Medieval Culture, Literature and Travellers · Medieval terms and administrative vocabulary
Q1. निम्नलिखित में से किस उपाधि का अर्थ 'तीनों लोकों का स्वामी' है?
- (a) महाराजाधिराज
- (b) त्रिभुवन-चक्रवर्ती
- (c) एकराट-सम्राट
- (d) देवराज
उत्तर और व्याख्या
उत्तर: (b) त्रिभुवन-चक्रवर्ती
सही उत्तर: त्रिभुवन-चक्रवर्ती (विकल्प 2)
उपाधि 'त्रिभुवन-चक्रवर्ती' का शाब्दिक अर्थ 'तीनों लोकों का विजेता/शासक' है (त्रि = तीन, भुवन = लोक, चक्रवर्ती = सम्राट/संप्रभु शासक)। यह एक शाही उपाधि थी जिसका उपयोग शक्तिशाली मध्यकालीन भारतीय राजा अपनी सर्वोच्च सत्ता स्थापित करने के लिए करते थे।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
विकल्प 1 - महाराजाधिराज: इसका अर्थ 'राजाओं का राजा' है, न कि 'तीनों लोकों का स्वामी'।
विकल्प 3 - एकराट-सम्राट: इसका अर्थ 'एकमात्र संप्रभु' या 'एकमात्र सम्राट' है, जो एक सर्वोच्च शासक को संदर्भित करता है।
विकल्प 4 - देवराज: इसका अर्थ 'देव-राजा' है, जो खमेर/दक्षिण-पूर्व एशियाई शासकों से जुड़ी एक अवधारणा है।
उपाधि 'त्रिभुवन-चक्रवर्ती' का शाब्दिक अर्थ 'तीनों लोकों का विजेता/शासक' है (त्रि = तीन, भुवन = लोक, चक्रवर्ती = सम्राट/संप्रभु शासक)। यह एक शाही उपाधि थी जिसका उपयोग शक्तिशाली मध्यकालीन भारतीय राजा अपनी सर्वोच्च सत्ता स्थापित करने के लिए करते थे।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
विकल्प 1 - महाराजाधिराज: इसका अर्थ 'राजाओं का राजा' है, न कि 'तीनों लोकों का स्वामी'।
विकल्प 3 - एकराट-सम्राट: इसका अर्थ 'एकमात्र संप्रभु' या 'एकमात्र सम्राट' है, जो एक सर्वोच्च शासक को संदर्भित करता है।
विकल्प 4 - देवराज: इसका अर्थ 'देव-राजा' है, जो खमेर/दक्षिण-पूर्व एशियाई शासकों से जुड़ी एक अवधारणा है।