Q1. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
1. यह अधिनियम अदालतों पर लागू होता है, जिसमें कोर्ट-मार्शल भी शामिल हैं, लेकिन इसमें शपथ-पत्र (एफिडेविट) और मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) शामिल नहीं हैं।
2. "दस्तावेज़" में ईमेल, सर्वर लॉग और स्मार्टफोन संदेश शामिल हैं।
3. पुलिस अधिकारियों के सामने किए गए इकबालिया बयान बिना किसी प्रतिबंध के स्वीकार्य हैं। 4. साक्ष्य अधिनियम, 1872 निरस्त कर दिया गया है, लेकिन लंबित मामलों में पुराना कानून लागू होगा।
- (a) केवल 1, 2 और 3
- (b) केवल 1, 2 और 4
- (c) केवल 2, 3 और 4
- (d) 1, 2 और 3 सभी सही हैं
उत्तर और व्याख्या
उत्तर: (b) केवल 1, 2 और 4
कथन 1 (सत्य): भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 सभी न्यायिक कार्यवाहियों पर लागू होता है, जिसमें कोर्ट-मार्शल भी शामिल हैं, लेकिन इसमें स्पष्ट रूप से शपथ-पत्र (एफिडेविट) और मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) की कार्यवाही शामिल नहीं है।
कथन 2 (सत्य): BSA ने 'दस्तावेज़' की परिभाषा का काफी विस्तार किया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जैसे ईमेल, सर्वर लॉग, स्मार्टफोन संदेश, अवस्थिति संबंधी साक्ष्य और डिजिटल डेटा शामिल हैं, जो आधुनिक साक्ष्य संबंधी वास्तविकताओं को दर्शाता है।
कथन 3 (असत्य): पुलिस अधिकारियों के सामने किए गए इकबालिया बयान BSA के तहत स्वीकार्य नहीं हैं (जैसा कि वे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत भी अस्वीकार्य थे)। पुलिस अधिकारी के सामने किया गया इकबालिया बयान केवल उस हद तक स्वीकार्य है जहाँ तक वह तथ्यों की खोज की ओर ले जाता है। आत्म-अभिशंसा (self-incrimination) के विरुद्ध यह सुरक्षा BSA में संरक्षित है।
कथन 4 (सत्य): भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को BSA, 2023 द्वारा निरस्त कर दिया गया है। हालाँकि, BSA के लागू होने से पहले शुरू किए गए लंबित मामले पुराने साक्ष्य अधिनियम द्वारा शासित होते रहेंगे। चूंकि कथन 1, 2 और 4 सही हैं, अतः विकल्प 2 उत्तर है।