स्वयं बना रहता है, इसलिए यह प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र है।
एक्वेरियम, फसल क्षेत्र (खेत) और बगीचे मनुष्य द्वारा बनाए और सँभाले जाते हैं — कृत्रिम (मानव-निर्मित) पारिस्थितिक तंत्र।
रिवीजन नोट — पारिस्थितिक तंत्र
• पारिस्थितिक तंत्र = किसी क्षेत्र के सभी सजीव + उनका निर्जीव परिवेश, जो एक इकाई के रूप में परस्पर क्रिया करते हैं।
• जैविक घटक: उत्पादक (हरे पौधे), उपभोक्ता (शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी, परजीवी), अपघटक (जीवाणु, कवक)।
• अजैविक घटक: ताप, वर्षा, पवन, मृदा, खनिज, जल, प्रकाश।
• प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र: वन, तालाब, झील, नदी, घास के मैदान, मरुस्थल, महासागर।
• कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र: बगीचे, फसल क्षेत्र, एक्वेरियम, पार्क, चिड़ियाघर।
• अपघटक पोषक तत्वों को मृदा में लौटाते हैं; एक्वेरियम में ये अनुपस्थित या नियंत्रित होते हैं, इसलिए इसे नियमित रूप से साफ करना पड़ता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• बगीचा बनाम वन — दोनों में पौधे और जंतु हैं, पर बगीचे को मानव देखभाल चाहिए; वन को नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र का उदाहरण (फसल क्षेत्र); अपघटकों की भूमिका (पोषक तत्वों को मृदा में वापस लौटाना); पारिस्थितिक तंत्र का अजैविक घटक (मृदा)।
Reproduction · Pollination and fertilisation in plants

Q7. स्व-परागण (Self pollination) निम्नलिखित में से किसमें संभव होता है?

  1. (a) उभयलिंगी फूल जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं (bisexual flowers with both stamens and pistil maturing at the different time)
  2. (b) एकलिंगी फूल जिसमें स्त्रीकेसर पहले परिपक्व होते हैं (unisexual flowers with pistil maturing first)
  3. (c) उभयलिंगी फूल जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों एक ही समय पर परिपक्व होते हैं (bisexual flowers with both stamens and pistil maturing at the same time)
  4. (d) एकलिंगी फूल जिसमें पुंकेसर पहले परिपक्व होते हैं (unisexual flowers with stamen maturing first)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) उभयलिंगी फूल जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों एक ही समय पर परिपक्व होते हैं (bisexual flowers with both stamens and pistil maturing at the same time)

उत्तर: विकल्प 3 — उभयलिंगी फूल जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों एक ही समय पर परिपक्व होते हैं
स्व-परागण का अर्थ है परागकणों का उसी फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचना।
अतः फूल में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों होने चाहिए (उभयलिंगी), और दोनों एक ही समय पर परिपक्व होने चाहिए (समकालपक्वता / homogamy)।
रिवीजन नोट — परागण
• परागण — परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण।
• स्व-परागण — उसी फूल में या उसी पौधे के दूसरे फूल में; जैसे मटर, गेहूँ, चावल।
• पर-परागण — परागकण उसी जाति के दूसरे पौधे के फूल तक पहुँचते हैं; वाहक: पवन, जल, कीट, पक्षी।
• उभयलिंगी फूलों में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों होते हैं (गुड़हल, सरसों); एकलिंगी फूलों में केवल एक (पपीता, तरबूज)।
• एकलिंगी फूल फूल के भीतर कभी स्व-परागण नहीं कर सकते — उन्हें पर-परागण चाहिए।
• भिन्नकालपक्वता (dichogamy) (पुंकेसर और स्त्रीकेसर का अलग-अलग समय पर परिपक्व होना) स्व-परागण को रोकती है और पर-परागण को बढ़ावा देती है।
• परागण के बाद निषेचन — नर और मादा युग्मकों का संलयन — से युग्मनज बनता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• परागण बनाम निषेचन — परागण परागकणों का स्थानांतरण है; निषेचन युग्मकों का संलयन है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: परागण और निषेचन में अंतर (निषेचन युग्मकों का संलयन है); पवन-परागित फूलों की विशेषता (हल्के, छोटे परागकण, बहुत बड़ी संख्या में)।
Reproduction · Seed, fruit and germination

Q8. बीजों के प्रकीर्णन का कारक, निम्नलिखित में से कौन-सा नहीं है?

  1. (a) सूर्य का प्रकाश
  2. (b) जल
  3. (c) वायु
  4. (d) जंतु
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) सूर्य का प्रकाश

उत्तर: विकल्प 1 — सूर्य का प्रकाश
बीज वायु, जल और जंतुओं द्वारा दूर ले जाए जाते हैं (और कुछ फलों के फटने से)।
नवोद्भिद को भोजन बनाने के लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक है, पर यह बीज को स्थानांतरित नहीं कर सकता।
रिवीजन नोट — बीजों का प्रकीर्णन
• प्रकीर्णन क्यों: इससे जनक पौधे के साथ सूर्य के प्रकाश, जल और खनिजों के लिए स्पर्धा नहीं होती और पौधा नए आवासों तक पहुँचता है।
• वायु: हल्के या पंखयुक्त बीज — सहजन, मेपल; रोमिल बीज — मदार (आक), सूरजमुखी, कपास।
• जल: स्पंजी या रेशेदार आवरण वाले तैरने वाले बीज — नारियल, कमल।
• जंतु: काँटेदार या हुकयुक्त बीज फर से चिपक जाते हैं — जैन्थियम, यूरेना; गूदेदार फल खाए जाते हैं और बीज बाहर निकल जाते हैं।
• विस्फोट: फल फटकर बीजों को दूर फेंकते हैं — अरंड, बालसम (गुलमेंहदी)।
• निषेचन के बाद अंडाशय फल बनता है और बीजांड बीज बनते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: आवृतबीजी, अनावृतबीजी से अधिक व्यापक क्यों हैं (फल बीजों को ढकते हैं और उनके प्रकीर्णन में सहायता करते हैं)।
Heredity and Evolution · Sex determination

Q9. मानव में बच्चे का लिंग निम्‍नलिखित में से किसके द्वारा निर्धारित होता है?

  1. (a) आनुवांशिक रचना (Genetic constitution)
  2. (b) भ्रूण के भाग्य (The fate of the embryo)
  3. (c) वह ताप जिस पर निषेचित अंडे रखे जाते हैं (The temperature at which fertilised eggs are placed)
  4. (d) पर्यावरणीय संकेत (Environmental cues)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) आनुवांशिक रचना (Genetic constitution)

उत्तर: विकल्प 1 — आनुवांशिक रचना (Genetic constitution)
मनुष्यों में बच्चे का लिंग आनुवंशिक रूप से निर्धारित होता है — उसे मिले लिंग गुणसूत्रों द्वारा।
माँ सदैव X देती है; पिता का शुक्राणु या तो X (लड़की) या Y (लड़का) देता है।
रिवीजन नोट — लिंग निर्धारण
• मनुष्य में 46 गुणसूत्र = 23 जोड़े: 22 जोड़े अलिंग गुणसूत्र (autosomes) + 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र।
• स्त्रियाँ XX; पुरुष XY — Y गुणसूत्र छोटा होता है।
• प्रत्येक अंडाणु में X होता है; आधे शुक्राणुओं में X और आधे में Y होता है।
• X शुक्राणु + अंडाणु → XX (लड़की); Y शुक्राणु + अंडाणु → XY (लड़का) — प्रत्येक की संभावना 50 : 50।
• अतः पिता का शुक्राणु बच्चे का लिंग तय करता है।
• कुछ सरीसृपों में निषेचित अंडों को जिस ताप पर रखा जाता है, वह लिंग तय करता है; घोंघा लिंग बदल लेता है — पर्यावरणीय नियंत्रण।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• मनुष्य बनाम सरीसृप — मनुष्य: आनुवंशिक (XX/XY); कछुए और कुछ छिपकलियाँ: ऊष्मायन ताप।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: मनुष्यों में अलिंग गुणसूत्रों के जोड़ों की संख्या (22)।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q10. हाइड्रा द्वारा पुनरुत्पादक कोशिकाओं (regenerative cells) का उपयोग किस लिए किया जाता है?

  1. (a) हाइड्रा, मुकुलन द्वारा प्रजनन के लिए पुनरुत्पादक कोशिकाओं का उपयोग करता है।
  2. (b) हाइड्रा, बीजाणु निर्माण द्वारा प्रजनन के लिए पुनरुत्पादक कोशिकाओं का उपयोग करता है।
  3. (c) हाइड्रा, विखंडन द्वारा प्रजनन के लिए पुनरुत्पादक कोशिकाओं का उपयोग करता है।
  4. (d) हाइड्रा, लैंगिक जनन द्वारा प्रजनन के लिए पुनरुत्पादक कोशिकाओं का उपयोग करता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) हाइड्रा, मुकुलन द्वारा प्रजनन के लिए पुनरुत्पादक कोशिकाओं का उपयोग करता है।

उत्तर: विकल्प 1 — हाइड्रा, मुकुलन द्वारा प्रजनन के लिए पुनरुत्पादक कोशिकाओं का उपयोग करता है।
हाइड्रा में पुनरुत्पादक कोशिकाएँ एक स्थान पर बार-बार विभाजित होकर एक उभार बनाती हैं — मुकुल।
मुकुल बढ़कर नन्हा हाइड्रा बनता है और परिपक्व होने पर जनक से अलग हो जाता है।
रिवीजन नोट — एकल जनक वाले जीवों में अलैंगिक जनन
• मुकुलन — हाइड्रा, यीस्ट; जनक पर एक मुकुल बनता है जो नया जीव बन जाता है।
• पुनरुद्भवन — हाइड्रा और प्लेनेरिया कटे हुए टुकड़े से विशिष्ट कोशिकाओं की सहायता से पूरा शरीर बना सकते हैं।
• द्विखंडन — अमीबा, पैरामीशियम; बहुखंडन — प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)।
• खंडन — स्पाइरोगाइरा; तंतु टूट जाता है और प्रत्येक टुकड़ा वृद्धि करता है।
• बीजाणु समासंघ — राइजोपस (ब्रेड मोल्ड); बीजाणु बीजाणुधानी में होते हैं।
• इन सभी से बनी संतानें एकल जनक के आनुवंशिक रूप से समान होती हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• मुकुलन बनाम पुनरुद्भवन — दोनों हाइड्रा में होते हैं; मुकुलन इसकी सामान्य जनन विधि है; पुनरुद्भवन कटे टुकड़े से पुनः वृद्धि है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अमीबा, यीस्ट और हाइड्रा में एकल जनक द्वारा जनन क्या दर्शाता है (यह युग्मकों के संलयन के बिना होता है)।

Q11. निम्नलिखित में से कौन-सा विषाणुजन्‍य संक्रमण, यौन संपर्क के माध्यम से फैल सकता है?

  1. (a) सिफलिस
  2. (b) एचआईवी-एड्स
  3. (c) गोनोरिया
  4. (d) तपेदिक
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) एचआईवी-एड्स

उत्तर: विकल्प 2 — एचआईवी-एड्स
एड्स ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) से होता है — जो एक विषाणु है — और यौन संपर्क से फैलता है।
सिफलिस और गोनोरिया जीवाणुजन्य हैं; तपेदिक भी जीवाणुजन्य है और वायु से फैलता है।
रिवीजन नोट — यौन संचारित रोग (NCERT कक्षा 10)
• विषाणुजन्य STD: HIV-एड्स, जननांग मस्से (HPV), जननांग हर्पीज़, हेपेटाइटिस B।
• जीवाणुजन्य STD: सिफलिस (Treponema pallidum), गोनोरिया (Neisseria gonorrhoeae)।
• HIV सहायक T-कोशिकाओं (CD4) पर आक्रमण कर प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर करता है; यह एक रेट्रोवायरस है।
• HIV संक्रमित रक्त, साझा सुइयों और माँ से शिशु में भी फैलता है।
• विश्व एड्स दिवस — 1 दिसंबर; HIV की जाँच — ELISA।
• कंडोम STD से सुरक्षा देते हैं; गर्भनिरोध की शल्य विधियाँ नहीं देतीं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• HIV बनाम एड्स — HIV विषाणु है; एड्स रोग की वह अवस्था है जब प्रतिरक्षा तंत्र नष्ट हो चुका होता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: सिफलिस की पहली सफल औषधि (सालवर्सन, पॉल एर्लिच द्वारा); STD के संबंध में शल्य गर्भनिरोध की सीमा (यह संक्रमण को नहीं रोकता)।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q12. पादपों में जनन की वह विधि निम्नलिखित में से कौन-सी है, जिसमें केवल एक ही जनक शामिल होता है?

  1. (a) लैंगिक जनन (Sexual reproduction)
  2. (b) निषेचन (Fertilisation)
  3. (c) परागण (Pollination)
  4. (d) अलैंगिक जनन (Asexual reproduction)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) अलैंगिक जनन (Asexual reproduction)

उत्तर: विकल्प 4 — अलैंगिक जनन
अलैंगिक जनन में केवल एक जनक की आवश्यकता होती है और युग्मकों का संलयन नहीं होता, इसलिए संतानें जनक की प्रतिकृति होती हैं।
लैंगिक जनन, परागण और निषेचन — सभी में दो जनक या युग्मक शामिल होते हैं।
रिवीजन नोट — पादपों में अलैंगिक जनन
• कायिक प्रवर्धन — जड़, तने या पत्ती से नए पौधे: आलू (कंद), अदरक (प्रकंद), ब्रायोफिलम (पत्ती की कलिकाएँ), गुलाब / गन्ना (तने की कलम)।
• कृत्रिम विधियाँ: कलम, दाब कलम, रोपण, और ऊतक संवर्धन (सूक्ष्म प्रवर्धन)।
• बीजाणु समासंघ — राइजोपस (ब्रेड मोल्ड), फर्न, मॉस।
• खंडन — स्पाइरोगाइरा।
• संतानें आनुवंशिक रूप से समरूप (क्लोन) होती हैं — उपयोगी गुण बने रहते हैं; बीज बनाने की क्षमता खो चुके पौधे जैसे केला, संतरा, गुलाब, चमेली इसी विधि से उगाए जाते हैं।
• कमी: कोई विविधता नहीं, इसलिए अनुकूलन की क्षमता कम होती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• परागण बनाम निषेचन — परागण में परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं; निषेचन नर और मादा युग्मकों का संलयन है — दोनों लैंगिक जनन के चरण हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: किसान कलम, रोपण और ऊतक संवर्धन का उपयोग क्यों करते हैं (आनुवंशिक रूप से समरूप पौधे); अमीबा, यीस्ट और हाइड्रा में एकल जनक द्वारा जनन क्या दर्शाता है (यह युग्मकों के संलयन के बिना होता है)।

Current Affairs (5)

National Affairs and Government Initiatives · Health policy and programmes - current

Q13. 30 सितम्बर 2024 तक के अनुसार, भारत सरकार द्वारा देश भर में कितने जन औषधि केंद्र (Jan Aushadhi Kendras) स्थापित किए जा चुके हैं?

  1. (a) 13,822
  2. (b) 14,822
  3. (c) 12,822
  4. (d) 11,822
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) 13,822

उत्तर: विकल्प 1 — 13,822
30 सितंबर 2024 तक प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि परियोजना (PMBJP) के अंतर्गत
पूरे भारत में 13,822 जन औषधि केंद्र कार्यरत थे।
रिवीजन नोट — प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि परियोजना
• 2008 में जन औषधि के रूप में शुरू; 2015–16 में PMBJP के रूप में पुनः आरंभ।
• रसायन और उर्वरक मंत्रालय का औषध विभाग इसे संचालित करता है।
• कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (PMBI)।
• ब्रांडेड दवाओं से 50%–90% कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएँ बेची जाती हैं।
• जन औषधि दिवस 7 मार्च को मनाया जाता है।
• लक्ष्य: मार्च 2027 तक 25,000 केंद्र।
• 2026 की स्थिति: नेटवर्क मार्च 2025 में 15,000 केंद्रों को पार कर गया।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाने वाला दिवस (जन औषधि दिवस, 7 मार्च)।
International Affairs and Summits · Summits and conferences

Q14. 2024 में बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्‍टी-सेक्‍टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation- BIMSTEC) के प्रथम बिजनेस समिट की मेजबानी निम्नलिखित में से किस देश ने की?

  1. (a) ढाका, बांग्लादेश
  2. (b) थिम्पू, भूटान
  3. (c) काठमांडू, नेपाल
  4. (d) नई दिल्ली, भारत
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) नई दिल्ली, भारत

उत्तर: विकल्प 4 — नई दिल्ली, भारत
पहला BIMSTEC बिज़नेस समिट 6 से 8 अगस्त 2024 तक नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
इसे विदेश मंत्रालय ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के साथ मिलकर आयोजित किया,
ताकि सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिले।
रिवीजन नोट — BIMSTEC
• पूरा नाम: Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल)।
• 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा द्वारा BIST-EC (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड) के रूप में गठित।
• 7 सदस्य: बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड — पाँच दक्षिण एशिया से, दो दक्षिण-पूर्व एशिया से।
• स्थायी सचिवालय ढाका, बांग्लादेश में (2014 में खुला)।
• 5वें शिखर सम्मेलन (वर्चुअल, कोलंबो, मार्च 2022) में BIMSTEC चार्टर अपनाया गया।
• भारत सुरक्षा स्तंभ का नेतृत्व करता है (आतंकवाद-रोधी, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा सुरक्षा)।
• 2026 तक: 6वाँ BIMSTEC शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल 2025 को बैंकॉक, थाईलैंड में हुआ।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• BIMSTEC बनाम SAARC — BIMSTEC का सचिवालय ढाका में है; SAARC का सचिवालय काठमांडू में है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: BIMSTEC की स्थापना करने वाली घोषणा (बैंकॉक घोषणा, 1997); अप्रैल 2025 के BIMSTEC शिखर सम्मेलन का मेज़बान (थाईलैंड)।
Science, Technology and Space - Current · Space missions - current

Q15. भारत का पहला नागरिक अंतरिक्ष पर्यटक निम्नलिखित में से कौन है?

  1. (a) प्रशांत बालकृष्णन नायर
  2. (b) शुभांशु शुक्ला
  3. (c) गोपीचंद थोटाकुरा
  4. (d) अजीत कृष्णन
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) गोपीचंद थोटाकुरा

उत्तर: विकल्प 3 — गोपीचंद थोटाकुरा
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के पायलट और उद्यमी गोपीचंद (गोपी) थोटाकुरा भारत के पहले नागरिक अंतरिक्ष पर्यटक बने।
उन्होंने 19 मई 2024 को ब्लू ओरिजिन की न्यू शेपर्ड NS-25 उप-कक्षीय उड़ान भरी।
रिवीजन नोट — अंतरिक्ष में भारतीय
• राकेश शर्मा — अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय, सोयुज T-11, अप्रैल 1984 ("सारे जहाँ से अच्छा")।
• कल्पना चावला — अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारत में जन्मी महिला (STS-87, 1997); कोलंबिया दुर्घटना (2003) में निधन।
• गोपीचंद थोटाकुरा — पहले भारतीय अंतरिक्ष पर्यटक (NS-25, मई 2024), जिन्होंने कार्मन रेखा (100 किमी) पार की।
• गगनयान के नामित अंतरिक्ष यात्री (फरवरी 2024 में घोषित): प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन, अंगद प्रताप, शुभांशु शुक्ला।
• न्यू शेपर्ड ब्लू ओरिजिन का पुन: प्रयोज्य उप-कक्षीय रॉकेट है, जिसकी स्थापना जेफ बेजोस ने की।
• 2026 तक: शुभांशु शुक्ला जून–जुलाई 2025 में एक्सिओम मिशन 4 से ISS गए — ISS पर जाने वाले पहले भारतीय।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अंतरिक्ष पर्यटक बनाम अंतरिक्ष यात्री — थोटाकुरा ने निजी यात्री के रूप में भुगतान किया; नायर, कृष्णन और शुक्ला गगनयान के लिए चुने गए IAF टेस्ट पायलट हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: 3D-प्रिंटेड इंजन से अग्निबाण SOrTeD प्रक्षेपित करने वाली भारतीय कंपनी (अग्निकुल); भारत का पहला निजी रूप से विकसित रॉकेट (विक्रम-S, स्काईरूट एयरोस्पेस)।
Sports - Current · Olympics, Asian Games and Commonwealth Games - current

Q16. निम्नलिखित में से किसने पेरिस पैरालिंपिक 2024 में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता?

  1. (a) अवनि लेखरा
  2. (b) मोना अग्रवाल
  3. (c) प्रीति पाल
  4. (d) निषाद कुमार
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) अवनि लेखरा

उत्तर: विकल्प 1 — अवनि लेखरा
अवनि लेखरा ने पेरिस 2024 पैरालिंपिक में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 में स्वर्ण जीता और अपना टोक्यो 2020 का खिताब बरकरार रखा।
रिवीजन नोट — पेरिस 2024 पैरालिंपिक में भारत
• आयोजन 28 अगस्त – 8 सितंबर 2024; भारत ने 29 पदक — 7 स्वर्ण, 9 रजत, 13 कांस्य जीते (अब तक का सर्वश्रेष्ठ), और 18वें स्थान पर रहा।
• स्वर्ण: अवनि लेखरा (निशानेबाजी), नितेश कुमार (बैडमिंटन SL3), सुमित अंतिल (भाला फेंक F64), हरविंदर सिंह (तीरंदाजी)।
• अन्य स्वर्ण: धर्मबीर (क्लब थ्रो F51), प्रवीण कुमार (ऊँची कूद T64), नवदीप सिंह (भाला फेंक F41)।
• अवनि लेखरा दो पैरालिंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
• मोना अग्रवाल ने उसी 10 मीटर एयर राइफल SH1 फाइनल में कांस्य जीता।
• प्रीति पाल ने 100 मीटर और 200 मीटर T35 में कांस्य जीते — भारत के पहले पैरालिंपिक ट्रैक पदक।
• निषाद कुमार ने ऊँची कूद T47 में रजत जीता (उनका दूसरा पैरालिंपिक रजत)।
• हरविंदर सिंह ने भारत का पहला पैरालिंपिक तीरंदाजी स्वर्ण जीता।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पेरिस 2024 में भारत का पहला पैरालिंपिक तीरंदाजी स्वर्ण (हरविंदर सिंह); पुरुषों की भाला फेंक F41 में स्वर्ण (नवदीप सिंह); एशियाई रिकॉर्ड के साथ ऊँची कूद T64 का स्वर्ण (प्रवीण कुमार)।
Reports, Indices and Rankings · National indices and rankings

Q17. निम्नलिखित में से किसने SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 का चौथा संस्करण जारी किया?

  1. (a) राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान
  2. (b) राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो
  3. (c) राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
  4. (d) राष्ट्रीय महिला आयोग
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान

उत्तर: विकल्प 1 — राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान
SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 (चौथा संस्करण) नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) द्वारा 12 जुलाई 2024 को जारी किया गया।
रिवीजन नोट — SDG इंडिया इंडेक्स
• 2018 में शुरू — SDG प्रगति का विश्व का पहला सरकार-नेतृत्व वाला उप-राष्ट्रीय मापक।
• संस्करण: 2018, 2019-20, 2020-21, 2023-24 (चौथा)।
• भारत का समग्र स्कोर 2020-21 के 66 से बढ़कर 2023-24 में 71 हो गया।
• शीर्ष राज्य: उत्तराखंड और केरल (79 प्रत्येक); निम्नतम: बिहार (57)।
• सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश आकांक्षी (Aspirant, 0–49), प्रदर्शक (Performer, 50–64), अग्रणी (Front Runner, 65–99), उपलब्धिकर्ता (Achiever, 100) श्रेणियों में रखे जाते हैं।
• 17 में से 16 SDG शामिल; संयुक्त राष्ट्र के 17 SDG 2030 तक के लिए हैं।
• नीति आयोग ने 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग का स्थान लिया; प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: SDG प्रगति का विश्व का पहला सरकार-नेतृत्व वाला उप-राष्ट्रीय मापक (SDG इंडिया इंडेक्स); SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 में राज्यों के समग्र स्कोर का परास (57 से 79)।

Chemistry (9)

Metals and Non-metals · Corrosion and its prevention (galvanisation, etc.)

Q18. ऑक्सीकरण (oxidation) होने पर, सिल्वर का रंग बदलकर _______ हो जाता है और कॉपर का रंग बदलकर _______ हो जाता है।

  1. (a) धूसर; हरा
  2. (b) काला; नीला
  3. (c) काला; हरा
  4. (d) धूसर; नीला
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) काला; हरा

उत्तर: विकल्प 3 — काला; हरा
सिल्वर वायु में उपस्थित सल्फर यौगिकों से अभिक्रिया करके सिल्वर सल्फाइड (Ag_(2)S) की काली परत बनाता है।
कॉपर वायु की नम CO_(2) से अभिक्रिया करके क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट की हरी परत बनाता है।
रिवीजन नोट — धातुओं का संक्षारण
• संक्षारण — आसपास की वायु, नमी या रसायनों द्वारा धातु का धीरे-धीरे क्षय होना।
• लोहा → लाल-भूरा जंग, जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड Fe_(2)O_(3)·xH_(2)O; इसके लिए वायु और जल दोनों आवश्यक हैं।
• सिल्वर → काला (Ag_(2)S, वायु की H_(2)S से)।
• कॉपर → हरा (CuCO_(3)·Cu(OH)_(2), क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट)।
• बचाव: पेंट करना, तेल लगाना, ग्रीस लगाना, यशदलेपन (जस्ते की परत), क्रोमियम लेपन, एनोडीकरण, मिश्रातु बनाना।
• सोना और प्लैटिनम का संक्षारण नहीं होता — वे सबसे कम अभिक्रियाशील हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• वायु में गर्म किया गया कॉपर बनाम नम वायु में छोड़ा गया कॉपर — गर्म करने पर काला कॉपर(II) ऑक्साइड बनता है; धीमे संक्षारण से हरी परत बनती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: सिल्वर की वस्तुएँ काली क्यों पड़ जाती हैं (सिल्वर सल्फाइड की परत बन जाती है); धातुओं के धीरे-धीरे क्षय होने का नाम (संक्षारण)।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q19. पेयजल को रोगाणुनाशित (disinfecting) करने के लिए विरंजन चूर्ण का उपयोग क्यों किया जाता है?

  1. (a) यह जल की कठोरता को कम करता है।
  2. (b) यह जल को उदासीन करता है।
  3. (c) यह क्लोरीन का विमोचन करता है, जो कीटाणुओं को नष्ट करता है।
  4. (d) यह एक अम्लीय माध्यम प्रदान करता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) यह क्लोरीन का विमोचन करता है, जो कीटाणुओं को नष्ट करता है।

उत्तर: विकल्प 3 — यह क्लोरीन का विमोचन करता है, जो कीटाणुओं को नष्ट करता है।
विरंजन चूर्ण, कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड (CaOCl_(2)), क्लोरीन मुक्त करता है,
जो एक प्रबल ऑक्सीकारक है और जल में उपस्थित जीवाणुओं तथा अन्य कीटाणुओं को नष्ट करता है।
रिवीजन नोट — विरंजन चूर्ण
• शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन प्रवाहित करके बनाया जाता है: Ca(OH)_(2) + Cl_(2) → CaOCl_(2) + H_(2)O।
• क्लोरीन क्लोर-क्षार प्रक्रिया (लवण जल का विद्युत अपघटन) से प्राप्त होती है, जिससे NaOH और H_(2) भी मिलते हैं।
• उपयोग: वस्त्र उद्योग में सूती और लिनन कपड़ों के विरंजन में, कागज़ कारखानों में लकड़ी की लुगदी के विरंजन में, धोबीघर में धुले कपड़ों के विरंजन में।
• रासायनिक उद्योगों में ऑक्सीकारक के रूप में तथा क्लोरोफॉर्म बनाने में भी उपयोग होता है।
• पेयजल को रोगाणुनाशित करना — इसमें सक्रिय कारक क्लोरीन है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• विरंजन चूर्ण बनाम धावन सोडा — विरंजन चूर्ण रोगाणुनाशन करता है; धावन सोडा (Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O) स्थायी कठोरता दूर करता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह गैस जो विरंजन चूर्ण को विरंजक और रोगाणुनाशक गुण देती है (क्लोरीन); विरंजन चूर्ण का एक उपयोग (पेयजल का रोगाणुनाशन; रासायनिक उद्योगों में ऑक्सीकारक)।
Acids, Bases and Salts · pH scale and its importance

Q20. pH पैमाने में गहरा नीला रंग __________ को दर्शाता है।

  1. (a) प्रबल अम्लीय विलयन
  2. (b) प्रबल क्षारीय विलयन
  3. (c) दुर्बल क्षारीय विलयन
  4. (d) उदासीन विलयन
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) दुर्बल क्षारीय विलयन

उत्तर: विकल्प 3 — दुर्बल क्षारीय विलयन
सार्वत्रिक सूचक के रंग चार्ट पर नीला से गहरा नीला लगभग pH 8 से 11 को दर्शाता है — दुर्बल क्षार।
सबसे प्रबल क्षार (pH 12–14) बैंगनी रंग दिखाते हैं।
रिवीजन नोट — pH पैमाना और सार्वत्रिक सूचक
• pH = हाइड्रोजन आयन सांद्रता का माप; पैमाना 0 से 14 तक ("p" जर्मन शब्द potenz अर्थात् शक्ति से)।
• pH < 7 अम्लीय, pH = 7 उदासीन, pH > 7 क्षारीय; अधिक H⁺ आयन ⇒ कम pH।
• सार्वत्रिक सूचक के रंग: लाल (प्रबल अम्ल) → नारंगी/पीला (दुर्बल अम्ल) → हरा (उदासीन) → नीला (दुर्बल क्षार) → बैंगनी (प्रबल क्षार)।
• शुद्ध जल 7; जठर रस लगभग 1.2; नींबू का रस लगभग 2.2; रक्त लगभग 7.4; मिल्क ऑफ मैग्नीशिया लगभग 10; NaOH विलयन लगभग 14।
• मुँह का pH 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय शुरू होता है।
• अम्ल वर्षा का pH 5.6 से कम होता है; पौधे उदासीन के निकट pH वाली मृदा में सबसे अच्छे उगते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• सार्वत्रिक सूचक बनाम लिटमस — लिटमस केवल अम्ल (लाल) या क्षार (नीला) बताता है; सार्वत्रिक सूचक रंगों की श्रेणी से कितना प्रबल है, यह भी दिखाता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: pH पैमाने पर उदासीन पदार्थ (शुद्ध जल); अधिक H⁺ सांद्रता का pH पर प्रभाव (कम pH मान)।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q21. सोल्वे (Solvay) प्रक्रिया में धावन सोडा (Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O) किस यौगिक से प्राप्त किया जाता है?

  1. (a) सोडियम सल्फेट
  2. (b) सोडियम क्लोराइड
  3. (c) सोडियम हाइड्रॉक्साइड
  4. (d) सोडियम बाइकार्बोनेट
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) सोडियम बाइकार्बोनेट

उत्तर: विकल्प 4 — सोडियम बाइकार्बोनेट
सोल्वे प्रक्रिया में पहले सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO_(3)) बनता है।
इसे गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट (Na_(2)CO_(3)) मिलता है, जिसे जल के साथ पुनः क्रिस्टलीकृत करके धावन सोडा प्राप्त होता है।
रिवीजन नोट — सोल्वे (अमोनिया-सोडा) प्रक्रिया और धावन सोडा
• कच्चा माल: लवण जल (NaCl), अमोनिया (NH_(3)), कार्बन डाइऑक्साइड (CO_(2)) और चूना पत्थर (CaCO_(3))।
• NaCl + NH_(3) + CO_(2) + H_(2)O → NaHCO_(3) + NH_(4)Cl (सोडियम बाइकार्बोनेट नीचे बैठ जाता है)।
• गर्म करने पर 2NaHCO_(3) → Na_(2)CO_(3) + H_(2)O + CO_(2); निर्जल Na_(2)CO_(3) को सोडा ऐश कहते हैं।
• पुनः क्रिस्टलीकरण द्वारा Na_(2)CO_(3) + 10H_(2)O → Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O (धावन सोडा)।
• NH_(4)Cl से बुझे हुए चूने की सहायता से अमोनिया पुनः प्राप्त कर फिर उपयोग की जाती है।
• धावन सोडा का उपयोग काँच, साबुन और कागज उद्योगों में, बोरेक्स बनाने में और जल की स्थायी कठोरता दूर करने में होता है।
• बेकिंग सोडा (NaHCO_(3)) का उपयोग बेकिंग पाउडर, प्रतिअम्ल (एंटासिड) और सोडा-अम्ल अग्निशामक में होता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• कच्चा माल बनाम पूर्ववर्ती यौगिक — NaCl आरंभिक पदार्थ है; धावन सोडा सीधे सोडियम बाइकार्बोनेट से प्राप्त होता है।
• बेकिंग सोडा बनाम धावन सोडा — NaHCO_(3) बनाम Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O (जल के 10 अणु)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: बेकिंग सोडा बनाने के लिए अमोनिया और जल के साथ आवश्यक गैस (कार्बन डाइऑक्साइड); धावन सोडा का उपयोग करने वाले उद्योग (काँच, साबुन और कागज)।
Acids, Bases and Salts · pH scale and its importance

Q22. प्रबल अम्लीय विलयन (strongly acidic solution) का pH रेंज कितना होता है?

  1. (a) 0-3
  2. (b) 7-8
  3. (c) 12-14
  4. (d) 10-11
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) 0-3

उत्तर: विकल्प 1 — 0-3
pH जितना कम होगा, विलयन उतना ही अधिक अम्लीय होगा।
0 के निकट के मान (लगभग 0–3) प्रबल अम्लीय विलयन दर्शाते हैं, जिसमें H^(+) आयनों की सांद्रता बहुत अधिक होती है।
रिवीजन नोट — pH पैमाना
• pH = हाइड्रोजन आयन की potenz (शक्ति); पैमाना 0 से 14 तक होता है।
• pH < 7 → अम्लीय; pH = 7 → उदासीन (शुद्ध जल); pH > 7 → क्षारीय।
• 0–3 प्रबल अम्लीय; 11–14 प्रबल क्षारीय; 7 के निकट के मान दुर्बल होते हैं।
• अधिक [H^(+)] का अर्थ है कम pH; pH की प्रत्येक इकाई H^(+) में 10 गुना परिवर्तन दर्शाती है।
• सामान्य मान: जठर रस ≈ 1.2, नींबू का रस ≈ 2.2, शुद्ध जल 7, रक्त ≈ 7.4, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया ≈ 10, NaOH विलयन ≈ 14।
• दंत क्षय pH 5.5 से नीचे शुरू होता है; आमाशय का HCl उसे प्रबल अम्लीय रखता है; अम्ल वर्षा का pH 5.6 से कम होता है।
• सार्वत्रिक सूचक रंगों की एक श्रेणी द्वारा pH दर्शाता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• प्रबल अम्ल बनाम सांद्र अम्ल — प्रबल का अर्थ है पूर्णतः आयनित होना (HCl); सांद्र का अर्थ है कम जल में अधिक अम्ल।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अधिक H^(+) सांद्रता का अर्थ (कम pH); pH पैमाने पर उदासीन पदार्थ (शुद्ध जल)।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q23. सोडियम हाइड्रॉक्साइड (sodium hydroxide) किस प्रक्रिया से तैयार किया जाता है?

  1. (a) संपर्क प्रक्रिया (Contact process)
  2. (b) सॉल्‍वाय प्रक्रिया (Solvay’s process)
  3. (c) हैबर प्रक्रिया (Haber’s process)
  4. (d) क्लोर-अल्‍कली प्रक्रिया (Chlor-alkali process)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) क्लोर-अल्‍कली प्रक्रिया (Chlor-alkali process)

उत्तर: विकल्प 4 — क्लोर-अल्‍कली प्रक्रिया (Chlor-alkali process)
लवण जल (brine) (जलीय NaCl) में विद्युत प्रवाहित की जाती है। यह विघटित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन और हाइड्रोजन देता है।
नाम उत्पादों से बना है: क्लोर (क्लोरीन) + अल्कली/क्षार (NaOH)।
रिवीजन नोट — क्लोर-क्षार प्रक्रिया
• समीकरण: 2NaCl(aq) + 2H_(2)O(l) → 2NaOH(aq) + Cl_(2)(g) + H_(2)(g)
• एनोड पर क्लोरीन; कैथोड पर हाइड्रोजन; NaOH कैथोड के निकट बनता है।
• Cl_(2) के उपयोग: जल शोधन, स्विमिंग पूल, PVC, रोगाणुनाशक, CFC, कीटनाशक, और विरंजक चूर्ण बनाना।
• NaOH के उपयोग: साबुन और अपमार्जक, कागज निर्माण, कृत्रिम रेशे, धातुओं से चिकनाई हटाना।
• H_(2) के उपयोग: ईंधन, तेलों का हाइड्रोजनीकरण (मार्जरीन), उर्वरकों के लिए अमोनिया।
• Cl_(2) और H_(2) मिलकर HCl बनाते हैं, जो स्टील की सफाई और दवाओं में प्रयुक्त होता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• सॉल्वे बनाम क्लोर-क्षार — सॉल्वे प्रक्रिया से सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा का आधार) बनता है; क्लोर-क्षार प्रक्रिया से सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनता है।
• हैबर बनाम संपर्क — हैबर से अमोनिया बनती है; संपर्क प्रक्रिया से सल्फ्यूरिक अम्ल बनता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: उस प्रक्रिया का नाम जिसमें लवण जल का विद्युत अपघटन होता है (क्लोर-क्षार प्रक्रिया); कैथोड पर मुक्त होने वाली गैस (हाइड्रोजन); क्लोरीन गैस का एक उपयोग (रोगाणुनाशक)।
Carbon and its Compounds · Chemical properties of carbon compounds (combustion, oxidation, addition, substitution)

Q24. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया मेथेन के दहन को निरुपित (represent) करती है?

  1. (a) CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl
  2. (b) CH₄ + O₂ → CO₂ + 2H₂O
  3. (c) CH₄ + O₂ → CO + H₂O
  4. (d) CH₄ + H₂O → CO + H₂
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) CH₄ + O₂ → CO₂ + 2H₂O

उत्तर: विकल्प 2 — CH₄ + O₂ → CO₂ + 2H₂O
दहन का अर्थ है ऑक्सीजन में जलना। मेथेन वायु में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जल, ऊष्मा और प्रकाश देती है।
संतुलित समीकरण है CH_(4) + 2O_(2) → CO_(2) + 2H_(2)O (विकल्प में उत्पाद सही हैं; उसमें O_(2) असंतुलित छोड़ा गया है)।
रिवीजन नोट — कार्बन यौगिकों का दहन
• कार्बन और उसके यौगिक ऑक्सीजन में जलकर CO_(2) + H_(2)O + ऊष्मा + प्रकाश देते हैं।
• पूर्ण दहन (पर्याप्त वायु) में नीली, अदीप्त ज्वाला बनती है, कालिख नहीं — जैसे LPG या गैस स्टोव में।
• अपूर्ण दहन (सीमित वायु) में CO और कालिख बनती है — पीली, कालिखयुक्त ज्वाला, जो बर्तनों को काला करती है।
• संतृप्त हाइड्रोकार्बन (मेथेन, एथेन) स्वच्छ नीली ज्वाला के साथ जलते हैं; असंतृप्त हाइड्रोकार्बन पीली कालिखयुक्त ज्वाला देते हैं।
• मेथेन (CH_(4)), CNG और बायोगैस का मुख्य घटक है।
• CH_(4) + Cl_(2) → CH_(3)Cl + HCl (सूर्य के प्रकाश में) एक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है, दहन नहीं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• दहन बनाम प्रतिस्थापन — दहन के लिए O_(2) आवश्यक है और इससे CO_(2) + H_(2)O बनते हैं; प्रतिस्थापन में सूर्य के प्रकाश में H का स्थान Cl ले लेता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: गैस बर्नर में मेथेन के पूर्ण दहन का संकेत (नीली, अदीप्त ज्वाला, कोई अवशेष नहीं); सूर्य के प्रकाश में मेथेन की क्लोरीन से अभिक्रिया का प्रकार (प्रतिस्थापन)।
Acids, Bases and Salts · Neutralisation reaction

Q25. निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया, उदासीनीकरण अभिक्रिया को निरुपित (represent) नहीं करती है?

  1. (a) CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O
  2. (b) Na₂CO₃ + HCl → NaCl + CO₂ + H₂O
  3. (c) HCl + NaOH → NaCl + H₂O
  4. (d) H₂SO₄ + Ca(OH)₂ → CaSO₄ + 2H₂O
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) Na₂CO₃ + HCl → NaCl + CO₂ + H₂O

उत्तर: विकल्प 2 — Na₂CO₃ + HCl → NaCl + CO₂ + H₂O
उदासीनीकरण अभिक्रिया केवल अम्ल + क्षारक → लवण + जल होती है।
सोडियम कार्बोनेट एक धातु कार्बोनेट है, और HCl के साथ इसकी अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भी बनती है — यह अम्ल + धातु कार्बोनेट अभिक्रिया है।
संतुलित: Na_(2)CO_(3) + 2HCl → 2NaCl + CO_(2) + H_(2)O।
रिवीजन नोट — अम्लों की अभिक्रियाएँ
• अम्ल + क्षारक → लवण + जल — उदासीनीकरण (जैसे HCl + NaOH → NaCl + H_(2)O)।
• प्रत्येक उदासीनीकरण का मूल है H⁺ + OH⁻ → H_(2)O; यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है।
• अम्ल + धातु कार्बोनेट / हाइड्रोजनकार्बोनेट → लवण + CO_(2) + जल; CO_(2) चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
• अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस (H_(2) पॉप ध्वनि के साथ जलती है)।
• अम्ल + धातु ऑक्साइड → लवण + जल — इसलिए धातु ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं।
• दुर्बल अम्ल (CH_(3)COOH) या अल्प विलेय क्षारक (Ca(OH)_(2)) भी लवण + जल देते हैं — यह भी उदासीनीकरण है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• उदासीनीकरण बनाम अम्ल–कार्बोनेट अभिक्रिया — उत्पादों में CO_(2) देखें; उदासीनीकरण में केवल लवण + जल बनते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: तनु अम्ल की धातु कार्बोनेट से अभिक्रिया में निकलने वाली गैस (कार्बन डाइऑक्साइड); सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट में HCl मिलाने पर प्रेक्षण (बुदबुदाहट)।
Acids, Bases and Salts · Neutralisation reaction

Q26. निम्नलिखित में से कौन-सा, सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के साथ हाइड्रोक्लोरिक अम्‍ल (HCl) के उदासीनीकरण का उत्पाद है?

  1. (a) सोडियम क्लोराइड और जल
  2. (b) सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्‍ल
  3. (c) सोडियम हाइड्रॉक्साइड और जल
  4. (d) सोडियम क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) सोडियम क्लोराइड और जल

उत्तर: विकल्प 1 — सोडियम क्लोराइड और जल
अम्ल + क्षारक → लवण + जल।
HCl + NaOH → NaCl + H_(2)O — बनने वाला लवण सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) है।
रिवीजन नोट — उदासीनीकरण
• अम्ल का H⁺ और क्षारक का OH⁻ मिलकर जल बनाते हैं: H⁺ + OH⁻ → H_(2)O।
• शेष आयन (Na⁺ और Cl⁻) लवण बनाते हैं।
• उदासीनीकरण ऊष्माक्षेपी है — ऊष्मा मुक्त होती है।
• यह एक द्वि-विस्थापन अभिक्रिया भी है (आयनों का आदान-प्रदान होता है)।
• प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक (HCl + NaOH) से उदासीन लवण, pH 7 बनता है।
• दैनिक उपयोग: अम्लता के लिए प्रति-अम्ल (antacid) (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया), चींटी के डंक पर बेकिंग सोडा, अम्लीय मृदा के लिए बिना बुझा चूना / बुझा हुआ चूना।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: HCl की NaOH से अभिक्रिया में जल बनाने वाले आयन (HCl से H⁺ और NaOH से OH⁻); HCl + NaOH → NaCl + H_(2)O और किस प्रकार की अभिक्रिया है (द्वि-विस्थापन)।

Physics (10)

Electricity · Resistors in series and parallel

Q27. प्रतिरोधकों के श्रेणी क्रम संयोजन में, प्रत्येक प्रतिरोधक में वोल्टता किस प्रकार बंटित होती है?

  1. (a) प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती रूप से
  2. (b) प्रतिरोध मानों से अप्रभावित रहती है
  3. (c) सभी प्रतिरोधकों में समान रूप से
  4. (d) प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती रूप से
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती रूप से

उत्तर: विकल्प 1 — प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती रूप से
श्रेणी क्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक से समान धारा I प्रवाहित होती है।
ओम के नियम से V = I × R, अतः I नियत होने पर बड़ा प्रतिरोधक वोल्टता का बड़ा भाग लेता है।
रिवीजन नोट — श्रेणी और पार्श्व संयोजन
• श्रेणी क्रम: समान धारा; वोल्टता V_(1) : V_(2) = R_(1) : R_(2) के अनुसार बँटती है; R_(s) = R_(1) + R_(2) + R_(3)।
• पार्श्व क्रम: समान वोल्टता; धारा प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपात में बँटती है; 1/R_(p) = 1/R_(1) + 1/R_(2) + 1/R_(3)।
• R_(s) सबसे बड़े प्रतिरोधक से भी अधिक होता है; R_(p) सबसे छोटे से भी कम।
• श्रेणी क्रम में एक बल्ब खराब होने पर पूरा परिपथ टूट जाता है; पार्श्व क्रम में शेष बल्ब काम करते रहते हैं।
• घरेलू वायरिंग पार्श्व क्रम में होती है, ताकि प्रत्येक उपकरण को पूरी 220 V मिले।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• श्रेणी बनाम पार्श्व — श्रेणी क्रम में वोल्टता बँटती है, पार्श्व क्रम में धारा बँटती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पार्श्व संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक को क्या मिलता है (समान वोल्टता); प्रतिरोधकों को श्रेणी क्रम में क्यों जोड़ा जाता है (कुल प्रतिरोध बढ़ाने और धारा सीमित करने के लिए)।
Electricity · Numericals on electricity

Q28. उस उपकरण का शक्ति अनुमतांक (power rating) क्या होगा जो 180-V स्रोत से संयोजित होने पर 1.75 A की विद्युत धारा खींचता है?

  1. (a) 440 W
  2. (b) 225 W
  3. (c) 315 W
  4. (d) 105 W
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) 315 W

उत्तर: विकल्प 3 — 315 W
सूत्र — विद्युत शक्ति।
शक्ति = वोल्टता × धारा
P = V × I
मान रखें।
V = 180 V, I = 1.75 A
P = 180 × 1.75
P = 180 × 7/4 = 45 × 7 = 315 W
उत्तर: 315 W
रिवीजन नोट — विद्युत शक्ति
• P = VI = I²R = V²/R; SI मात्रक वाट (W) = 1 J/s।
• 1 kW = 1000 W; 1 अश्वशक्ति = 746 W।
• ऊर्जा = शक्ति × समय; व्यावसायिक मात्रक 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10⁶ J।
• किसी उपकरण का शक्ति अनुमतांक = अपनी अनुमत वोल्टता पर वह प्रति सेकंड जितनी ऊर्जा उपयोग करता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: विद्युत ऊर्जा का सूत्र (ऊर्जा = शक्ति × समय); 1 किलोवाट घंटा जूल में (3.6 × 10⁶ J)।
ट्रैप: 180 ÷ 1.75 से प्रतिरोध (लगभग 103 Ω) मिलता है, शक्ति नहीं।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Electromagnetic induction and Faraday's laws

Q29. जब भी विद्युत परिपथ से संयोजित चुंबकीय क्षेत्र में कोई परिवर्तन होता है, तो एक emf प्रेरित होता है। इसकी व्याख्या किस नियम के द्वारा की गई?

  1. (a) गुरुत्वाकर्षण का नियम
  2. (b) ओम का नियम
  3. (c) फैराडे का नियम
  4. (d) न्यूटन का नियम
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) फैराडे का नियम

उत्तर: विकल्प 3 — फैराडे का नियम
फैराडे का विद्युत चुंबकीय प्रेरण का नियम बताता है कि जब भी किसी परिपथ से संबद्ध
चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उसमें emf प्रेरित होता है।
रिवीजन नोट — विद्युत चुंबकीय प्रेरण
• माइकल फैराडे ने 1831 में विद्युत चुंबकीय प्रेरण की खोज की।
• प्रेरित emf = चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर: e = −dΦ/dt (N फेरों के लिए, e = −N dΦ/dt)।
• लेंज का नियम दिशा बताता है — प्रेरित धारा उसे उत्पन्न करने वाले परिवर्तन का विरोध करती है (ऊर्जा संरक्षण)।
• अधिक फेरों, प्रबल चुंबक और तीव्र गति से प्रेरित धारा अधिक होती है।
• फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम गतिमान चालक में प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
• अनुप्रयोग: AC जनित्र (डायनेमो), ट्रांसफॉर्मर, इंडक्शन कुकर।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• फैराडे का नियम बनाम लेंज का नियम — फैराडे का नियम बताता है कि emf कितना प्रेरित होता है; लेंज का नियम बताता है कि धारा किस दिशा में बहती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: प्रेरित धारा की दिशा बताने वाला नियम (लेंज का नियम — प्रेरित धारा फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करती है); प्रेरित धारा कैसे बढ़ाएँ (कुंडली में अधिक फेरों का उपयोग करें)।
Electricity · Electric power and electrical energy

Q30. समय अंतराल t के दौरान वोल्टता V और धारा I वाले परिपथ में शक्ति, __________ होगी।

  1. (a) I/V
  2. (b) V/I
  3. (c) (I × t)/V
  4. (d) I × V
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) I × V

उत्तर: विकल्प 4 — I × V
आवेश Q को विभवांतर V से होकर ले जाने में किया गया कार्य W = VQ है, और Q = I × t।
शक्ति = कार्य ÷ समय = VIt ÷ t = V × I — समय अंतराल कट जाता है।
रिवीजन नोट — विद्युत शक्ति
• विद्युत शक्ति = विद्युत ऊर्जा के उपयोग की दर: P = VI।
• ओम के नियम (V = IR) से: P = I²R = V²/R।
• SI मात्रक वाट (W); 1 W = 1 V × 1 A = 1 J/s।
• विद्युत ऊर्जा = P × t = VIt; व्यावसायिक मात्रक 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J।
• 100 W, 220 V का बल्ब I = P/V = 0.45 A धारा लेता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• V/I बनाम V × I — V/I प्रतिरोध (ओम) है; V × I शक्ति (वाट) है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: विद्युत ऊर्जा का सूत्र (ऊर्जा = शक्ति × समय); 1 किलोवाट घंटा जूल में (3.6 × 10⁶ J)।
Electricity · Resistors in series and parallel

Q31. समांतर परिपथ में, प्रत्येक प्रतिरोधक पर वोल्टता की तुलना, बैटरी द्वारा आपूर्ति की गई कुल वोल्टता से किस प्रकार की जाती है?

  1. (a) यह प्रत्येक प्रतिरोधक के लिए समान होती है।
  2. (b) इसे प्रतिरोध मानों के अनुसार विभाजित किया जाता है।
  3. (c) यह प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
  4. (d) यह शून्य होती है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) यह प्रत्येक प्रतिरोधक के लिए समान होती है।

उत्तर: विकल्प 1 — यह प्रत्येक प्रतिरोधक के लिए समान होती है।
समांतर क्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक बैटरी के उन्हीं दो बिंदुओं के बीच जुड़ा होता है।
इसलिए प्रत्येक को बैटरी की पूरी वोल्टता मिलती है; उनमें धारा बँटती है।
रिवीजन नोट — श्रेणी और समांतर संयोजन
• समांतर: प्रत्येक पर समान वोल्टता; धारा प्रतिरोध के व्युत्क्रम अनुपात में बँटती है; 1/R_(p) = 1/R_(1) + 1/R_(2) + 1/R_(3)।
• श्रेणी: प्रत्येक से समान धारा; वोल्टता प्रतिरोध के अनुपात में बँटती है; R_(s) = R_(1) + R_(2) + R_(3)।
• R_(p) सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी कम होता है; R_(s) सबसे बड़े से अधिक होता है।
• समांतर क्रम में एक उपकरण खराब होने पर अन्य नहीं रुकते।
• घरेलू उपकरण समांतर क्रम में जोड़े जाते हैं, ताकि प्रत्येक को पूरे 220 V मिलें।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• श्रेणी बनाम समांतर — श्रेणी में वोल्टता बँटती है, समांतर में धारा बँटती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: समांतर संयोजन का विशिष्ट गुण (प्रत्येक प्रतिरोधक को समान वोल्टता मिलती है); घरेलू उपकरण समांतर क्रम में क्यों जोड़े जाते हैं (प्रत्येक को समान विभवांतर मिलता है)।
Electricity · Electric power and electrical energy

Q32. धारा (I), शक्ति (P) और वोल्टता (V) के बीच क्या संबंध होता है?

  1. (a) I = PV
  2. (b) I = P ÷ V
  3. (c) I = V ÷ P
  4. (d) I = P2V
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) I = P ÷ V

उत्तर: विकल्प 2 — I = P ÷ V
विद्युत शक्ति = वोल्टता × धारा (P = VI)।
दोनों पक्षों को V से भाग देने पर I = P ÷ V प्राप्त होता है।
रिवीजन नोट — विद्युत शक्ति
• शक्ति वह दर है जिससे विद्युत ऊर्जा का उपयोग होता है: P = VI।
• ओम के नियम (V = IR) से: P = I²R = V²/R।
• SI मात्रक वाट (W); 1 W = 1 V × 1 A; 1 kW = 1,000 W।
• विद्युत ऊर्जा E = P × t; व्यावसायिक मात्रक किलोवाट-घंटा (kWh) है।
• 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J = बिजली के बिल पर 1 यूनिट।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: 120 V पर 60 W बल्ब का प्रतिरोध (R = V²/P = 240 Ω); विद्युत ऊर्जा का सूत्र (ऊर्जा = शक्ति × समय)।

Q33. विद्युत मोटर में दिक्परिवर्तक (commutator) का उपयोग किसके लिए किया जाता है?

  1. (a) कुंडली से प्रवाहित धारा की दिशा को उत्क्रमित करने के लिए
  2. (b) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को परिवर्तित करने के लिए
  3. (c) परिपथ में विभवांतर बनाए रखने के लिए
  4. (d) परिपथ में चुंबकीय क्षेत्र बनाए रखने के लिए
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) कुंडली से प्रवाहित धारा की दिशा को उत्क्रमित करने के लिए

उत्तर: विकल्प 1 — कुंडली से प्रवाहित धारा की दिशा को उत्क्रमित करने के लिए
विभक्त वलय दिक्परिवर्तक प्रत्येक आधे घूर्णन पर कुंडली में धारा की दिशा उत्क्रमित कर देता है।
इससे कुंडली की प्रत्येक भुजा पर बल एक ही ओर धकेलता रहता है, और कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है।
रिवीजन नोट — विद्युत मोटर
• विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
• सिद्धांत: चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है; इसकी दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से ज्ञात होती है।
• भाग: आर्मेचर कुंडली, क्षेत्र चुंबक, विभक्त वलय (दिक्परिवर्तक), कार्बन ब्रुश, धुरी।
• ब्रुश विभक्त वलयों को स्पर्श करते हैं और कुंडली में धारा पहुँचाते हैं।
• व्यावसायिक मोटर शक्ति बढ़ाने के लिए विद्युत चुंबक, नर्म लोहे का क्रोड और तार के अनेक फेरे प्रयोग करती है।
• उपयोग: पंखे, मिक्सर, वॉशिंग मशीन, जल पंप, कंप्यूटर।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• मोटर बनाम जनित्र — मोटर धारा को गति में बदलती है (वामहस्त नियम); जनित्र गति को धारा में बदलता है (दक्षिणहस्त नियम)।
• विभक्त वलय बनाम सर्पी वलय — विभक्त वलय (दिक्परिवर्तक) DC मोटर / DC जनित्र में; सर्पी वलय AC जनित्र में।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलने वाला उपकरण (विद्युत मोटर); AC जनित्र कुंडली से धारा लेने के लिए क्या प्रयोग करता है (सर्पी वलय)।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Force on a current-carrying conductor and Fleming's left-hand rule

Q34. विद्युत मोटर में धारावाही चालक पर बल की दिशा निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित में से किस नियम का उपयोग किया जाता है?

  1. (a) दाएँ हाथ का अंगूठे नियम
  2. (b) एम्पीयर का नियम
  3. (c) फ्लेमिंग के दाएँ हाथ का नियम
  4. (d) फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम

उत्तर: विकल्प 4 — फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम
मोटर में, चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर एक बल लगता है।
इसकी दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से ज्ञात होती है — यह मोटर नियम है।
रिवीजन नोट — फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम और विद्युत मोटर
• बाएँ हाथ का अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा परस्पर लंबवत फैलाएँ।
• तर्जनी → चुंबकीय क्षेत्र; मध्यमा → धारा; अंगूठा → बल (गति)।
• धारा क्षेत्र के लंबवत हो तो बल अधिकतम और समानांतर हो तो शून्य होता है; F = BIL।
• धारा या क्षेत्र में से किसी एक को उलटने पर बल भी उलट जाता है।
• विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है; विभक्त वलय दिक्परिवर्तक हर आधे घूर्णन पर धारा उलटता है।
• फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम प्रेरित धारा की दिशा बताता है — जनित्र के लिए प्रयुक्त।
• दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम सीधे तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• बायाँ हाथ बनाम दायाँ हाथ — बायाँ मोटर के लिए (बल); दायाँ जनित्र के लिए (प्रेरित धारा)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम में मध्यमा क्या दर्शाती है (धारा की दिशा); क्षेत्र के लिए उंगली (तर्जनी); धारा उलटने का प्रभाव (बल उलट जाता है)।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Domestic electric circuits, fuse and earthing

Q35. घरेलू परिपथ में विद्युत फ्यूज का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. (a) धारा प्रवाह में वृद्धि करना (To increase current flow)
  2. (b) परिपथ में प्रतिरोध को कम करना (To reduce resistance in the circuit)
  3. (c) अतिभारण और लघुपरिपथ को रोकना (To prevent overloading and short circuits)
  4. (d) वोल्टता आपूर्ति को विनियमित करना (To regulate voltage supply)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) अतिभारण और लघुपरिपथ को रोकना (To prevent overloading and short circuits)

उत्तर: विकल्प 3 — अतिभारण और लघुपरिपथ को रोकना
फ्यूज एक सुरक्षा युक्ति है। जब बहुत अधिक धारा प्रवाहित होती है (अतिभारण या लघुपरिपथ), तो फ्यूज का तार पिघल जाता है और परिपथ को तोड़ देता है, जिससे वायरिंग और उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
रिवीजन नोट — विद्युत फ्यूज और घरेलू परिपथ
• यह धारा के तापीय प्रभाव (H = I²Rt) पर कार्य करता है।
• फ्यूज तार का गलनांक कम होता है — प्रायः टिन और सीसे की मिश्रधातु।
• फ्यूज विद्युन्मय (live) तार के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
• अनुमतांक: बल्ब और पंखों के लिए 5 A; गीज़र, AC, हीटर जैसे भारी उपकरणों के लिए 15 A।
• लघुपरिपथ — विद्युन्मय और उदासीन तार सीधे संपर्क में आ जाते हैं; प्रतिरोध घटता है और धारा तेजी से बढ़ती है।
• अतिभारण — एक ही सॉकेट पर बहुत अधिक उपकरण, या वोल्टता में अचानक वृद्धि।
• भूसंपर्क तार (हरा विद्युतरोधी आवरण) धातु-आवरण वाले उपकरणों के झटके से उपयोगकर्ता की रक्षा करता है; MCB फ्यूज का आधुनिक विकल्प है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• फ्यूज बनाम भूसंपर्कण — फ्यूज परिपथ और उपकरणों को अधिक धारा से बचाता है; भूसंपर्कण उपयोगकर्ता को विद्युत झटके से बचाता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: घरेलू फ्यूज का मुख्य उद्देश्य (अधिक धारा बहने पर परिपथ तोड़ना); गीज़र और कूलर के लिए अनुमतांक (15 A); भारत में भूसंपर्क तार का रंग (हरा)।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Solenoid and electromagnet

Q36. विद्युत धारा ले जाने वाली एक लंबी, सीधी परिनालिका (solenoid) के अंदर चुंबकीय क्षेत्र ____________ होता है।

  1. (a) शून्य
  2. (b) धारा के व्युत्क्रमानुपाती
  3. (c) एकसमान और परिनालिका के अक्ष के समानांतर
  4. (d) किनारों के निकट अधिक प्रबल
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) एकसमान और परिनालिका के अक्ष के समानांतर

उत्तर: विकल्प 3 — एकसमान और परिनालिका के अक्ष के समानांतर
लंबी धारावाही परिनालिका के अंदर क्षेत्र रेखाएँ अक्ष के अनुदिश समानांतर सीधी रेखाएँ होती हैं।
समान दूरी पर स्थित समानांतर रेखाओं का अर्थ है कि क्षेत्र सभी बिंदुओं पर समान है — एकसमान।
रिवीजन नोट — परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र
• परिनालिका — विद्युतरोधी ताँबे के तार के अनेक वृत्ताकार फेरों की कुंडली, जो पास-पास बेलन के आकार में लपेटी जाती है।
• बाहर इसका क्षेत्र-पैटर्न छड़ चुंबक जैसा होता है — एक सिरा N और दूसरा S की तरह कार्य करता है।
• अधिक फेरे, अधिक धारा और नर्म लोहे का क्रोड होने पर क्षेत्र की प्रबलता बढ़ती है।
• परिनालिका के अंदर रखी नर्म लोहे की छड़ विद्युत चुंबक बन जाती है — एक अस्थायी चुंबक।
• विद्युत चुंबकों का उपयोग विद्युत घंटी, क्रेन, रिले, MRI और लाउडस्पीकर में होता है।
• क्षेत्र की दिशा दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम से ज्ञात होती है (उंगलियाँ धारा की दिशा में मोड़ें; अंगूठा N बताता है)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अंदर बनाम बाहर — अंदर: एकसमान, समानांतर रेखाएँ; बाहर: रेखाएँ N से फैलती हैं और मुड़कर S पर लौटती हैं, छड़ चुंबक की तरह।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: परिनालिका अपने अंदर रखे नर्म लोहे को चुंबकित क्यों कर सकती है (यह अंदर प्रबल और एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है); परिनालिका की क्षेत्र रेखाओं का आकार (अंदर समानांतर सीधी रेखाएँ)।

Geography (1)

India - Drainage System · Tributaries and confluences

Q37. निम्नलिखित नदियों का उनकी सहायक नदियों से सुमेलित करें।
[TABLE]
नदी | सहायक नदी
1. ब्रह्मपुत्र | a. बेतवा
2. सिंधु | b. चिनाब
3. यमुना | c. दिबांग
[/TABLE]

  1. (a) 1-c, 2-a, 3-b
  2. (b) 1-b, 2-c, 3-a
  3. (c) 1-c, 2-b, 3-a
  4. (d) 1-a, 2-b, 3-c
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) 1-c, 2-b, 3-a

उत्तर: विकल्प 3 — 1-c, 2-b, 3-a
सूचियाँ: 1. ब्रह्मपुत्र, 2. सिंधु, 3. यमुना तथा a. बेतवा, b. चिनाब, c. दिबांग।
दिबांग ब्रह्मपुत्र से मिलती है, चिनाब सिंधु तंत्र से मिलती है और बेतवा यमुना से मिलती है।
रिवीजन नोट — हिमालयी नदी तंत्र और उनकी सहायक नदियाँ
• सिंधु: झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज मिलकर पंचनद बनाती हैं और मिठानकोट (पाकिस्तान) के ऊपर सिंधु में मिलती हैं; श्योक, जास्कर, काबुल भी इसकी सहायक नदियाँ हैं।
• चिनाब तांडी (लाहौल-स्पीति, हिमाचल प्रदेश) में चंद्रा और भागा के मिलने से बनती है — इसीलिए चंद्रभागा; यह सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
• ब्रह्मपुत्र: ऊपरी असम में दिबांग और लोहित दिहांग (सियांग) से मिलती हैं; दाहिने तट की सहायक नदियों में सुबनसिरी, मानस, तीस्ता शामिल हैं।
• यमुना: दाहिने तट पर चंबल, सिंध, बेतवा, केन; टोंस इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी है।
• बेतवा विंध्य (मध्य प्रदेश) से निकलती है और हमीरपुर (उत्तर प्रदेश) के पास यमुना में मिलती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• बेतवा यमुना से मिलती है, सीधे गंगा से नहीं; गंगा की दाहिने तट की मुख्य सहायक नदी सोन है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह नदी जिससे दिबांग और लोहित मिलती हैं (ब्रह्मपुत्र); यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी (टोंस); वह नदी जिसमें पंचनद मिलती है (सिंधु); चिनाब कहाँ बनती है (तांडी)।

Polity (3)

Q38. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद वित्त आयोग से संबंधित है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों का वितरण करता है?

  1. (a) अनुच्छेद 282
  2. (b) अनुच्छेद 283
  3. (c) अनुच्छेद 280
  4. (d) अनुच्छेद 281
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) अनुच्छेद 280

उत्तर: विकल्प 3 — अनुच्छेद 280
अनुच्छेद 280 के अनुसार राष्ट्रपति प्रत्येक पाँच वर्ष में (या उससे पहले) वित्त आयोग का गठन करते हैं।
यह सिफारिश करता है कि करों की शुद्ध आय का केंद्र और राज्यों के बीच, तथा राज्यों के आपस में, बँटवारा कैसे हो।
रिवीजन नोट — वित्त आयोग
• एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक निकाय; 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य, राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त।
• सदस्यों की योग्यताएँ संसद तय करती है — वित्त आयोग (प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1951।
• 1ला वित्त आयोग (1951) — अध्यक्ष के.सी. नियोगी।
• 15वाँ वित्त आयोग — एन.के. सिंह; विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा 41% (2021–26)।
• 16वाँ वित्त आयोग (31 दिसंबर 2023 को गठित) — अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, 2026–31 के लिए।
• सिफारिशें सलाहकारी हैं, बाध्यकारी नहीं; अनुच्छेद 281 के तहत राष्ट्रपति इन्हें संसद के समक्ष रखते हैं।
• अनुच्छेद 275 — सांविधिक सहायता अनुदान; अनुच्छेद 282 — विवेकाधीन अनुदान।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अनुच्छेद 280 बनाम अनुच्छेद 243-I / 243-Y — 280 संघ का वित्त आयोग है; पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए राज्य वित्त आयोग 243-I और 243-Y के अंतर्गत आता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है (राष्ट्रपति); राज्यों को सांविधिक सहायता अनुदान का अनुच्छेद (अनुच्छेद 275)।
Union Executive · Vice-President

Q39. निम्नलिखित में से कौन-से अनुच्छेद, भारत के उपराष्ट्रपति के चुनाव, योग्यता और पदच्युति के प्रावधानों से संबंधित हैं?

  1. (a) अनुच्छेद 78 - 80
  2. (b) अनुच्छेद 224 - 245
  3. (c) अनुच्छेद 68 - 75
  4. (d) अनुच्छेद 63 - 71
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) अनुच्छेद 63 - 71

उत्तर: विकल्प 4 — अनुच्छेद 63 - 71
अनुच्छेद 63 से 71 (भाग V) उपराष्ट्रपति से संबंधित हैं — पद, निर्वाचन, अर्हताएँ, कार्यकाल, पद से हटाना, शपथ और निर्वाचन संबंधी विवाद।
रिवीजन नोट — भारत का उपराष्ट्रपति
• अनु. 63 — भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा; अनु. 64 — पदेन राज्यसभा का सभापति।
• अनु. 65 — राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।
• अनु. 66 — दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित और मनोनीत) द्वारा निर्वाचित।
• मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व — एकल संक्रमणीय मत द्वारा, गुप्त मतदान से।
• अर्हताएँ: नागरिक, 35 वर्ष की आयु, राज्यसभा के निर्वाचन के लिए योग्य।
• अनु. 67 — कार्यकाल 5 वर्ष; त्यागपत्र राष्ट्रपति को देता है।
• 14 दिन की सूचना के बाद राज्यसभा के संकल्प (प्रभावी बहुमत) द्वारा, जिससे लोकसभा सहमत हो, हटाया जाता है।
• अनु. 69 — शपथ राष्ट्रपति के समक्ष; अनु. 71 — निर्वाचन विवादों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय करता है।
• वेतन संसद द्वारा निर्धारित होता है, जो राज्यसभा के सभापति के रूप में मिलता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• राष्ट्रपति बनाम उपराष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल — राष्ट्रपति के मंडल में निर्वाचित विधायक और केवल निर्वाचित सांसद होते हैं; उपराष्ट्रपति के मंडल में सभी सांसद होते हैं और कोई विधायक नहीं।
• अनुच्छेद 52–62 राष्ट्रपति से; अनुच्छेद 74–75 मंत्रिपरिषद से संबंधित हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: उपराष्ट्रपति अपना त्यागपत्र किसे सौंपता है (राष्ट्रपति); उसके निर्वाचन संबंधी विवादों का निर्णय कौन करता है (सर्वोच्च न्यायालय); इस पद के लिए न्यूनतम आयु (35 वर्ष)।
DPSP and Fundamental Duties · Swaran Singh Committee and 42nd/86th amendments

Q40. निम्नलिखित में से किस समिति ने सुझाव दिया कि 'करों का भुगतान करना' भी भारतीय नागरिक का मौलिक कर्तव्य होना चाहिए?

  1. (a) सरकारिया आयोग
  2. (b) जस्टिस जे.एस. वर्मा समिति
  3. (c) स्वर्ण सिंह समिति
  4. (d) संथानम समिति
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) स्वर्ण सिंह समिति

उत्तर: विकल्प 3 — स्वर्ण सिंह समिति
स्वर्ण सिंह समिति (1976) ने मौलिक कर्तव्यों की सिफारिश की थी, और उसके सुझावों में करों का भुगतान करने का कर्तव्य भी शामिल था।
अनुच्छेद 51A जोड़ते समय संसद ने यह कर्तव्य स्वीकार नहीं किया।
रिवीजन नोट — मौलिक कर्तव्य
• 1976 में आपातकाल के दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा गठित; इसने 8 कर्तव्यों की सिफारिश की।
• 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 ने भाग IVA, अनुच्छेद 51A में 10 कर्तव्य जोड़े — समिति के प्रस्ताव से अधिक।
• जो सुझाव स्वीकार नहीं हुए: करों का भुगतान करने का कर्तव्य, और कर्तव्यों का पालन न करने पर संसद द्वारा दंड।
• 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 ने 11वाँ कर्तव्य, 51A(k) जोड़ा — माता-पिता 6–14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।
• यह विचार सोवियत संघ (USSR) के संविधान से लिया गया; ये कर्तव्य गैर-न्यायोचित हैं।
• मौलिक कर्तव्यों पर जस्टिस जे.एस. वर्मा समिति (1998, रिपोर्ट 1999) ने उन कानूनों की सूची बनाई जो कुछ कर्तव्यों को पहले से लागू करते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• स्वर्ण सिंह बनाम जे.एस. वर्मा — स्वर्ण सिंह ने कर्तव्यों का प्रस्ताव किया (1976); जे.एस. वर्मा ने उनके प्रवर्तन की समीक्षा की (1999)।
• सरकारिया बनाम संथानम — सरकारिया (1983) केंद्र–राज्य संबंध; संथानम (1962) भ्रष्टाचार निवारण, जिससे केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) बना।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: मौलिक कर्तव्यों की सिफारिश करने वाली समिति (स्वर्ण सिंह समिति); इन्हें जोड़ने वाला संशोधन (42वाँ, 1976); 86वें संशोधन का कर्तव्य (शिक्षा, 6–14 वर्ष)।

Modern History (1)

Rise of Nationalism and Indian National Congress · Foundation of the INC (1885)

Q41. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अधिवेशन निम्नलिखित में से किस स्थान पर हुआ था?

  1. (a) बॉम्बे
  2. (b) लाहौर
  3. (c) इलाहाबाद
  4. (d) कलकत्ता
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) बॉम्बे

उत्तर: विकल्प 1 — बॉम्बे
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अधिवेशन 28–31 दिसंबर 1885 को बॉम्बे में, गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुआ।
रिवीजन नोट — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
• संस्थापक ए.ओ. ह्यूम, एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक, जो इसके पहले महासचिव बने।
• पहले अध्यक्ष: डब्ल्यू.सी. बनर्जी; 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
• अधिवेशन पूना में होना था, पर हैजा फैलने के कारण बॉम्बे स्थानांतरित किया गया।
• 2रा अधिवेशन: कलकत्ता, 1886 (दादाभाई नौरोजी); 3रा: मद्रास, 1887 (बदरुद्दीन तैयबजी, पहले मुस्लिम अध्यक्ष)।
• पहले ब्रिटिश अध्यक्ष: जॉर्ज यूल (इलाहाबाद, 1888); पहली महिला अध्यक्ष: एनी बेसेंट (कलकत्ता, 1917)।
• पहली भारतीय महिला अध्यक्ष: सरोजिनी नायडू (कानपुर, 1925)।
• स्थापना के समय वायसराय: लॉर्ड डफरिन।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: INC के पहले अध्यक्ष (डब्ल्यू.सी. बनर्जी); INC के संस्थापक (ए.ओ. ह्यूम); पहले ब्रिटिश अध्यक्ष (जॉर्ज यूल, 1888); पहली महिला अध्यक्ष (एनी बेसेंट, 1917)।

Medieval History (1)

Bhakti, Sufi and Sikh Movements · Bhakti in Maharashtra and Bengal (Namdev, Tukaram, Chaitanya)

Q42. चैतन्य महाप्रभु निम्नलिखित में से किस धार्मिक संप्रदाय से संबंधित थे?

  1. (a) वैष्णव
  2. (b) कापालिक
  3. (c) शैव
  4. (d) तंत्र
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) वैष्णव

उत्तर: विकल्प 1 — वैष्णव
चैतन्य महाप्रभु बंगाल के वैष्णव भक्ति संत थे, जो कृष्ण (विष्णु) के उपासक थे।
उन्होंने गौड़ीय वैष्णव परंपरा की स्थापना की।
रिवीजन नोट — चैतन्य महाप्रभु और बंगाल का वैष्णव धर्म
• जन्म 1486 में नवद्वीप (नदिया), बंगाल में; मृत्यु 1534 में पुरी, ओडिशा में।
• संकीर्तन को लोकप्रिय बनाया — कृष्ण और राधा की स्तुति में सामूहिक गायन और नृत्य।
• सभी के लिए खुली भक्ति (भक्ति) का उपदेश दिया; जाति बंधन और कर्मकांड का विरोध किया।
• उनके शिष्यों, वृंदावन के छह गोस्वामियों, ने आंदोलन के ग्रंथ रचे।
• इस्कॉन (ISKCON) (हरे कृष्ण आंदोलन), जिसकी स्थापना 1966 में ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की, उन्हीं की परंपरा का अनुसरण करता है।
• अन्य वैष्णव संत: आलवार (तमिल), रामानुज, रामानंद, वल्लभाचार्य, सूरदास, मीराबाई, शंकरदेव (असम)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• वैष्णव बनाम शैव — वैष्णव विष्णु की उपासना करते हैं (आलवार); शैव शिव की उपासना करते हैं (नयनार, कापालिक, वीरशैव)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: तमिल भक्ति के वैष्णव संतों का नाम (आलवार); संत तुकाराम के अभंगों की भाषा (मराठी); वह ग्रंथ जिस पर ज्ञानेश्वरी एक टीका है (भगवद्गीता)।

Static GK (1)

Q43. ताज महोत्सव कहाँ आयोजित किया जाता है?

  1. (a) ताजमहल के पश्चिमी द्वार के पास
  2. (b) फ़तेहपुर सीकरी में
  3. (c) ताजमहल के पूर्वी द्वार के पास
  4. (d) आगरा के किले में
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) ताजमहल के पूर्वी द्वार के पास

उत्तर: विकल्प 3 — ताजमहल के पूर्वी द्वार के पास
ताज महोत्सव प्रतिवर्ष आगरा में ताजमहल के पूर्वी द्वार के पास स्थित खुले शिल्प स्थल शिल्पग्राम में आयोजित होता है।
रिवीजन नोट — ताज महोत्सव
• प्रतिवर्ष 18 से 27 फरवरी तक आयोजित होने वाला 10-दिवसीय उत्सव।
• उत्तर प्रदेश पर्यटन द्वारा आयोजित; पहली बार 1992 में आयोजित।
• पूरे भारत की कला, शिल्प, संगीत, नृत्य और व्यंजन का प्रदर्शन — संगमरमर जड़ाई, ज़री, चिकनकारी, कालीन।
• उत्तर प्रदेश के मुगल काल और नवाबी शैली पर आधारित।
• ताजमहल (शाहजहाँ द्वारा मुमताज महल के लिए निर्मित; मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी) 1983 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना।
• उत्तर प्रदेश के अन्य उत्सव: कुंभ मेला (प्रयागराज), लखनऊ महोत्सव, देव दीपावली (वाराणसी), राम बारात (आगरा)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: ताजमहल को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किए जाने का वर्ष (1983); ताजमहल के मुख्य वास्तुकार (उस्ताद अहमद लाहौरी)।
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