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RRB JE CBT-1 2024-25 18 दिसंबर 2024 शिफ्ट 2 – GK प्रश्न – उत्तर व व्याख्या सहित

RRB JE CBT-1 2024-25 (18 दिसंबर 2024 शिफ्ट 2) में पूछे गए सभी 42 GK / सामान्य अध्ययन प्रश्न, सही उत्तर और व्याख्या के साथ – विषयवार।

📚 42 प्रश्न🗓️ 18 दिसंबर 2024⏰ शिफ्ट 2
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विषय: Chemistry (9) · Biology (10) · Physics (8) · Current Affairs (4) · Polity (3) · Economics (1) · Ancient History (1) · Static GK (2) · Modern History (1) · Geography (2) · Medieval History (1)

Chemistry (9)

Acids, Bases and Salts · Nature of salts (acidic, basic, neutral)

Q1. सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) को जल में घोलने पर, परिणामी विलयन ________ हो जाता है।

  1. (a) सोडियम क्लोराइड के साथ अत्यधिक अभिक्रियाशील
  2. (b) क्षारीय
  3. (c) अम्‍लीय
  4. (d) उदासीन
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) क्षारीय

उत्तर: विकल्प 2 — क्षारीय
सोडियम कार्बोनेट प्रबल क्षार (NaOH) और दुर्बल अम्ल (H₂CO₃) का लवण है।
जल में इसका जल-अपघटन होता है और यह OH⁻ आयन देता है,
इसलिए विलयन का pH 7 से अधिक होता है — यह क्षारीय है।
रिवीजन नोट — लवण विलयनों की प्रकृति
• प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार → उदासीन लवण, pH 7; जैसे NaCl, Na₂SO₄, KNO₃।
• प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार → अम्लीय लवण, pH 7 से कम; जैसे NH₄Cl, CuSO₄।
• दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार → क्षारीय लवण, pH 7 से अधिक; जैसे Na₂CO₃, NaHCO₃, CH₃COONa।
• धावन सोडा = Na₂CO₃·10H₂O (क्रिस्टलन जल के 10 अणु); काँच, साबुन, कागज उद्योगों में और जल की स्थायी कठोरता दूर करने में उपयोग।
• बेकिंग सोडा = NaHCO₃ — हल्का क्षारीय, प्रतिअम्ल (एंटासिड) के रूप में और सोडा-अम्ल अग्निशामक में उपयोग।
• Na₂CO₃ लाल लिटमस को नीला और फिनॉल्फ्थेलिन को गुलाबी कर देता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• धावन सोडा बनाम बेकिंग सोडा — Na₂CO₃·10H₂O धावन सोडा है; NaHCO₃ बेकिंग सोडा है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: NaCl विलयन की प्रकृति (उदासीन); NH₄Cl, Na₂CO₃ और सोडियम ऐसीटेट में से अम्लीय विलयन देने वाला लवण (NH₄Cl); pH 9 देने वाले लवण का प्रकार (प्रबल क्षार + दुर्बल अम्ल)।
Metals and Non-metals · Reactivity series

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित करेगी?

  1. (a) चाँदी
  2. (b) लोहा
  3. (c) प्लैटिनम
  4. (d) सोना
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) लोहा

उत्तर: विकल्प 2 — लोहा
लोहा कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है।
Fe + CuSO_(4) → FeSO_(4) + Cu
रिवीजन नोट — सक्रियता श्रेणी और विस्थापन (कक्षा 10)
• अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।
• क्रम: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > [H] > Cu > Hg > Ag > Au (Pt सबसे नीचे)।
• नीले CuSO_(4) में लोहे की कील: कील पर लाल-भूरी कॉपर की परत जमती है और विलयन हल्का हरा (FeSO_(4)) हो जाता है।
• जिंक भी कॉपर को विस्थापित करता है: Zn + CuSO_(4) → ZnSO_(4) + Cu।
• चाँदी, सोना और प्लैटिनम कॉपर से नीचे हैं, इसलिए ये इसे विस्थापित नहीं कर सकते।
• हाइड्रोजन से नीचे की धातुएँ (Cu, Ag, Au) तनु अम्लों के साथ H_(2) नहीं देतीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: कॉपर सल्फेट विलयन में रखी लोहे की कील पर जमी परत का रंग (लाल-भूरा कॉपर); लेड, आयरन(II) सल्फेट से आयरन को विस्थापित क्यों नहीं कर सकता (लेड, आयरन से कम अभिक्रियाशील है)।
Carbon and its Compounds · Esters and esterification

Q3. एथेनॉल (ethanol) और ऐसीटिक (acetic) अम्ल के बीच अभिक्रिया से निर्मित उत्पाद कौन-सा है?

  1. (a) एथेनल (ethanal)
  2. (b) ऐसीटेट (acetate)
  3. (c) एस्टर (ester)
  4. (d) मेथेनॉल (methanol)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) एस्टर (ester)

उत्तर: विकल्प 3 — एस्टर (ester)
एथेनॉल (एक ऐल्कोहॉल) किसी अम्ल की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल (एथेनॉइक अम्ल) से अभिक्रिया करके मीठी गंध वाला एस्टर और जल बनाता है।
इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं।
रिवीजन नोट — एथेनॉल, एथेनॉइक अम्ल और एस्टर
• एस्टरीकरण: CH_(3)COOH + C_(2)H_(5)OH → CH_(3)COOC_(2)H_(5) + H_(2)O, उत्प्रेरक सांद्र H_(2)SO_(4)।
• उत्पाद एथिल एथेनोएट (एथिल ऐसीटेट) एक एस्टर है, जिसकी फल जैसी, मीठी गंध होती है — इत्र और स्वाद देने वाले पदार्थों में प्रयुक्त।
• साबुनीकरण: एस्टर + NaOH से पुनः ऐल्कोहॉल और अम्ल का सोडियम लवण बनता है — यही अभिक्रिया साबुन बनाने में प्रयुक्त होती है।
• एथेनॉइक अम्ल को सामान्यतः ऐसीटिक अम्ल कहते हैं; जल में इसका 5–8% विलयन सिरका है।
• शुद्ध एथेनॉइक अम्ल ठंडी जलवायु में 290 K पर जम जाता है, इसलिए इसे ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल कहते हैं।
• एथेनॉल + सोडियम से हाइड्रोजन गैस और सोडियम एथॉक्साइड बनते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• एथेनल बनाम एथेनोएट — एथेनल (CH_(3)CHO) एथेनॉल के ऑक्सीकरण से बनने वाला ऐल्डिहाइड है; एथेनोएट, एथेनॉइक अम्ल का एस्टर या लवण है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एथेनॉइक अम्ल और एथेनॉल के बीच अभिक्रिया का प्रकार (एस्टरीकरण)।
केवल "ऐसीटेट" नाम का एक भाग है — बनने वाले यौगिक का वर्ग एस्टर है।
Acids, Bases and Salts · pH scale and its importance

Q4. जब किसी विलयन में H^(+) और OH^(−) आयनों की संख्या बराबर होती है, तो विलयन का pH कितना होता है?

  1. (a) pH < 3
  2. (b) pH > 12
  3. (c) pH = 7
  4. (d) pH > 3 लेकिन < 5
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) pH = 7

उत्तर: विकल्प 3 — pH = 7
जब [H^(+)] = [OH^(−)] हो, तो विलयन उदासीन होता है।
25 °C पर प्रत्येक सांद्रता 10^(−7) mol/L होती है, इसलिए pH = 7।
रिवीजन नोट — pH स्केल
• pH = −log[H^(+)]; स्केल 0 से 14 तक (सोरेनसेन)।
• pH < 7 अम्लीय, pH = 7 उदासीन, pH > 7 क्षारीय।
• pH की प्रत्येक इकाई [H^(+)] में 10 गुना परिवर्तन दर्शाती है।
• सामान्य मान: जठर रस लगभग 1.2, नींबू का रस लगभग 2.2, शुद्ध जल 7, रक्त लगभग 7.4, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया लगभग 10।
• मुँह का pH 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय शुरू होता है।
• सार्वत्रिक सूचक भिन्न-भिन्न pH मानों पर भिन्न-भिन्न रंग दर्शाता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: pH स्केल पर उदासीन पदार्थ (शुद्ध जल); H^(+) की अधिक सांद्रता का pH पर प्रभाव (pH कम); प्रबल अम्ल और प्रबल क्षारक से बने लवण की प्रकृति (उदासीन)।
उदासीन का अर्थ है H^(+) और OH^(−) बराबर, दोनों में से किसी का शून्य होना नहीं।
Chemical Reactions and Equations · Combination reactions

Q5. संयोजन अभिक्रिया का सामान्य रूप क्या होता है?

  1. (a) AB + CD → AC + BD
  2. (b) A → B + C
  3. (c) A + B → AB
  4. (d) AB → A + B
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) A + B → AB

उत्तर: विकल्प 3 — A + B → AB
संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक अभिकारक मिलकर एक ही उत्पाद बनाते हैं।
इसलिए इसका सामान्य रूप A + B → AB है।
रिवीजन नोट — रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार
• संयोजन: A + B → AB — उदाहरण CaO + H_(2)O → Ca(OH)_(2) (बिना बुझा चूना से बुझा हुआ चूना, ऊष्माक्षेपी)।
• वियोजन: AB → A + B — ऊष्मा (CaCO_(3)), विद्युत (जल) या प्रकाश (AgCl, AgBr) द्वारा।
• विस्थापन: A + BC → AC + B — उदाहरण Fe + CuSO_(4) → FeSO_(4) + Cu (नीला रंग फीका पड़ता है)।
• द्विविस्थापन: AB + CD → AD + CB — उदाहरण Na_(2)SO_(4) + BaCl_(2) से BaSO_(4) का सफेद अवक्षेप बनता है।
• कोयले का जलना और H_(2) तथा O_(2) से जल का बनना भी संयोजन अभिक्रियाएँ हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• संयोजन बनाम वियोजन — संयोजन में अनेक से एक उत्पाद बनता है; वियोजन में एक अभिकारक अनेक में टूटता है। इनके सामान्य रूप एक-दूसरे के ठीक उल्टे हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अभिक्रिया CaO + H_(2)O → Ca(OH)_(2) + ऊष्मा का प्रकार (संयोजन अभिक्रिया); संयोजन अभिक्रिया की पुष्टि करने वाला प्रेक्षण (केवल एक नया पदार्थ बनता है)।
दाईं ओर देखें — एक ही उत्पाद का अर्थ है संयोजन।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q6. विरंजक चूर्ण बनाने के लिए किन अभिकारकों का उपयोग किया जाता है?

  1. (a) कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक एसिड
  2. (b) क्लोरीन गैस और शुष्क कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड
  3. (c) चूना और सल्फ्यूरिक एसिड
  4. (d) क्लोरीन और जल
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) क्लोरीन गैस और शुष्क कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड

उत्तर: विकल्प 2 — क्लोरीन गैस और शुष्क कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड
विरंजक चूर्ण शुष्क बुझे हुए चूने (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करके बनाया जाता है।
Ca(OH)_(2) + Cl_(2) → CaOCl_(2) + H_(2)O
रिवीजन नोट — विरंजक चूर्ण
• रासायनिक नाम कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड; सूत्र CaOCl_(2)।
• क्लोरीन क्लोर-क्षार प्रक्रिया से प्राप्त होती है — लवण-जल (ब्राइन) के विद्युत-अपघटन से NaOH, Cl_(2) (ऐनोड पर) और H_(2) (कैथोड पर) बनते हैं।
• यह क्लोरीन मुक्त करके विरंजन करता है, जो ऑक्सीकारक का कार्य करती है।
• उपयोग: सूती और लिनन (वस्त्र उद्योग), लकड़ी की लुगदी (कागज़ उद्योग), धुले कपड़ों (लॉन्ड्री) का विरंजन।
• पीने के पानी को रोगाणुमुक्त करने और रासायनिक उद्योगों में ऑक्सीकारक के रूप में भी उपयोग होता है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• विरंजक चूर्ण CaOCl_(2) · बेकिंग सोडा NaHCO_(3) · धावन सोडा Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O · प्लास्टर ऑफ पेरिस CaSO_(4)·½H_(2)O।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह गैस जिसके कारण यह विरंजन करता है (क्लोरीन); विरंजन के अतिरिक्त विरंजक चूर्ण का एक उपयोग (पीने के पानी को रोगाणुमुक्त करना); लवण-जल के विद्युत-अपघटन का नाम (क्लोर-क्षार प्रक्रिया)।
Everyday and Industrial Chemistry · Drugs and medicines (antacids, antibiotics, analgesics)

Q7. एसिडिटी की समस्या वाले लोगों का इलाज एंटासिड (antacids) से किया जाता है। इसमें निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व होता है?

  1. (a) हाइड्रोक्लोरिक अम्‍ल (Hydrochloric acid)
  2. (b) अशमित चूना (Quick lime)
  3. (c) चूना जल (Lime water)
  4. (d) मिल्‍क ऑफ मैग्नेशिया (Milk of magnesia)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) मिल्‍क ऑफ मैग्नेशिया (Milk of magnesia)

उत्तर: विकल्प 4 — मिल्‍क ऑफ मैग्नेशिया (Milk of magnesia)
एसिडिटी पेट में अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के कारण होती है।
एंटासिड (प्रतिअम्ल) एक दुर्बल क्षारक है जो इस अम्ल को उदासीन करता है; मिल्क ऑफ मैग्नेशिया मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, Mg(OH)_(2) का निलंबन है।
रिवीजन नोट — एंटासिड और उदासीनीकरण
• अम्ल + क्षारक → लवण + जल — यह उदासीनीकरण है।
• आमाशय हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) बनाता है; इसकी अधिकता से अपच / एसिडिटी होती है।
• सामान्य एंटासिड: मिल्क ऑफ मैग्नेशिया (Mg(OH)_(2)), बेकिंग सोडा (NaHCO_(3)), ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड।
• एंटासिड दुर्बल क्षारक होने चाहिए — NaOH या अशमित चूना (CaO) जैसे प्रबल क्षार आहार नाल को जला देंगे।
• उदासीनीकरण के अन्य उपयोग: चींटी या मधुमक्खी के डंक (फॉर्मिक अम्ल) पर बेकिंग सोडा / कैलामाइन; अम्लीय मृदा के लिए अशमित चूना या बुझा हुआ चूना।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• चूना जल बनाम अशमित चूना — चूना जल Ca(OH)_(2) का विलयन है, जिसका उपयोग CO_(2) के परीक्षण में होता है; अशमित चूना CaO है। दोनों में से किसी का उपयोग एंटासिड के रूप में नहीं होता।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: एंटासिड अपच से कैसे राहत देते हैं (आमाशय के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके); रसोई का वह पदार्थ जो एंटासिड का कार्य करता है (बेकिंग सोडा)।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q8. वॉशिंग सोडा को Na_(2)CO_(3).xH_(2)O द्वारा दर्शाया जाता है। 'x' का मान _____________ के बराबर है।

  1. (a) 10
  2. (b) 6
  3. (c) 8
  4. (d) 2
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) 10

उत्तर: विकल्प 1 — 10
वॉशिंग सोडा सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट, Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O है।
डेका = दस, अतः प्रत्येक सूत्र इकाई में क्रिस्टलन जल के 10 अणु होते हैं।
रिवीजन नोट — सामान्य लवण और क्रिस्टलन जल
• वॉशिंग सोडा: Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O — सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलन से बनता है; गर्म करने पर सोडा ऐश (निर्जल Na_(2)CO_(3)) मिलता है।
• नीला थोथा (कॉपर सल्फेट): CuSO_(4)·5H_(2)O — गर्म करने पर जल खोकर सफेद हो जाता है।
• जिप्सम: CaSO_(4)·2H_(2)O; प्लास्टर ऑफ पेरिस: CaSO_(4)·½H_(2)O।
• बेकिंग सोडा: NaHCO_(3) — इसमें क्रिस्टलन जल नहीं होता।
• वॉशिंग सोडा के उपयोग: काँच, साबुन और कागज उद्योग, बोरैक्स बनाने में, घरेलू सफाई, जल की स्थायी कठोरता दूर करने में।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• वॉशिंग सोडा बनाम बेकिंग सोडा — Na_(2)CO_(3)·10H_(2)O (सोडियम कार्बोनेट) बनाम NaHCO_(3) (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वॉशिंग सोडा का उपयोग करने वाले उद्योग (काँच, साबुन और कागज); बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम (सोडियम बाइकार्बोनेट); कैल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (प्लास्टर ऑफ पेरिस)।
Acids, Bases and Salts · Common salts - preparation and uses (baking soda, washing soda, bleaching powder, plaster of Paris)

Q9. प्राय: घरों (households) में उपयोग किए जाने वाले बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम ________ है।

  1. (a) सोडियम बाइकार्बोनेट
  2. (b) मैग्‍नीशियम हाइड्रॉक्‍साइड
  3. (c) सोडियम कार्बोनेट
  4. (d) कैल्सियम कार्बोनेट
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) सोडियम बाइकार्बोनेट

उत्तर: विकल्प 1 — सोडियम बाइकार्बोनेट
बेकिंग सोडा सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (सोडियम बाइकार्बोनेट), NaHCO_(3) है।
रिवीजन नोट — बेकिंग सोडा
• NaCl + H_(2)O + CO_(2) + NH_(3) → NH_(4)Cl + NaHCO_(3) से बनता है।
• गर्म करने पर: 2NaHCO_(3) → Na_(2)CO_(3) + H_(2)O + CO_(2) — CO_(2) के कारण केक फूलता है।
• बेकिंग पाउडर = बेकिंग सोडा + टार्टरिक अम्ल जैसा कोई दुर्बल खाद्य अम्ल।
• यह एक दुर्बल क्षारक है — एंटासिड के रूप में और सोडा-अम्ल अग्निशामक में प्रयुक्त।
• इसका विलयन क्षारीय होता है; यह संक्षारक नहीं है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• सोडियम बाइकार्बोनेट बनाम सोडियम कार्बोनेट — बेकिंग सोडा NaHCO_(3) है; Na_(2)CO_(3) सोडा ऐश / वॉशिंग सोडा है।
• मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड मिल्क ऑफ मैग्नेशिया है; कैल्सियम कार्बोनेट चूना पत्थर / खड़िया / संगमरमर है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अग्निशामक में बेकिंग सोडा का उपयोग क्यों होता है (यह अम्ल के साथ आसानी से कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त करता है); इसे बनाने में अमोनिया के साथ आवश्यक गैस (कार्बन डाइऑक्साइड)।

Biology (10)

Reproduction · Pollination and fertilisation in plants

Q10. पौधों में नर और मादा युग्मकों के संलयन की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?

  1. (a) निषेचन (Fertilisation)
  2. (b) अंकुरण (Germination)
  3. (c) परागण (Pollination)
  4. (d) प्रवर्धन (Propagation)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) निषेचन (Fertilisation)

उत्तर: विकल्प 1 — निषेचन (Fertilisation)
नर युग्मक (परागकण से) का मादा युग्मक (बीजांड में अंड) के साथ संलयन निषेचन कहलाता है;
इससे युग्मनज (zygote) बनता है।
रिवीजन नोट — पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन
• परागण: परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण — यह निषेचन से पहले होता है।
• स्व-परागण = उसी फूल या पौधे पर; पर-परागण = दूसरे पौधे पर (वायु, जल, कीटों, पक्षियों द्वारा)।
• परागकण से पराग नलिका बनती है, जो वर्तिका से होकर अंडाशय में स्थित बीजांड तक पहुँचती है।
• निषेचन बीजांड के भीतर होता है; युग्मनज → भ्रूण।
• निषेचन के बाद: बीजांड → बीज, अंडाशय → फल; पंखुड़ियाँ, बाह्यदल और पुंकेसर प्रायः मुरझा जाते हैं।
• अंकुरण = बीज का नवोद्भिद (पौध) में विकसित होना; प्रवर्धन = नए पौधे उत्पन्न करना (जैसे तना, जड़, पत्ती द्वारा कायिक प्रवर्धन)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• परागण बनाम निषेचन — परागण परागकणों को वर्तिकाग्र तक पहुँचाता है; निषेचन युग्मकों का संलयन कराता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: सादृश्यता परागण : परागकणों का स्थानांतरण :: निषेचन : ? (युग्मकों का संलयन); युग्मक क्या हैं (अगुणित जनन कोशिकाएँ, जो संलयित होकर युग्मनज बनाती हैं)।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q11. निम्नलिखित में से कौन-सा जीव पुनर्जनन (regeneration) विधि द्वारा प्रजनन करता है?

  1. (a) खमीर (Yeast)
  2. (b) ब्रायोफ़िलम (Bryophyllum)
  3. (c) प्लेनेरिया (Planaria)
  4. (d) राइज़ोपस (Rhizopus)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) प्लेनेरिया (Planaria)

उत्तर: विकल्प 3 — प्लेनेरिया (Planaria)
पुनर्जनन में पूर्ण विकसित जीव को टुकड़ों में काटा जाता है और प्रत्येक टुकड़ा विकसित होकर पूर्ण जीव बन जाता है।
प्लेनेरिया और हाइड्रा यह दर्शाते हैं; यह कार्य विशिष्ट कोशिकाएँ करती हैं जो विभाजित और विभेदित होती हैं।
रिवीजन नोट — अलैंगिक जनन की विधियाँ
• द्विखंडन: अमीबा, पैरामीशियम, जीवाणु; लेस्मानिया एक निश्चित तल में विभाजित होता है।
• बहुखंडन: प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)।
• मुकुलन: यीस्ट (खमीर) और हाइड्रा — एक मुकुल विकसित होकर अलग हो जाता है।
• खंडन: स्पाइरोगायरा — शरीर स्वयं टुकड़ों में टूट जाता है, प्रत्येक टुकड़ा विकसित होता है।
• बीजाणु समासंघ: राइज़ोपस (ब्रेड मोल्ड) — बीजाणु बीजाणुधानी में।
• कायिक प्रवर्धन: ब्रायोफ़िलम (पत्तियों के किनारों पर कलिकाएँ), आलू, गुलाब, केला, गन्ना।
• सभी अलैंगिक विधियों में एक ही जनक होता है और युग्मकों का संलयन नहीं होता।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• पुनर्जनन बनाम खंडन — पुनर्जनन में जीव को काटना पड़ता है और विशिष्ट कोशिकाएँ उसे पुनः बनाती हैं; खंडन में परिपक्व होने पर शरीर स्वयं टूट जाता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अमीबा, यीस्ट और हाइड्रा का एक जनक से जनन क्या दर्शाता है (युग्मकों का संलयन नहीं); कायिक प्रवर्धन के बारे में गलत कथन (बीज धारण करने वाली संरचनाओं से नए पौधे)।
हाइड्रा दोनों करता है — मुकुलन और पुनर्जनन — पर यीस्ट केवल मुकुलन करता है।
Heredity and Evolution · Heredity and variation

Q12. पादपों में विविधता, उनके उत्तरजीविता और विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

  1. (a) यह पौधों को बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद करती है।
  2. (b) यह सुनिश्चित करती है कि सभी पौधे समान संततियां उत्‍पन्‍न करें।
  3. (c) यह पौधों को अधिक लंबा और मजबूत बनने में मदद करती है।
  4. (d) यह पौधों के बीच प्रतिस्पर्धा को कम करती है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) यह पौधों को बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद करती है।

उत्तर: विकल्प 1 — यह पौधों को बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद करती है।
विविधता कुछ व्यष्टियों को ऐसे लक्षण देती है जो पर्यावरण में परिवर्तन (ऊष्मा, सूखा, रोग) के बावजूद जीवित रहने में सहायक होते हैं।
ये जीवित बचे जीव जनन करते हैं, इसलिए विविधता विकास का कच्चा माल है।
रिवीजन नोट — आनुवंशिकता और विविधता
• आनुवंशिकता: लक्षणों का जनकों से संतति में जाना; विविधता: किसी स्पीशीज़ के व्यष्टियों में अंतर।
• आनुवंशिकता और विविधता का अध्ययन आनुवंशिकी कहलाता है।
• लैंगिक जनन से अधिक विविधता उत्पन्न होती है — दो जनकों के जीन मिलते हैं और अर्धसूत्री विभाजन उन्हें फेरबदल करता है।
• अलैंगिक जनन से बहुत कम विविधता आती है — केवल DNA प्रतिकृति की छोटी त्रुटियों से।
• पर्यावरण के अनुकूल विभिन्नताएँ प्राकृतिक वरण (डार्विन) द्वारा बनी रहती हैं।
• उदाहरण: ऊष्मा सहन कर सकने वाले जीवाणु लू में बेहतर ढंग से जीवित रहते हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: आनुवंशिकता और विविधता का अध्ययन (आनुवंशिकी); वह प्रक्रम जिसके कारण एक ही जनकों की संतानें भिन्न दिखती हैं (अर्धसूत्री विभाजन)।
समान संततियाँ विविधता का उल्टा हैं — अलैंगिक जनन प्रायः यही उत्पन्न करता है।
Cell - Structure and Function · Cell division - mitosis and meiosis

Q13. कौन-सी प्रक्रिया ग़ैर-प्रजनन कोशिकाओं की तुलना में प्रजनन कोशिकाओं में DNA की आधी मात्रा सुनिश्चित करती है?

  1. (a) समसूत्री विभाजन (Mitosis)
  2. (b) अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)
  3. (c) असूत्री विभाजन (Amitosis)
  4. (d) कोशिकाद्रव्य-विभाजन (Cytokinesis)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)

उत्तर: विकल्प 2 — अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)
जनन कोशिकाएँ (युग्मक) अर्धसूत्री विभाजन से बनती हैं, जो एक न्यूनीकरण विभाजन है।
यह गुणसूत्रों की संख्या आधी कर देता है, इसलिए प्रत्येक युग्मक में शरीर की कोशिका का आधा DNA होता है।
रिवीजन नोट — समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजन
• समसूत्री विभाजन — शरीर (कायिक) कोशिकाओं में; समान गुणसूत्र संख्या वाली 2 एकसमान संतति कोशिकाएँ बनती हैं; वृद्धि और मरम्मत के लिए।
• अर्धसूत्री विभाजन — जनन अंगों (वृषण, अंडाशय, परागकोश, बीजांड) में; आधी गुणसूत्र संख्या (अगुणित, n) वाली 4 संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
• मनुष्य: शरीर की कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र (2n); शुक्राणु और अंडाणु प्रत्येक में 23 (n)।
• निषेचन में दो अगुणित युग्मक संलयित होकर युग्मनज में 2n फिर से स्थापित करते हैं — इस प्रकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी DNA की मात्रा स्थिर रहती है।
• अर्धसूत्री विभाजन में जीन विनिमय (crossing over) और यादृच्छिक पृथक्करण संतानों में विभिन्नता उत्पन्न करते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• कोशिकाद्रव्य-विभाजन केवल विभाजन के अंत में कोशिकाद्रव्य का बँटना है; असूत्री विभाजन तर्कु (spindle) के बिना होने वाला प्रत्यक्ष विभाजन है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अर्धसूत्री विभाजन में बनने वाली संतति कोशिकाओं की संख्या (चार); अर्धसूत्री विभाजन से बनने वाली जनन कोशिकाओं का नाम (युग्मक); भाई-बहन एक-दूसरे से भिन्न क्यों दिखते हैं (अर्धसूत्री विभाजन)।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q14. अमीबा में, विखंडन के दौरान विभाजन _______ हो सकता है।

  1. (a) किसी संरचना से संबंधित एक निश्चित दिशा में
  2. (b) किसी भी तल में
  3. (c) केवल एक निश्चित तल के अनुदिश
  4. (d) केवल एक विशिष्ट तल में
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) किसी भी तल में

उत्तर: विकल्प 2 — किसी भी तल में
अमीबा का कोई निश्चित आकार नहीं होता और विभाजन को दिशा देने वाली कोई निश्चित संरचना नहीं होती।
इसलिए द्विखंडन के दौरान इसका शरीर किसी भी तल में विभाजित हो सकता है।
रिवीजन नोट — विखंडन और अन्य अलैंगिक विधियाँ
• द्विखंडन — एक कोशिका दो में विभाजित होती है: अमीबा, पैरामीशियम, जीवाणु।
• लेस्मानिया (काला-अजार का कारक) अपनी कोड़े जैसी कशाभिका द्वारा निर्धारित एक निश्चित दिशा में विभाजित होता है।
• बहुखंडन — एक कोशिका अनेक में विभाजित होती है: प्लैज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)।
• मुकुलन — हाइड्रा, यीस्ट; खंडन — स्पाइरोगाइरा; बीजाणु समासंघ — राइजोपस (ब्रेड मोल्ड)।
• पुनर्जनन — एक टुकड़े से पूरा शरीर विकसित होता है: प्लेनेरिया, हाइड्रा।
• इन सभी में एक ही जनक होता है और युग्मक नहीं बनते; संतति जनक की लगभग प्रतिलिपि होती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अमीबा बनाम लेस्मानिया — अमीबा किसी भी तल में विभाजित होता है; लेस्मानिया अपनी कशाभिका से संबंधित निश्चित तल में।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अमीबा, यीस्ट और हाइड्रा का एक जनक से जनन क्या दर्शाता है (अलैंगिक जनन युग्मकों के संलयन के बिना होता है)।
Reproduction · Vegetative propagation

Q15. निम्नलिखित में से कौन-सा पौधों में पुनर्जनन (regeneration) का एक उदाहरण है?

  1. (a) मनुष्यों में जनन
  2. (b) हाइड्रा में मुकुलन
  3. (c) जीवाणुओं में द्विखंडन
  4. (d) कलम (कटिंग) से नए पौधे की वृद्धि
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) कलम (कटिंग) से नए पौधे की वृद्धि

उत्तर: विकल्प 4 — कलम (कटिंग) से नए पौधे की वृद्धि
तने का एक टुकड़ा (कलम) नई जड़ें और प्ररोह उगाकर पूरा पौधा बना लेता है।
किसी भाग से पूरा शरीर फिर से विकसित होना पुनर्जनन है; पौधों में इसका उपयोग कायिक प्रवर्धन के रूप में होता है।
शेष तीनों विकल्प पौधों से संबंधित ही नहीं हैं।
रिवीजन नोट — कायिक प्रवर्धन
• एक ही जनक की जड़, तने या पत्तियों से नए पौधे उगते हैं — न बीज, न युग्मक।
• तने की कलम — गुलाब, गन्ना, मनी प्लांट; दाब लगाना (layering) — चमेली; रोपण (grafting) — आम, नींबू वंश।
• पत्ती की कलिकाएँ — ब्रायोफिलम अपनी पत्तियों के किनारों की खाँचों से नए पौधे उगाता है।
• जिन पौधों ने बीज उत्पन्न करने की क्षमता खो दी है, जैसे केला, संतरा, गुलाब, चमेली, उन्हें इसी विधि से उगाया जाता है।
• संतति जनक के आनुवंशिक रूप से समान होती है, और पौधा बीज से उगाए गए पौधे की तुलना में जल्दी फूल और फल देता है।
• ऊतक संवर्धन — वृद्धिशील सिरे की कुछ कोशिकाओं से अनेक पौधे; ऑर्किड और सजावटी पौधों के लिए उपयोगी।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• पुनर्जनन बनाम मुकुलन — पुनर्जनन में कटा हुआ टुकड़ा पूरे शरीर में विकसित होता है (प्लेनेरिया); मुकुलन में एक उभार अक्षत जनक से अलग हो जाता है (हाइड्रा)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: माली कलम, रोपण और दाब लगाने का उपयोग क्यों करते हैं (इनसे आनुवंशिक रूप से समान पौधे बनते हैं)।
Heredity and Evolution · Mendel's laws and experiments

Q16. वंशागति की इकाइयाँ, जिन्हें मेंडल ने 'कारक (factors)' कहा था, अब क्या कहलाती हैं?

  1. (a) गुणसूत्र (Chromosomes)
  2. (b) जीन (Genes)
  3. (c) विशेषक (Traits)
  4. (d) डीएनए (DNA)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) जीन (Genes)

उत्तर: विकल्प 2 — जीन (Genes)
मेंडल ने कहा कि प्रत्येक लक्षण 'कारकों' के एक युग्म द्वारा नियंत्रित होता है जो जनकों से संतति में जाते हैं।
इन कारकों को अब जीन कहा जाता है।
रिवीजन नोट — मेंडल और आनुवंशिकता
• ग्रेगर जॉन मेंडल — आनुवंशिकी के जनक; उद्यान मटर, Pisum sativum, के 7 विपरीत लक्षण युग्मों पर कार्य किया।
• एकसंकर संकरण (लंबा × बौना): F1 सभी लंबे; F2 3 : 1 (लक्षणप्रारूप), 1 : 2 : 1 (जीनप्रारूप)।
• द्विसंकर संकरण का F2 अनुपात: 9 : 3 : 3 : 1।
• प्रभाविता का नियम, पृथक्करण का नियम, स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम।
• जीन गुणसूत्र पर स्थित DNA का एक खंड है; किसी जीन के विभिन्न रूप युग्मविकल्पी (alleles) कहलाते हैं।
• जीन शब्द विल्हेम जोहान्सन ने (1909) दिया।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• जीन बनाम गुणसूत्र बनाम DNA — DNA रसायन है; गुणसूत्र DNA का एक लंबा धागा है; जीन उसका एक कार्यात्मक खंड है जो किसी लक्षण को नियंत्रित करता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह नियम कि युग्मक बनते समय दोनों युग्मविकल्पी अलग हो जाते हैं (पृथक्करण का नियम); बौने मटर के पौधे का जीनप्रारूप (tt)।
Heredity and Evolution · Mendel's laws and experiments

Q17. मेंडल के अनुसार, लंबे मटर के पौधों को छोटे मटर के पौधों के साथ संकरण कराने पर F1 संतति में कौन-सा विशेषक प्रकट हुआ?

  1. (a) लंबा
  2. (b) बौना
  3. (c) मध्यम
  4. (d) छोटा
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) लंबा

उत्तर: विकल्प 1 — लंबा
शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध छोटे (tt) मटर के पौधों के संकरण से F1 में Tt पौधे प्राप्त होते हैं।
लंबापन प्रभावी है, इसलिए F1 का हर पौधा लंबा होता है — कोई मध्यम या छोटा पौधा नहीं आता।
रिवीजन नोट — मेंडल का एकसंकर संकरण
• ग्रेगर मेंडल ने उद्यान मटर (Pisum sativum) पर कार्य किया; वे आनुवंशिकी के जनक हैं।
• F1: सभी लंबे (Tt) — F1 में दिखने वाला लक्षण प्रभावी होता है; छिपा हुआ लक्षण अप्रभावी होता है।
• F2 (F1 का स्व-परागण): लक्षणप्ररूप 3 : 1 (लंबा : छोटा), जीनप्ररूप 1 : 2 : 1 (TT : Tt : tt)।
• छोटा लक्षण F2 में फिर प्रकट होता है, जिससे सिद्ध होता है कि अप्रभावी कारक नष्ट नहीं हुआ था — केवल दबा हुआ था।
• मेंडल ने विपरीत लक्षणों के 7 युग्मों का अध्ययन किया (ऊँचाई, बीज का आकार, बीज का रंग, फूल का रंग …)।
• नियम: प्रभाविता का नियम, पृथक्करण का नियम, स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (द्विसंकर संकरण, F2 अनुपात 9 : 3 : 3 : 1)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• प्रभाविता बनाम सम्मिश्रण — F1 पूरी तरह लंबा होता है, मध्यम नहीं; मेंडल के परिणाम ने सम्मिश्रण (blending) की धारणा को खारिज कर दिया।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: छोटे मटर के पौधे का जीनप्ररूप (tt); लंबापन किस प्रकार का लक्षण है (प्रभावी); एकसंकर संकरण का F2 लक्षणप्ररूप अनुपात (3 : 1)।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q18. एककोशिकीय जीवों के लिए अलैंगिक जनन लाभदायक क्यों होता है?

  1. (a) यह ओवरक्राउडिंग (overcrowding) को रोकता है।
  2. (b) इससे अनुकूल परिस्थितियों में तीव्र जनन संभव होता है।
  3. (c) इसके लिए एक मेट (mate) की आवश्यकता होती है।
  4. (d) इससे आनुवंशिक परिवर्तिता में वृद्धि होती है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) इससे अनुकूल परिस्थितियों में तीव्र जनन संभव होता है।

उत्तर: विकल्प 2 — इससे अनुकूल परिस्थितियों में तीव्र जनन संभव होता है।
अलैंगिक जनन में केवल एक जनक की आवश्यकता होती है और कोई युग्मक नहीं बनते।
इसलिए एककोशिकीय जीव बस बार-बार विभाजित होकर, भोजन और परिस्थितियाँ अनुकूल रहने तक, तेजी से बड़ी संख्या बना सकता है।
रिवीजन नोट — अलैंगिक जनन
• एक जनक, युग्मकों का संलयन नहीं, संतति क्लोन होती है — जनक के लगभग समान।
• द्विखंडन — अमीबा, पैरामीशियम, जीवाणु; बहुखंडन — प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)।
• मुकुलन — यीस्ट, हाइड्रा; खंडन — स्पाइरोगायरा; पुनर्जनन — प्लेनेरिया, हाइड्रा।
• बीजाणु निर्माण — राइजोपस (ब्रेड मोल्ड); बीजाणुओं की मोटी भित्ति प्रतिकूल परिस्थितियों को सह लेती है।
• कमी: विभिन्नता बहुत कम, इसलिए समष्टि बदले हुए पर्यावरण में कम टिक पाती है।
• लैंगिक जनन में दो जनक होते हैं और यह विभिन्नता बढ़ाता है — जो विकास के लिए उपयोगी है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• विभिन्नता लैंगिक जनन से आती है, अलैंगिक से नहीं — और साथी (mate) की आवश्यकता लैंगिक जनन की विशेषता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अमीबा, यीस्ट और हाइड्रा का एक जनक से जनन क्या दर्शाता है (अलैंगिक जनन युग्मकों के संलयन के बिना होता है)।
Reproduction · Asexual reproduction (fission, budding, fragmentation, spores)

Q19. अलैंगिक प्रजनन की निम्नलिखित में से कौन-सी विधि का उपयोग विशेष रूप से एककोशिकीय जीवों द्वारा किया जाता है?

  1. (a) द्वि-खंडन (Binary fission)
  2. (b) विखंडन (Fragmentation)
  3. (c) पुनर्जनन (Regeneration)
  4. (d) बीजाणुकजनन (Sporulation)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) द्वि-खंडन (Binary fission)

उत्तर: विकल्प 1 — द्वि-खंडन (Binary fission)
द्वि-खंडन में एकल कोशिका दो संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है।
केवल एककोशिकीय जीव ही ऐसा कर सकता है — उसका पूरा शरीर एक ही कोशिका है।
रिवीजन नोट — अलैंगिक जनन की विधियाँ
• द्वि-खंडन: अमीबा (किसी भी तल में), लेस्मानिया (कशाभ के कारण निश्चित तल में), पैरामीशियम, जीवाणु।
• बहुखंडन: एक कोशिका अनेक संतति कोशिकाओं में विभाजित होती है — प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)।
• खंडन: तंतु टुकड़ों में टूटता है और हर टुकड़ा वृद्धि करता है — स्पाइरोगायरा (बहुकोशिकीय)।
• पुनर्जनन: विशिष्ट कोशिकाएँ एक टुकड़े से पूरा शरीर फिर से बना देती हैं — प्लेनेरिया, हाइड्रा।
• मुकुलन: जनक पर एक मुकुल विकसित होता है — यीस्ट (एककोशिकीय), हाइड्रा (बहुकोशिकीय)।
• बीजाणु निर्माण: बीजाणुधानी बीजाणु मुक्त करती है — राइजोपस (ब्रेड मोल्ड)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• खंडन बनाम पुनर्जनन — खंडन जनन की एक सामान्य विधि है (स्पाइरोगायरा); पुनर्जनन किसी भी कटे टुकड़े से शरीर फिर बनाता है (प्लेनेरिया) और इसके लिए विशिष्ट कोशिकाएँ चाहिए।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: अमीबा, यीस्ट और हाइड्रा के एक जनक से जनन में दिखने वाली विशेषता (युग्मकों का संलयन नहीं)।

Physics (8)

Electricity · Resistors in series and parallel

Q20. किसी श्रेणी परिपथ में, यदि प्रतिरोधकों में से एक को हटा दिया जाए या वह टूट जाए, तो परिपथ में धारा ________।

  1. (a) बढ़ जाएगी
  2. (b) घट जाएगी
  3. (c) शून्य हो जाएगी
  4. (d) समान रहेगी
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) शून्य हो जाएगी

उत्तर: विकल्प 3 — शून्य हो जाएगी
श्रेणी परिपथ में धारा के लिए केवल एक पथ होता है।
किसी भी प्रतिरोधक को हटाने या उसके टूटने से परिपथ खुल जाता है,
इसलिए कोई धारा प्रवाहित नहीं होती।
रिवीजन नोट — श्रेणी और पार्श्व संयोजन
• श्रेणी: R = R₁ + R₂ + R₃; प्रत्येक प्रतिरोधक से समान धारा; विभवांतर बँट जाता है।
• श्रेणी में तुल्य प्रतिरोध सबसे बड़े प्रतिरोधक से भी अधिक होता है।
• पार्श्व: 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃; प्रत्येक के सिरों पर समान विभवांतर; धारा बँट जाती है।
• पार्श्व में तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी कम होता है।
• घरेलू वायरिंग पार्श्व में होती है — प्रत्येक उपकरण को 220 V मिलता है और वह स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।
• सजावटी बल्बों की लड़ी: एक बल्ब फ्यूज़ होने पर → सभी बुझ जाते हैं (श्रेणी)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• श्रेणी बनाम पार्श्व में टूटना — श्रेणी में पूरा परिपथ रुक जाता है; पार्श्व में केवल वही शाखा रुकती है, शेष कार्य करती रहती हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह व्यवस्था जिसमें एक उपकरण हटाने पर अन्य नहीं रुकते (पार्श्व); पार्श्व में 4 Ω, 6 Ω और 12 Ω (2 Ω)।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Solenoid and electromagnet

Q21. परिनालिका (solenoid) के अंदर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की आकृति कैसी होती है?

  1. (a) यादृच्छिक रूप से अभिविन्यस्त (Randomly oriented)
  2. (b) सरल और समांतर (Straight and parallel)
  3. (c) वृत्ताकार (Circular)
  4. (d) दीर्घवृत्ताकार (Elliptical)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) सरल और समांतर (Straight and parallel)

उत्तर: विकल्प 2 — सरल और समांतर (Straight and parallel)
धारावाही परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है,
इसलिए इसकी क्षेत्र रेखाएँ समांतर सरल रेखाएँ होती हैं।
रिवीजन नोट — परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र
• परिनालिका: पृथक्कित तार के अनेक वृत्ताकार फेरों वाली कुंडली, जो बेलन के आकार में सटाकर लपेटी गई हो।
• इसके बाहर क्षेत्र का पैटर्न छड़ चुंबक जैसा होता है — एक सिरा उत्तरी ध्रुव, दूसरा दक्षिणी ध्रुव की तरह कार्य करता है।
• अंदर: क्षेत्र रेखाएँ सरल और समांतर — प्रत्येक बिंदु पर समान प्रबलता और दिशा (एकसमान क्षेत्र)।
• अधिक फेरों, अधिक धारा और नर्म लोहे के क्रोड से क्षेत्र प्रबल होता है।
• परिनालिका के अंदर नर्म लोहे का क्रोड विद्युत चुंबक बनाता है — एक अस्थायी चुंबक (विद्युत घंटी, क्रेन, रिले में उपयोग)।
• क्षेत्र की दिशा: दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (उँगलियाँ धारा की दिशा में मोड़ें; अंगूठा उत्तरी सिरा बताता है)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• सीधा तार बनाम परिनालिका — सीधा तार संकेंद्री वृत्त देता है; परिनालिका के अंदर रेखाएँ समांतर सरल रेखाएँ होती हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: परिनालिका के क्षेत्र का पैटर्न (अंदर समांतर रेखाएँ, बाहर बंद लूप); परिनालिका नर्म लोहे को चुंबकित क्यों कर सकती है (अंदर प्रबल एकसमान क्षेत्र)।
Light - Refraction and Lenses · Laws of refraction and Snell's law

Q22. अपवर्तन का कौन-सा नियम यह बताता है कि एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय प्रकाश की गति में परिवर्तन के कारण प्रकाश का बंकन (bends) होता है?

  1. (a) हाइगेन्स का नियम (Huygens' principle)
  2. (b) परावर्तन का नियम (Law of reflection)
  3. (c) स्नेल का नियम (Snell's law)
  4. (d) फ़र्मा का नियम (Fermat’s principle)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) स्नेल का नियम (Snell's law)

उत्तर: विकल्प 3 — स्नेल का नियम (Snell's law)
स्नेल का नियम प्रकाश के मुड़ने को दोनों माध्यमों में उसकी चालों के अनुपात से जोड़ता है:
sin i / sin r = v₁ / v₂ = नियतांक (अपवर्तनांक)।
रिवीजन नोट — प्रकाश का अपवर्तन
• अपवर्तन: एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय प्रकाश का मुड़ना, क्योंकि उसकी चाल बदल जाती है।
• पहला नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
• दूसरा नियम (स्नेल का नियम): sin i / sin r = नियतांक = माध्यम 1 के सापेक्ष माध्यम 2 का अपवर्तनांक।
• अपवर्तनांक n = c / v (निर्वात में चाल ÷ माध्यम में चाल); n का कोई मात्रक नहीं होता।
• विरल → सघन: किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है; सघन → विरल: अभिलंब से दूर।
• उदाहरण: पानी में पेंसिल मुड़ी हुई दिखती है; तालाब उथला दिखता है; तारे टिमटिमाते हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• स्नेल का नियम बनाम हाइगेन्स का सिद्धांत — स्नेल का नियम अपवर्तन का नियम है; हाइगेन्स का सिद्धांत एक तरंग-रचना है, जिससे इसे व्युत्पन्न किया जाता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वायु से जल में जाते समय प्रकाश के मुड़ने का कारण (चाल में परिवर्तन); वह नियम कि आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं (अपवर्तन का पहला नियम)।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Electric generator and Fleming's right-hand rule

Q23. फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम में अंगूठा किसे निरूपित करता है?

  1. (a) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
  2. (b) वोल्टता की दिशा
  3. (c) गति की दिशा
  4. (d) प्रेरित धारा की दिशा
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) गति की दिशा

उत्तर: विकल्प 3 — गति की दिशा
फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त (दाएँ हाथ के) नियम में अंगूठा चालक की गति की दिशा दर्शाता है।
यह नियम चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान चालक में प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
रिवीजन नोट — फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (कक्षा 10)
• दाएँ हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत् फैलाएँ।
• अंगूठा → चालक की गति की दिशा।
• तर्जनी → चुंबकीय क्षेत्र की दिशा।
• मध्यमा → प्रेरित धारा की दिशा।
• विद्युत जनित्र के लिए प्रयुक्त (विद्युत चुंबकीय प्रेरण — यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• दक्षिण-हस्त बनाम वाम-हस्त नियम — दक्षिण-हस्त नियम = जनित्र (प्रेरित धारा)।
वाम-हस्त नियम = मोटर (धारावाही चालक पर बल)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: जनित्र की कुंडली दोगुनी तेजी से घुमाने पर प्रेरित विभवांतर (दोगुना); उत्तर से दक्षिण दिशा वाले क्षेत्र में ऊपर की ओर गतिमान चालक में प्रेरित धारा (पूर्व की ओर)।
Magnetism and Magnetic Effects of Current · Solenoid and electromagnet

Q24. परिनालिका (solenoid) में चुंबकीय क्षेत्र, ___________________।

  1. (a) केंद्र पर अधिकतम और किनारे पर न्यूनतम होता है
  2. (b) केंद्र पर शून्य होता है
  3. (c) सभी बिंदुओं पर समान होता है
  4. (d) किनारे से दूरी के साथ बदलता रहता है
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) सभी बिंदुओं पर समान होता है

उत्तर: विकल्प 3 — सभी बिंदुओं पर समान होता है
किसी लंबी धारावाही परिनालिका के भीतर क्षेत्र रेखाएँ समांतर सरल रेखाएँ होती हैं।
समांतर, समान दूरी वाली रेखाओं का अर्थ है एकसमान क्षेत्र — भीतर हर बिंदु पर समान।
रिवीजन नोट — परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र (कक्षा 10)
• परिनालिका = पृथक्कृत ताँबे के तार के अनेक वृत्ताकार फेरों वाली कुंडली, जो बेलन के आकार में सटाकर लपेटी गई हो।
• इसका क्षेत्र-पैटर्न छड़ चुंबक जैसा होता है: एक सिरा उत्तरी ध्रुव और दूसरा दक्षिणी ध्रुव की तरह व्यवहार करता है।
• भीतर: समांतर सरल रेखाएँ ⇒ एकसमान क्षेत्र; बाहर: रेखाएँ N से S की ओर लूप बनाती हैं।
• भीतर का प्रबल एकसमान क्षेत्र उसमें रखे नर्म लोहे के टुकड़े को चुंबकित कर सकता है — इससे विद्युत चुंबक बनता है।
• फेरों की संख्या अधिक, धारा अधिक और नर्म लोहे का क्रोड होने पर क्षेत्र की प्रबलता बढ़ती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• परिनालिका बनाम वृत्ताकार पाश — एकल वृत्ताकार पाश का क्षेत्र केंद्र पर सबसे प्रबल होता है और एकसमान नहीं होता; परिनालिका का क्षेत्र भीतर एकसमान होता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: धारावाही परिनालिका के भीतर क्षेत्र रेखाओं की आकृति (समांतर सरल रेखाएँ); परिनालिका नर्म लोहे को चुंबकित क्यों कर सकती है (भीतर प्रबल, एकसमान क्षेत्र)।
Electricity · Heating effect of current and Joule's law

Q25. निम्नलिखित में से कौन-सा उपकरण विद्युत धारा के तापीय प्रभाव के आधार पर कार्य करता है?

  1. (a) विद्युत मोटर
  2. (b) जनित्र (जनरेटर)
  3. (c) ट्रांसफॉर्मर
  4. (d) विद्युत इस्त्री
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) विद्युत इस्त्री

उत्तर: विकल्प 4 — विद्युत इस्त्री
विद्युत इस्त्री में उच्च प्रतिरोध का एक तापन अवयव होता है; इससे प्रवाहित धारा जूल के नियम (H = I^(2)Rt) के अनुसार ऊष्मा उत्पन्न करती है।
मोटर, जनित्र और ट्रांसफॉर्मर धारा के चुंबकीय प्रभावों पर कार्य करते हैं, तापन पर नहीं।
रिवीजन नोट — विद्युत धारा का तापीय प्रभाव
• जूल का नियम: H = I^(2)Rt — ऊष्मा ∝ धारा का वर्ग, ∝ प्रतिरोध, ∝ समय।
• तापन पर आधारित उपकरण: विद्युत इस्त्री, हीटर, टोस्टर, ओवन, गीज़र, केतली, बल्ब का तंतु।
• तापन अवयव नाइक्रोम के बने होते हैं — उच्च प्रतिरोधकता और उच्च गलनांक, आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होता।
• बल्ब के तंतु टंगस्टन के होते हैं (गलनांक लगभग 3380 °C); बल्बों में नाइट्रोजन और आर्गन भरी होती है।
• फ्यूज़ तापीय प्रभाव पर कार्य करता है; इसके तार का गलनांक कम होता है और यह श्रेणी क्रम में जुड़ा होता है।
• विद्युत मोटर — धारावाही चालक पर चुंबकीय बल; जनित्र — विद्युत चुंबकीय प्रेरण।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: हीटरों में नाइक्रोम का उपयोग क्यों होता है (उच्च प्रतिरोधकता और उच्च गलनांक); धारा दोगुनी करने पर ऊष्मा में परिवर्तन (चार गुना); विद्युत बल्बों में भरी गैस (नाइट्रोजन और आर्गन)।
ट्रांसफॉर्मर और जनित्र भी "गर्म होते हैं", पर उनकी ऊष्मा हानि है — इस्त्री ही वह उपकरण है जो ऊष्मा का उपयोग करने के लिए बनी है।
Human Eye and the Colourful World · Atmospheric refraction (twinkling of stars, advance sunrise)

Q26. पृथ्वी से देखने पर तारे टिमटिमाते क्यों दिखाई देते हैं?

  1. (a) कणों द्वारा प्रकीर्णन के कारण
  2. (b) बादलों द्वारा विवर्तन के कारण
  3. (c) वायुमंडल में परावर्तन के कारण
  4. (d) पृथ्वी के वायुमंडल में अपवर्तन के कारण
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) पृथ्वी के वायुमंडल में अपवर्तन के कारण

उत्तर: विकल्प 4 — पृथ्वी के वायुमंडल में अपवर्तन के कारण
तारों का प्रकाश वायु की ऐसी परतों से होकर गुजरता है जिनका ताप और घनत्व लगातार बदलता रहता है, इसलिए उसका अपवर्तन भी लगातार बदलता रहता है।
तारे की आभासी स्थिति और चमक बदलती रहती है — यही टिमटिमाना है, जो वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है।
रिवीजन नोट — वायुमंडलीय अपवर्तन
• गर्म वायु प्रकाशतः विरल और ठंडी वायु प्रकाशतः सघन होती है — इन्हें पार करते समय प्रकाश मुड़ता है।
• तारा बहुत दूर स्थित एक बिंदु स्रोत है, इसलिए उसके प्रकाश-पथ में छोटा परिवर्तन भी दिखाई देता है।
• ग्रह नहीं टिमटिमाते — वे बहुत निकट हैं, विस्तृत स्रोत (अनेक बिंदु स्रोतों का समूह) की तरह व्यवहार करते हैं, और उतार-चढ़ाव औसत होकर समाप्त हो जाते हैं।
• क्षितिज के पास देखने पर तारा अपनी वास्तविक स्थिति से थोड़ा ऊपर दिखाई देता है।
• अग्रिम सूर्योदय और विलंबित सूर्यास्त — सूर्य वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले और वास्तविक सूर्यास्त के लगभग 2 मिनट बाद तक दिखाई देता है।
• इसी कारण सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य की चक्रिका चपटी दिखाई देती है।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अपवर्तन बनाम प्रकीर्णन — टिमटिमाना और अग्रिम सूर्योदय अपवर्तन हैं; नीला आकाश, लाल सूर्यास्त और टिंडल प्रभाव प्रकीर्णन हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य की चक्रिका चपटी क्यों दिखती है (वायुमंडलीय अपवर्तन); गर्म सड़क पर मृगतृष्णा का कारण (गर्म वायु की परतों से अपवर्तन)।
Light - Reflection and Mirrors · Concave mirror - image formation and uses

Q27. एक अवतल दर्पण वास्तविक, उल्टा और आवर्धित प्रतिबिंब बना सकता है जब वस्तु को ____________ रखा जाता है।

  1. (a) वक्रता केंद्र से परे
  2. (b) फोकस और वक्रता केंद्र के बीच
  3. (c) ध्रुव पर
  4. (d) ध्रुव और फोकस के बीच
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) फोकस और वक्रता केंद्र के बीच

उत्तर: विकल्प 2 — फोकस और वक्रता केंद्र के बीच
वस्तु F और C के बीच हो, तो प्रतिबिंब C से परे बनता है।
यह वास्तविक, उल्टा और आवर्धित होता है — केवल यही स्थिति तीनों गुण देती है।
रिवीजन नोट — अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब
• वस्तु अनंत पर → प्रतिबिंब F पर, वास्तविक, उल्टा, अत्यधिक छोटा (बिंदु आकार)।
• वस्तु C से परे → प्रतिबिंब F और C के बीच, वास्तविक, उल्टा, छोटा।
• वस्तु C पर → प्रतिबिंब C पर, वास्तविक, उल्टा, समान आकार।
• वस्तु F और C के बीच → प्रतिबिंब C से परे, वास्तविक, उल्टा, बड़ा।
• वस्तु F पर → प्रतिबिंब अनंत पर, वास्तविक, उल्टा, अत्यधिक बड़ा।
• वस्तु P और F के बीच → प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा, बड़ा (शेविंग / दंत चिकित्सक का दर्पण)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• F और C के बीच बनाम P और F के बीच — दोनों आवर्धित प्रतिबिंब देते हैं।
• केवल F से C वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब देता है; P से F आभासी, सीधा प्रतिबिंब देता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वस्तु ध्रुव और फोकस के बीच होने पर प्रतिबिंब (आभासी और सीधा); शेविंग दर्पण में चेहरा कहाँ रखें (ध्रुव और फोकस के बीच)।

Current Affairs (4)

Science, Technology and Space - Current · Technology launches and AI

Q28. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अक्टूबर 2024 में बायोपॉलिमर (Biopolymers) के लिए भारत की पहली प्रदर्शन इकाई (Demonstration Facility) का उद्घाटन कहाँ किया?

  1. (a) पुणे
  2. (b) चेन्नई
  3. (c) भोपाल
  4. (d) हैदराबाद
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) पुणे

उत्तर: विकल्प 1 — पुणे
अक्टूबर 2024 में डॉ. जितेंद्र सिंह ने जेजुरी, पुणे (महाराष्ट्र) में
बायोपॉलिमर के लिए भारत की पहली प्रदर्शन इकाई का उद्घाटन किया,
जिसे प्राज इंडस्ट्रीज (Praj Industries) ने स्थापित किया है।
रिवीजन नोट — भारत की पहली बायोपॉलिमर इकाइयाँ
• बायोपॉलिमर नवीकरणीय जैविक स्रोतों (गन्ना, मक्का) से बने बहुलक हैं; ये जैव-निम्नीकरणीय होते हैं — पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक का विकल्प।
• पुणे इकाई PLA (पॉलीलैक्टिक अम्ल) बनाती है, जो एक प्रमुख बायोप्लास्टिक है।
• यह BioE3 नीति (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी) को समर्थन देती है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2024 में स्वीकृति दी।
• भारत का पहला बायोपॉलिमर विनिर्माण संयंत्र (PLA) उत्तर प्रदेश में बलरामपुर चीनी मिल्स द्वारा कुंभी, लखीमपुर खीरी में स्थापित किया जा रहा है।
• डॉ. जितेंद्र सिंह विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री हैं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• प्रदर्शन इकाई (पुणे, प्राज, 2024) बनाम वाणिज्यिक विनिर्माण संयंत्र (उत्तर प्रदेश, बलरामपुर चीनी)।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह राज्य जहाँ भारत का पहला बायोपॉलिमर विनिर्माण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है (उत्तर प्रदेश)।
National Affairs and Government Initiatives · National events and launches

Q29. विश्व ऑडियो विजुअल और मनोरंजन शिखर सम्मेलन से पहले, 22 अगस्त 2024 को नई दिल्ली में 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज-सीजन वन (Create in India Challenge-Season One)' का शुभारंभ किसने किया?

  1. (a) नितिन गड़करी
  2. (b) अमित शाह
  3. (c) अश्विनी वैष्णव
  4. (d) नरेंद्र मोदी
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) अश्विनी वैष्णव

उत्तर: विकल्प 3 — अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 22 अगस्त 2024 को नई दिल्ली में
'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज – सीजन वन' का शुभारंभ किया।
रिवीजन नोट — क्रिएट इन इंडिया चैलेंज और WAVES
• यह चैलेंज (25 प्रतियोगिताएँ) WAVES — विश्व ऑडियो विजुअल और मनोरंजन शिखर सम्मेलन की तैयारी के क्रम में शुरू किया गया।
• उद्देश्य: भारत को कंटेंट निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना — एनिमेशन, गेमिंग, फ़िल्म, संगीत, कॉमिक्स, VFX, AR/VR।
• WAVES 2025 (पहला संस्करण) जियो वर्ल्ड सेंटर, मुंबई में 1–4 मई 2025 को आयोजित हुआ, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
• आयोजक: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय।
• अश्विनी वैष्णव के पास रेल और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी हैं।
रेल, सूचना एवं प्रसारण और MeitY — तीनों एक ही मंत्री के पास हैं; रेलवे परीक्षाओं में यह पसंदीदा कड़ी है।
Environment and Climate - Current · Environmental rules, campaigns and summits - current

Q30. वर्ल्‍ड सस्‍टेनेबल डेवेलपमेन्‍ट समिट 2024 (World Sustainable Development Summit 2024) का आयोजन भारत के किस शहर में हुआ?

  1. (a) मुंबई
  2. (b) नई दिल्ली
  3. (c) जयपुर
  4. (d) हैदराबाद
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) नई दिल्ली

उत्तर: विकल्प 2 — नई दिल्ली
विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (WSDS) 2024 — 23वाँ संस्करण — 7–9 फरवरी 2024 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
इसका आयोजन हर वर्ष TERI (द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट) करता है।
रिवीजन नोट — विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन
• आयोजक: TERI, नई दिल्ली — सतत विकास और जलवायु पर TERI का प्रमुख वार्षिक आयोजन।
• यह शिखर सम्मेलन 2001 में दिल्ली सतत विकास शिखर सम्मेलन (DSDS) के रूप में शुरू हुआ और 2016 में इसका नाम WSDS किया गया।
• WSDS 2024 का विषय: "Leadership for Sustainable Development and Climate Solutions" (सतत विकास और जलवायु समाधान के लिए नेतृत्व)।
• यह लगभग हर वर्ष नई दिल्ली में आयोजित होता है।
• अगला संस्करण, WSDS 2025 (24वाँ), 5–7 मार्च 2025 को फिर से नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: मार्च 2025 में WSDS की मेज़बानी करने वाला शहर (नई दिल्ली); WSDS 2025 का संस्करण क्रमांक (24वाँ); WSDS का आयोजक (TERI)।
यह TERI का शिखर सम्मेलन है, और TERI नई दिल्ली में है — आयोजन स्थल लगभग कभी नहीं बदला।
International Affairs and Summits · Summits and conferences

Q31. 2024 में G20 कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन स्थल कौन-सा था?

  1. (a) पेरिस, फ़्रांस (Paris, France)
  2. (b) ब्रुसेल्स, बेल्जियम (Brussels, Belgium)
  3. (c) कुइआबा, ब्राज़ील (Cuiaba, Brazil)
  4. (d) ओटावा, कनाडा (Ottawa, Canada)
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) कुइआबा, ब्राज़ील (Cuiaba, Brazil)

उत्तर: विकल्प 3 — कुइआबा, ब्राज़ील (Cuiaba, Brazil)
2024 में G20 की अध्यक्षता ब्राज़ील के पास थी, इसलिए उसकी सभी मंत्रिस्तरीय बैठकें ब्राज़ील में हुईं।
G20 कृषि मंत्रियों की बैठक सितंबर 2024 में कृषि प्रधान राज्य माटो ग्रोसो के कुइआबा (चापादा डॉस गुइमारेस) में हुई।
रिवीजन नोट — 2023–2024 में G20
• G20 = 19 देश + यूरोपीय संघ, और 2023 से अफ्रीकी संघ; एशियाई वित्तीय संकट के बाद 1999 में गठित।
• भारत की अध्यक्षता (2023) — भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18वाँ शिखर सम्मेलन; थीम वसुधैव कुटुंबकम — एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य।
• नई दिल्ली में अफ्रीकी संघ स्थायी सदस्य बना।
• ब्राज़ील की अध्यक्षता (2024) — रियो डी जनेरियो में 19वाँ शिखर सम्मेलन, नवंबर 2024; थीम एक न्यायपूर्ण विश्व और एक संधारणीय ग्रह का निर्माण।
• ब्राज़ील ने रियो शिखर सम्मेलन में भूख और गरीबी के विरुद्ध वैश्विक गठबंधन की शुरुआत की।
• अध्यक्षता ट्रोइका में आगे बढ़ती है: 2023 भारत → 2024 ब्राज़ील → 2025 दक्षिण अफ्रीका (जोहान्सबर्ग)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• रियो डी जनेरियो में नेताओं का शिखर सम्मेलन हुआ; कृषि मंत्रियों की बैठक माटो ग्रोसो (कुइआबा) में हुई।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: G20 शिखर सम्मेलन 2024 का स्थल (रियो डी जनेरियो); रियो की थीम (एक न्यायपूर्ण विश्व और एक संधारणीय ग्रह का निर्माण); 2025 जोहान्सबर्ग की थीम (एकजुटता, समानता, संधारणीयता)।

Polity (3)

Q32. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 में अधिनियमित किया गया था और ___________________ को गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए नियमों के आधार पर इसे लागू किया गया था।

  1. (a) 11 मार्च 2024
  2. (b) 11 मार्च 2020
  3. (c) 11 मार्च 2023
  4. (d) 11 मार्च 2022
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) 11 मार्च 2024

उत्तर: विकल्प 1 — 11 मार्च 2024
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 तभी लागू हुआ जब गृह मंत्रालय ने
11 मार्च 2024 को नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 अधिसूचित किए।
रिवीजन नोट — नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019
• संसद द्वारा दिसंबर 2019 में पारित; यह नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करता है।
• अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई प्रवासियों को शीघ्र नागरिकता।
• भारत में प्रवेश की अंतिम तिथि: 31 दिसंबर 2014।
• इन समूहों के लिए देशीकरण हेतु निवास की अवधि 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष की गई।
• यह पूर्वोत्तर के छठी अनुसूची वाले जनजातीय क्षेत्रों और इनर लाइन परमिट (ILP) वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होता।
• नागरिकता संघ सूची का विषय है; संविधान के अनुच्छेद 5–11 (भाग II) नागरिकता से संबंधित हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: CAA 2019 में शामिल तीन देश (अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान); 2024 के नियमों द्वारा बाहर रखे गए क्षेत्र (छठी अनुसूची क्षेत्र और ILP क्षेत्र)।
Elections, Parties and Representation · Electoral system and universal adult franchise

Q33. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद, लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के लिए वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचन कराने से संबंधित है?

  1. (a) 352
  2. (b) 326
  3. (c) 340
  4. (d) 318
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) 326

उत्तर: विकल्प 2 — 326
अनुच्छेद 326 के अनुसार लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर होते हैं।
18 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक नागरिक, जो अन्यथा अयोग्य न हो, मतदान कर सकता है।
रिवीजन नोट — संविधान में निर्वाचन (भाग XV)
• भाग XV, अनुच्छेद 324–329, निर्वाचन से संबंधित है।
• अनुच्छेद 324 — निर्वाचन आयोग: निर्वाचनों का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण।
• अनुच्छेद 325 — प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र के लिए एक साधारण निर्वाचक नामावली; धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर कोई बाहर नहीं।
• अनुच्छेद 326 — वयस्क मताधिकार; 61वें संशोधन अधिनियम, 1988 ने मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 की।
• अनुच्छेद 327 / 328 — संसद / राज्य विधानमंडल निर्वाचन संबंधी कानून बना सकते हैं।
• अनुच्छेद 329 — निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• अनुच्छेद 352 बनाम 326 — 352 राष्ट्रीय आपातकाल है; 340 पिछड़े वर्ग आयोग से संबंधित है; 318 लोक सेवा आयोग के सदस्यों से संबंधित है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 करने वाला संशोधन (61वाँ संशोधन, 1988); राज्य विधान सभा निर्वाचन के लिए न्यूनतम मतदान आयु (18 वर्ष)।
Special Provisions, Official Language and Miscellaneous Provisions · Official language (Part XVII) and Eighth Schedule languages

Q34. निम्नलिखित में से कौन-सा संवैधानिक संशोधन भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी को सम्मिलित करता है, जिसे भारत में भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए आयुक्त (CLM) के रूप में जाना जाता है, जो भारत में संविधान के अंतर्गत भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्रदान की गई सुरक्षा से संबंधित सभी मामलों की जांच करता है और राष्ट्रपति को रिपोर्ट करता है?

  1. (a) 10वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1960
  2. (b) 11वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1965
  3. (c) दूसरा संविधान संशोधन अधिनियम, 1952
  4. (d) 7वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1956
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) 7वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1956

उत्तर: विकल्प 4 — 7वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1956
7वें संशोधन अधिनियम, 1956 ने अनुच्छेद 350B जोड़ा, जिसके द्वारा भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी का पद बनाया गया।
इन्हें भाषाई अल्पसंख्यक आयुक्त कहा जाता है और ये राष्ट्रपति को रिपोर्ट करते हैं।
रिवीजन नोट — भाषाई अल्पसंख्यक और 7वां संशोधन
• अनुच्छेद 350B भाग XVII (राजभाषा) में है; इस अधिकारी की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
• इनकी रिपोर्टें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाती हैं और संबंधित राज्य सरकारों को भेजी जाती हैं।
• यह कार्यालय 1957 में स्थापित हुआ; अब यह अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
• इसी 7वें संशोधन (1956) ने अनुच्छेद 350A भी जोड़ा — प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा।
• 7वें संशोधन ने राज्यों का भाषाई आधार पर पुनर्गठन किया (राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956): भाग A, B, C, D राज्यों को समाप्त कर 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए।
• अनुच्छेद 29 नागरिकों के किसी भी वर्ग की संस्कृति, भाषा और लिपि की रक्षा करता है; अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शिक्षा संस्थान स्थापित करने का अधिकार देता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी का पद बनाने वाला अनुच्छेद (अनुच्छेद 350B); अल्पसंख्यकों को शिक्षा संस्थान स्थापित करने का अधिकार देने वाला अनुच्छेद (अनुच्छेद 30)।
350A और 350B, 1956 में राज्य पुनर्गठन के साथ आए — तीनों को 7वें संशोधन से जोड़ें।

Economics (1)

Basic Concepts and Economic Systems · Demand, supply and elasticity

Q35. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संतुलन के संबंध में सही है?

  1. (a) संतुलन वह स्थिति है जहाँ परिवर्तन की प्रवृत्ति कम होती है।
  2. (b) संतुलन वह स्थिति है जहाँ किसी भी परिवर्तन की प्रवृत्ति नहीं होती है।
  3. (c) संतुलन वह स्थिति है जहां परिवर्तन की प्रवृत्ति होती है।
  4. (d) संतुलन वह स्थिति है जहाँ परिवर्तन की प्रवृत्ति अधिक होती है।
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (b) संतुलन वह स्थिति है जहाँ किसी भी परिवर्तन की प्रवृत्ति नहीं होती है।

उत्तर: विकल्प 2 — संतुलन वह स्थिति है जहाँ किसी भी परिवर्तन की प्रवृत्ति नहीं होती है।
संतुलन की अवस्था में सभी विरोधी प्रभाव ठीक-ठीक संतुलित होते हैं,
इसलिए वह अवस्था अपने-आप परिवर्तित होने की प्रवृत्ति नहीं रखती।
रिवीजन नोट — अर्थशास्त्र और विज्ञान में संतुलन
• बाज़ार (अर्थशास्त्र): संतुलन कीमत वह है जहाँ माँगी गई मात्रा = आपूर्ति की गई मात्रा; कोई क्रेता या विक्रेता अपनी योजना बदलना नहीं चाहता।
• यांत्रिक: किसी पिंड पर कुल बल और कुल बल-आघूर्ण शून्य — वह विराम में या एकसमान गति में बना रहता है।
• रासायनिक: अग्र अभिक्रिया की दर = पश्च अभिक्रिया की दर; सांद्रताएँ स्थिर रहती हैं। यह गतिक है, स्थैतिक नहीं।
• ऊष्मीय: संपर्क में दो पिंड समान ताप पर — कोई नेट ऊष्मा प्रवाह नहीं (ऊष्मागतिकी के शून्यवें नियम का आधार)।
• ला-शातेलिए का सिद्धांत: विक्षुब्ध संतुलन परिवर्तन का विरोध करने की दिशा में खिसकता है।
• स्थायी, अस्थायी, उदासीन संतुलन — थोड़ा विस्थापित करने पर पिंड लौट आता है, दूर चला जाता है, या नई स्थिति में टिका रहता है।
• अर्थशास्त्र में बाज़ार संतुलन वहाँ है जहाँ माँग = आपूर्ति — यहाँ भी कीमत में परिवर्तन की कोई प्रवृत्ति नहीं।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• गतिक बनाम स्थैतिक — रासायनिक संतुलन स्थिर दिखता है, पर दोनों अभिक्रियाएँ समान दर से चलती रहती हैं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: संतुलन पर उत्पाद मिलाने का प्रभाव (बाईं ओर खिसकता है, ला-शातेलिए); वह ताप जिस पर बर्फ़, जल और वाष्प संतुलन में साथ रहते हैं (0.01°C)।

Ancient History (1)

Ancient Art, Culture and Science · Stupas and chaityas

Q36. बौद्ध स्थापत्य कला के संदर्भ में, 'चैत्य' क्या है?

  1. (a) भिक्षुओं के लिए एक आवासीय स्थान
  2. (b) एक सजावटी स्तंभ
  3. (c) एक प्रकार का स्तूप
  4. (d) प्रार्थना और सभा के लिए एक कक्ष
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) प्रार्थना और सभा के लिए एक कक्ष

उत्तर: विकल्प 4 — प्रार्थना और सभा के लिए एक कक्ष
चैत्य एक बौद्ध प्रार्थना कक्ष है जहाँ भिक्षु और श्रद्धालु एकत्र होते थे;
इसके दूर वाले, गोलाकार (अर्धवृत्ताकार / apsidal) छोर पर प्रायः एक छोटा स्तूप होता है।
रिवीजन नोट — बौद्ध स्थापत्य कला
• स्तूप: बुद्ध के अवशेषों पर बना अर्धगोलाकार टीला; भाग — अंड (गुंबद), हर्मिका (शीर्ष पर वेदिका), यष्टि और छत्र, तोरण (प्रवेश द्वार)।
• चैत्य: प्रार्थना / सामूहिक उपासना कक्ष; प्रसिद्ध शैलकृत चैत्य कार्ले (सबसे बड़ा), भाजा, अजंता गुफाएँ 9, 10, 19, 26।
• विहार: मठ — भिक्षुओं का निवास, जिसमें एक केंद्रीय कक्ष के चारों ओर कोठरियाँ होती हैं।
• साँची स्तूप (मध्य प्रदेश) का निर्माण अशोक ने आरंभ किया; इसके तोरणों पर जातक कथाएँ अंकित हैं।
• भरहुत की उभरी नक्काशी (ईसा पूर्व 2री शताब्दी) → साँची के तोरण → मथुरा शैली — बौद्ध मूर्तिकला का विकास।
• आरंभिक कला में बुद्ध को केवल प्रतीकों द्वारा दिखाया गया — खाली आसन, पदचिह्न, स्तूप, चक्र, बोधि वृक्ष।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• चैत्य बनाम विहार — चैत्य प्रार्थना के लिए है; विहार निवास के लिए।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: चैत्यों का मुख्य कार्य (सामूहिक उपासना कक्ष); साँची के तोरणों पर क्या अंकित है (जातक कथाएँ); स्तूप का वह भाग जिसे देवताओं का निवास माना जाता है (हर्मिका)।

Static GK (2)

Books and Authors · Modern Indian books and authors

Q37. इंडियन कल्‍चर: ए कम्‍पेंडियम ऑफ इंडियन हिस्‍ट्री, कल्‍चर एंड हेरिटेज (Indian Culture: A Compendium of Indian History, Culture and Heritage)' किस वर्ष प्रकाशित हुआ था?

  1. (a) 2020
  2. (b) 2023
  3. (c) 2022
  4. (d) 2021
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) 2021

उत्तर: विकल्प 4 — 2021
'इंडियन कल्चर: ए कम्पेंडियम ऑफ इंडियन हिस्ट्री, कल्चर एंड हेरिटेज (Indian Culture: A Compendium of Indian History, Culture and Heritage)' 2021 में प्रकाशित हुई।
यह इतिहासकार डॉ. एस. श्रीकंठ शास्त्री की कन्नड़ कृति 'भारतीय संस्कृति' (1954) का अंग्रेज़ी अनुवाद है।
रिवीजन नोट — पुस्तक और उसके लेखक
• अंग्रेज़ी में अनुवाद लेखक के पुत्र प्रो. एस. नागनाथ ने किया।
• नोशन प्रेस (Notion Press) द्वारा 2021 में प्रकाशित।
• एस. श्रीकंठ शास्त्री (1904–1974) मैसूर, कर्नाटक के इतिहासकार और भारतविद् थे।
• मूल कन्नड़ पुस्तक 'भारतीय संस्कृति' 1954 में प्रकाशित हुई थी।
• यह प्राचीन काल से भारत के इतिहास, धर्म, कला, साहित्य और विरासत का सर्वेक्षण करती है।
प्रकाशन-वर्ष वाले प्रश्न प्रायः अनुवाद पर टिके होते हैं — मूल का नहीं, अंग्रेज़ी संस्करण का वर्ष पूछा जाता है।
Sports · National championships - venues and winners

Q38. 2024 में, भारतीय राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप के 61वें संस्करण की मेजबानी किस राज्य ने की?

  1. (a) हिमाचल प्रदेश
  2. (b) तमिलनाडु
  3. (c) कर्नाटक
  4. (d) हरियाणा
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) हरियाणा

उत्तर: विकल्प 4 — हरियाणा
अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (AICF) द्वारा आयोजित 61वीं राष्ट्रीय (सीनियर) शतरंज चैंपियनशिप, 2024, गुरुग्राम, हरियाणा में आयोजित हुई।
रिवीजन नोट — भारतीय शतरंज
• अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (AICF) राष्ट्रीय शतरंज का संचालन करता है; FIDE (स्थापना 1924, पेरिस) लुसाने से विश्व शतरंज का संचालन करता है।
• विश्वनाथन आनंद 1988 में भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने और पाँच बार विश्व चैंपियनशिप जीती।
• भारत ने 45वें शतरंज ओलंपियाड, बुडापेस्ट, सितंबर 2024 में दोनों स्वर्ण पदक (ओपन और महिला) जीते।
• गुकेश डी. सबसे कम आयु के निर्विवाद विश्व चैंपियन बने (दिसंबर 2024, सिंगापुर, डिंग लिरेन को हराकर)।
• भारत ने 2022 में मामल्लपुरम (चेन्नई) में 44वें शतरंज ओलंपियाड की मेजबानी की; शुभंकर थम्बी।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: भारत के पहले शतरंज ग्रैंडमास्टर (विश्वनाथन आनंद); FIDE का पूर्ण रूप (Federation Internationale des Echecs)।

Modern History (1)

Gandhian Era · Civil Disobedience Movement and Dandi March

Q39. महात्मा गाँधी ने अपने ________ भरोसेमंद स्वयंसेवकों के साथ अपना प्रसिद्ध 'नमक मार्च' शुरू किया।

  1. (a) 78
  2. (b) 94
  3. (c) 39
  4. (d) 51
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (a) 78

उत्तर: विकल्प 1 — 78
गाँधीजी साबरमती आश्रम के 78 भरोसेमंद स्वयंसेवकों के साथ नमक मार्च पर निकले।
यह 12 मार्च 1930 को आरंभ हुआ और 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचा।
रिवीजन नोट — दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा (1930)
• मार्ग: साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) → दांडी (तटीय गुजरात), लगभग 240 मील (385 किमी), 24 दिनों में।
• दांडी में गाँधीजी ने समुद्री जल से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा — यही सविनय अवज्ञा आंदोलन का आरंभ था।
• नमक कर और नमक पर ब्रिटिश एकाधिकार को इसलिए चुना गया क्योंकि इनसे हर भारतीय प्रभावित होता था।
• सी. राजगोपालाचारी ने तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम (मद्रास प्रेसीडेंसी) तक समानांतर नमक मार्च का नेतृत्व किया।
• गाँधी–इरविन समझौते (1931) से आंदोलन स्थगित हुआ और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के बाद 1932 में फिर शुरू हुआ।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: वह वर्ष जब गाँधीजी ने दांडी में नमक कानून तोड़ा (1930); मद्रास प्रेसीडेंसी में नमक मार्च के नेता (सी. राजगोपालाचारी); 1932 में फिर शुरू हुआ आंदोलन (सविनय अवज्ञा)।

Geography (2)

India - Climate, Soils and Natural Vegetation · Indian monsoon - mechanism

Q40. भारत में जुलाई माह में अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र सामान्यतः किस अक्षांश पर स्थित होता है?

  1. (a) भूमध्य रेखा के पास
  2. (b) 5°N और 10°N के बीच
  3. (c) लगभग 20°N-25°N
  4. (d) भूमध्य रेखा के दक्षिण में
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (c) लगभग 20°N-25°N

उत्तर: विकल्प 3 — लगभग 20°N-25°N
जुलाई में ITCZ शिरोपरि सूर्य के साथ उत्तर की ओर खिसककर गंगा के मैदान के ऊपर लगभग 20°N–25°N पर स्थित हो जाता है।
यहाँ इसे मानसून गर्त कहा जाता है।
रिवीजन नोट — ITCZ और भारतीय मानसून
• अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) = वह निम्न वायुदाब पेटी जहाँ उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें मिलती हैं।
• यह सामान्यतः भूमध्य रेखा के पास (डोलड्रम) स्थित होता है और सूर्य की आभासी गति के साथ खिसकता है।
• ग्रीष्म: उत्तर-पश्चिम भारत के तीव्र तापन से निम्न दाब गहरा होता है; ITCZ दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनों को खींचता है, जो भूमध्य रेखा पार करके दक्षिण-पश्चिम मानसून बन जाती हैं।
• शीत: ITCZ दक्षिण की ओर खिसक जाता है; इसका दक्षिण की ओर लौटना मानसून की वापसी का संकेत है।
• मानसून में विराम तब होता है जब मानसून गर्त अपनी सामान्य स्थिति से हट जाता है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: भूमध्य रेखा के पास वह क्षेत्र जहाँ दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें मिलती हैं (ITCZ); मानसून की वापसी का संकेत देने वाला परिवर्तन (ITCZ का दक्षिण की ओर खिसकना)।

Q41. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख भारतीय बंदरगाह सार्वजनिक-निजी भागीदारी {Public-Private Partnership (PPP)} मॉडल के अंतर्गत संचालित होने वाला पहला बंदरगाह बन गया है?

  1. (a) न्यू मैंगलोर बंदरगाह
  2. (b) मुंद्रा बंदरगाह
  3. (c) पारादीप बंदरगाह
  4. (d) जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह

उत्तर: विकल्प 4 — जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह
नवी मुंबई के न्हावा शेवा स्थित जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (JNPA) भारत का पहला प्रमुख बंदरगाह है जिसके सभी बर्थ PPP के अंतर्गत निजी संचालकों द्वारा चलाए जाते हैं।
बंदरगाह प्राधिकरण अब केवल भू-स्वामी (landlord) की भूमिका में है — भूमि और जल उसका है, टर्मिनल निजी कंपनियाँ चलाती हैं।
रिवीजन नोट — भारत के प्रमुख बंदरगाह
• प्रमुख बंदरगाह केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन हैं; इनकी संख्या 12 है, और ये महापत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 2021 के अंतर्गत संचालित होते हैं।
• JNPA की शुरुआत 26 मई 1989 को हुई थी और यह प्रमुख बंदरगाहों में भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह है।
• JNPA, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड के साथ मिलकर पालघर, महाराष्ट्र में गहरे पानी वाला वधावन बंदरगाह बना रहा है (आधारशिला अगस्त 2024)।
• पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाह उत्तर से दक्षिण: दीनदयाल (कांडला), मुंबई, JNPA, मोरमुगाओ, न्यू मैंगलोर, कोचीन।
• पूर्वी तट: वी.ओ. चिदंबरनार (तूतीकोरिन), चेन्नई, कामराजर (एन्नोर), विशाखापत्तनम, पारादीप, श्यामा प्रसाद मुखर्जी (कोलकाता)।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• मुंद्रा (गुजरात) अदाणी समूह का एक बड़ा निजी बंदरगाह है, प्रमुख बंदरगाह नहीं।
• कामराजर बंदरगाह (एन्नोर) कंपनी के रूप में स्थापित पहला प्रमुख बंदरगाह था; JNPA पूर्णतः PPP द्वारा संचालित पहला प्रमुख बंदरगाह है।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: कांडला, JNPA, मोरमुगाओ और न्यू मैंगलोर में सबसे दक्षिणी (न्यू मैंगलोर); कोचीन, चेन्नई, पारादीप और विशाखापत्तनम में पश्चिमी तट का बंदरगाह (कोचीन)।

Medieval History (1)

Early Medieval North India · Tripartite struggle (Palas, Pratiharas, Rashtrakutas)

Q42. निम्नलिखित में से किस वंश ने कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग नहीं लिया था?

  1. (a) गुर्जर-प्रतिहार
  2. (b) पाल
  3. (c) राष्ट्रकूट
  4. (d) चोल
उत्तर और व्याख्या

उत्तर: (d) चोल

उत्तर: विकल्प 4 — चोल
कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष केवल गुर्जर-प्रतिहारों, पालों और राष्ट्रकूटों के बीच लड़ा गया था।
चोल सुदूर दक्षिण में कावेरी डेल्टा में शासन करते थे और उन्होंने इसमें भाग नहीं लिया।
रिवीजन नोट — कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष
• कन्नौज (कान्यकुब्ज) और गंगा घाटी पर नियंत्रण के लिए लगभग 200 वर्षों (8वीं–10वीं शताब्दी ई.) तक लड़ा गया।
• कन्नौज इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह हर्षवर्धन की राजधानी रहा था — उत्तर भारत पर सत्ता का प्रतीक।
• गुर्जर-प्रतिहार — पश्चिमी भारत (राजस्थान, गुजरात); पाल — बंगाल और बिहार; राष्ट्रकूट — दक्कन (राजधानी मान्यखेट)।
• प्रमुख राजा: धर्मपाल और देवपाल (पाल), नागभट II और मिहिर भोज (प्रतिहार), ध्रुव और गोविंद III (राष्ट्रकूट)।
• अंततः कन्नौज पर प्रतिहारों का अधिकार रहा — नागभट II ने इसे जीतकर अपनी राजधानी बनाया।
• लंबे युद्ध ने तीनों को कमजोर कर दिया और बाद के राजपूत राज्यों तथा महमूद गजनवी के आक्रमणों का मार्ग खोल दिया।
इनसे भ्रमित मत होनाः
• चोल — विजयालय द्वारा (लगभग 850 ई.) तंजावुर में स्थापित साम्राज्यिक वंश; उनके बड़े प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रकूट और चालुक्य थे, कन्नौज में नहीं।
इस विषय से पूछे गए अन्य प्रश्न: संघर्ष के दौरान कन्नौज पर शासन करने वाला वंश (गुर्जर-प्रतिहार); इस संघर्ष का नाम (त्रिपक्षीय संघर्ष); राष्ट्रकूट वंश का संस्थापक (दंतिदुर्ग)।
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