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RRB JE CBT-1 2024-25 17 दिसंबर 2024 शिफ्ट 3 – GK प्रश्न – उत्तर व व्याख्या सहित

RRB JE CBT-1 2024-25 (17 दिसंबर 2024 शिफ्ट 3) में पूछे गए सभी 44 GK / सामान्य अध्ययन प्रश्न, सही उत्तर और व्याख्या के साथ – विषयवार।

📚 44 प्रश्न🗓️ 17 दिसंबर 2024⏰ शिफ्ट 3
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विषय: Biology (10) · Polity (3) · Static GK (2) · Chemistry (10) · Economics (1) · Current Affairs (5) · Physics (9) · Medieval History (1) · Geography (2) · Modern History (1)

Biology (10)

Heredity and Evolution · Mendel's laws and experiments

Q1. किस वैज्ञानिक/किन वैज्ञानिकों ने वंशागति के नियम स्थापित किए?

  1. (a) चार्ल्स डार्विन
  2. (b) थॉमस हंट मॉर्गन
  3. (c) वाटसन और क्रिक
  4. (d) ग्रेगर जोहान मेंडल
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) ग्रेगर जोहान मेंडल

उत्तर: विकल्प 4 — ग्रेगर जोहान मेंडल
ग्रेगर जोहान मेंडल ने उद्यान मटर (पाइसम सैटाइवम) पर अपने प्रयोगों से वंशागति के नियम प्रतिपादित किए और उन्हें 1865–66 में प्रकाशित किया।
रिवीजन नोट — मेंडल और वंशागति के नियम
• मेंडल एक ऑस्ट्रियाई पादरी (भिक्षु) थे; उन्हें आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है।
• उन्होंने मटर में 7 जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया (लंबा/बौना, गोल/झुर्रीदार बीज आदि)।
• प्रभाविता का नियम — संकर में F_(1) में केवल प्रभावी लक्षण दिखाई देता है (लंबा × बौना → सभी लंबे)।
• पृथक्करण का नियम — किसी जीन के दो युग्मविकल्पी (एलील) युग्मक बनते समय अलग हो जाते हैं; एकसंकर F_(2) अनुपात 3 : 1 है।
• स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम — दो भिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं; द्विसंकर F_(2) अनुपात 9 : 3 : 3 : 1 है।
• आनुवंशिकी (genetics) शब्द विलियम बेटसन ने दिया।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• मेंडल बनाम मॉर्गन बनाम वाटसन–क्रिक — मेंडल ने वंशागति के नियम दिए; टी. एच. मॉर्गन ने दिखाया कि जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं (फल मक्खी); वाटसन और क्रिक ने DNA का द्विकुंडलित (डबल-हेलिक्स) मॉडल (1953) दिया।
• मेंडल बनाम डार्विन — डार्विन ने प्राकृतिक चयन द्वारा विकास का सिद्धांत दिया, आनुवंशिकता के नियम नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: युग्मकों में युग्मविकल्पियों के अलग होने की व्याख्या करने वाला मेंडल का नियम (पृथक्करण का नियम); मटर में लंबापन किस प्रकार का लक्षण है (प्रभावी); बौने मटर के पौधे का युग्मविकल्पी संयोजन (tt)।
Reproduction · Reproductive health and contraception

Q2. गर्भनिरोध, किस स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है?

  1. (a) मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम
  2. (b) पल्स पोलियो कार्यक्रम
  3. (c) इंद्रधनुष टीकाकरण कार्यक्रम
  4. (d) प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रम
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रम

उत्तर: विकल्प 4 — प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रम
भारत का प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (RCH) कार्यक्रम जनन की दृष्टि से स्वस्थ समाज का लक्ष्य रखता है, और गर्भनिरोध के माध्यम से परिवार नियोजन इसका एक मुख्य लक्ष्य है।
रिवीजन नोट — जनन स्वास्थ्य और गर्भनिरोध
• भारत ने 1952 में परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया — राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा करने वाला पहला देश।
• 1997 में इसे विस्तृत करके प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य देखभाल (RCH) कार्यक्रम बनाया गया।
• रोध (बैरियर) विधियाँ — कंडोम, डायाफ्राम, गर्भाशय ग्रीवा टोपी; ये यौन संचारित रोगों (STDs) से भी बचाती हैं।
• हार्मोनल विधियाँ — मुख से ली जाने वाली गोलियाँ और इंजेक्शन, जो अंडोत्सर्ग को रोकते हैं।
• अंतर्गर्भाशयी युक्तियाँ (IUDs) — गर्भाशय में लगाया गया कॉपर-T आरोपण को रोकता है।
• शल्य विधियाँ — पुरुष नसबंदी (पुरुषों में शुक्रवाहक काटी जाती है) और स्त्री नसबंदी (महिलाओं में फैलोपियन नलिकाएँ काटी जाती हैं); ये STDs से कोई सुरक्षा नहीं देतीं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• पल्स पोलियो बनाम इंद्रधनुष — दोनों टीकाकरण अभियान हैं (पोलियो; टीके से रोके जा सकने वाले अनेक रोग), परिवार नियोजन नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: भारत ने राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम किस वर्ष शुरू किया (1952); शल्य नसबंदी की एक सीमा (STDs से कोई सुरक्षा नहीं); अवरुद्ध अंडवाहिनियों में सहायता (IVF)।
Reproduction · Pollination and fertilisation in plants

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी, परागण (pollination) विधि नहीं है?

  1. (a) अलैंगिक परागण (Asexual pollination)
  2. (b) स्वपरागण (Self-pollination)
  3. (c) वायु परागण (Wind pollination)
  4. (d) जल परागण (Water pollination)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) अलैंगिक परागण (Asexual pollination)

उत्तर: विकल्प 1 — अलैंगिक परागण (Asexual pollination)
परागण परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण है — यह लैंगिक जनन का एक चरण है।
इसलिए "अलैंगिक परागण" जैसी कोई चीज नहीं होती।
रिवीजन नोट — परागण
• स्वपरागण — परागकण उसी पुष्प के या उसी पौधे के किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं।
• पर-परागण — परागकण उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं; इससे विविधता उत्पन्न होती है।
• पर-परागण के कारक: वायु (वायुपरागण), जल (जलपरागण), कीट (कीटपरागण), पक्षी (पक्षीपरागण), जंतु (प्राणीपरागण)।
• वायु-परागित पुष्प हल्के, सूखे परागकण बड़ी मात्रा में बनाते हैं और इनके वर्तिकाग्र पिच्छाकार होते हैं (मक्का, घास)।
• कीट-परागित पुष्प बड़े, चटकीले रंग वाले, सुगंधित होते हैं और इनमें मकरंद तथा चिपचिपे परागकण होते हैं।
• परागण के बाद निषेचन — नर और मादा युग्मकों का संलयन — से युग्मनज बनता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• परागण बनाम निषेचन — परागण परागकणों का स्थानांतरण है; निषेचन युग्मकों का संलयन है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: परागण : परागकणों का स्थानांतरण :: निषेचन : ? (युग्मकों का संलयन); कीट-परागित पुष्पों में न पाई जाने वाली विशेषता (बहुत बड़ी संख्या में हल्के, छोटे परागकण)।
Heredity and Evolution · Heredity and variation

Q4. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक मुख्य रूप से प्रजातियों की उत्तरजीविता के लिए उत्तरदायी है?

  1. (a) निकेत (Niche)
  2. (b) तापमान
  3. (c) उत्परिवर्तन
  4. (d) विभिन्नताएँ
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) विभिन्नताएँ

उत्तर: विकल्प 4 — विभिन्नताएँ
जीवों में पाई जाने वाली विभिन्नताएँ किसी प्रजाति की उत्तरजीविता में सहायक होती हैं: जब पर्यावरण बदलता है, तो कुछ विभिन्न जीव उसके अधिक अनुकूल होते हैं और जीवित रहकर जनन करते हैं।
विभिन्नता के बिना, एक ही भारी परिवर्तन पूरी समष्टि को नष्ट कर सकता है।
रिवीजन नोट — विभिन्नता और विकास (कक्षा 10)
• विभिन्नता DNA प्रतिकृति की अशुद्धियों से उत्पन्न होती है और लैंगिक जनन से बढ़ती है (हर पीढ़ी में नए संयोजन)।
• अलैंगिक जनन में विभिन्नता बहुत कम होती है; लैंगिक जनन में अधिक।
• उदाहरण (NCERT): ऊष्मा सहन कर सकने वाले जीवाणु ग्रीष्म लहर (heat wave) में बेहतर जीवित रहते हैं।
• प्राकृतिक वरण (डार्विन) पर्यावरण के अनुकूल विभिन्नताओं का पक्ष लेता है; यही विकास को आगे बढ़ाता है।
• पीढ़ियों में संचित वंशानुगत विभिन्नताएँ नई प्रजातियों (जाति-उद्भवन) को जन्म देती हैं।
• कायिक (अजनन) ऊतकों में होने वाले परिवर्तन उपार्जित लक्षण हैं और वंशानुगत नहीं होते।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• विभिन्नता बनाम उत्परिवर्तन — उत्परिवर्तन DNA में परिवर्तन का एक स्रोत है; विभिन्नता जीवों के बीच अंतरों की पूरी श्रृंखला है, जिस पर वरण कार्य करता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पीढ़ियों में संचित होकर नए जीव-रूप बनाने वाली चीज़ (विभिन्नताएँ — जैव-विविधता का विकास); डार्विन का रूपांतरण सहित अवतरण (भिन्न-भिन्न उत्तरजीविता और जनन)।
Reproduction · Reproductive health and contraception

Q5. परिवार नियोजन में कॉपर-T जैसी युक्तियों के उपयोग का उद्देश्य क्या है?

  1. (a) महिलाओं में हॉर्मोन के स्तर में परिवर्तन करना
  2. (b) पुरुषों में शुक्राणुओं के स्थानांतरण को रोकना
  3. (c) निषेचित अंडे को गर्भाशय में रोपित होने से रोकना
  4. (d) शुक्राणुओं के लिए भौतिक अवरोध का कार्य करना
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) निषेचित अंडे को गर्भाशय में रोपित होने से रोकना

उत्तर: विकल्प 3 — निषेचित अंडे को गर्भाशय में रोपित होने से रोकना
कॉपर-T एक अंतर्गर्भाशयी युक्ति (IUD) है, जिसे गर्भाशय के अंदर लगाया जाता है।
यह निषेचित अंडे को गर्भाशय की भित्ति में रोपित होने से रोकती है, जिससे गर्भधारण शुरू नहीं होता।
रिवीजन नोट — गर्भनिरोधन की विधियाँ
• अवरोधिका विधियाँ — कंडोम, डायाफ्राम, गर्भाशय-ग्रीवा टोपी; शुक्राणुओं को अंडे तक पहुँचने से रोकती हैं; कंडोम यौन संचारित रोगों (STD) से भी बचाव करते हैं।
• हॉर्मोनल (रासायनिक) विधियाँ — मुख से ली जाने वाली गोलियाँ हॉर्मोन संतुलन बदल देती हैं, जिससे अंडे मोचित नहीं होते।
• अंतर्गर्भाशयी युक्तियाँ — लूप या कॉपर-T को गर्भाशय में लगाया जाता है; कॉपर आयन शुक्राणुओं को कम सक्रिय भी बनाते हैं।
• शल्य विधियाँ — पुरुष नसबंदी (पुरुषों में शुक्रवाहक अवरुद्ध की जाती है), महिला नसबंदी (महिलाओं में अंडवाहिनी (फैलोपियन नलिका) अवरुद्ध की जाती है)।
• शल्य विधि गर्भधारण रोकती है, पर यौन संचारित रोगों से कोई बचाव नहीं करती।
• IUD से गर्भाशय में जलन जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• कॉपर-T बनाम मुख से ली जाने वाली गोली — कॉपर-T गर्भाशय के अंदर कार्य करती है; गोली हॉर्मोन बदलकर कार्य करती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पुरुष या महिला नसबंदी की एक सीमा (यह यौन संचारित रोगों को नहीं रोकती); महिला की अंडवाहिनियाँ अवरुद्ध होने पर प्रयुक्त तकनीक (इन विट्रो निषेचन (IVF))।
Reproduction · Pollination and fertilisation in plants

Q6. परागकण से एक नलिका जैसी संरचना वर्तिका से होते हुए नीचे की ओर बढ़ती है और बीजांड तक पहुँचती है। यह पराग नलिका किसके लिए उत्तरदायी है:

  1. (a) अंडाशय में स्थित मादा जनन-कोशिका तक कार्बन डाइऑक्साइड ले जाने के लिए
  2. (b) अंडाशय में स्थित मादा जनन-कोशिका तक ऑक्सीजन ले जाने के लिए
  3. (c) अंडाशय में स्थित मादा जनन-कोशिका तक पोषण ले जाने के लिए
  4. (d) नर जनन-कोशिका को अंडाशय में स्थित मादा जनन-कोशिका तक ले जाने के लिए
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) नर जनन-कोशिका को अंडाशय में स्थित मादा जनन-कोशिका तक ले जाने के लिए

उत्तर: विकल्प 4 — नर जनन-कोशिका को अंडाशय में स्थित मादा जनन-कोशिका तक ले जाने के लिए
परागण के बाद परागकण से एक पराग नलिका निकलती है, जो वर्तिका से होकर नीचे बीजांड तक बढ़ती है।
यह नर जनन-कोशिका को मादा जनन-कोशिका (अंड) तक ले जाती है, जिससे निषेचन हो सके।
रिवीजन नोट — पौधों में परागण और निषेचन
• परागण — परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण; स्व-परागण (उसी पुष्प में) या पर-परागण (दूसरे पुष्प में)।
• पर-परागण के वाहक: वायु, जल, कीट, पक्षी।
• निषेचन — बीजांड के अंदर नर और मादा जनन-कोशिकाओं का संलयन, जिससे युग्मनज बनता है।
• निषेचन के बाद: युग्मनज → भ्रूण, बीजांड → बीज, अंडाशय → फल।
• निषेचन के बाद पंखुड़ियाँ, बाह्यदल और पुंकेसर प्रायः मुरझाकर गिर जाते हैं।
• पराग नलिका रसायनों के प्रति अनुक्रिया में बीजांड की ओर बढ़ती है — यह रसायनानुवर्तन का उदाहरण है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• परागण बनाम निषेचन — परागण में परागकणों का स्थानांतरण होता है; निषेचन युग्मकों का संलयन है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पराग नलिका का बीजांड की ओर बढ़ना किसका उदाहरण है (रसायनानुवर्तन); निषेचन का अर्थ (युग्मकों का संलयन)।
Reproduction · Pollination and fertilisation in plants

Q7. परागण द्वारा गुलाब के पुष्प के परागकण सूरजमुखी के वर्तिकाग्र पर पहुँच गए हैं। वर्तिकाग्र द्वारा परागकण अस्वीकार कर दिए जाएँगे, क्योंकि:

  1. (a) परागकण का वर्तिकाग्र से कोई संबंध नहीं है
  2. (b) परागकण गुलाब के पुष्प के थे
  3. (c) वर्तिकाग्र का परागकण से कोई संबंध नहीं है
  4. (d) परागकण सूरजमुखी के नहीं थे
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) परागकण सूरजमुखी के नहीं थे

उत्तर: विकल्प 4 — परागकण सूरजमुखी के नहीं थे
वर्तिकाग्र केवल अपनी ही जाति के संगत परागकणों को पहचानकर स्वीकार करता है।
गुलाब के परागकण भिन्न जाति के हैं, इसलिए सूरजमुखी का वर्तिकाग्र उन्हें अस्वीकार कर देता है और बीजांड तक कोई पराग नलिका नहीं बढ़ती।
रिवीजन नोट — पुष्प और परागण
• पुंकेसर (नर) = परागकोश + तंतु; परागकोश परागकण बनाता है।
• स्त्रीकेसर / अंडप (मादा) = वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय; अंडाशय में बीजांड होते हैं।
• वर्तिकाग्र चिपचिपा होता है — यह परागकणों को पकड़ता है और जाँचता है कि वे संगत हैं या नहीं।
• केवल सही जाति के परागकण ही वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर पराग नलिका बनाते हैं।
• एकलिंगी पुष्पों (पपीता, तरबूज) में केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर होता है; उभयलिंगी पुष्पों (गुड़हल, सरसों) में दोनों होते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय से बना मादा जनन भाग (जायांग / स्त्रीकेसर); परागण का अर्थ (परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण)।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q8. लीश्मानिया में जनन होता है:

  1. (a) केवल ऊर्ध्वाधर तलों में द्विखंडन द्वारा
  2. (b) किसी भी तल में द्विखंडन द्वारा
  3. (c) दो समान भागों में द्विखंडन द्वारा
  4. (d) एक निर्धारित तल में द्विखंडन द्वारा
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) एक निर्धारित तल में द्विखंडन द्वारा

उत्तर: विकल्प 4 — एक निर्धारित तल में द्विखंडन द्वारा
लीश्मानिया में कोशिका के एक सिरे पर कोड़े जैसी संरचना (कशाभ) होती है।
इसलिए इसका द्विखंडन इस संरचना के सापेक्ष एक निर्धारित तल में होता है।
रिवीजन नोट — एककोशिकीय जीवों में विखंडन
• द्विखंडन — एक कोशिका दो संतति कोशिकाओं में विभाजित होती है, जैसे अमीबा, पैरामीशियम, लीश्मानिया।
• अमीबा किसी भी तल में विभाजित हो सकता है; लीश्मानिया एक निर्धारित तल में विभाजित होता है।
• बहुखंडन — एक कोशिका एक साथ अनेक संतति कोशिकाओं में विभाजित होती है, जैसे प्लाज्मोडियम।
• लीश्मानिया से कालाजार होता है, जो सैंड फ्लाई (बालू मक्खी) से फैलता है; प्लाज्मोडियम से मलेरिया होता है, जो मादा एनाफ़िलीज़ मच्छर से फैलता है।
• विखंडन, मुकुलन, खंडन और बीजाणु निर्माण अलैंगिक हैं — एक ही जनक, कोई युग्मक नहीं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अमीबा बनाम लीश्मानिया — अमीबा: किसी भी तल में विखंडन; लीश्मानिया: निर्धारित तल में विखंडन।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अमीबा में द्विखंडन और यीस्ट में मुकुलन की समान विशेषता (युग्मकों का संलयन नहीं होता); मलेरिया उत्पन्न करने वाले जीव का प्रकार (प्रोटोज़ोआ, प्लाज्मोडियम)।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q9. खमीर (Yeast) में जनन की किस अलैंगिक विधि द्वारा जनन होता है?

  1. (a) संलयन (Fusion)
  2. (b) मुकुलन (Budding)
  3. (c) विखंडन (Fission)
  4. (d) कायिक प्रवर्धन (Vegetative propagation)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) मुकुलन (Budding)

उत्तर: विकल्प 2 — मुकुलन (Budding)
खमीर (यीस्ट) में जनक कोशिका से एक छोटी मुकुल उभार के रूप में बाहर निकलती है।
मुकुल बढ़ती है, अलग हो जाती है और एक नई यीस्ट कोशिका बन जाती है।
रिवीजन नोट — अलैंगिक जनन की विधियाँ
• मुकुलन — एक स्थान पर मुकुल विकसित होकर अलग हो जाती है; यीस्ट और हाइड्रा।
• द्विखंडन — अमीबा, पैरामीशियम; बहुखंडन — प्लाज्मोडियम।
• खंडन — शरीर टुकड़ों में टूट जाता है, प्रत्येक टुकड़ा नए जीव में विकसित होता है; स्पाइरोगायरा।
• बीजाणु निर्माण — बीजाणुधानी में बीजाणु; राइज़ोपस (ब्रेड मोल्ड)।
• कायिक प्रवर्धन — जड़, तने या पत्ती से नए पौधे; ब्रायोफिलम, आलू, गुलाब।
• यीस्ट एक एककोशिकीय कवक है; यह अवायवीय श्वसन करके एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है (किण्वन)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• हाइड्रा बनाम यीस्ट में मुकुलन — हाइड्रा बहुकोशिकीय है (मुकुल पुनर्जनन कोशिकाओं से बनती है); यीस्ट एककोशिकीय है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अमीबा में द्विखंडन तथा यीस्ट और हाइड्रा में मुकुलन में क्या समान है (युग्मकों का संलयन नहीं होता); यीस्ट में अवायवीय श्वसन के उत्पाद (एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड)।
Reproduction · Vegetative propagation

Q10. ब्रायोफिलम पौधे का कौन-सा भाग कायिक प्रवर्धन द्वारा नए पौधे विकसित करता है?

  1. (a) पत्तियाँ
  2. (b) जड़ें
  3. (c) फूल
  4. (d) तने
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) पत्तियाँ

उत्तर: विकल्प 1 — पत्तियाँ
ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) की पत्तियों के किनारों पर बने खाँचों में कलिकाएँ होती हैं।
जब पत्ती नम मृदा पर गिरती है, तो ये कलिकाएँ नए पौधों में विकसित हो जाती हैं — पत्ती द्वारा कायिक प्रवर्धन।
रिवीजन नोट — कायिक प्रवर्धन
• कायिक प्रवर्धन = बीज के बिना जड़, तने या पत्ती से नए पौधे; संतति जनक के आनुवंशिक रूप से समान होती है।
• पत्ती: ब्रायोफिलम (पत्ती के किनारे पर कलिकाएँ)।
• तना: आलू (कंद, इसकी आँखें कलिकाएँ हैं), अदरक और हल्दी (प्रकंद), प्याज (शल्ककंद), गन्ना, गुलाब (कलम), घास (उपरिभूस्तारी)।
• जड़: शकरकंद, डहेलिया, अमरूद।
• कृत्रिम विधियाँ: कलम, दाब-कलम, रोपण (आम, नींबू वंश) और ऊतक संवर्धन (ऑर्किड, सजावटी पौधे)।
• उन पौधों के लिए उपयोगी जिनमें बीज उत्पन्न करने की क्षमता समाप्त हो गई है — केला, संतरा, गुलाब, चमेली।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• ब्रायोफिलम बनाम आलू — ब्रायोफिलम पत्तियों से जनन करता है; आलू तने (कंद) से, जड़ से नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: कायिक प्रवर्धन के बारे में गलत कथन (नए पौधे बीजों से उत्पन्न होते हैं); किसान कलम और रोपण का उपयोग क्यों करते हैं (आनुवंशिक रूप से समान पौधे)।

Polity (3)

Amendments and Important Articles · Basic structure doctrine

Q11. भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निम्नलिखित में से किस मामले में ‘मूल ढाँचे का सिद्धांत’ प्रतिपादित किया?

  1. (a) ए. के. गोपालन मामला
  2. (b) मेनका गांधी मामला
  3. (c) गोलकनाथ मामला
  4. (d) केशवानंद भारती मामला
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) केशवानंद भारती मामला

उत्तर: विकल्प 4 — केशवानंद भारती मामला
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, किंतु उसके मूल ढाँचे को नहीं बदल सकती।
रिवीजन नोट — मूल ढाँचे का सिद्धांत
• 24 अप्रैल 1973 को 13 न्यायाधीशों की पीठ — अब तक की सबसे बड़ी — ने 7 : 6 के बहुमत से निर्णय दिया; मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सीकरी।
• इसी मामले में माना गया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है (बेरुबारी यूनियन, 1960 का निर्णय पलटा गया)।
• गोलकनाथ मामला (1967) — संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती; 24वें संशोधन (1971) ने यह शक्ति पुनः दी।
• मिनर्वा मिल्स (1980) — सीमित संशोधन शक्ति और न्यायिक पुनरावलोकन स्वयं मूल ढाँचे का भाग हैं।
• इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण (1975) — इस सिद्धांत के आधार पर किसी संशोधन (39वें) को रद्द करने वाला पहला मामला।
• न्यायालयों द्वारा बताई गई मूल विशेषताएँ: संविधान की सर्वोच्चता, पंथनिरपेक्षता, संघवाद, शक्तियों का पृथक्करण, विधि का शासन, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• ए. के. गोपालन (1950) बनाम मेनका गांधी (1978) — दोनों अनुच्छेद 21 के मामले हैं: गोपालन में "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" की संकीर्ण व्याख्या हुई; मेनका गांधी में प्रक्रिया का न्यायसंगत, निष्पक्ष और युक्तियुक्त होना आवश्यक माना गया।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह मामला जिसमें पहली बार प्रस्तावना को संविधान का भाग माना गया (केशवानंद भारती, 1973); गोलकनाथ के बाद मौलिक अधिकारों पर संसद की शक्ति पुनः देने वाला संशोधन (24वाँ, 1971)।
Fundamental Rights · Fundamental Rights - general (Articles 12, 13)

Q12. भारतीय संविधान निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद के अंतर्गत अपने नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी प्रदान करता है?

  1. (a) केवल अनुच्छेद 12 से 30
  2. (b) केवल अनुच्छेद 15 से 35
  3. (c) केवल अनुच्छेद 12 से 35
  4. (d) केवल अनुच्छेद 14 से 32
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) केवल अनुच्छेद 12 से 35

उत्तर: विकल्प 3 — केवल अनुच्छेद 12 से 35
मौलिक अधिकार संविधान के भाग III में हैं, जो अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35 तक है।
रिवीजन नोट — मौलिक अधिकार (भाग III)
• भाग III को भारत का मैग्नाकार्टा कहा जाता है; यह विचार संयुक्त राज्य अमेरिका (बिल ऑफ राइट्स) से लिया गया।
• अनुच्छेद 12 "राज्य" को परिभाषित करता है; अनुच्छेद 13 मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाली विधियों को शून्य करता है — न्यायिक पुनरावलोकन का आधार।
• अब छह अधिकार: समता (14–18), स्वतंत्रता (19–22), शोषण के विरुद्ध (23–24), धर्म की स्वतंत्रता (25–28), संस्कृति और शिक्षा संबंधी (29–30), संवैधानिक उपचार (32)।
• संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(f) और 31) 44वें संशोधन, 1978 द्वारा हटाया गया; अब यह अनुच्छेद 300A के तहत विधिक अधिकार है।
• अनुच्छेद 33–35 — संसद सशस्त्र बलों के मौलिक अधिकार सीमित कर सकती है (अनु. 33), सेना विधि (मार्शल लॉ) के दौरान (अनु. 34), और कुछ मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए विधि बना सकती है (अनु. 35)।
• राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 के अधिकार निलंबित नहीं किए जा सकते (अनुच्छेद 359)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अनुच्छेद 14 से 32 बनाम 12 से 35 — अनुच्छेद 14–32 में स्वयं छह अधिकार हैं, पर भाग III पूरा 12 से शुरू होकर 35 पर समाप्त होता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: संविधान का वह भाग जिसे "भारत का मैग्नाकार्टा" कहा जाता है (भाग III); आज मौलिक अधिकारों की श्रेणियों की संख्या (छह); सशस्त्र बलों के मौलिक अधिकारों से संबंधित अनुच्छेद (अनुच्छेद 33)।
Judiciary · Supreme Court - jurisdiction (original, appellate, advisory)

Q13. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद, सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णय या आदेश की समीक्षा करने की अनुमति देता है?

  1. (a) अनुच्छेद 132
  2. (b) अनुच्छेद 137
  3. (c) अनुच्छेद 138
  4. (d) अनुच्छेद 135
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) अनुच्छेद 137

उत्तर: विकल्प 2 — अनुच्छेद 137
अनुच्छेद 137 सर्वोच्च न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई विधि और अनुच्छेद 145 के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, अपने द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनर्विलोकन करने की शक्ति देता है।
रिवीजन नोट — सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार से संबंधित अनुच्छेद
• अनुच्छेद 124 — सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन।
• अनुच्छेद 129 — सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है (अपनी अवमानना के लिए दंड दे सकता है)।
• अनुच्छेद 131 — केंद्र और राज्यों के बीच विवादों में मूल क्षेत्राधिकार।
• अनुच्छेद 132 — संवैधानिक मामलों में अपील; अनुच्छेद 133 — सिविल; अनुच्छेद 134 — आपराधिक।
• अनुच्छेद 136 — किसी भी न्यायालय या अधिकरण के विरुद्ध विशेष अनुमति याचिका (SLP)।
• अनुच्छेद 137 — अपने निर्णयों का पुनर्विलोकन; अनुच्छेद 143 — परामर्शी क्षेत्राधिकार (राष्ट्रपति द्वारा निर्देश)।
• अनुच्छेद 138 — संसद द्वारा क्षेत्राधिकार का विस्तार; अनुच्छेद 142 — पूर्ण न्याय।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अनुच्छेद 137 बनाम अनुच्छेद 136 — 137 में न्यायालय अपने ही निर्णय का पुनर्विलोकन करता है; 136 किसी अन्य न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध अपील की विशेष अनुमति है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह अनुच्छेद जो सर्वोच्च न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए किसी भी निर्णय का पुनर्विलोकन करने देता है (अनुच्छेद 137)।

Static GK (2)

Monuments and Heritage · Temples and religious places

Q14. तमिलनाडु में प्रसिद्ध मंदिर परिसर का क्या नाम है, जो अपनी द्रविड़ वास्तुकला और 1,000 स्तंभों वाले हॉल के लिए विख्‍यात है?

  1. (a) मीनाक्षी मंदिर
  2. (b) कांचीपुरम मंदिर
  3. (c) बृहदेश्वर मंदिर
  4. (d) जगन्नाथ मंदिर
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) मीनाक्षी मंदिर

उत्तर: विकल्प 1 — मीनाक्षी मंदिर
मदुरै का मीनाक्षी अम्मन मंदिर एक द्रविड़ मंदिर परिसर है, जो अपने ऊँचे गोपुरमों और आयिरम काल मंडपम — हजार स्तंभों वाले हॉल के लिए प्रसिद्ध है (वास्तव में इसमें लगभग 985 नक्काशीदार स्तंभ हैं)।
रिवीजन नोट — तमिलनाडु के द्रविड़ मंदिर
• द्रविड़ शैली — गर्भगृह के ऊपर ऊँचा पिरामिडनुमा विमान, विशाल गोपुरम (प्रवेश द्वार के शिखर), स्तंभयुक्त मंडप और मंदिर के सरोवर।
• मीनाक्षी मंदिर, मदुरै — मीनाक्षी (पार्वती) और सुंदरेश्वर (शिव) को समर्पित; पहले पांड्यों के अधीन बना और नायकों (तिरुमलाई नायक) ने इसका बहुत विस्तार किया; 14 गोपुरम।
• बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर — राजराज चोल प्रथम द्वारा निर्मित (लगभग 1010 में पूर्ण); यूनेस्को स्थल महान जीवंत चोल मंदिरों का भाग।
• कांचीपुरम — "हजार मंदिरों का नगर"; कैलाशनाथ मंदिर पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) ने बनवाया।
• नटराज मंदिर, चिदंबरम में भी हजार स्तंभों वाला हॉल है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• मीनाक्षी मंदिर बनाम हजार स्तंभ मंदिर — "हजार स्तंभ मंदिर" (रुद्रेश्वर) हनमकोंडा, वारंगल (तेलंगाना) में है, जिसे काकतीय राजा रुद्रदेव ने बनवाया था, तमिलनाडु में नहीं।
• जगन्नाथ मंदिर, पुरी ओडिशा में है और कलिंग (नागर) शैली का है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: "दक्षिण का ताजमहल" कहा जाने वाला मंदिर (मीनाक्षी मंदिर, मदुरै); इसकी सबसे प्रसिद्ध विशेषता (विशाल गोपुरम); वारंगल के हजार स्तंभ मंदिर के निर्माता (काकतीय)।
Books and Authors · Modern Indian books and authors

Q15. अरुणिमा होसकोटे द्वारा लिखित 'हेयरलूम ट्रेजरीज: द कल्चरल टेपेस्ट्री ऑफ इंडिया: ए कंपाइलेशन ऑफ सिलेक्टेड आर्टिकल्स फ्रॉम इंडिया बेकन्स: वॉल्यूम 1 (Heirloom Treasures: The Cultural Tapestry of India: A Compilation of Selected Articles from India Beckons: Volume 1)' किस वर्ष प्रकाशित हुआ था?

  1. (a) 2020
  2. (b) 2018
  3. (c) 2021
  4. (d) 2019
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) 2020

उत्तर: विकल्प 1 — 2020
अरुणिमा होसकोटे की हेयरलूम ट्रेजरीज: द कल्चरल टेपेस्ट्री ऑफ इंडिया (वॉल्यूम 1)
2020 में नोशन प्रेस द्वारा प्रकाशित हुई।
रिवीजन नोट — हेयरलूम ट्रेजरीज: द कल्चरल टेपेस्ट्री ऑफ इंडिया
• लेखिका: अरुणिमा होसकोटे, एक लेखिका–संपादक और कैम्ब्रिज से अर्थशास्त्र की स्नातक।
• यह पुस्तक इंडिया बेकन्स — उनके द्वारा स्थापित डिजिटल यात्रा पत्रिका — से चुने हुए लेखों का संकलन है।
• विषय: भारत की विरासत, संस्कृति और यात्रा — शीर्षक की "हेयरलूम ट्रेजरीज" (पारिवारिक धरोहरें)।
• प्रकाशक: नोशन प्रेस; वर्ष: 2020; यह वॉल्यूम 1 है।
• पुस्तकें-और-लेखक प्रश्नों के लिए शीर्षक → लेखक → वर्ष तीनों को एक साथ याद करें।

Chemistry (10)

Q16. अम्लीय वर्षा का pH मान कितना होता है?

  1. (a) 7 के बराबर
  2. (b) 5.6 से अधिक लेकिन 7 से कम
  3. (c) 5.6 से कम
  4. (d) 7 से अधिक
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) 5.6 से कम

उत्तर: विकल्प 3 — 5.6 से कम
सामान्य वर्षा का जल पहले से ही हल्का अम्लीय होता है, लगभग pH 5.6, क्योंकि इसमें CO_(2) घुलकर दुर्बल कार्बोनिक अम्ल बनाती है।
वर्षा को अम्लीय वर्षा तभी कहा जाता है जब उसका pH 5.6 से नीचे चला जाए।
रिवीजन नोट — अम्लीय वर्षा
• मुख्य कारण: जीवाश्म ईंधनों के जलने से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड (SO_(2)) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO_(x)) — बिजलीघर, वाहन, उद्योग।
• ये वायु में सल्फ्यूरिक अम्ल (H_(2)SO_(4)) और नाइट्रिक अम्ल (HNO_(3)) बनाती हैं।
• प्रभाव: संगमरमर के स्मारकों को क्षति — ताजमहल का "संगमरमर कैंसर" (CaCO_(3) अम्ल से अभिक्रिया करता है); वनों, मृदा और जलीय जीवों को हानि।
• अम्लीय झीलें मछलियों को मार देती हैं; किसान अम्लीय मृदा को बिना बुझे चूने या बुझे हुए चूने से ठीक करते हैं।
• शुद्ध जल का pH 7 होता है; 7 से कम pH अम्लीय, 7 से अधिक क्षारीय होता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• सामान्य वर्षा बनाम अम्लीय वर्षा — दोनों का pH 7 से कम है; अम्लीय वर्षा की विभाजक रेखा 5.6 है, 7 नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अम्लीय वर्षा में सर्वाधिक योगदान देने वाली गैस (सल्फर डाइऑक्साइड); अम्लीय वर्षा के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी दो गैसें (सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड)।
Chemical Reactions and Equations · Decomposition reactions (thermal, electrolytic, photolytic)

Q17. निम्नलिखित में से कौन-सा, विद्युत धारा प्रवाहित करने से होने वाली वियोजन अभिक्रिया का उदाहरण है?

  1. (a) ऊष्मा द्वारा पोटैशियम परमैंगनेट का वियोजन
  2. (b) ऊष्मा द्वारा सोडियम बाइकार्बोनेट का वियोजन
  3. (c) जल का विद्युत अपघटन
  4. (d) कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म करना
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) जल का विद्युत अपघटन

उत्तर: विकल्प 3 — जल का विद्युत अपघटन
जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूट जाता है:
2H_(2)O → 2H_(2) + O_(2) — एक विद्युत अपघटनी वियोजन अभिक्रिया।
अन्य तीनों विकल्प ऊष्मा से होने वाले वियोजन हैं।
रिवीजन नोट — वियोजन अभिक्रियाओं के प्रकार
• वियोजन — एक यौगिक टूटकर दो या अधिक सरल पदार्थ बनाता है (AB → A + B); इसके लिए ऊर्जा चाहिए, इसलिए अधिकांश ऊष्माशोषी होती हैं।
• ऊष्मीय (ऊष्मा): CaCO_(3) → CaO + CO_(2) (सीमेंट के लिए बिना बुझा चूना); 2FeSO_(4) → Fe_(2)O_(3) + SO_(2) + SO_(3); 2Pb(NO_(3))_(2) → 2PbO + 4NO_(2) + O_(2) (भूरा धुआँ)।
• विद्युत अपघटनी (विद्युत): जल → कैथोड पर H_(2) और ऐनोड पर O_(2), आयतन के अनुसार 2 : 1 अनुपात में; गलित NaCl और Al_(2)O_(3) भी।
• प्रकाश-अपघटनी (प्रकाश): 2AgCl → 2Ag + Cl_(2), 2AgBr → 2Ag + Br_(2) — श्वेत-श्याम फोटोग्राफी में प्रयुक्त।
• बेकिंग सोडा को गर्म करना: 2NaHCO_(3) → Na_(2)CO_(3) + H_(2)O + CO_(2); KMnO_(4) को गर्म करने पर O_(2) निकलती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: जल के विद्युत अपघटन में आयतन के अनुसार H_(2) : O_(2) (2 : 1); CaCO_(3) को गर्म करना कौन-सी अभिक्रिया है (वियोजन); श्वेत-श्याम फोटोग्राफी में प्रयुक्त सिल्वर लवण (AgCl, AgBr)।
Chemical Reactions and Equations · Writing and balancing chemical equations

Q18. निम्नलिखित में से कौन-सा चरण किसी रासायनिक समीकरण को संतुलित करने का पहला चरण है?

  1. (a) ढाँचागत (कंकाल) समीकरण लिखना
  2. (b) हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करना
  3. (c) गुणांकों को यादृच्छिक रूप से जोड़ना
  4. (d) ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करना
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) ढाँचागत (कंकाल) समीकरण लिखना

उत्तर: विकल्प 1 — ढाँचागत (कंकाल) समीकरण लिखना
जो लिखा ही न गया हो, उसे संतुलित नहीं किया जा सकता,
इसलिए पहला चरण सभी अभिकारकों और उत्पादों के सही सूत्रों के साथ ढाँचागत (असंतुलित) समीकरण लिखना है।
इसके बाद परमाणुओं को गिनकर एक-एक तत्व को संतुलित किया जाता है।
रिवीजन नोट — रासायनिक समीकरण को संतुलित करना (हिट-एंड-ट्रायल विधि)
• संतुलित समीकरण द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करता है — परमाणु न तो बनते हैं, न नष्ट होते हैं।
• चरण 1: ढाँचागत समीकरण लिखें; चरण 2: प्रत्येक सूत्र के चारों ओर बॉक्स बनाएँ और दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणु गिनें।
• सबसे अधिक परमाणुओं वाले यौगिक से शुरू करें और उसमें सबसे अधिक परमाणुओं वाले तत्व से (जैसे Fe_(3)O_(4) में ऑक्सीजन)।
• केवल गुणांक बदलें, सूत्र या पादांक कभी नहीं (H_(2)O के स्थान पर H_(2)O_(2) लिखने से पदार्थ ही बदल जाता है)।
• उदाहरण: 3Fe + 4H_(2)O → Fe_(3)O_(4) + 4H_(2)।
• अंत में भौतिक अवस्थाएँ (s), (l), (g), (aq) और शर्तें (ऊष्मा, उत्प्रेरक) तीर के ऊपर लिखें।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: द्रव्यमान संरक्षण का उल्लंघन करने वाली अभिक्रिया (2Mg + O_(2) → MgO); संतुलन करते समय H_(2)O को H_(2)O_(4) क्यों नहीं बनाया जा सकता (इससे पदार्थ बदल जाता है)।
Chemical Reactions and Equations · Double displacement and precipitation reactions

Q19. जब पोटैशियम आयोडाइड का जलीय विलयन लेड नाइट्रेट से अभिक्रिया करता है, तो किस प्रकार का उत्पाद बनता है?

  1. (a) सोडियम नाइट्रेट
  2. (b) लेड आयोडाइड (अवक्षेप)
  3. (c) लेड क्लोराइड
  4. (d) लेड नाइट्रेट
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) लेड आयोडाइड (अवक्षेप)

उत्तर: विकल्प 2 — लेड आयोडाइड (अवक्षेप)
Pb(NO_(3))_(2)(aq) + 2KI(aq) → PbI_(2)(s) + 2KNO_(3)(aq)
आयन आपस में साझेदार बदलते हैं; लेड आयोडाइड अविलेय है और पीले अवक्षेप के रूप में अलग हो जाता है। पोटैशियम नाइट्रेट विलयन में रहता है।
रिवीजन नोट — द्विविस्थापन और अवक्षेपण (कक्षा 10)
• द्विविस्थापन: दो यौगिक आयनों का आदान-प्रदान करते हैं — AB + CD → AD + CB।
• जिस अभिक्रिया में अविलेय ठोस बनता है, वह अवक्षेपण अभिक्रिया है।
• Pb(NO_(3))_(2) + 2KI → PbI_(2)↓ पीला + 2KNO_(3)।
• Na_(2)SO_(4) + BaCl_(2) → BaSO_(4)↓ सफेद + 2NaCl।
• AgNO_(3) + NaCl → AgCl↓ सफेद + NaNO_(3)।
• गर्म करने पर लेड नाइट्रेट अपघटित होता है: 2Pb(NO_(3))_(2) → 2PbO + 4NO_(2) (भूरा धुआँ) + O_(2)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• लेड आयोडाइड बनाम लेड नाइट्रेट — लेड नाइट्रेट विलेय अभिकारक है; लेड आयोडाइड पीला अविलेय उत्पाद है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: कौन-सा यौगिक अपघटन के लिए ऊष्मा नहीं, प्रकाश लेता है (सिल्वर क्लोराइड, लेड नाइट्रेट के विपरीत)।
Carbon and its Compounds · Homologous series

Q20. समजातीय श्रेणी कार्बनिक यौगिकों का वह समूह है जिनमें:

  1. (a) समान प्रकार्यात्मक समूह होता है, परंतु वे एक CH₂ समूह से भिन्न होते हैं
  2. (b) समान आण्विक सूत्र होता है
  3. (c) समान संरचना सूत्र होता है
  4. (d) आपस में कोई संबंध नहीं होता
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) समान प्रकार्यात्मक समूह होता है, परंतु वे एक CH₂ समूह से भिन्न होते हैं

उत्तर: विकल्प 1 — समान प्रकार्यात्मक समूह होता है, परंतु वे एक CH₂ समूह से भिन्न होते हैं
समजातीय श्रेणी कार्बन यौगिकों का वह परिवार है जिनमें समान प्रकार्यात्मक समूह होता है और जिसके क्रमागत सदस्य एक −CH_(2)− इकाई (14 u) से भिन्न होते हैं।
रिवीजन नोट — समजातीय श्रेणी (कक्षा 10)
• सभी सदस्यों का एक ही सामान्य सूत्र होता है — ऐल्केन C_(n)H_(2n+2), ऐल्कीन C_(n)H_(2n), ऐल्काइन C_(n)H_(2n−2)।
• क्रमागत सदस्य सूत्र में CH_(2) से और आण्विक द्रव्यमान में 14 u से भिन्न होते हैं।
• रासायनिक गुण समान होते हैं (प्रकार्यात्मक समूह द्वारा निर्धारित)।
• भौतिक गुण (गलनांक, क्वथनांक, विलेयता) आण्विक द्रव्यमान के साथ क्रमिक रूप से बदलते हैं।
• उदाहरण: मेथेन CH_(4), एथेन C_(2)H_(6), प्रोपेन C_(3)H_(8); ऐल्कोहॉल CH_(3)OH, C_(2)H_(5)OH।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• समजातीय श्रेणी बनाम समावयवी — समावयवियों का आण्विक सूत्र समान होता है पर संरचनाएँ भिन्न; समजात CH_(2) से भिन्न होते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: −CH_(2)− इकाई से भिन्न यौगिक क्या बनाते हैं (एक समजातीय श्रेणी); शृंखला लंबी होने पर क्या क्रमिक रूप से बढ़ता है (क्वथनांक)।
Chemical Reactions and Equations · Corrosion and rancidity

Q21. अम्लों या नमी की उपस्थिति में धातुओं का ऑक्सीकरण क्या कहलाता है?

  1. (a) जंग लगना
  2. (b) उदासीनीकरण
  3. (c) विकृतगंधिता
  4. (d) संक्षारण
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) संक्षारण

उत्तर: विकल्प 4 — संक्षारण
जब कोई धातु अपने आस-पास के नमी, अम्ल या वायु जैसे पदार्थों के संपर्क से प्रभावित होती है, तो कहा जाता है कि उसका संक्षारण हो रहा है।
धातुओं का यह धीमा ऑक्सीकरण ही संक्षारण है।
रिवीजन नोट — संक्षारण और विकृतगंधिता
• जंग लगना केवल लोहे का संक्षारण है — लाल-भूरे रंग की परत, जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड, Fe_(2)O_(3)·xH_(2)O।
• लोहे में जंग तभी लगती है जब ऑक्सीजन और जल दोनों उपस्थित हों।
• चाँदी काली पड़ जाती है (सिल्वर सल्फाइड, Ag_(2)S); ताँबे पर हरी परत चढ़ जाती है (क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट)।
• बचाव: पेंट करना, तेल लगाना, ग्रीज़ लगाना, यशदलेपन (जिंक की परत), क्रोमियम लेपन, मिश्रातु बनाना।
• विकृतगंधिता — भोजन में उपस्थित वसा और तेल का ऑक्सीकरण, जिससे उसकी गंध और स्वाद खराब हो जाते हैं।
• विकृतगंधिता को प्रतिऑक्सीकारकों, वायुरोधी बर्तनों और चिप्स के पैकेटों में नाइट्रोजन भरकर धीमा किया जाता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• संक्षारण बनाम जंग लगना — संक्षारण सभी धातुओं के लिए सामान्य शब्द है; जंग लगना केवल लोहे का संक्षारण है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: नम वायु में लोहे पर बनने वाली लाल-भूरी परत (जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड); विकृतगंधिता का कारण (ऑक्सीकरण)।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q22. जब प्लास्टर ऑफ पेरिस को जल में मिश्रित किया जाता है, तो इसमें निम्नलिखित में से कौन-सा परिवर्तन होता है?

  1. (a) यह पूर्णतः घुल जाता है।
  2. (b) इससे उसके सभी जल अणु नष्ट हो जाते हैं।
  3. (c) यह जिप्सम में परिवर्तित हो जाता है।
  4. (d) यह एक गैस उत्‍पन्‍न करता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) यह जिप्सम में परिवर्तित हो जाता है।

उत्तर: विकल्प 3 — यह जिप्सम में परिवर्तित हो जाता है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस पुनः जल ग्रहण करता है और जिप्सम के कठोर ठोस पिंड के रूप में जम जाता है।
CaSO_(4)·½H_(2)O + 1½H_(2)O → CaSO_(4)·2H_(2)O
रिवीजन नोट — प्लास्टर ऑफ पेरिस
• रासायनिक नाम: कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट, CaSO_(4)·½H_(2)O — प्रति सूत्र इकाई आधा जल अणु।
• जिप्सम (CaSO_(4)·2H_(2)O) को 373 K (100 °C) पर गर्म करके बनाया जाता है।
• 373 K से अधिक गर्म करने पर निर्जल CaSO_(4) (मृत-दग्ध प्लास्टर) बनता है, जो जल के साथ नहीं जमता।
• इसे नमीरोधी पात्र में रखना चाहिए, अन्यथा यह उपयोग से पहले ही जम जाता है।
• उपयोग: टूटी हड्डियों पर प्लास्टर, खिलौने, सजावट की सामग्री, और सतहों को चिकना बनाना।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• जिप्सम बनाम प्लास्टर ऑफ पेरिस — जिप्सम में 2 जल अणु होते हैं; प्लास्टर ऑफ पेरिस में ½।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम और सूत्र (कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट, CaSO_(4)·½H_(2)O); इसका उपयोग प्लास्टर चढ़ाने में क्यों होता है (यह शीघ्र ही कठोर पिंड में जम जाता है)।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q23. विरंजक चूर्ण के निर्माण में क्लोरीन गैस की क्या भूमिका है?

  1. (a) इसका उपयोग अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है।
  2. (b) इसका उपयोग कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड को उदासीन करने के लिए किया जाता है।
  3. (c) यह जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन परॉक्साइड बनाती है।
  4. (d) यह शुष्क बुझे हुए चूने के साथ अभिक्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाती है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) यह शुष्क बुझे हुए चूने के साथ अभिक्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाती है।

उत्तर: विकल्प 4 — यह शुष्क बुझे हुए चूने के साथ अभिक्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाती है।
विरंजक चूर्ण शुष्क बुझे हुए चूने, Ca(OH)_(2) पर क्लोरीन की क्रिया से बनाया जाता है।
Ca(OH)_(2) + Cl_(2) → CaOCl_(2) + H_(2)O
रिवीजन नोट — विरंजक चूर्ण
• रासायनिक नाम: कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड, CaOCl_(2)।
• क्लोरीन क्लोर-क्षार प्रक्रिया से प्राप्त होती है — लवण-जल (ब्राइन) के विद्युत-अपघटन से NaOH, Cl_(2) (एनोड पर) और H_(2) (कैथोड पर) बनते हैं।
• इसकी विरंजक और रोगाणुनाशक क्रिया इससे मुक्त होने वाली क्लोरीन के कारण होती है।
• उपयोग: सूती और लिनन (वस्त्र उद्योग) तथा लकड़ी की लुगदी (कागज़ उद्योग) का विरंजन; धोबीघर में धुले कपड़ों का विरंजन।
• रासायनिक उद्योगों में ऑक्सीकारक तथा पेयजल को रोगाणुमुक्त करने में भी उपयोग।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: विरंजक चूर्ण से मुक्त होने वाली गैस जो विरंजन और रोगाणुनाशन करती है (क्लोरीन); विरंजक चूर्ण का एक अन्य उपयोग (पेयजल को रोगाणुमुक्त करना)।
Acids, Bases and Salts · pH scale and its importance

Q24. हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता बढ़ने पर pH मान _______।

  1. (a) घटता है
  2. (b) पहले घटता है और फिर बढ़ता है
  3. (c) समान रहता है
  4. (d) बढ़ता है
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) घटता है

उत्तर: विकल्प 1 — घटता है
pH, हाइड्रोनियम आयन (H_(3)O^(+)) की सांद्रता को एक उलटे स्केल पर मापता है।
H_(3)O^(+) की सांद्रता जितनी अधिक होगी, विलयन उतना अधिक अम्लीय होगा और उसका pH उतना कम होगा।
रिवीजन नोट — pH स्केल
• pH — 'p' जर्मन शब्द पोटेंज़ (potenz) (शक्ति) से; स्केल 0 (अत्यधिक अम्लीय) से 14 (अत्यधिक क्षारीय) तक होता है।
• pH 7 = उदासीन (शुद्ध जल); 7 से कम = अम्लीय; 7 से अधिक = क्षारकीय।
• pH = −log[H^(+)] — pH में 1 की कमी का अर्थ है 10 गुना अधिक H^(+) आयन।
• जल में H^(+) अकेले नहीं रह सकता; यह जल से जुड़ जाता है: H^(+) + H_(2)O → H_(3)O^(+)।
• सामान्य मान: जठर रस ~1–2, नींबू का रस ~2.5, रक्त ~7.4, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया ~10।
• मुख का pH 5.5 से कम होने पर दंत-क्षय शुरू होता है; 5.6 से कम pH वाली वर्षा अम्लीय वर्षा है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: हाइड्रोजन आयन की अधिक सांद्रता से क्या होता है (pH कम होता है); H^(+) के जल से जुड़ने पर बनने वाला आयन (हाइड्रोनियम आयन); साबुन के विलयन का pH दर्शाता है कि वह (क्षारकीय है, लगभग 9)।
Chemical Reactions and Equations · Oxidation, reduction and redox reactions

Q25. जब जिंक (Zn), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ अभिक्रिया करता है, तो क्या होता है?

  1. (a) जिंक का अपचयन होता है।
  2. (b) जिंक का ऑक्सीकरण होता है।
  3. (c) जिंक और हाइड्रोजन दोनों का ऑक्सीकरण होता है।
  4. (d) हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण होता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) जिंक का ऑक्सीकरण होता है।

उत्तर: विकल्प 2 — जिंक का ऑक्सीकरण होता है।
Zn + 2HCl → ZnCl_(2) + H_(2)↑
जिंक 2 इलेक्ट्रॉन खोकर ZnCl_(2) में Zn²⁺ बन जाता है, इसलिए जिंक का ऑक्सीकरण होता है।
अम्ल के H⁺ आयन ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके H_(2) गैस बनाते हैं — हाइड्रोजन का अपचयन होता है।
रिवीजन नोट — ऑक्सीकरण और अपचयन
• ऑक्सीकरण = ऑक्सीजन का जुड़ना / हाइड्रोजन का हटना / इलेक्ट्रॉनों का त्याग।
• अपचयन = ऑक्सीजन का हटना / हाइड्रोजन का जुड़ना / इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण (OIL RIG: Oxidation Is Loss, Reduction Is Gain)।
• रेडॉक्स अभिक्रिया में ऑक्सीकरण और अपचयन साथ-साथ होते हैं।
• जिस पदार्थ का ऑक्सीकरण होता है वह अपचायक है (यहाँ Zn); जिसका अपचयन होता है वह ऑक्सीकारक है (यहाँ HCl / H⁺)।
• यह एक विस्थापन अभिक्रिया भी है — अधिक अभिक्रियाशील जिंक अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित करता है।
• अभिक्रियाशीलता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ तनु अम्लों से H_(2) देती हैं; यह गैस पॉप ध्वनि के साथ जलती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• ऑक्सीकृत बनाम ऑक्सीकारक — जिंक का ऑक्सीकरण होता है, इसलिए वह अपचायक है, ऑक्सीकारक नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: जिंक की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया का प्रकार (विस्थापन अभिक्रिया); CuO + H_(2) → Cu + H_(2)O में ऑक्सीकृत होने वाला पदार्थ (हाइड्रोजन)।

Economics (1)

Basic Concepts and Economic Systems · Factors of production and returns

Q26. निम्नलिखित में से किस बिंदु तक प्रत्येक फर्म श्रम को नियोजित करती है?

  1. (a) प्रत्येक फर्म उस बिंदु तक श्रम नियोजित करती है जहाँ श्रम की सीमांत लागत मजदूरी दर के बराबर होती है।
  2. (b) प्रत्येक फर्म उस बिंदु तक श्रम नियोजित करती है जहाँ श्रम का सीमांत राजस्व उत्पाद घटा मजदूरी दर।
  3. (c) प्रत्येक फर्म उस बिंदु तक श्रम नियोजित करती है जहाँ श्रम का सीमांत राजस्व उत्पाद मजदूरी दर से गुणा होता है।
  4. (d) प्रत्येक फर्म उस बिंदु तक श्रम नियोजित करती है जहाँ श्रम का सीमांत राजस्व उत्पाद मजदूरी दर के बराबर होता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) प्रत्येक फर्म उस बिंदु तक श्रम नियोजित करती है जहाँ श्रम का सीमांत राजस्व उत्पाद मजदूरी दर के बराबर होता है।

उत्तर: विकल्प 4 — प्रत्येक फर्म उस बिंदु तक श्रम नियोजित करती है जहाँ श्रम का सीमांत राजस्व उत्पाद मजदूरी दर के बराबर होता है।
एक अतिरिक्त श्रमिक आय में MRP_(L) जोड़ता है और उस पर मजदूरी दर (W) का व्यय होता है।
फर्म तब तक श्रमिक नियुक्त करती रहती है जब तक MRP_(L) > W है,
और वहाँ रुकती है जहाँ MRP_(L) = W — यहीं लाभ अधिकतम होता है।
रिवीजन नोट — फर्म द्वारा श्रम की माँग
• श्रम का सीमांत उत्पाद (MP_(L)) = एक और श्रमिक से प्राप्त अतिरिक्त उत्पादन।
• सीमांत राजस्व उत्पाद (MRP_(L)) = MR × MP_(L); पूर्ण प्रतियोगिता में MR = कीमत, इसलिए इसे VMP_(L) = P × MP_(L) (सीमांत उत्पाद का मूल्य) भी कहते हैं।
• श्रमिक नियुक्ति का लाभ-अधिकतमीकरण नियम: MRP_(L) = मजदूरी दर।
• पूर्ण प्रतियोगी श्रम बाजार में प्रत्येक फर्म मजदूरी स्वीकारकर्ता (wage taker) होती है — मजदूरी श्रम की बाजार माँग और पूर्ति से तय होती है।
• MRP_(L) वक्र ही फर्म का श्रम माँग वक्र है; ह्रासमान सीमांत प्रतिफल के कारण इसका ढलान नीचे की ओर होता है।
• उत्पादन के चार साधन और उनके प्रतिफल: भूमि → लगान, श्रम → मजदूरी, पूँजी → ब्याज, उद्यमी → लाभ।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• MRP_(L) = W (श्रम नियुक्ति) बनाम MR = MC (उत्पादन का चयन) — पहला तय करता है कि कितने श्रमिक रखें, दूसरा कि कितना उत्पादन करें; दोनों एक ही लाभ-अधिकतमीकरण तर्क हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पूर्ण प्रतियोगी बाजार की एक विशेषता (फर्मों का निर्बाध प्रवेश और निकास)।

Current Affairs (5)

Economy, Banking and Business · Energy and power sector - current

Q27. भारत ने 17 अगस्त 2024 से कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर (windfall tax) को ₹4,600 से घटाकर ₹____________ प्रति मीट्रिक टन कर दिया है।

  1. (a) 2,600
  2. (b) 1,800
  3. (c) 3,600
  4. (d) 2,100
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) 2,100

उत्तर: विकल्प 4 — 2,100
अपनी पाक्षिक समीक्षा में सरकार ने घरेलू रूप से उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर (windfall tax)
को ₹4,600 से घटाकर ₹2,100 प्रति टन कर दिया, जो 17 अगस्त 2024 से प्रभावी हुआ।
रिवीजन नोट — कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर
• अप्रत्याशित लाभ कर उन असामान्य (अप्रत्याशित) लाभों पर लगने वाला कर है, जो किसी फर्म को किसी बाहरी झटके — जैसे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल — से मिलते हैं।
• भारत ने इसे 1 जुलाई 2022 को लागू किया; यह घरेलू कच्चे तेल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) के रूप में लगाया गया।
• इसके साथ डीज़ल, पेट्रोल और ATF के निर्यात पर शुल्क भी लगाए गए।
• अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के औसत के अनुसार दर की हर पखवाड़े समीक्षा होती थी।
• अप्रत्याशित लाभ कर 2 दिसंबर 2024 से समाप्त कर दिया गया।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अप्रत्याशित लाभ कर का औचित्य (वैश्विक वस्तु-कीमतों में उछाल जैसे अप्रत्याशित बाहरी कारकों से हुए अतिरिक्त लाभ पर कर लगाना)।
International Affairs and Summits · International organisations - current

Q28. संभावित संघर्षों के दौरान उत्तरी यूरोपीय भूमि प्रचालनों की निगरानी के लिए नाटो (NATO), 2025 में रूसी सीमा के पास _________ में एक नई भूमि कमान (land command) स्थापित करेगा।

  1. (a) तुर्कमेनिस्तान
  2. (b) यूक्रेन
  3. (c) किर्गिज़स्तान
  4. (d) फ़िनलैंड
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) फ़िनलैंड

उत्तर: विकल्प 4 — फ़िनलैंड
नाटो ने अक्टूबर 2024 में फ़िनलैंड (मिक्केली में) एक नई मल्टी-कॉर्प्स लैंड कंपोनेंट कमान स्थापित करने का निर्णय लिया,
जो 2025 से उत्तरी यूरोप के भूमि प्रचालनों की निगरानी करेगी।
किसी भी नाटो सदस्य में रूस के साथ सबसे लंबी सीमा फ़िनलैंड की है (लगभग 1,340 किमी)।
रिवीजन नोट — नाटो (NATO)
• नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) की स्थापना 4 अप्रैल 1949 को वाशिंगटन संधि द्वारा हुई, जिसके 12 संस्थापक सदस्य थे।
• मुख्यालय: ब्रसेल्स, बेल्जियम।
• अनुच्छेद 5 — एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला है (सामूहिक रक्षा); इसे केवल एक बार, 9/11 (2001) के बाद लागू किया गया।
• फ़िनलैंड 4 अप्रैल 2023 को 31वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ; स्वीडन 7 मार्च 2024 को 32वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ।
• मार्क रूटे (नीदरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री) 1 अक्टूबर 2024 को जेन्स स्टोलटेनबर्ग के स्थान पर महासचिव बने।
• यूक्रेन, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज़स्तान नाटो के सदस्य नहीं हैं।
International Affairs and Summits · Summits and conferences

Q29. 2024 में विश्व व्यापार संगठन के 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का आयोजन स्थल कहाँ था?

  1. (a) लंदन, इंग्लैंड
  2. (b) पेरिस, फ्रांस
  3. (c) अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात
  4. (d) नई दिल्ली, भारत
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात

उत्तर: विकल्प 3 — अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात
विश्व व्यापार संगठन का 13वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC13) अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आयोजित हुआ।
यह 26 फरवरी से 2 मार्च 2024 तक चला।
रिवीजन नोट — WTO और उसके मंत्रिस्तरीय सम्मेलन
• मंत्रिस्तरीय सम्मेलन WTO का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है; इसकी बैठक सामान्यतः हर दो वर्ष में एक बार होती है।
• WTO की स्थापना 1 जनवरी 1995 को GATT (1947) के स्थान पर हुई; मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड।
• MC12 जिनेवा (जून 2022) में हुआ — इसमें मत्स्य सब्सिडी पर समझौता अपनाया गया।
• MC13 (अबू धाबी) की अध्यक्षता UAE के व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल ज़ायौदी ने की; वहीं कोमोरोस और तिमोर-लेस्ते के प्रवेश को स्वीकृति मिली।
• पहला मंत्रिस्तरीय सम्मेलन: सिंगापुर (1996); 2026 से पहले अफ्रीका में हुआ एकमात्र सम्मेलन: MC10, नैरोबी (2015)।
• महानिदेशक: न्गोज़ी ओकोंजो-इवेला (नाइजीरिया) — WTO का नेतृत्व करने वाली पहली महिला और पहली अफ्रीकी।
• 2026 तक: MC14 मार्च 2026 में याउंडे, कैमरून में आयोजित हुआ।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: मार्च 2026 में 14वें WTO मंत्रिस्तरीय सम्मेलन की मेज़बानी करने वाला देश (कैमरून — याउंडे)।
Science, Technology and Space - Current · Technology launches and AI

Q30. इसरो (ISRO) द्वारा अपने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के माध्यम से विकसित उस सॉफ्टवेयर का नाम (संक्षिप्त नाम) क्या है, जो एक कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स (CFD) टूल है और जिसका उद्देश्य एयरोस्पेस वाहनों के वायुगतिकीय डिज़ाइन और विश्लेषण को सुगम बनाना है?

  1. (a) PraYoGa
  2. (b) PraViNa
  3. (c) PraNaMa
  4. (d) PraVaHa
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) PraVaHa

उत्तर: विकल्प 4 — PraVaHa
PraVaHa (Parallel RANS Solver for Aerospace Vehicle Aero-thermo-dynamics) एक कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स (CFD) सॉफ्टवेयर है।
इसे इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), तिरुवनंतपुरम ने विकसित किया है।
यह प्रक्षेपण यानों, पंखयुक्त पिंडों और पुनः प्रवेश कैप्सूलों पर वायु प्रवाह का अनुकरण करता है, जिससे महँगे पवन-सुरंग (wind-tunnel) परीक्षण कम होते हैं।
रिवीजन नोट — इसरो, VSSC और स्वदेशी अंतरिक्ष सॉफ्टवेयर
• VSSC, तिरुवनंतपुरम प्रक्षेपण यानों के लिए इसरो का प्रमुख केंद्र है — SLV, PSLV, GSLV और LVM3 यहीं डिज़ाइन किए गए।
• PraVaHa हवाई जहाज़ (पंखयुक्त पिंड) और रॉकेट / पुनः प्रवेश कैप्सूल (पंखरहित पिंड) दोनों का विश्लेषण कर सकता है।
• इसका उपयोग गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में क्रू मॉड्यूल और प्रक्षेपण यान की वायुगतिकी के अध्ययन में होता है।
• CFD = किसी पिंड पर दाब, कर्षण (drag) और तापन ज्ञात करने के लिए द्रव प्रवाह के समीकरणों को कंप्यूटर पर हल करना।
• इसरो का गठन 15 अगस्त 1969 को INCOSPAR (1962) से हुआ; विक्रम साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक हैं।
• प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) से होते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: VSSC की मुख्य भूमिका (प्रक्षेपण यानों का डिज़ाइन और निर्माण); इसरो के प्रथम अध्यक्ष (विक्रम साराभाई)।
Sports - Current · Cricket - current

Q31. किस टीम ने 2024-25 सत्र के लिए ईरानी कप का खिताब जीता?

  1. (a) रेलवे
  2. (b) रेस्‍ट ऑफ इंडिया
  3. (c) कर्नाटक
  4. (d) मुंबई
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) मुंबई

उत्तर: विकल्प 4 — मुंबई
2023-24 रणजी ट्रॉफी विजेता मुंबई ने अक्टूबर 2024 में लखनऊ में रेस्ट ऑफ इंडिया के विरुद्ध ईरानी कप 2024-25 जीता।
मैच ड्रॉ रहा और मुंबई ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर खिताब जीता, जिसमें सरफराज खान के दोहरे शतक की अहम भूमिका रही।
रिवीजन नोट — ईरानी कप और भारतीय घरेलू क्रिकेट
• ईरानी कप रणजी ट्रॉफी विजेता और रेस्ट ऑफ इंडिया एकादश के बीच खेला जाता है।
• इसका नाम BCCI के लंबे समय तक पदाधिकारी रहे ज़ेड. आर. ईरानी के नाम पर है; इसकी शुरुआत 1959-60 में हुई।
• यह मुंबई का 15वाँ ईरानी कप खिताब था और 1997-98 के बाद पहला।
• रणजी ट्रॉफी (1934-35 से) भारत का प्रमुख प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट है, जिसका नाम के. एस. रणजीतसिंहजी के नाम पर है; सर्वाधिक खिताब मुंबई के नाम हैं।
• BCCI के अन्य घरेलू टूर्नामेंट: दलीप ट्रॉफी (क्षेत्रीय प्रथम श्रेणी), विजय हजारे ट्रॉफी (एकदिवसीय), सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (T20)।
• ये सभी घरेलू टूर्नामेंट BCCI द्वारा आयोजित किए जाते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• ईरानी कप बनाम रणजी ट्रॉफी — रणजी ट्रॉफी राष्ट्रीय चैंपियनशिप है; ईरानी कप उसके विजेता और रेस्ट ऑफ इंडिया के बीच एकल मैच है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: रणजी ट्रॉफी के इतिहास की सबसे सफल टीम (मुंबई); 1934-35 में पहली रणजी ट्रॉफी की विजेता (बॉम्बे); रणजी ट्रॉफी का आयोजन करने वाली संस्था (BCCI)।

Physics (9)

Electricity · Heating effect of current and Joule's law

Q32. यदि किसी चालक का प्रतिरोध दोगुना कर दिया जाए, जबकि धारा समान रहे, तो प्रति इकाई समय में उत्पन्न ऊष्मा में क्या परिवर्तन होगा?

  1. (a) यह चार गुना हो जाएगी।
  2. (b) यह समान रहेगी।
  3. (c) यह आधी हो जाएगी।
  4. (d) यह दोगुनी हो जाएगी।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) यह दोगुनी हो जाएगी।

उत्तर: विकल्प 4 — यह दोगुनी हो जाएगी।
जूल के तापन नियम के अनुसार, H = I²Rt।
धारा और समय अपरिवर्तित रहने पर H, R के अनुक्रमानुपाती है।
अतः R दोगुना करने पर प्रति इकाई समय उत्पन्न ऊष्मा दोगुनी हो जाती है।
रिवीजन नोट — विद्युत धारा का तापीय प्रभाव
• जूल का नियम: H = I²Rt — ऊष्मा I², R और t के अनुक्रमानुपाती है।
• धारा दोगुनी करने पर ऊष्मा चार गुना हो जाती है (I² के कारण)।
• नियत वोल्टता पर H = V²t/R लें — वहाँ R दोगुना करने पर ऊष्मा आधी हो जाती है।
• तापन अवयवों में नाइक्रोम (निकेल–क्रोमियम मिश्रातु) प्रयुक्त होता है: उच्च प्रतिरोधकता और उच्च गलनांक।
• बल्ब के तंतु टंगस्टन के होते हैं (गलनांक लगभग 3380 डिग्री सेल्सियस); बल्बों में अक्रिय आर्गन/नाइट्रोजन भरी जाती है।
• विद्युत फ्यूज तापीय प्रभाव पर कार्य करता है; इसके तार का गलनांक कम होता है और यह परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• समान धारा बनाम समान वोल्टता — समान धारा पर ऊष्मा ∝ R; समान वोल्टता पर ऊष्मा ∝ 1/R।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: धारा दोगुनी करने पर उत्पन्न ऊष्मा (चार गुना); प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा का SI मात्रक (जूल); हीटर में नाइक्रोम क्यों प्रयुक्त होता है (उच्च प्रतिरोधकता और उच्च गलनांक)।
Human Eye and the Colourful World · Prism and dispersion of light

Q33. त्रिभुजाकार काँच के प्रिज्म के दो पार्श्व फलकों के बीच बनने वाले कोण को क्या कहते हैं?

  1. (a) आपतन कोण
  2. (b) विचलन कोण
  3. (c) अपवर्तन कोण
  4. (d) प्रिज्म कोण
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) प्रिज्म कोण

उत्तर: विकल्प 4 — प्रिज्म कोण
त्रिभुजाकार काँच के प्रिज्म में दो त्रिभुजाकार आधार और तीन आयताकार पार्श्व फलक होते हैं।
जिन दो पार्श्व फलकों से प्रकाश प्रवेश करता है और बाहर निकलता है,
उनके बीच का कोण प्रिज्म कोण (अपवर्तक कोण) कहलाता है।
रिवीजन नोट — काँच के प्रिज्म से अपवर्तन
• आपतित किरण और निर्गत किरण के बीच का कोण विचलन कोण कहलाता है।
• प्रिज्म से गुजरने के बाद प्रकाश प्रिज्म के आधार की ओर मुड़ता है।
• श्वेत प्रकाश सात रंगों (VIBGYOR) में विभक्त हो जाता है — विक्षेपण; रंगों की इस पट्टी को स्पेक्ट्रम कहते हैं।
• बैंगनी रंग सबसे अधिक और लाल रंग सबसे कम मुड़ता है, क्योंकि काँच में प्रत्येक रंग की चाल (अपवर्तनांक) अलग होती है।
• आइज़क न्यूटन ने सबसे पहले काँच के प्रिज्म से सूर्य के प्रकाश का स्पेक्ट्रम प्राप्त किया; दूसरा उल्टा प्रिज्म रंगों को फिर से श्वेत प्रकाश में मिला देता है।
• इंद्रधनुष एक प्राकृतिक स्पेक्ट्रम है, जो छोटे प्रिज्मों की तरह कार्य करने वाली जल की बूँदों से बनता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• प्रिज्म कोण बनाम विचलन कोण — पहला दोनों फलकों के बीच का कोण है (प्रिज्म का गुण); दूसरा आपतित और निर्गत किरणों के बीच का कोण है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: आपतित और निर्गत किरणों के बीच का कोण (विचलन कोण); प्रिज्म द्वारा स्पेक्ट्रम बनना (विक्षेपण); श्वेत प्रकाश के विक्षेपण की व्याख्या सबसे पहले किसने की (आइज़क न्यूटन)।
Electricity · Resistance, resistivity and their factors

Q34. किसी पदार्थ द्वारा आवेशों के प्रवाह का कितना विरोध किया जाता है, इसकी माप क्या कहलाती है?

  1. (a) उत्पन्न शक्ति
  2. (b) विभवांतर
  3. (c) धारा
  4. (d) प्रतिरोधकता
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) प्रतिरोधकता

उत्तर: विकल्प 4 — प्रतिरोधकता
प्रतिरोधकता (ρ) किसी पदार्थ का वह गुण है जो मापता है कि वह आवेशों के प्रवाह का कितना प्रबल विरोध करता है।
यह केवल पदार्थ और उसके ताप पर निर्भर करती है, तार की लंबाई या मोटाई पर नहीं।
रिवीजन नोट — प्रतिरोध और प्रतिरोधकता (कक्षा 10)
• R = ρL/A — प्रतिरोध लंबाई (L) के साथ बढ़ता है और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के साथ घटता है।
• प्रतिरोधकता का SI मात्रक: ओम-मीटर (Ω m); प्रतिरोध का: ओम (Ω)।
• प्रतिरोधकता = एकांक लंबाई और एकांक अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले चालक का प्रतिरोध।
• धातुओं की प्रतिरोधकता कम होती है (10^(−8) Ω m परास); काँच और रबर जैसे विद्युतरोधियों की बहुत अधिक (10^(12)–10^(17) Ω m)।
• मिश्रधातुओं (नाइक्रोम, मैंगनिन) की प्रतिरोधकता उनकी धातुओं से अधिक होती है और वे आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होतीं — तापन अवयवों में प्रयुक्त।
• धातुओं के लिए प्रतिरोधकता ताप बढ़ने पर बढ़ती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• प्रतिरोध बनाम प्रतिरोधकता — प्रतिरोध तार के आकार और आकृति पर निर्भर करता है; किसी दिए गए ताप पर प्रतिरोधकता पदार्थ के लिए नियत होती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: एकांक लंबाई और एकांक क्षेत्रफल वाले चालक का प्रतिरोध (प्रतिरोधकता); तार को खींचकर दोगुनी लंबाई करने पर प्रतिरोध (चार गुना)।
Light - Reflection and Mirrors · Convex mirror - image formation and uses

Q35. उत्तल दर्पण में, मुख्य फोकस _____ स्थित होता है।

  1. (a) दर्पण के पीछे
  2. (b) दर्पण के सामने
  3. (c) वक्रता केंद्र पर
  4. (d) दर्पण के ध्रुव पर
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) दर्पण के पीछे

उत्तर: विकल्प 1 — दर्पण के पीछे
उत्तल दर्पण समांतर किरणों को अपसरित करता है; परावर्तित किरणें केवल दर्पण के पीछे स्थित एक बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं।
इसलिए इसका मुख्य फोकस आभासी होता है और दर्पण के पीछे, ध्रुव और वक्रता केंद्र के ठीक बीच में स्थित होता है।
रिवीजन नोट — गोलीय दर्पण के पद (कक्षा 10)
• ध्रुव (P) — परावर्तक पृष्ठ का केंद्र; मुख्य अक्ष — P और C से होकर जाने वाली रेखा।
• वक्रता केंद्र (C) — उस गोले का केंद्र जिसका दर्पण एक भाग है; वक्रता त्रिज्या R = PC।
• फोकस दूरी f = R/2।
• अवतल दर्पण: फोकस वास्तविक होता है, दर्पण के सामने (किरणें वास्तव में वहाँ मिलती हैं)।
• उत्तल दर्पण: फोकस और C दर्पण के पीछे होते हैं; प्रतिबिंब सदैव आभासी, सीधा, छोटा।
• चिह्न परिपाटी: अवतल दर्पण के लिए f ऋणात्मक और उत्तल दर्पण के लिए धनात्मक होती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: R = 50 सेमी वाले उत्तल दर्पण के लिए समांतर किरण-पुंज किस बिंदु से अपसरित होता प्रतीत होता है (दर्पण के पीछे 25 सेमी); उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब की प्रकृति (आभासी और छोटा)।
Light - Reflection and Mirrors · Concave mirror - image formation and uses

Q36. जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र पर रखा जाता है, तो प्रतिबिंब कहाँ बनता है?

  1. (a) वक्रता केंद्र पर
  2. (b) ध्रुव पर
  3. (c) फोकस बिंदु पर
  4. (d) अनंत पर
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) वक्रता केंद्र पर

उत्तर: विकल्प 1 — वक्रता केंद्र पर
वस्तु को C पर रखने पर प्रतिबिंब स्वयं C पर बनता है — वास्तविक, उल्टा और वस्तु के समान आकार का।
दर्पण सूत्र से, u = −2f रखने पर v = −2f प्राप्त होता है।
रिवीजन नोट — अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण (कक्षा 10)
• वस्तु अनंत पर → प्रतिबिंब F पर, अत्यधिक छोटा, वास्तविक, उल्टा।
• C से परे → F और C के बीच, छोटा, वास्तविक, उल्टा।
• C पर → C पर, समान आकार, वास्तविक, उल्टा।
• C और F के बीच → C से परे, बड़ा, वास्तविक, उल्टा।
• F पर → अनंत पर, अत्यधिक बड़ा।
• P और F के बीच → दर्पण के पीछे, बड़ा, आभासी और सीधा (दाढ़ी बनाने / मेकअप का दर्पण)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वस्तु C और F के बीच होने पर प्रतिबिंब (वास्तविक, उल्टा, बड़ा, C से परे); दाढ़ी बनाने के दर्पण में चेहरा कहाँ रखें (P और F के बीच)।
Electricity · Resistance, resistivity and their factors

Q37. कक्ष तापमान (room temperature) पर, निम्नलिखित में से किस पदार्थ का सबसे कम प्रतिरोध होता है?

  1. (a) निक्रोम (Nichrome)
  2. (b) तांबा (Copper)
  3. (c) लोहा (Iron)
  4. (d) एल्यूमीनियम (Aluminum)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) तांबा (Copper)

उत्तर: विकल्प 2 — तांबा (Copper)
चारों में से तांबे की प्रतिरोधकता सबसे कम (लगभग 1.62 × 10^(−8) Ω m) है, इसलिए समान आकार के लिए यह सबसे कम प्रतिरोध देता है।
रिवीजन नोट — 20 °C पर पदार्थों की प्रतिरोधकता (NCERT तालिका)
• चाँदी 1.60 × 10^(−8) Ω m — सबसे अच्छा चालक।
• तांबा 1.62 × 10^(−8) Ω m — घरेलू वायरिंग में प्रयुक्त।
• एल्यूमीनियम 2.63 × 10^(−8) Ω m — उपरिगामी संचरण लाइनों में प्रयुक्त (हल्का और सस्ता)।
• लोहा 10.0 × 10^(−8) Ω m।
• नाइक्रोम (Ni–Cr–Mn–Fe मिश्रधातु) लगभग 100 × 10^(−8) Ω m — तापन अवयव।
• मैंगनिन और कॉन्स्टेंटन — उच्च प्रतिरोधकता वाली मिश्रधातुएँ, मानक प्रतिरोधकों में प्रयुक्त।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• तांबा बनाम एल्यूमीनियम — लंबी संचरण लाइनों में एल्यूमीनियम इसलिए प्रयुक्त होता है क्योंकि वह हल्का और सस्ता है, इसलिए नहीं कि वह बेहतर चालक है; तांबा बेहतर चालक है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: समान आकार के तांबे और लोहे के तारों में कम प्रतिरोध वाला तार (तांबा); घरेलू वायरिंग में तांबा क्यों प्रयुक्त होता है (कम प्रतिरोध)।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Magnetic field and field lines

Q38. दिए गए कथन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प गलत है?
किसी छड़ चुंबक की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ किसके उपयोग से खींची जा सकती हैं:

  1. (a) एक अन्य छड़ चुंबक
  2. (b) लकड़ी के कण
  3. (c) लौह-चूर्ण
  4. (d) चुंबकीय दिक्सूचक
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) लकड़ी के कण

उत्तर: विकल्प 2 — लकड़ी के कण
लकड़ी एक अचुंबकीय पदार्थ है, इसलिए इसके कण चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित नहीं होते।
लौह-चूर्ण और दिक्सूचक की सुई चुंबकीय हैं, इसलिए वे क्षेत्र का पैटर्न दिखाते हैं।
रिवीजन नोट — चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ
• छड़ चुंबक की क्षेत्र रेखाएँ लौह-चूर्ण से या दिक्सूचक सुई की स्थितियाँ क्रम से अंकित करके खींची जाती हैं।
• चुंबक के बाहर रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर जाती हैं; अंदर दक्षिण से उत्तर की ओर — ये बंद वक्र होती हैं।
• दो क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं — किसी एक बिंदु पर क्षेत्र की केवल एक ही दिशा होती है।
• जहाँ रेखाएँ अधिक पास-पास होती हैं, वहाँ क्षेत्र अधिक प्रबल होता है — ध्रुवों के पास रेखाएँ सघन होती हैं।
• क्षेत्र रेखा पर खींची गई स्पर्श रेखा क्षेत्र की दिशा बताती है; दिक्सूचक की सुई इसी दिशा में संकेत करती है।
• चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक: टेस्ला (T)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पास-पास स्थित क्षेत्र रेखाएँ क्या दर्शाती हैं (अधिक प्रबल चुंबकीय क्षेत्र); धारावाही परिनालिका के अंदर क्षेत्र रेखाओं का आकार (समानांतर सरल रेखाएँ)।
Electricity · Resistors in series and parallel

Q39. श्रेणीक्रम परिपथ में प्रतिरोधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. (a) कुल प्रतिरोध सभी अलग-अलग प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।
  2. (b) कुल प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों के गुणनफल के बराबर होता है।
  3. (c) कुल प्रतिरोध किसी भी अलग प्रतिरोध से कम होता है।
  4. (d) कुल प्रतिरोध प्रत्येक प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) कुल प्रतिरोध सभी अलग-अलग प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।

उत्तर: विकल्प 1 — कुल प्रतिरोध सभी अलग-अलग प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।
श्रेणीक्रम में एक ही धारा प्रत्येक प्रतिरोधक से एक के बाद एक होकर प्रवाहित होती है।
इसलिए प्रतिरोध जुड़ जाते हैं: R = R_(1) + R_(2) + R_(3)।
रिवीजन नोट — श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजन
• श्रेणीक्रम — हर प्रतिरोधक से समान धारा; विभवांतर उनमें बँट जाता है।
• श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध सबसे बड़े अकेले प्रतिरोध से भी अधिक होता है।
• पार्श्वक्रम — प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर समान विभवांतर; धारा बँट जाती है।
• पार्श्वक्रम: 1/R = 1/R_(1) + 1/R_(2) + 1/R_(3) — कुल प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
• घरेलू विद्युत वायरिंग में पार्श्वक्रम का उपयोग होता है — हर उपकरण को पूरी वोल्टता मिलती है और उसे अलग से चालू/बंद किया जा सकता है।
• श्रेणीक्रम में एक बल्ब फ्यूज़ होने पर पूरा परिपथ टूट जाता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• श्रेणीक्रम बनाम पार्श्वक्रम — श्रेणीक्रम में धारा समान रहती है; पार्श्वक्रम में वोल्टता समान रहती है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में क्यों जोड़ा जाता है (कुल प्रतिरोध बढ़ाने और धारा सीमित करने के लिए); 3 Ω, 2 Ω और 1 Ω को श्रेणीक्रम में 9 V से जोड़ने पर धारा (1.5 A)।
Light - Reflection and Mirrors · Concave mirror - image formation and uses

Q40. अवतल दर्पण की फोकस दूरी प्रायोगिक रूप से कैसे ज्ञात की जा सकती है?

  1. (a) परावर्तन कोण मापें।
  2. (b) दर्पण और उसके द्वारा बने किसी दूरस्थ वस्तु के प्रतिबिंब के बीच की दूरी मापें।
  3. (c) दर्पण का व्यास मापें।
  4. (d) ध्रुव और वक्रता केंद्र के बीच की दूरी मापें।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) दर्पण और उसके द्वारा बने किसी दूरस्थ वस्तु के प्रतिबिंब के बीच की दूरी मापें।

उत्तर: विकल्प 2 — दर्पण और उसके द्वारा बने किसी दूरस्थ वस्तु के प्रतिबिंब के बीच की दूरी मापें।
किसी दूरस्थ वस्तु (दूर का पेड़, सूर्य) से आने वाली किरणें मुख्य अक्ष के लगभग समांतर होती हैं।
अवतल दर्पण समांतर किरणों को अपने मुख्य फोकस पर एक बिंदु पर एकत्र करता है, इसलिए परदे पर बना स्पष्ट प्रतिबिंब F पर होता है।
अतः दर्पण से परदे तक की दूरी ही फोकस दूरी है।
रिवीजन नोट — अवतल दर्पण और फोकस दूरी
• वस्तु अनंत पर ⇒ प्रतिबिंब F पर, वास्तविक, उल्टा और अत्यधिक छोटा (बिंदु के आकार का)।
• फोकस दूरी f = R/2, जहाँ R वक्रता त्रिज्या है; F, P और C के ठीक मध्य में होता है।
• वस्तु C पर ⇒ प्रतिबिंब C पर, वास्तविक, उल्टा, समान आकार का।
• वस्तु P और F के बीच ⇒ प्रतिबिंब आभासी, सीधा, बड़ा, दर्पण के पीछे (दाढ़ी बनाने / मेकअप का दर्पण)।
• अवतल दर्पण प्रकाश को अभिसरित करते हैं, इसलिए इनका उपयोग सौर भट्टियों, टॉर्च / हेडलाइट (बल्ब F पर) और दंत चिकित्सकों द्वारा होता है।
• चिह्न परिपाटी: अवतल दर्पण की f ऋणात्मक होती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• फोकस दूरी बनाम वक्रता त्रिज्या — ध्रुव से C तक की दूरी R = 2f है, f नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: सौर भट्टियों में अवतल दर्पण क्यों प्रयुक्त होते हैं (वे सूर्य के प्रकाश को फोकस पर अभिसरित करते हैं); आभासी, सीधे, बड़े प्रतिबिंब के लिए वस्तु की स्थिति (P और F के बीच)।

Medieval History (1)

Mughal Empire · Humayun and Sher Shah Suri

Q41. निम्नलिखित में से कौन गुजरात का तब शासक था, जब हुमायूँ ने 1532 में राज्य पर आक्रमण किया था?

  1. (a) सिकंदर शाह
  2. (b) जफर खान मुजफ्फर
  3. (c) मुजफ्फर शाह II
  4. (d) बहादुर शाह
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) बहादुर शाह

उत्तर: विकल्प 4 — बहादुर शाह
मुजफ्फरी वंश के बहादुर शाह ने गुजरात (1526–1537) पर शासन किया।
उसकी बढ़ती शक्ति और हुमायूँ के विरोधियों को शरण देने के कारण हुमायूँ ने उस पर चढ़ाई की।
हुमायूँ ने उसे मंदसौर में पराजित किया और मांडू तथा चंपानेर पर अधिकार कर लिया (1535)।
रिवीजन नोट — हुमायूँ का शासनकाल (1530–1540, 1555–1556)
• बाबर का ज्येष्ठ पुत्र; 1530 में उत्तराधिकारी बना; दिल्ली में दीनपनाह नगर बसाया।
• गुजरात के बहादुर शाह के विरुद्ध अभियान (1532–1535): मांडू और चंपानेर जीते, परंतु गुजरात शीघ्र ही फिर हाथ से निकल गया।
• शेर खाँ (शेरशाह सूरी) से चौसा (1539) और कन्नौज / बिलग्राम (1540) में पराजित; फारस में निर्वासन में गया।
• फारस की सहायता से सरहिंद के युद्ध (1555) के बाद दिल्ली पुनः प्राप्त की।
• 1556 में पुराना किला स्थित अपने पुस्तकालय शेर मंडल की सीढ़ियों से गिरकर मृत्यु; हुमायूँ का मकबरा उसकी विधवा हमीदा बानो बेगम ने बनवाया।
• उसकी बहन गुलबदन बेगम ने हुमायूँनामा लिखा।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• गुजरात का बहादुर शाह बनाम बहादुर शाह ज़फ़र — पहला 1530 के दशक में हुमायूँ से लड़ा; ज़फ़र अंतिम मुगल सम्राट था, 1857 के विद्रोह का नेता।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: हुमायूँ को हराकर सूर साम्राज्य की स्थापना किसने की (शेरशाह सूरी); हुमायूँ की पराजय वाले युद्ध (चौसा 1539, कन्नौज 1540)।

Geography (2)

India - Location, Physiography and Neighbours · Himalayas - ranges and peaks

Q42. अरुणाचल हिमालय के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?कथन 1: यह भूटान हिमालय के पूर्व से लेकर पूर्व में दीफू दर्रे (Diphu pass) तक फैला हुआ है।कथन 2: पर्वत श्रृंखला की सामान्य दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है।कथन 3: इस क्षेत्र की कुछ महत्वपूर्ण पर्वत चोटियाँ K2 और अन्नपूर्णा हैं।कथन 4: ये श्रेणियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर तेज़ बहने वाली नदियों द्वारा विच्छेदित हैं, जिससे गहरी घाटियाँ बनती हैं।

  1. (a) कथन 2, 3 और 4 सही हैं।
  2. (b) कथन 1, 2 और 3 सही हैं।
  3. (c) कथन 1, 2 और 4 सही हैं।
  4. (d) केवल कथन 2 और 3 सही हैं।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) कथन 1, 2 और 4 सही हैं।

उत्तर: विकल्प 3 — कथन 1, 2 और 4 सही हैं।
कथन 3 गलत है: K2 काराकोरम में है और अन्नपूर्णा नेपाल में है।
अरुणाचल हिमालय की प्रमुख चोटियाँ कांगतु और नामचा बरवा हैं।
रिवीजन नोट — अरुणाचल हिमालय
• भूटान हिमालय के पूर्व से लेकर पूर्व में दीफू दर्रे तक फैला है।
• श्रेणियों की सामान्य दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व।
• तेज़ बहने वाली नदियाँ श्रेणियों को उत्तर से दक्षिण की ओर काटती हैं, जिससे गहरे गॉर्ज (महाखड्ड) बनते हैं।
• नामचा बरवा को पार करने के बाद ब्रह्मपुत्र एक गहरे गॉर्ज से होकर बहती है।
• प्रमुख नदियाँ: कामेंग, सुबनसिरी, दिहांग, दिबांग, लोहित।
• पश्चिम से पूर्व की ओर जनजातियाँ: मोनपा, डफला, अबोर, मिश्मी, निशी, नागा; यहाँ झूमिंग (स्थानांतरी कृषि) की जाती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• हिमालय की दिशा — कश्मीर और हिमाचल में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व, नेपाल और सिक्किम में पूर्व–पश्चिम, अरुणाचल में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व, मणिपुर और मिज़ोरम में उत्तर–दक्षिण।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में भारत, चीन और म्यांमार का त्रि-संगम (दीफू दर्रा); महान हिमालय के पूर्वी छोर को चिह्नित करने वाली चोटी (नामचा बरवा)।

Q43. निम्नलिखित में से कौन-सा जलमार्ग तापी नदी पर स्थित है?

  1. (a) NW-1
  2. (b) NW-10
  3. (c) NW-91
  4. (d) NW-100
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) NW-100

उत्तर: विकल्प 4 — NW-100
राष्ट्रीय जलमार्ग 100 तापी (ताप्ती) नदी पर है, जिसे राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अंतर्गत घोषित किया गया।
रिवीजन नोट — भारत के राष्ट्रीय जलमार्ग
• राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 ने राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 5 से बढ़ाकर 111 कर दी।
• NW-1: गंगा–भागीरथी–हुगली, प्रयागराज से हल्दिया (लगभग 1,620 किमी, सबसे लंबा)।
• NW-2: ब्रह्मपुत्र, सदिया से धुबरी (891 किमी); NW-3: वेस्ट कोस्ट नहर (केरल)।
• NW-4: नहरों सहित कृष्णा–गोदावरी तंत्र; NW-5: ईस्ट कोस्ट नहर सहित ब्राह्मणी–महानदी डेल्टा।
• NW-10 अंबा नदी पर और NW-91 शास्त्री नदी–जयगढ़ क्रीक पर है (दोनों महाराष्ट्र); नर्मदा NW-73 है।
• राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास और विनियमन भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) करता है, जिसकी स्थापना 1986 में हुई, मुख्यालय नोएडा।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• तापी बनाम नर्मदा — दोनों पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं; तापी NW-100 है, नर्मदा NW-73।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: राष्ट्रीय जलमार्ग 1 का नदी तंत्र (गंगा–भागीरथी–हुगली); राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास और विनियमन करने वाली संस्था (भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण)।

Modern History (1)

Rise of Nationalism and Indian National Congress · Foundation of the INC (1885)

Q44. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष __________ थे।

  1. (a) व्योमेश चंद्र बनर्जी
  2. (b) रास बिहारी बोस
  3. (c) दादा भाई नौरोजी
  4. (d) गोपाल कृष्ण गोखले
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) व्योमेश चंद्र बनर्जी

उत्तर: विकल्प 1 — व्योमेश चंद्र बनर्जी
कलकत्ता के बैरिस्टर व्योमेश चंद्र बनर्जी ने दिसंबर 1885 में बंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता की।
रिवीजन नोट — प्रारंभिक कांग्रेस
• कांग्रेस की स्थापना 1885 में सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक ए. ओ. ह्यूम ने की।
• पहला अधिवेशन: 28–31 दिसंबर 1885, गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई, 72 प्रतिनिधि; हैजे के कारण इसे पुणे से स्थानांतरित किया गया।
• 2रा अधिवेशन 1886, कलकत्ता — अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी (पहले पारसी अध्यक्ष)।
• 3रा अधिवेशन 1887, मद्रास — बदरुद्दीन तैयबजी (पहले मुस्लिम अध्यक्ष)।
• 4था अधिवेशन 1888, इलाहाबाद — जॉर्ज यूल (पहले ब्रिटिश अध्यक्ष)।
• पहली महिला अध्यक्ष एनी बेसेंट (1917, कलकत्ता); पहली भारतीय महिला अध्यक्ष सरोजिनी नायडू (1925, कानपुर)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• संस्थापक बनाम पहले अध्यक्ष — ए. ओ. ह्यूम ने कांग्रेस की स्थापना की; डब्ल्यू. सी. बनर्जी इसके पहले अध्यक्ष थे।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: कांग्रेस के पहले अधिवेशन का शहर (बंबई); कांग्रेस के पहले मुस्लिम अध्यक्ष (बदरुद्दीन तैयबजी); कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष (एनी बेसेंट)।
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